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सौर विकिरण, ऊष्मा संतुलन एवं तापमान

पृथ्वी को सूर्य से छोटी तरंगों के रूप में ऊर्जा मिलती है; इसे सूर्यातप कहते हैं। जहाँ किरणें सीधी पड़ती हैं (विषुवत के पास) वहाँ यह सबसे ज़्यादा और तिरछी किरणों वाले ध्रुवों पर सबसे कम है। हवा नीचे से गरम होती है: पहले ज़मीन गरम होती है, फिर चालन, संवहन, अभिवहन और पार्थिव विकिरण (लंबी तरंगें) से हवा गरम होती है। 100 इकाई धूप में 35 लौट जाती हैं (एल्बिडो), 14 हवा और 51 ज़मीन सोखती है; सोखी हुई सारी 65 इकाई फिर अंतरिक्ष में लौटती हैं — यही ऊष्मा बजट है। तापमान विषुवत से ध्रुवों की ओर और ऊँचाई के साथ घटता है; स्थल-जल और समुद्री धाराएँ इसे बदलती हैं। कभी ठंडी हवा नीचे और गरम ऊपर होती है — यह तापमान व्युत्क्रमण है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. धरती तक पहुँचने वाली धूप को सूर्यातप कहते हैं। सीधी किरणें (विषुवत पर) छोटे टुकड़े को ज़्यादा गरम करती हैं; तिरछी किरणें (ध्रुवों के पास) बड़े टुकड़े पर फैलकर कम गरम करती हैं।
  2. नीचे आते समय कुछ धूप हवा, धूल और बादलों से बिखरती और लौटती है। बाकी ज़मीन तक पहुँचकर उसे गरम करती है।
  3. गरम ज़मीन हवा को नीचे से गरम करती है: छूकर (चालन), गरम हवा ऊपर उठकर (संवहन), हवा के साथ बगल में (अभिवहन), और लंबी तरंगों की गर्मी छोड़कर (पार्थिव विकिरण)।
  4. ऊष्मा बजट: 100 इकाई धूप लीजिए। 35 सीधे अंतरिक्ष में लौटती हैं। 65 सोखी जाती हैं, और बाद में सारी 65 गर्मी बनकर बाहर जाती हैं। आय = व्यय, इसलिए धरती लगातार गरम नहीं होती।
  5. तापमान अक्षांश (गरम विषुवत, ठंडे ध्रुव), ऊँचाई (ऊपर ठंडा), स्थल-जल और समुद्री धाराओं से बदलता है। बराबर तापमान वाली रेखाएँ समताप रेखाएँ हैं।
  6. करके देखें: साफ़, शांत सर्द रात में ज़मीन जल्दी ठंडी होती है। ठंडी हवा नीचे बैठती है और गरम हवा ऊपर। यह उलटी परत तापमान व्युत्क्रमण है। दिन और रात बदलकर देखिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

सूर्य ऊर्जा देता है, तो पहाड़ की चोटी ठंडी क्यों?

हवा नीचे से ज़मीन की लंबी तरंगों वाली गर्मी से गरम होती है। ऊपर आप उस "हीटर" से दूर हैं और हवा पतली है, इसलिए कम गर्मी रुकती है।

विषुवत को ध्रुवों से ज़्यादा गर्मी क्यों मिलती है?

विषुवत पर किरणें लगभग सीधी छोटे क्षेत्र पर पड़ती हैं। ध्रुवों पर वही किरण तिरछी होकर बड़े क्षेत्र पर फैलती है और ज़्यादा हवा पार करती है।

क्या धरती सूर्य के सबसे पास होने पर सबसे गरम होती है?

नहीं। धरती 3 जनवरी के आसपास सबसे पास होती है, जब भारत में सर्दी होती है। ऋतुएँ अक्ष के झुकाव से हैं।

धूप लगातार मिलती है, फिर धरती गरम होती क्यों नहीं जाती?

जितनी सोखती है, उतनी ही बाहर भेजती है: 65 अंदर, 65 बाहर। यही ऊष्मा बजट है।

मुंबई जैसे तटीय शहर दिल्ली से कम अति वाले क्यों हैं?

पानी धीरे गरम-ठंडा होता है, इसलिए समुद्र पास के स्थल को सम रखता है। दिल्ली समुद्र से दूर है।

दिल्ली की सर्द सुबह का स्मॉग ऊपर क्यों नहीं जाता?

ज़मीन के पास ठंडी हवा गरम हवा के नीचे बैठी है (व्युत्क्रमण)। ठंडी हवा भारी है, ऊपर नहीं उठती, इसलिए धुआँ फँस जाता है।

सूर्यातप: धरती को मिलने वाली धूप

सूर्यातप (आने वाला सौर विकिरण) सूर्य की वह ऊर्जा है जो पृथ्वी तक पहुँचती है। यह छोटी तरंगों में आती है। धरती को सूर्य की ऊर्जा का बहुत छोटा भाग मिलता है, फिर भी सारा मौसम और जीवन इसी से चलता है।

सूर्यातप की मात्रा किन बातों से बदलती है?

पृथ्वी लगभग 3 जनवरी को सूर्य के सबसे पास (उपसौर) और 4 जुलाई को सबसे दूर (अपसौर) होती है, पर इससे बहुत कम फ़र्क पड़ता है। सूर्यातप उपोष्ण मरुस्थलों पर सबसे ज़्यादा (कम बादल) और ध्रुवों पर सबसे कम है।

वायुमंडल से गुज़रते हुए

हवा छोटी तरंगों के लिए लगभग पारदर्शी है। छोटे कण नीली रोशनी ज़्यादा बिखेरते हैं, इसलिए आसमान नीला दिखता है। सूर्योदय-सूर्यास्त पर रोशनी ज़्यादा हवा पार करती है, आसमान लाल हो जाता है।

वायुमंडल का तापन और शीतलन

रात को ज़मीन गर्मी खोकर पास की हवा को ठंडा करती है। इसलिए रातें ठंडी होती हैं, और साफ़ रातें बादल वाली रातों से ज़्यादा ठंडी।

पार्थिव विकिरण

गरम पृथ्वी लंबी तरंगों में गर्मी छोड़ती है। इसे पार्थिव विकिरण कहते हैं। हवा छोटी तरंगों को जाने देती है पर लंबी तरंगें सोख लेती है, खासकर कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प (ग्रीनहाउस गैसें)। इसलिए हवा अप्रत्यक्ष रूप से, नीचे से, धरती द्वारा गरम होती है — सूर्य से सीधे नहीं। इसी कारण ऊपर ठंड होती है।

पृथ्वी का ऊष्मा बजट

मान लीजिए वायुमंडल के ऊपर 100 इकाई धूप पहुँची:

सतह अपनी 51 इकाई पार्थिव विकिरण से लौटाती है: 17 सीधे अंतरिक्ष में, 34 हवा सोखती है (6 सीधे, 9 संवहन से, 19 संघनन की गुप्त ऊष्मा से)। अब हवा के पास 14 + 34 = 48 इकाई हैं, जो वह अंतरिक्ष में भेज देती है। बाहर: 17 + 48 = 65 = अंदर (65)। इसलिए औसत तापमान वही रहता है।

कुछ जगहों पर अतिरिक्त गर्मी क्यों?

लगभग 40° उ. और 40° द. के बीच धरती जितनी गर्मी खोती है उससे ज़्यादा पाती है (अधिशेष)। ध्रुवों के पास ज़्यादा खोती है (कमी)। पवनें और समुद्री धाराएँ अतिरिक्त गर्मी ध्रुवों की ओर ले जाती हैं।

तापमान का वितरण

किसी जगह का तापमान इन बातों से तय होता है:

  1. अक्षांश: विषुवत से ध्रुवों की ओर तापमान घटता है।
  2. ऊँचाई: हर 1,000 m पर लगभग 6.5 °C घटता है (सामान्य ह्रास दर)।
  3. समुद्र से दूरी: समुद्र तटों को सम रखता है; अंदरूनी जगहों पर गर्मी बहुत तेज़ और सर्दी बहुत ठंडी (महाद्वीपीयता)।
  4. वायुराशियाँ और समुद्री धाराएँ: गरम धारा तट को गरम, ठंडी धारा ठंडा करती है।
  5. स्थानीय बातें जैसे ढलान और छाया।

समताप रेखाएँ बराबर तापमान वाली जगहों को मिलाती हैं। ये मोटे तौर पर पूरब-पश्चिम चलती हैं, पर स्थल और जल पर मुड़ती हैं। जनवरी में उत्तरी महाद्वीपों पर विषुवत की ओर (स्थल ठंडा) और महासागरों पर ध्रुव की ओर मुड़ती हैं; जुलाई में उलटा। वार्षिक तापांतर विषुवत के पास कम और बड़े महाद्वीपों के भीतर बहुत ज़्यादा होता है।

तापमान का व्युत्क्रमण

सामान्यतः ऊपर जाने पर हवा ठंडी होती है। व्युत्क्रमण में उलटा होता है: ज़मीन के पास ठंडी हवा और उसके ऊपर गरम हवा।

अनुकूल दशाएँ: सर्दी की लंबी रातें, साफ़ आसमान, शांत और सूखी हवा, बर्फ़ से ढकी ज़मीन। ज़मीन जल्दी ठंडी होकर पास की हवा को ठंडा करती है।

वायु अपवाह: पहाड़ों में रात को ठंडी भारी हवा ढलानों से नीचे खिसककर घाटी में जमा होती है। घाटी के तल में पाला पड़ता है जबकि ढलान गरम रहते हैं। प्रभाव: कोहरा, नीचे फँसा धुआँ (स्मॉग), फ़सलों को पाला, उड़ानों के लिए कम दृश्यता।

घर पर करके देखें

दो एक जैसे पानी के कप धूप में रखिए: एक सफ़ेद कागज़ पर, एक काले कागज़ पर। 30 मिनट बाद छूकर देखिए। काला ज़्यादा सोखता है (कम एल्बिडो), सफ़ेद ज़्यादा लौटाता है (ज़्यादा एल्बिडो)। अब टॉर्च को कागज़ पर सीधा, फिर तिरछा चमकाइए: तिरछा धब्बा बड़ा और मद्धम है — ठीक ध्रुवों के सूर्यातप जैसा।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. दोपहर की धूप शाम की धूप से ज़्यादा गरम क्यों लगती है?

दोपहर को किरणें लगभग सीधी पड़ती हैं: वही ऊर्जा छोटे क्षेत्र पर और कम हवा पार करके आती है। शाम को तिरछी किरणें बड़े क्षेत्र पर फैलती हैं और मोटी हवा में ज़्यादा ऊर्जा खोती हैं।

2. 100 इकाई में से 35 लौटीं और 14 हवा ने सोखीं। ज़मीन को कितनी मिलीं?

100 − 35 − 14 = 51 इकाई।

3. ज़मीन 51 इकाई छोड़ती है; 17 अंतरिक्ष में चली जाती हैं। हवा कितनी सोखती है? हवा कुल कितनी अंतरिक्ष में भेजती है?

सोखी = 51 − 17 = 34। हवा का कुल = 14 + 34 = 48 इकाई, सब अंतरिक्ष में।

4. समुद्र तल पर एक कस्बा 28 °C है। 2,200 m ऊँचे हिल स्टेशन पर उसी दिन 12 °C है। क्या यह सामान्य ह्रास दर से मेल खाता है?

अपेक्षित कमी = 6.5 × 2.2 = 14.3 °C, यानी ≈ 13.7 °C। असली 12 °C पास ही है; ढलान, हवा और छाया से थोड़ा अंतर आता है।

5. उपोष्ण मरुस्थल विषुवत से ज़्यादा गरम क्यों होते हैं?

विषुवत पर घने बादल और भारी बारिश धूप रोकते हैं। मरुस्थलों में आसमान साफ़ रहता है, इसलिए ज़्यादा सूर्यातप ज़मीन तक पहुँचता है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. सूर्यातप मुख्य रूप से किस रूप में आता है?
2. बिना गरम किए लौटने वाली धूप का हिस्सा कहलाता है:
3. उत्तर भारत की लू किसका उदाहरण है?
4. बराबर तापमान वाली जगहों को मिलाने वाली रेखाएँ:
5. तापमान व्युत्क्रमण सबसे ज़्यादा कब होता है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पृथ्वी का ऊष्मा बजट क्या है?

सूर्य से मिली गर्मी और अंतरिक्ष में लौटाई गर्मी का संतुलन। 100 में से 35 लौटती और 65 सोखी जाती हैं; बाद में सारी 65 लौटती हैं, इसलिए आय = व्यय।

सूर्यातप और पार्थिव विकिरण में क्या अंतर है?

सूर्यातप सूर्य से आने वाली छोटी तरंगों की ऊर्जा है। पार्थिव विकिरण धरती से जाने वाली लंबी तरंगों की गर्मी है, जो हवा को गरम करती है।

तापमान व्युत्क्रमण क्या है?

जब ज़मीन के पास ऊँचाई के साथ तापमान बढ़ता है; आमतौर पर साफ़, शांत, लंबी सर्द रातों या घाटियों में।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 11जलवायु
चीन高一Comp.1 Ch.1 Earth in the universe

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