चलती हवा पर दो बल
हवा में भार होता है, इसलिए वह हर ओर से दाब महसूस करती है। अगर एक ओर दाब ज़्यादा है तो हवा कम दाब की ओर धकेली जाती है। यह दाब प्रवणता बल है। यह हमेशा उच्च से निम्न दाब की ओर, समदाब रेखाओं के आर-पार लगता है। समदाब रेखाएँ (isobars) बराबर दाब वाली जगहों को जोड़ती हैं।
रेखाएँ जितनी पास हों, दाब उतनी तेज़ी से बदलता है और धक्का उतना बड़ा होता है।
पृथ्वी घूमती है, इसलिए चलती हवा मुड़ी हुई दिखती है। यह कोरिऑलिस प्रभाव है। उत्तरी गोलार्ध में यह हवा को दाएँ मोड़ता है, दक्षिणी में बाएँ। भूमध्य रेखा पर यह शून्य है और ध्रुवों पर सबसे ज़्यादा। हवा जितनी तेज़, यह उतना बड़ा। यह हवा को सिर्फ़ मोड़ता है, तेज़ नहीं करता।
भूविक्षेपी पवन: दोनों बल बराबर
हवा समदाब रेखाओं के आर-पार चलना शुरू करती है। तेज़ होने पर कोरिऑलिस बल बढ़ता है और उसे मोड़ता है। यह तब तक चलता है जब तक कोरिऑलिस बल दाब बल के ठीक बराबर और उलटा न हो जाए। तब कुल बल शून्य है और हवा समदाब रेखाओं के साथ सीधी बहती है। यही भूविक्षेपी पवन (geostrophic wind) है।
गति v = (1 / ρf) × (Δp / d)। यहाँ ρ हवा का घनत्व है, f कोरिऑलिस संख्या (मध्य अक्षांशों में लगभग 0.0001 प्रति सेकंड) और Δp / d रेखाओं के आर-पार प्रति मीटर दाब-परिवर्तन। रेखाएँ पास यानी Δp / d बड़ा और हवा तेज़।
यह लगभग 1 किमी से ऊपर ठीक चलता है, जहाँ ज़मीन हवा को रगड़ती नहीं। भूमध्य रेखा के पास यह नहीं चलता, क्योंकि वहाँ f लगभग शून्य है।
प्रवणता पवन: मुड़ी हुई समदाब रेखाएँ
असली समदाब रेखाएँ अक्सर उच्च या निम्न दाब के चारों ओर गोल होती हैं। मोड़ पर चलने के लिए हवा को केंद्र की ओर कुल बल चाहिए। यह प्रवणता पवन (gradient wind) है।
- निम्न दाब के चारों ओर: दाब बल अंदर, कोरिऑलिस बल बाहर। दाब बल बड़ा है। उत्तर में हवा वामावर्त घूमती है (दक्षिण में दक्षिणावर्त)। यह भूविक्षेपी पवन से थोड़ी धीमी होती है।
- उच्च दाब के चारों ओर: कोरिऑलिस बल अंदर और बड़ा, दाब बल बाहर। उत्तर में हवा दक्षिणावर्त घूमती है (दक्षिण में वामावर्त)। समान दूरी की रेखाओं पर यह भूविक्षेपी पवन से थोड़ी तेज़ होती है।
ज़मीन के पास: घर्षण और बाइज़ बैलेट का नियम
ज़मीन के पास घर्षण हवा को धीमा करता है। धीमी हवा पर कोरिऑलिस बल कम लगता है, इसलिए दाब बल थोड़ा जीतता है और हवा लगभग 10 से 30 डिग्री समदाब रेखाओं को काटकर निम्न दाब की ओर सरक जाती है। इसीलिए हवा निम्न दाब में घुमावदार अंदर आती है और ऊपर उठती है, जिससे बादल और वर्षा बनते हैं।
बाइज़ बैलेट का नियम: उत्तरी गोलार्ध में हवा की ओर पीठ करके खड़े हो जाओ। निम्न दाब तुम्हारे बाएँ होगा। दक्षिणी गोलार्ध में दाएँ।
करके देखो: घूमने वाली थाली और पेंसिल
एक कागज़ की प्लेट को रिकॉर्ड प्लेयर या धीरे घूमते स्टूल पर रखो। उसे वामावर्त घुमाओ (ऊपर से देखने पर उत्तरी गोलार्ध जैसा)। स्केल को स्थिर पकड़कर केंद्र से बाहर की ओर "सीधी" रेखा खींचो। रोकने पर रेखा मुड़ी हुई दिखेगी। प्लेट तुम्हारी पेंसिल के नीचे घूम गई, जैसे पृथ्वी चलती हवा के नीचे घूमती है। अब सोचो: प्लेट दक्षिणावर्त घुमाओ तो रेखा किधर मुड़ेगी? करके जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- दाब प्रवणता = Δp / d (पास्कल प्रति मीटर)
- भूविक्षेपी पवन: v = Δp / (ρ f d)
- कोरिऑलिस संख्या: f = 2Ω sin φ (Ω = 7.3 × 10⁻⁵ s⁻¹, φ = अक्षांश)
- संतुलन: दाब बल = कोरिऑलिस बल
हल किए गए उदाहरण
1. 100 किमी में दाब 4 hPa घटता है। भूविक्षेपी पवन ज्ञात करो। ρ = 1.2 kg/m³, f = 1 × 10⁻⁴ s⁻¹ लो।
Δp = 4 hPa = 400 Pa; d = 100 000 m। प्रवणता = 400 / 100 000 = 0.004 Pa/m। v = 0.004 / (1.2 × 0.0001) ≈ 33 m/s।
2. समदाब रेखाएँ दोगुनी दूर हों (दाब-अंतर वही), तो पवन का क्या होगा?
Δp / d आधा हो जाता है, इसलिए v भी आधा। दूर-दूर रेखाएँ यानी कमज़ोर पवन।
3. तुम उत्तरी गोलार्ध में हो और हवा पीठ पर है। निम्न दाब कहाँ है?
तुम्हारे बाएँ (बाइज़ बैलेट का नियम)।
4. 30° उत्तर पर f ज्ञात करो। (Ω = 7.3 × 10⁻⁵ s⁻¹)
f = 2Ω sin 30° = 2 × 7.3 × 10⁻⁵ × 0.5 = 7.3 × 10⁻⁵ s⁻¹।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि हवा सीधी उच्च से निम्न दाब की ओर बहती है। ऊँचाई पर वह समदाब रेखाओं के साथ बहती है।
- यह सोचना कि कोरिऑलिस बल हवा को तेज़ करता है। वह सिर्फ़ मोड़ता है।
- भूमध्य रेखा पर भूविक्षेपी सूत्र लगाना। वहाँ f शून्य है, इसलिए सूत्र काम नहीं करता।
- दिशाएँ उलझाना: निम्न दाब के चारों ओर उत्तर में वामावर्त, पर दक्षिण में दक्षिणावर्त।