पवन, घर्षण और एकमान सर्पिल
पवन समुद्र पर चलती है तो घर्षण ऊपरी परत को खींचता है। पृथ्वी घूमती है, इसलिए चलता पानी मुड़ता है। उत्तरी गोलार्ध में दाएँ, दक्षिणी में बाएँ।
ऊपरी परत पवन की दिशा से लगभग 45 डिग्री पर चलती है। वह नीचे की परत को खींचती है, जो थोड़ा और मुड़ती है और धीमी चलती है। परत-दर-परत तीर छोटा होता सर्पिल बनाते हैं: एकमान सर्पिल। गति लगभग 100 मीटर पर ख़त्म हो जाती है। यह ऊपरी क्षेत्र एकमान परत है।
एकमान परिवहन और उपरिवाह
एकमान परत की सारी परतों की गति जोड़ो। कुल जल-गति उत्तर में पवन से 90 डिग्री दाएँ होती है (दक्षिण में 90 डिग्री बाएँ)। यह एकमान परिवहन है।
प्रति मीटर चौड़ाई में खिसकने वाला पानी M = τ / (ρ f)। यहाँ τ पवन-प्रतिबल (प्रति वर्ग मीटर पवन का खिंचाव), ρ समुद्री जल का घनत्व (लगभग 1025 kg/m³) और f कोरिऑलिस संख्या (मध्य अक्षांशों में लगभग 0.0001 प्रति सेकंड) है।
तटीय उपरिवाह (upwelling): उत्तर में पवन तट के साथ चले और तट उसके बाएँ हो, तो एकमान परिवहन सतह का पानी तट से दूर ले जाता है। नीचे का ठंडा पानी ऊपर आकर जगह भरता है। इसमें पोषक तत्व भरपूर होते हैं, इसलिए वहाँ मछली पकड़ना बढ़िया रहता है।
पानी की पहाड़ी और गायर
पूरे महासागर में, उष्णकटिबंध के पास व्यापारिक पवनें पश्चिम की ओर और उनसे उत्तर में पछुआ पवनें पूरब की ओर चलती हैं। दोनों से एकमान परिवहन बेसिन के बीच की ओर होता है। वहाँ हज़ारों किलोमीटर में फैली लगभग एक मीटर ऊँची हल्की पहाड़ी बन जाती है।
पहाड़ी से दाब बल पैदा होता है जो पानी को ढलान से नीचे धकेलता है। पानी चलता है तो कोरिऑलिस प्रभाव उसे दाएँ मोड़ता है, जब तक दोनों बल बराबर न हो जाएँ। तब पानी पहाड़ी की समोच्च रेखाओं के साथ बहता है, नीचे नहीं। यह भूविक्षेपी धारा है। उत्तरी गोलार्ध में यह पहाड़ी के चारों ओर दक्षिणावर्त चलती है और गायर बनता है। दक्षिणी गोलार्ध में गायर वामावर्त चलते हैं।
यह भूविक्षेपी पवन जैसा ही विचार है, बस उच्च दाब क्षेत्र की जगह पानी की पहाड़ी है।
भूविक्षेपी धारा की गति
धारा की गति v = (g / f) × ढाल, जहाँ ढाल यानी ऊँचाई का अंतर ÷ दूरी, और g = 9.8 m/s²। ढाल जितना तीखा, धारा उतनी तेज़। गायर समान नहीं होते: हर महासागर के पश्चिमी किनारे पर पानी तेज़ और पतला बहता है, जैसे गल्फ़ स्ट्रीम और कुरोशियो। इन्हें पश्चिमी सीमा धाराएँ कहते हैं।
करके देखो: पानी की ट्रे पर फूँक मारो
एक उथली ट्रे में पानी भरो और कागज़ के छोटे टुकड़े डालो। स्ट्रॉ से ट्रे के साथ धीरे फूँक मारो। देखो पानी दूर वाले सिरे पर जमा होता है और टुकड़े हवा के साथ चलते हैं। असली समुद्र में पृथ्वी का घूमना एक मोड़ और जोड़ता है। अब धीरे घूमते स्टूल पर कटोरा रखो और एक दिशा में चम्मच घुमाओ: पानी बाहर की ओर चढ़ता है। अंदाज़ा लगाओ कि दीवार पर और बीच में पानी का स्तर कैसा होगा, फिर देखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सतह की धारा: पवन से लगभग 45° दाएँ (उत्तर में)
- कुल एकमान परिवहन: पवन से 90° दाएँ (उत्तर में)
- प्रति मीटर एकमान परिवहन: M = τ / (ρ f)
- भूविक्षेपी धारा: v = (g / f) × (Δh / d)
हल किए गए उदाहरण
1. पवन-प्रतिबल 0.1 N/m² है। प्रति मीटर चौड़ाई में एकमान परिवहन ज्ञात करो। (ρ = 1025 kg/m³, f = 1 × 10⁻⁴ s⁻¹)
M = τ / (ρ f) = 0.1 / (1025 × 0.0001) = 0.1 / 0.1025 ≈ 0.98 m²/s। यानी तट के हर मीटर पर लगभग 1 घन मीटर पानी प्रति सेकंड।
2. समुद्र की सतह की पहाड़ी 1000 किमी में 1 मीटर ऊँची है। भूविक्षेपी धारा ज्ञात करो। (f = 1 × 10⁻⁴ s⁻¹, g = 9.8 m/s²)
ढाल = 1 / 1 000 000 = 1 × 10⁻⁶। v = (9.8 / 0.0001) × 10⁻⁶ = 98 000 × 10⁻⁶ ≈ 0.098 m/s, यानी लगभग 10 सेमी/से।
3. उत्तरी गोलार्ध में पवन पूरब की ओर चल रही है। कुल जल-गति किस दिशा में होगी?
पूरब से 90° दाएँ मुड़ो: दक्षिण की ओर।
4. उत्तरी गोलार्ध में पवन दक्षिण की ओर चलती है। एकमान परिवहन किधर होगा, और तट पश्चिम में हो तो क्या होगा?
दक्षिण से दाएँ पश्चिम है। तट पश्चिम में हो तो पानी तट की ओर धकेला जाएगा; तट पूरब में हो तो पानी तट से दूर जाएगा (उपरिवाह)। हमेशा पवन से दाएँ मुड़ो और देखो कि दिशा तट की ओर है या दूर।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि पानी पवन की ही दिशा में चलता है। कुल गति बगल में 90° पर होती है।
- यह कहना कि सतह पवन से 90° पर चलती है। सतह लगभग 45° पर है; 90° सारी परतों का कुल है।
- यह भूल जाना कि दक्षिणी गोलार्ध में उलटा (बाएँ) मुड़ना होता है।
- यह सोचना कि धारा पानी की पहाड़ी से नीचे बहती है। वह पहाड़ी के साथ बहती है, कोरिऑलिस से संतुलित।