भारत की जलवायु के कारक
जलवायु किसी जगह का कई सालों का सामान्य मौसम है। भारत के लिए ये बातें सबसे ज़रूरी हैं:
- अक्षांश: कर्क रेखा भारत के बीच से गुज़रती है। दक्षिण भाग गर्म उष्ण कटिबंध में है, उत्तर भाग उपोष्ण।
- हिमालय: उत्तर में बहुत ऊँची दीवार। यह मध्य एशिया की बर्फ़ीली हवा रोकता है और मानसूनी हवा को भारत में ही बरसने पर मजबूर करता है।
- स्थल और जल: ज़मीन जल्दी गर्म-ठंडी होती है, समुद्र धीरे। इसी से दाब का अंतर बनता है जो मानसून चलाता है।
- समुद्र से दूरी: तटों पर सम (मध्यम) जलवायु। दिल्ली जैसे भीतरी स्थानों पर गर्मी बहुत तेज़ और सर्दी कड़ी (विषम या महाद्वीपीय जलवायु)।
- ऊँचाई: हर 1 किमी ऊपर जाने पर हवा लगभग 6.5 °C ठंडी होती है, इसलिए शिमला अंबाला से ठंडा है।
- उच्चावच: पहाड़ तय करते हैं कि कौन-सा ढाल बरसात पाएगा (पवनमुखी) और कौन सूखा रहेगा (पवनविमुखी)।
- ऊपरी वायु: आसमान में ऊँचाई पर तेज़ हवाएँ (जेट धाराएँ) और दूर के समुद्र भी असर डालते हैं: प्रशांत महासागर गर्म हो (एल नीनो) तो अक्सर मानसून कमज़ोर रहता है।
मानसून की प्रकृति
मानसून शब्द अरबी के मौसिम से बना है, जिसका अर्थ है ऋतु। मानसून ऐसी पवन व्यवस्था है जो ऋतु के साथ दिशा उलट देती है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून कैसे शुरू होता है
- मई–जून में सूरज कर्क रेखा के पास सिर के ऊपर होता है। उत्तर-पश्चिमी मैदान बहुत गर्म हो जाते हैं और वहाँ निम्न दाब बनता है।
- जहाँ व्यापारिक पवनें मिलती हैं, वह पट्टी (ITCZ, अंतः उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र) उत्तर की ओर गंगा के मैदान तक खिसक आती है।
- दक्षिणी हिंद महासागर की दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनें भूमध्य रेखा पार करती हैं। पृथ्वी के घूमने से वे दाईं ओर मुड़ती हैं और दक्षिण-पश्चिम से भारत आती हैं।
- हज़ारों किमी गर्म समुद्र पार करने से वे नमी से भरी होती हैं।
- प्रायद्वीप के ऊपर ऊँचाई पर पूर्वी जेट धारा मानसून के फटने में मदद करती है।
आगमन, विराम और वापसी
मानसून लगभग 1 जून को अचानक तेज़ बारिश के साथ केरल पहुँचता है (मानसून का फटना)। जुलाई के बीच तक पूरे देश में छा जाता है। रोज़ बारिश नहीं होती: एक या अधिक हफ़्ते के सूखे दिनों को मानसून में विराम कहते हैं। सितंबर से हवाएँ कमज़ोर होकर लौटने लगती हैं (मानसून का निवर्तन), सबसे पहले उत्तर-पश्चिम से।
दो शाखाएँ
अरब सागर शाखा पश्चिमी घाट से टकराती है और फिर गुजरात-राजस्थान पहुँचती है। बंगाल की खाड़ी शाखा उत्तर-पूर्व की पहाड़ियों से टकराकर हिमालय के साथ पश्चिम की ओर गंगा के मैदान में मुड़ती है।
भारत की चार ऋतुएँ
| ऋतु | महीने | क्या होता है |
|---|---|---|
| शीत ऋतु | दिस.–फ़र. | ज़मीन से समुद्र की ओर सूखी हवा। उत्तर भारत 10–15 °C, पाला और कोहरा। भूमध्य सागर से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ पंजाब में हल्की बारिश और हिमालय में बर्फ़ लाते हैं (गेहूँ के लिए अच्छा)। तमिलनाडु तट पर तब भी वर्षा। |
| ग्रीष्म ऋतु | मार्च–मई | उत्तर-पश्चिम में 40 °C से ऊपर। गर्म सूखी हवा लू। स्थानीय तूफ़ान: केरल-कर्नाटक में आम्र वर्षा, पश्चिम बंगाल-असम में काल बैसाखी। |
| दक्षिण-पश्चिम मानसून | जून–सित. | समुद्र से नम हवाएँ; भारत की सालाना वर्षा का लगभग 75%। पश्चिमी घाट और उत्तर-पूर्व में भारी। |
| लौटता मानसून | अक्टू.–नव. | हवाएँ पीछे हटती हैं; साफ़ आसमान और उमस भरी गर्मी (क्वार की उमस)। कोरोमंडल तट पर मुख्य वर्षा; बंगाल की खाड़ी में चक्रवात। |
वर्षा का वितरण
भारत की औसत वार्षिक वर्षा लगभग 125 सेमी है, पर यह बहुत असमान है:
- 200 सेमी से अधिक (बहुत अधिक): पश्चिमी घाट का पवनमुखी ढाल, मेघालय और उत्तर-पूर्व की पहाड़ियाँ, अंडमान-निकोबार। चेरापूँजी के पास मॉसिनराम दुनिया की सबसे गीली जगहों में है।
- 100–200 सेमी: पूर्वी गंगा मैदान, पूर्वी मध्य प्रदेश, ओडिशा, कोंकण-मालाबार पट्टी।
- 50–100 सेमी: पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, भीतरी महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना।
- 50 सेमी से कम (न्यून): पश्चिमी राजस्थान (थार), कच्छ, लद्दाख और दक्कन का वृष्टि छाया भाग।
उत्तर में पूर्व से पश्चिम की ओर और दक्षिण में तट से भीतर की ओर वर्षा घटती है। वृष्टि छाया: पश्चिमी घाट के पीछे (जैसे पुणे) सामने (जैसे मुंबई) से बहुत कम वर्षा होती है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में वर्षा सबसे ज़्यादा परिवर्तनशील भी होती है, इसलिए वहाँ सूखा बार-बार पड़ता है।
मानसून और भारत का आर्थिक जीवन
- खेती: भारत की आधी से ज़्यादा खेती की ज़मीन पर नहर या नलकूप नहीं है, वह वर्षा पर निर्भर है। खरीफ़ फ़सलें (धान, कपास, सोयाबीन, दालें) मानसून के साथ बोई जाती हैं।
- असमान और अनिश्चित वर्षा: देर से आना, लंबा विराम या जल्दी लौटना सूखा लाता है; कम समय में बहुत बारिश बाढ़ लाती है। दोनों से फ़सल को नुक़सान।
- दाम और रोज़गार: कमज़ोर मानसून से उपज घटती है, भोजन महँगा होता है और गाँवों में काम व ख़र्च घटता है।
- पानी और बिजली: नदियाँ, जलाशय और भूजल मानसून से भरते हैं; जलविद्युत इन्हीं पर निर्भर है।
- संस्कृति: ओणम, बैसाखी, पोंगल जैसे त्योहार ऋतुओं से बने खेती के कैलेंडर के साथ चलते हैं।
वैश्विक तापन और भारत
ग्रीनहाउस गैसें (कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, जलवाष्प) धूप को अंदर आने देती हैं पर बाहर जाती गर्मी का कुछ भाग रोक लेती हैं, कंबल की तरह। यह प्राकृतिक है और धरती को रहने लायक गर्म रखता है। पर कोयला, तेल, गैस जलाने और जंगल काटने से अतिरिक्त CO₂ बढ़ी है, इसलिए 1850 से धरती लगभग 1.1–1.2 °C गर्म हो चुकी है। यही वैश्विक तापन है।
भारत पर असर: तेज़ लू, हिमालय के हिमनदों का सिकुड़ना (गंगा जैसी नदियाँ इन पर निर्भर), समुद्र-तल बढ़ने से तटीय शहरों और सुंदरबन को ख़तरा, और मानसून में बारिश के दिन कम पर तेज़ बौछारें ज़्यादा, जिससे बाढ़ और सूखा दोनों बढ़ते हैं। उपाय: स्वच्छ ऊर्जा (सौर, पवन), बिजली बचाना, सार्वजनिक परिवहन, पेड़ लगाना और जंगल बचाना।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मानसून = ऋतु के साथ हवाओं का उलटना: गर्मी में समुद्र → ज़मीन (नम), सर्दी में ज़मीन → समुद्र (सूखी)
- पवनमुखी ढाल = वर्षा; पवनविमुखी ढाल = वृष्टि छाया
- ऋतुएँ: शीत (दिस.–फ़र.) → ग्रीष्म (मार्च–मई) → द.-प. मानसून (जून–सित.) → लौटता मानसून (अक्टू.–नव.)
- हर 1,000 मी ऊँचाई पर तापमान लगभग 6.5 °C घटता है
- भारत की औसत वर्षा ≈ 125 सेमी; इसका ≈ 75% दक्षिण-पश्चिम मानसून से
- एल नीनो (गर्म प्रशांत महासागर) → अक्सर कमज़ोर भारतीय मानसून
हल किए गए उदाहरण
1. मुंबई और पुणे दोनों महाराष्ट्र में हैं, पर मुंबई में लगभग 240 सेमी और पुणे में लगभग 70 सेमी वर्षा होती है। क्यों?
मुंबई पश्चिमी घाट के पवनमुखी ढाल पर है, जहाँ नम हवा ऊपर उठकर बरसती है। पुणे घाट के पीछे पवनविमुखी ढाल पर है; हवा अपनी नमी पहले ही छोड़ चुकी होती है और नीचे उतरती है, इसलिए पुणे वृष्टि छाया में है।
2. चेन्नई में ज़्यादातर वर्षा जुलाई में नहीं, अक्टूबर–नवंबर में होती है। समझाइए।
जुलाई में दक्षिण-पश्चिमी हवा कोरोमंडल तट के समानांतर बहती है और तमिलनाडु पश्चिमी घाट की वृष्टि छाया में रहता है। अक्टूबर–नवंबर में लौटती मानसूनी हवा उत्तर-पूर्व से बंगाल की खाड़ी पार करके नमी लेती है और तमिलनाडु तट पर बरसती है; चक्रवात और वर्षा जोड़ते हैं।
3. पहाड़ की तलहटी में तापमान 32 °C है। 2,000 मी ऊँचे हिल स्टेशन पर लगभग कितना होगा?
हर 1,000 मी पर लगभग 6.5 °C घटता है। कमी = 2 × 6.5 = 13 °C। तापमान ≈ 32 − 13 = 19 °C।
4. दिल्ली की जलवायु 'विषम' और मुंबई की 'सम' क्यों कहलाती है?
मुंबई समुद्र के पास है, जो धीरे गर्म-ठंडा होकर हवा को मध्यम रखता है; गर्मी-सर्दी का अंतर कम है। दिल्ली समुद्र से दूर है, इसलिए गर्मी में 45 °C से ऊपर और सर्दी की रातें 5 °C के पास।
5. भारत की वार्षिक वर्षा 125 सेमी है और 75% दक्षिण-पश्चिम मानसून से आती है। जून–सितंबर में कितनी वर्षा होती है?
125 सेमी का 75% = 0.75 × 125 = 93.75 सेमी, लगभग 94 सेमी।
6. एल नीनो वाले साल मानसून सामान्य से 15% कम रहा। विदर्भ के किसान परिवार पर क्या असर हो सकता है?
कम वर्षा → खरीफ़ कपास और सोयाबीन सूखे → उपज और आय कम → कर्ज़ चुकाना मुश्किल → भोजन और चारा महँगा → परिवार काम के लिए पलायन कर सकता है। इसीलिए मानसून को भारत का असली वित्त मंत्री कहते हैं।
आम गलतियाँ
- मानसून को केवल 'बरसात का मौसम' कहना। यह दिशा बदलने वाली पवन व्यवस्था है; वर्षा उसका परिणाम है।
- यह मानना कि दक्षिण-पश्चिम मानसून तमिलनाडु में भारी वर्षा करता है। गर्मी में तमिलनाडु वृष्टि छाया में रहता है; ज़्यादा वर्षा लौटते (उत्तर-पूर्वी) मानसून से होती है।
- पवनमुखी और पवनविमुखी में उलझना। पवनमुखी हवा की ओर है और वर्षा पाता है; पवनविमुखी पहाड़ के पीछे सूखा रहता है।
- यह सोचना कि वैश्विक तापन से हर जगह ज़्यादा बारिश होगी। यह वर्षा को ज़्यादा असमान बनाता है: तेज़ बौछारें, लंबे सूखे।