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भारत की जलवायु: मानसून हमारा साल कैसे तय करता है

भारत की जलवायु उष्ण कटिबंधीय मानसूनी है। यह अक्षांश, हिमालय, समुद्र से दूरी, ऊँचाई और हवाओं पर निर्भर है। मानसून वह हवा है जो मौसम के साथ दिशा बदलती है। गर्मी में ज़मीन समुद्र से ज़्यादा गर्म होती है, इसलिए नम हवा समुद्र से ज़मीन की ओर आती है और बारिश लाती है। सर्दी में सूखी हवा ज़मीन से समुद्र की ओर जाती है। भारत में चार ऋतुएँ हैं: शीत, ग्रीष्म, दक्षिण-पश्चिम मानसून और लौटता मानसून। वर्षा असमान है: पश्चिमी घाट और उत्तर-पूर्व में 400 सेमी से ज़्यादा, थार और लद्दाख में 60 सेमी से कम। खेती, भोजन के दाम और रोज़गार मानसून पर टिके हैं। वैश्विक तापन से लू तेज़ और वर्षा अनियमित हो रही है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. भारत की जलवायु किससे तय होती है? अक्षांश, हिमालय की दीवार, समुद्र से दूरी और ऊँचाई।
  2. मानसूनी हवा दिशा बदलती है: गर्मी में समुद्र से ज़मीन (नम), सर्दी में ज़मीन से समुद्र (सूखी)।
  3. नम हवा पहाड़ से टकराकर सामने बरसती है। पीछे का भाग सूखी वृष्टि छाया है।
  4. भारत में चार ऋतुएँ हैं: शीत, ग्रीष्म, दक्षिण-पश्चिम मानसून और लौटता मानसून।
  5. खेतों को मानसून चाहिए। अच्छी वर्षा से भरपूर फ़सल; कम वर्षा से सूखा और महँगा भोजन।
  6. करके देखें: ग्रीनहाउस गैसें बढ़ाइए और धरती को गर्म, हिमनद को छोटा और समुद्र को ऊँचा होते देखिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

उसी अक्षांश पर मध्य एशिया की तरह भारत सर्दी में जम क्यों नहीं जाता?

हिमालय दीवार की तरह मध्य एशिया की बर्फ़ीली हवा रोकता है। चरण 1 में ठंडा तीर पहाड़ों पर रुकता दिखता है।

गर्मी में हवा समुद्र से और सर्दी में ज़मीन से क्यों चलती है?

हवा उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है। गर्मी में ज़मीन गर्म (निम्न दाब), इसलिए हवा समुद्र से आती है; सर्दी में ज़मीन ठंडी (उच्च दाब), इसलिए हवा समुद्र की ओर जाती है। चरण 2 के दोनों बटन दबाइए।

पश्चिमी घाट का एक ओर गीला और दूसरी ओर सूखा क्यों है?

सामने के ढाल पर चढ़ती नम हवा ठंडी होकर बरसती है। पार पहुँचने तक वह सूखी होकर नीचे उतरती है, इसलिए पीछे का भाग सूखा रहता है। चरण 3 में पहाड़ ऊँचा करके पट्टियाँ देखिए।

जब बाक़ी भारत सूखा है, तब सर्दी में तमिलनाडु में वर्षा क्यों होती है?

लौटती मानसूनी हवाएँ बंगाल की खाड़ी पार करते हुए नमी लेती हैं और कोरोमंडल तट पर बरसती हैं। चरण 4 का 'लौटता' बटन देखिए।

क्या ज़्यादा बारिश हमेशा किसान के लिए अच्छी है?

नहीं। सामान्य के लगभग 110% से ज़्यादा वर्षा खेतों में बाढ़ लाकर फ़सल बिगाड़ सकती है। चरण 5 में 130% करके देखिए।

थोड़ी-सी गर्मी बढ़ना तो नुक़सानदेह नहीं?

सिर्फ़ 1–2 °C से भी हिमनद पिघलते हैं, समुद्र बढ़ता है और लू व बाढ़ तेज़ होती हैं। चरण 6 का CO₂ स्लाइडर चलाइए।

भारत की जलवायु के कारक

जलवायु किसी जगह का कई सालों का सामान्य मौसम है। भारत के लिए ये बातें सबसे ज़रूरी हैं:

मानसून की प्रकृति

मानसून शब्द अरबी के मौसिम से बना है, जिसका अर्थ है ऋतु। मानसून ऐसी पवन व्यवस्था है जो ऋतु के साथ दिशा उलट देती है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून कैसे शुरू होता है

  1. मई–जून में सूरज कर्क रेखा के पास सिर के ऊपर होता है। उत्तर-पश्चिमी मैदान बहुत गर्म हो जाते हैं और वहाँ निम्न दाब बनता है।
  2. जहाँ व्यापारिक पवनें मिलती हैं, वह पट्टी (ITCZ, अंतः उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र) उत्तर की ओर गंगा के मैदान तक खिसक आती है।
  3. दक्षिणी हिंद महासागर की दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनें भूमध्य रेखा पार करती हैं। पृथ्वी के घूमने से वे दाईं ओर मुड़ती हैं और दक्षिण-पश्चिम से भारत आती हैं।
  4. हज़ारों किमी गर्म समुद्र पार करने से वे नमी से भरी होती हैं।
  5. प्रायद्वीप के ऊपर ऊँचाई पर पूर्वी जेट धारा मानसून के फटने में मदद करती है।

आगमन, विराम और वापसी

मानसून लगभग 1 जून को अचानक तेज़ बारिश के साथ केरल पहुँचता है (मानसून का फटना)। जुलाई के बीच तक पूरे देश में छा जाता है। रोज़ बारिश नहीं होती: एक या अधिक हफ़्ते के सूखे दिनों को मानसून में विराम कहते हैं। सितंबर से हवाएँ कमज़ोर होकर लौटने लगती हैं (मानसून का निवर्तन), सबसे पहले उत्तर-पश्चिम से।

दो शाखाएँ

अरब सागर शाखा पश्चिमी घाट से टकराती है और फिर गुजरात-राजस्थान पहुँचती है। बंगाल की खाड़ी शाखा उत्तर-पूर्व की पहाड़ियों से टकराकर हिमालय के साथ पश्चिम की ओर गंगा के मैदान में मुड़ती है।

भारत की चार ऋतुएँ

ऋतुमहीनेक्या होता है
शीत ऋतुदिस.–फ़र.ज़मीन से समुद्र की ओर सूखी हवा। उत्तर भारत 10–15 °C, पाला और कोहरा। भूमध्य सागर से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ पंजाब में हल्की बारिश और हिमालय में बर्फ़ लाते हैं (गेहूँ के लिए अच्छा)। तमिलनाडु तट पर तब भी वर्षा।
ग्रीष्म ऋतुमार्च–मईउत्तर-पश्चिम में 40 °C से ऊपर। गर्म सूखी हवा लू। स्थानीय तूफ़ान: केरल-कर्नाटक में आम्र वर्षा, पश्चिम बंगाल-असम में काल बैसाखी।
दक्षिण-पश्चिम मानसूनजून–सित.समुद्र से नम हवाएँ; भारत की सालाना वर्षा का लगभग 75%। पश्चिमी घाट और उत्तर-पूर्व में भारी।
लौटता मानसूनअक्टू.–नव.हवाएँ पीछे हटती हैं; साफ़ आसमान और उमस भरी गर्मी (क्वार की उमस)। कोरोमंडल तट पर मुख्य वर्षा; बंगाल की खाड़ी में चक्रवात।

वर्षा का वितरण

भारत की औसत वार्षिक वर्षा लगभग 125 सेमी है, पर यह बहुत असमान है:

उत्तर में पूर्व से पश्चिम की ओर और दक्षिण में तट से भीतर की ओर वर्षा घटती है। वृष्टि छाया: पश्चिमी घाट के पीछे (जैसे पुणे) सामने (जैसे मुंबई) से बहुत कम वर्षा होती है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में वर्षा सबसे ज़्यादा परिवर्तनशील भी होती है, इसलिए वहाँ सूखा बार-बार पड़ता है।

मानसून और भारत का आर्थिक जीवन

वैश्विक तापन और भारत

ग्रीनहाउस गैसें (कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, जलवाष्प) धूप को अंदर आने देती हैं पर बाहर जाती गर्मी का कुछ भाग रोक लेती हैं, कंबल की तरह। यह प्राकृतिक है और धरती को रहने लायक गर्म रखता है। पर कोयला, तेल, गैस जलाने और जंगल काटने से अतिरिक्त CO₂ बढ़ी है, इसलिए 1850 से धरती लगभग 1.1–1.2 °C गर्म हो चुकी है। यही वैश्विक तापन है।

भारत पर असर: तेज़ लू, हिमालय के हिमनदों का सिकुड़ना (गंगा जैसी नदियाँ इन पर निर्भर), समुद्र-तल बढ़ने से तटीय शहरों और सुंदरबन को ख़तरा, और मानसून में बारिश के दिन कम पर तेज़ बौछारें ज़्यादा, जिससे बाढ़ और सूखा दोनों बढ़ते हैं। उपाय: स्वच्छ ऊर्जा (सौर, पवन), बिजली बचाना, सार्वजनिक परिवहन, पेड़ लगाना और जंगल बचाना।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. मुंबई और पुणे दोनों महाराष्ट्र में हैं, पर मुंबई में लगभग 240 सेमी और पुणे में लगभग 70 सेमी वर्षा होती है। क्यों?

मुंबई पश्चिमी घाट के पवनमुखी ढाल पर है, जहाँ नम हवा ऊपर उठकर बरसती है। पुणे घाट के पीछे पवनविमुखी ढाल पर है; हवा अपनी नमी पहले ही छोड़ चुकी होती है और नीचे उतरती है, इसलिए पुणे वृष्टि छाया में है।

2. चेन्नई में ज़्यादातर वर्षा जुलाई में नहीं, अक्टूबर–नवंबर में होती है। समझाइए।

जुलाई में दक्षिण-पश्चिमी हवा कोरोमंडल तट के समानांतर बहती है और तमिलनाडु पश्चिमी घाट की वृष्टि छाया में रहता है। अक्टूबर–नवंबर में लौटती मानसूनी हवा उत्तर-पूर्व से बंगाल की खाड़ी पार करके नमी लेती है और तमिलनाडु तट पर बरसती है; चक्रवात और वर्षा जोड़ते हैं।

3. पहाड़ की तलहटी में तापमान 32 °C है। 2,000 मी ऊँचे हिल स्टेशन पर लगभग कितना होगा?

हर 1,000 मी पर लगभग 6.5 °C घटता है। कमी = 2 × 6.5 = 13 °C। तापमान ≈ 32 − 13 = 19 °C।

4. दिल्ली की जलवायु 'विषम' और मुंबई की 'सम' क्यों कहलाती है?

मुंबई समुद्र के पास है, जो धीरे गर्म-ठंडा होकर हवा को मध्यम रखता है; गर्मी-सर्दी का अंतर कम है। दिल्ली समुद्र से दूर है, इसलिए गर्मी में 45 °C से ऊपर और सर्दी की रातें 5 °C के पास।

5. भारत की वार्षिक वर्षा 125 सेमी है और 75% दक्षिण-पश्चिम मानसून से आती है। जून–सितंबर में कितनी वर्षा होती है?

125 सेमी का 75% = 0.75 × 125 = 93.75 सेमी, लगभग 94 सेमी।

6. एल नीनो वाले साल मानसून सामान्य से 15% कम रहा। विदर्भ के किसान परिवार पर क्या असर हो सकता है?

कम वर्षा → खरीफ़ कपास और सोयाबीन सूखे → उपज और आय कम → कर्ज़ चुकाना मुश्किल → भोजन और चारा महँगा → परिवार काम के लिए पलायन कर सकता है। इसीलिए मानसून को भारत का असली वित्त मंत्री कहते हैं।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. भारतीय मानसून का सबसे सही वर्णन है:
2. भारत में सबसे ज़्यादा वर्षा किस ऋतु में होती है?
3. पुणे में मुंबई से कम वर्षा होती है क्योंकि पुणे:
4. पंजाब में सर्दी की वर्षा किससे होती है?
5. हिमालय भारत की जलवायु पर मुख्य रूप से कैसे असर डालता है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक कौन-से हैं?

अक्षांश, हिमालय, स्थल और जल का वितरण, समुद्र से दूरी, ऊँचाई, उच्चावच और जेट धारा जैसी ऊपरी हवाएँ, साथ ही एल नीनो।

मानसून में विराम किसे कहते हैं?

वर्षा ऋतु के बीच एक या अधिक हफ़्ते का सूखा दौर, जब मानसूनी गर्त खिसक जाने से बड़े क्षेत्र में बारिश रुक जाती है।

मानसून को भारत का वित्त मंत्री क्यों कहते हैं?

क्योंकि खेती की उपज, भोजन के दाम, गाँवों का रोज़गार, पानी और बिजली सब अच्छी मानसूनी वर्षा पर निर्भर हैं, इसलिए यह साल भर की अर्थव्यवस्था तय करता है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 11जलवायु
सीबीएसई (भारत)कक्षा 11जलवायु, वनस्पति और मृदा

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