South 고등학교 2학년 Earth System Science
अध्याय: 3
1. Birth of Earth and a dynamic planet
Early atmosphere, ocean and life · Evolution of the Earth system · Plate motion and driving forces · Volcanism in the rock cycle · Seismic waves and Earth's interior
- पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास: धूल के बादल से जीवित ग्रह तक – पुराने विचारकों ने कहा कि ग्रह युवा सूर्य के चारों ओर घूमते गैस के बादल से बने (निहारिका परिकल्पना) या पास से गुज़रते तारे ने सूर्य से पदार्थ खींचा। आज वैज्ञानिक ब्रह्मांड को बिग बैंग से समझाते हैं: लगभग 13.7 अरब वर्ष पहले सब कुछ एक छोटे बिंदु से शुरू हुआ और आज भी फैल रहा है। गैस के गुच्छों से तारे बने; सूर्य के चारों ओर की धूल से ग्रह बने। लगभग 4.6 अरब वर्ष पुरानी पृथ्वी गरम और पिघली थी; भारी लोहा डूबकर क्रोड बना और हल्की चट्टान से भूपर्पटी बनी। ज्वालामुखियों की गैसों से शुरुआती हवा बनी, जलवाष्प बरसकर महासागर बनी, और लगभग 3.8 अरब वर्ष पहले महासागरों में जीवन शुरू हुआ।
- पृथ्वी एक तंत्र: मंडल और ऊर्जा – पृथ्वी एक बड़ी मशीन जैसी है, जिसके पाँच हिस्से हैं: चट्टान (भूमंडल), पानी (जलमंडल), बर्फ (हिममंडल), हवा (वायुमंडल) और जीवन (जीवमंडल)। इस मशीन को सूर्य चलाता है। सूर्य की ऊर्जा कई तरह की किरणों में आती है, जिसे विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम कहते हैं। सूर्य पृथ्वी को बराबर गर्म नहीं करता, इसी से पवनें, समीर और महासागरीय धाराएँ बनती हैं। पानी, कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन मंडलों के बीच गोल-गोल घूमते हैं। इंसान अब इन चक्रों को बदल रहा है, इसलिए हमें पृथ्वी का ध्यान रखना है।
- महासागरों और महाद्वीपों का वितरण: विस्थापन, विस्तार और प्लेटें – 1912 में अल्फ्रेड वेगनर ने कहा कि सारे महाद्वीप कभी एक भूखंड पैंजिया थे, जो एक महासागर पैंथालासा से घिरा था, और वे धीरे-धीरे अलग हुए। मिलते तट, चट्टानें, जीवाश्म, हिमनद जमाव और प्लेसर सोना उनके पक्ष में थे, पर वे बल नहीं समझा सके। समुद्र तल के मानचित्रण से कटक, मैदान और खाइयाँ मिलीं; फिर हैरी हेस ने सागरीय अधस्तल विस्तार दिया: मध्य-महासागरीय कटक पर नई भूपर्पटी बनती है और खाइयों में पुरानी डूबती है। इससे प्लेट विवर्तनिकी बनी: स्थलमंडल कठोर प्लेटों में टूटा है जो नरम दुर्बलतामंडल पर चलती हैं और अपसारी, अभिसारी और रूपांतर सीमाओं पर मिलती हैं। भारतीय प्लेट दक्षिण से अलग होकर उत्तर बढ़ी और एशिया से टकराकर हिमालय उठाया।
- चट्टानें और खनिज – खनिज एक प्राकृतिक, निर्जीव ठोस है जिसकी रासायनिक बनावट तय होती है और क्रिस्टल आकार नियमित होता है, जैसे क्वार्ट्ज़ या हेलाइट (नमक)। चट्टान एक या अधिक खनिजों का मिश्रण है। चट्टानें तीन तरह की हैं: आग्नेय (ठंडे मैग्मा या लावा से), अवसादी (दबे हुए कणों की परतों से) और कायांतरित (गरमी और दबाव से बदली)। शैल चक्र लाखों वर्षों में हर प्रकार को दूसरे में बदलता रहता है।
2. Ocean motion
Ekman transport and geostrophic currents · Ocean waves · Storm surges and tsunamis · Tides
- एकमान परिवहन और भूविक्षेपी धाराएँ – पवन समुद्र की सतह को खींचती है और पृथ्वी का घूमना हर जल-परत को (उत्तर में) दाएँ मोड़ता है। सबको जोड़ने पर पानी पवन से 90 डिग्री दाएँ चलता है: एकमान परिवहन। इससे समुद्री बेसिन के बीच पानी की एक नीची पहाड़ी बनती है। उस पहाड़ी के चारों ओर बहता पानी भूविक्षेपी धारा है, जो बड़े महासागरीय गायरों का इंजन है।
- प्राकृतिक संकट (Natural Hazards) – प्राकृतिक संकट (hazard) ऐसी प्राकृतिक घटना है जो लोगों और चीज़ों को नुकसान पहुँचा सकती है, जैसे भूकंप, ज्वालामुखी, भूस्खलन, बाढ़, सूखा या चक्रवात। जब यह ऐसे लोगों पर पड़ती है जो तैयार नहीं हैं, तब यह आपदा (disaster) बन जाती है। भूगर्भीय संकट धरती के अंदर से आते हैं, मौसमी संकट हवा और पानी से। जोखिम = संकट × सुभेद्यता ÷ क्षमता, इसलिए चेतावनी, मज़बूत मकान और प्रशिक्षित लोग नुकसान घटाते हैं।
3. Precipitation and atmospheric motion
Selective absorption by gases · Heat budget of surface and air · Lapse rates and stability · Hydrostatic balance · Geostrophic and gradient winds · Planetary waves
- ग्रीनहाउस प्रभाव – सूर्य पृथ्वी को दृश्य प्रकाश से गर्म करता है। लगभग 30% प्रकाश सीधे अंतरिक्ष में लौट जाता है (एल्बिडो ≈ 0.30)। बाक़ी ज़मीन को गर्म करता है, और गर्म ज़मीन अवरक्त विकिरण छोड़ती है। ग्रीनहाउस गैसें – जलवाष्प, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड – दृश्य प्रकाश को जाने देती हैं, पर अवरक्त को सोखकर उसका कुछ भाग वापस नीचे भेजती हैं। पृथ्वी उस तापमान पर टिकती है जहाँ आने वाली ऊर्जा = जाने वाली ऊर्जा। इन गैसों के बिना औसत तापमान लगभग −18 °C होता; इनके साथ लगभग +15 °C है। ईंधन जलाने, खेती और कूड़े के ढेरों से CO₂ और CH₄ बढ़ने पर यह प्रभाव तेज़ होता है और धरती गर्म होती है।
- वायुमंडलीय स्थिरता और रुद्धोष्म प्रक्रियाएँ – जब हवा का एक पार्सल ऊपर उठता है, आसपास का दाब घटता है, तो वह फैलता है और बिना ऊष्मा लिए या दिए ठंडा होता है: रुद्धोष्म (adiabatic) शीतलन। सूखी (असंतृप्त) हवा हर km पर 10 °C ठंडी होती है (शुष्क रुद्धोष्म ह्रास दर)। ओसांक पर पहुँचकर वाष्प संघनित होकर बादल बनाती है और गुप्त ऊष्मा छोड़ती है, इसलिए अब यह सिर्फ़ लगभग 4 से 7 °C प्रति km ठंडी होती है (आर्द्र/संतृप्त रुद्धोष्म ह्रास दर, लगभग 6)। आसपास की हवा की अपनी पर्यावरणीय ह्रास दर होती है (औसत 6.5 °C प्रति km)। उठता पार्सल आसपास से ठंडा हो जाए तो भारी होकर रुक जाता है: स्थिर हवा, चपटे बादल, कोहरा, स्मॉग। गर्म रहे तो उठता रहता है: अस्थिर हवा, ऊँचे कपासी बादल और आँधी-तूफ़ान। दोनों दरों के बीच हवा सशर्त अस्थिर होती है। प्रतिलोमन (ऊपर हवा गर्म) बहुत स्थिर होता है।
- वायुमंडलीय दाब – हवा का भी भार होता है। किसी सतह के ऊपर खड़ा हवा का पूरा स्तंभ उस पर दबाव डालता है; हर वर्ग मीटर पर यह धक्का ही वायुमंडलीय दाब है। समुद्र तल पर यह लगभग 101 kPa है — 760 mm पारे के स्तंभ या लगभग 10 m पानी के बराबर। ऊपर जाने पर आपके ऊपर हवा कम रह जाती है, इसलिए दाब घटता है। शांत हवा में किसी परत का भार नीचे से ऊपर लगने वाले दाब से संतुलित रहता है (द्रवस्थैतिक संतुलन)। हवा अधिक दाब से कम दाब की ओर बहती है — यही पवन है।
- भूविक्षेपी और प्रवणता पवन – दाब प्रवणता बल हवा को उच्च दाब से निम्न दाब की ओर धकेलता है। चलते ही पृथ्वी का घूमना (कोरिऑलिस बल) उसे मोड़ने लगता है। ज़मीन से ऊपर दोनों बल बराबर हो जाते हैं और हवा समदाब रेखाओं के साथ बहती है: यह भूविक्षेपी पवन है। मुड़ी रेखाओं पर यही प्रवणता पवन कहलाती है।
- वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ – हवा का वज़न होता है, इसलिए वह नीचे दबाव डालती है: यही वायुदाब है (समुद्र तल पर लगभग 1013 mb)। पवन उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है; दाब प्रवणता बल इसे धकेलता है, कोरिऑलिस बल मोड़ता है (उत्तर में दाएँ, दक्षिण में बाएँ) और घर्षण ज़मीन के पास धीमा करता है। असमान गर्मी से दाब पेटियाँ बनती हैं (विषुवतीय निम्न, उपोष्ण उच्च, उपध्रुवीय निम्न, ध्रुवीय उच्च) और तीन कोष्ठ, जिनसे भूमंडलीय पवनें चलती हैं: व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें, ध्रुवीय पूर्वी पवनें। ऋतु के साथ पेटियाँ खिसकती हैं और मानसून जैसी मौसमी पवनें बनती हैं; स्थानीय पवनों में स्थल-समुद्र समीर और पर्वत-घाटी समीर हैं। एक जैसी गर्मी और नमी वाली विशाल हवा वायुराशि है; दो वायुराशियों की सीमा वाताग्र है। चक्रवात निम्न दाब वाले तूफ़ान हैं: उष्णकटिबंधीय गरम समुद्र पर, शीतोष्ण वाताग्रों पर बनते हैं। तड़ितझंझा और टॉरनेडो छोटे पर बहुत तेज़ तूफ़ान हैं।