पृथ्वी का भूगोल जलवायु कैसे बनाता है
- अक्षांश: भूमध्य रेखा पर सूर्य ऊँचा, इसलिए गर्मी; ध्रुवों पर तिरछी, कमज़ोर धूप।
- वायु परिसंचरण: हैडली कोष्ठ: हवा भूमध्य रेखा पर उठती है (वर्षावन), लगभग 30° N/S पर उतरती है (सहारा, थार जैसे रेगिस्तान), फिर व्यापारिक पवन बनकर लौटती है। आगे के कोष्ठ (फ़ेरल, ध्रुवीय) पछुआ और ध्रुवीय पूर्वी पवनें देते हैं।
- ऊँचाई: हर 1,000 m पर हवा लगभग 6.5 °C ठंडी। शिमला दिल्ली से ठंडा है।
- समुद्र से निकटता: पानी धीरे गर्म-ठंडा होता है (ऊँची विशिष्ट ऊष्मा), तो तट पर नरम समुद्री जलवायु; अंदर गर्म गर्मियाँ और ठंडी सर्दियाँ (महाद्वीपीय)।
- महासागरीय धाराएँ: गर्म धाराएँ (गल्फ़ स्ट्रीम) पास के तट गर्म करती हैं; ठंडी धाराएँ (हम्बोल्ट) ठंडा करके तटीय रेगिस्तान बनाती हैं।
- पहाड़: पवनें रोकते और वृष्टि छाया बनाते हैं।
वृष्टि छाया प्रभाव
नम हवा पहाड़ से मिलती है तो उसे ऊपर उठना पड़ता है (पर्वतीय उठान)। उठती हवा फैलकर ठंडी होती है; जलवाष्प संघनित होकर पवनमुखी (windward) ढलान पर बादल और बारिश बनाती है। चोटी पार करने वाली हवा की नमी खत्म हो चुकी होती है और पवनविमुखी (leeward) ढलान पर उतरते हुए गर्म होती है। इसलिए वह ओर सूखी रहती है: वृष्टि छाया। उदाहरण: पश्चिमी घाट (गीला तट, सूखा दक्कन), हिमालय (गीला दक्षिण, सूखा तिब्बती पठार), एंडीज़ और पैटागोनिया।
एल नीनो और ला नीना (ENSO)
एल नीनो–दक्षिणी दोलन (ENSO) उष्णकटिबंधीय प्रशांत में हर 2–7 साल में आने वाला प्राकृतिक झूला है।
सामान्य स्थिति
व्यापारिक पवनें भूमध्य रेखा के साथ पूर्व से पश्चिम चलती हैं और सतह का गर्म पानी पश्चिम धकेलती हैं। पश्चिमी प्रशांत गर्म, हवा उठती, भारी बारिश। पूर्व में नीचे से ठंडा, पोषक पानी ऊपर आता है (उत्प्रवाह, upwelling), जिससे मछलियाँ पलती हैं।
एल नीनो
- व्यापारिक पवनें कमज़ोर या उलटी; गर्म पानी पूर्व की ओर।
- उत्प्रवाह घटता है: दक्षिण अमेरिका के पास मछली कम।
- बारिश पूर्व की ओर: पेरू, इक्वाडोर में बाढ़; इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया में सूखा; अक्सर कमज़ोर भारतीय मानसून।
- एक साल के लिए वैश्विक औसत तापमान थोड़ा बढ़ता है।
ला नीना
- व्यापारिक पवनें सामान्य से तेज़; पूर्वी प्रशांत ज़्यादा ठंडा।
- दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया में ज़्यादा बारिश; अक्सर अच्छा भारतीय मानसून; अमेरिका के कुछ भागों में सूखा।
दक्षिणी दोलन पश्चिमी और पूर्वी प्रशांत के बीच वायुदाब का साथ चलने वाला झूला है।
करके देखो: वृष्टि छाया और छोटा एल नीनो
एक लंबी ट्रे में पानी भरो और एक सिरे पर खाने के रंग की कुछ बूँदें डालो। स्ट्रॉ से सतह पर लगातार फूँको (व्यापारिक पवन): रंगीन पानी दूसरे सिरे पर जमा होता है। फूँकना बंद करो: वह वापस बहता है। पवनें कमज़ोर होने पर गर्म पानी ऐसे ही पूर्व की ओर फैलता है। वृष्टि छाया के लिए किताब के पीछे रखे ठंडे गिलास पर साँस छोड़ो: सामने वाली ओर धुंध, किताब के पीछे वाली ओर साफ़।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- हर 1,000 m ऊँचाई पर हवा ≈ 6.5 °C ठंडी
- हैडली कोष्ठ: 0° पर उठान, लगभग 30° पर अवतलन
- पवनमुखी = गीला, पवनविमुखी = वृष्टि छाया
- एल नीनो: कमज़ोर व्यापारिक पवनें, गर्म पूर्वी प्रशांत, कम उत्प्रवाह
- ला नीना: तेज़ व्यापारिक पवनें, ठंडा पूर्वी प्रशांत
- ENSO चक्र: लगभग हर 2–7 साल
हल किए गए उदाहरण
1. समुद्र तल पर एक शहर 30 °C है। 2,000 m ऊपर हिल स्टेशन का तापमान अनुमानित करो।
ठंडक ≈ 6.5 × 2 = 13 °C, तो लगभग 30 − 13 = 17 °C।
2. दुनिया के कई बड़े रेगिस्तान लगभग 30° N और 30° S पर क्यों हैं?
हैडली कोष्ठ में भूमध्य रेखा से आई हवा वहाँ उतरती है। उतरती हवा गर्म और सूखी होती है, बादल कम बनते हैं।
3. मुंबई और पुणे लगभग 150 km दूर हैं। पुणे में बहुत कम बारिश क्यों?
अरब सागर से आई मानसूनी हवा पश्चिमी घाट पर चढ़कर ज़्यादातर बारिश पवनमुखी (मुंबई) ओर गिरा देती है। पुणे पवनविमुखी ओर, वृष्टि छाया में है।
4. एल नीनो वर्ष में पेरू के पास मछली पकड़ का क्या होता है, क्यों?
घटती है। कमज़ोर पवनों से ठंडे, पोषक पानी का उत्प्रवाह घटता है, तो प्लवक और मछलियाँ कम होती हैं।
5. एक ही अक्षांश पर तटीय शहरों में तापांतर अंदरूनी शहरों से कम क्यों?
पानी की विशिष्ट ऊष्मा ऊँची है, वह धीरे गर्म-ठंडा होता है, और पास की हवा को गर्मी-सर्दी दोनों में नरम रखता है।
आम गलतियाँ
- एल नीनो को एक तूफ़ान समझना। यह महीनों तक चलने वाला प्रशांत की पवनों और समुद्री तापमान का बदलाव है।
- कहना कि वृष्टि छाया पवनमुखी ओर है। पवनमुखी ओर गीली; पवनविमुखी ओर सूखी।
- मानना कि एल नीनो से भारत में हमेशा सूखा पड़ता है। यह अक्सर मानसून कमज़ोर करता है, पर हर बार नहीं।
- ऊँचाई भूल जाना: भूमध्य रेखा पर भी ऊँची जगह ठंडी हो सकती है (जैसे किलिमंजारो पर बर्फ़)।