जलीय चक्र
जलीय चक्र धरती पर, ऊपर और नीचे पानी की लगातार चलने वाली गति है। कुल पानी लगभग उतना ही रहता है; बस जगह और रूप (पानी, बर्फ़, वाष्प) बदलता है।
- महासागरों-झीलों से वाष्पीकरण और पौधों से वाष्पोत्सर्जन वाष्प को हवा में भेजते हैं।
- संघनन से बादल बनते हैं।
- वर्षण बारिश या हिम के रूप में पानी नीचे लाता है।
- अपवाह (नदियाँ), अंतःस्यंदन और भूजल प्रवाह उसे समुद्र तक लौटाते हैं।
धरती का लगभग 97% पानी महासागरों में, ~2% हिम चादरों-हिमनदों में, और 1% से कम नदियों, झीलों, मिट्टी और भूजल में मीठा पानी है। इसलिए पानी बचाना ज़रूरी है।
महासागरीय अधस्तल का उच्चावच
महाद्वीप महासागरों को प्रशांत, अटलांटिक, हिंद, दक्षिणी और आर्कटिक में बाँटते हैं। तल के चार मुख्य भाग:
- महाद्वीपीय मग्नतट: समुद्र के नीचे महाद्वीप का हल्का ढलान वाला उथला किनारा, आमतौर पर ~200 m तक। चौड़ाई लगभग शून्य से 100 km से ज़्यादा। मछलियों से भरपूर; यहाँ के अवसाद से तेल-गैस बनते हैं।
- महाद्वीपीय ढाल: मग्नतट के किनारे से 2–3 km गहराई तक खड़ी ढलान। इसमें कैनियन कटी होती हैं।
- गहरे समुद्री मैदान: 3–6 km गहराई पर चौड़ा, बहुत सपाट तल, बारीक कीचड़ से ढका।
- महासागरीय गर्त (खाइयाँ): सबसे गहरे, लंबे-संकरे भाग, आसपास से 3–5 km और गहरे, प्लेट सीमाओं के पास जहाँ ज्वालामुखी और भूकंप होते हैं। प्रशांत की मारियाना खाई लगभग 11 km गहरी है।
लघु उच्चावच
- मध्य-महासागरीय कटक: पानी के नीचे पर्वतों की लंबी शृंखला जहाँ प्लेटें दूर जाती हैं; चोटियाँ द्वीप बनकर ऊपर आ सकती हैं (जैसे आइसलैंड)।
- समुद्री टीला: नुकीली चोटी वाला अकेला पानी के नीचे ज्वालामुखी, जो सतह तक नहीं पहुँचता।
- निमग्न द्वीप (गुयॉट): सपाट चोटी वाला समुद्री टीला (लहरों ने कभी चोटी काट दी)।
- अंतःसागरीय कैनियन: मग्नतट और ढाल में कटी गहरी घाटियाँ, अक्सर नदी मुहानों पर।
- एटॉल (प्रवाल वलय): गरम समुद्रों में लैगून को घेरे छल्ले जैसा प्रवाल द्वीप (लक्षद्वीप में हैं)।
- बैंक और शोल: मग्नतट के उठे, उथले भाग — अच्छे मछली क्षेत्र।
महासागरीय जल का तापमान
समुद्र सूर्य से गरम होता है, ज़्यादातर सतह पर। पानी धीरे गरम-ठंडा होता है, इसलिए समुद्र का तापमान स्थल से कम बदलता है।
कारक
- अक्षांश: सतह का तापमान विषुवत से ध्रुवों की ओर घटता है।
- स्थल-जल का असमान बँटवारा: उत्तरी महासागर ज़्यादा स्थल छूते हैं, इसलिए दक्षिणी से थोड़े गरम।
- प्रचलित पवनें: तट से दूर जाती पवनें गरम सतही पानी हटाती हैं और ठंडा पानी ऊपर आता है (उत्प्रवाह); तट की ओर पवनें गरम पानी जमा करती हैं।
- समुद्री धाराएँ: गरम धाराएँ तापमान बढ़ाती, ठंडी घटाती हैं।
ऊर्ध्वाधर वितरण (तीन परतें)
- ऊपरी परत (~0–500 m): गरम, उष्ण कटिबंध में 20–25 °C; अच्छी तरह मिली।
- ताप प्रवणता परत (थर्मोक्लाइन) (~500–1,000 m): गहराई के साथ तापमान तेज़ी से गिरता है।
- गहरी परत: बहुत ठंडी, 0–4 °C के पास, तल तक।
ध्रुवों के पास सतह पहले से ठंडी है, इसलिए केवल एक ठंडी परत। विषुवत के पास औसत सतही तापमान ~27 °C है और हर अक्षांश दूर जाने पर लगभग 0.5 °C घटता है।
क्षैतिज वितरण
सबसे ज़्यादा सतही तापमान उष्ण कटिबंध में, ठीक विषुवत पर नहीं; गरम क्षेत्रों के बंद समुद्र, जैसे लाल सागर और फ़ारस की खाड़ी, खुले महासागर से गरम हैं।
महासागरीय जल की लवणता
लवणता समुद्री पानी में घुले कुल नमक की मात्रा है, प्रति हज़ार भाग (‰) में: 1,000 ग्राम पानी में नमक के ग्राम। औसत लगभग 35‰। सबसे बड़ा भाग साधारण नमक (सोडियम क्लोराइड) का। बराबर लवणता वाली जगहों को मिलाने वाली रेखा समलवण रेखा है।
लवणता को प्रभावित करने वाले कारक
- वाष्पीकरण: ज़्यादा वाष्पीकरण → ज़्यादा लवणता (गरम, सूखे क्षेत्र)।
- मीठा पानी: बारिश, नदी का पानी, पिघलती बर्फ़ → कम लवणता।
- पवन पानी को हिलाती और मिलाती है।
- समुद्री धाराएँ खारा या कम खारा पानी दूसरी जगह ले जाती हैं।
वितरण
- खुले महासागर: 33–37‰। सबसे ज़्यादा उपोष्ण क्षेत्रों (~20°–30°: गरम, सूखा, तेज़ वाष्पीकरण) में; विषुवत (भारी बारिश) और ध्रुवों (पिघलती बर्फ़) के पास कम।
- गरम सूखे क्षेत्रों के बंद समुद्र बहुत खारे: लाल सागर ~41‰; मृत सागर (खारी झील) ~238‰; तुर्की की वान झील ~330‰।
- बहुत नदियों या बर्फ़ पिघलने वाले समुद्र कम खारे: बाल्टिक सागर और बंगाल की खाड़ी (गंगा–ब्रह्मपुत्र)।
- अरब सागर बंगाल की खाड़ी से ज़्यादा खारा (ज़्यादा वाष्पीकरण, कम नदी जल)।
- गहराई के साथ: लवण प्रवणता परत (हैलोक्लाइन) में लवणता तेज़ी से बदलती है; खारा पानी भारी होकर नीचे बैठता है।
घर पर करके देखें
1 लीटर पानी में 35 g नमक (लगभग 7 चम्मच) घोलिए: यही औसत समुद्री पानी है। इसे चौड़ी थाली में डालकर कुछ दिन धूप में रखिए। पानी उड़ने पर बचा नमक दिखाता है कि वाष्पीकरण लवणता बढ़ाता है। एक अंडा सादे पानी में (डूबेगा) और बहुत खारे पानी में (तैरेगा) डालिए: खारा पानी ज़्यादा घना है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- जलीय चक्र: वाष्पीकरण → संघनन → वर्षण → अपवाह/अंतःस्यंदन → समुद्र
- पानी का बँटवारा: महासागर ~97%, बर्फ़ ~2%, बाकी मीठा पानी < 1%
- तल तट से: मग्नतट (~200 m तक) → ढाल → गहरा मैदान (3–6 km) → गर्त (मारियाना ~11 km)
- महासागर की परतें: गरम ऊपरी (~0–500 m) → ताप प्रवणता (~500–1,000 m) → ठंडी गहरी (0–4 °C)
- लवणता (‰) = 1,000 g समुद्री पानी में नमक के ग्राम; औसत ≈ 35‰
- लवणता ↑ वाष्पीकरण से; ↓ बारिश, नदियों, पिघलती बर्फ़ से
हल किए गए उदाहरण
1. 2 kg समुद्री पानी सुखाने पर 70 g नमक बचता है। लवणता निकालिए।
2 kg = 2,000 g। लवणता = 70 ÷ 2,000 × 1,000 = 35‰।
2. 41‰ वाले लाल सागर के 10 kg पानी में कितना नमक है?
नमक = 41 × 10,000 ÷ 1,000 = 410 g।
3. बंगाल की खाड़ी अरब सागर से कम खारी क्यों है?
गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी बड़ी नदियाँ खाड़ी में बहुत मीठा पानी डालती हैं, और वहाँ भारी बारिश होती है। अरब सागर में कम मीठा पानी और ज़्यादा वाष्पीकरण है।
4. 25° उ. पर लवणता विषुवत से ज़्यादा क्यों है, जबकि विषुवत ज़्यादा गरम है?
विषुवत पर लगभग रोज़ बारिश मीठा पानी जोड़ती है। 25° के पास हवा सूखी और आसमान साफ़ है (उपोष्ण उच्च दाब), इसलिए वाष्पीकरण तेज़ और बारिश कम।
5. समुद्री टीला और गुयॉट दोनों तल से उठते हैं। इन्हें कैसे पहचानें?
समुद्री टीले की चोटी नुकीली होती है। गुयॉट की चोटी सपाट होती है, क्योंकि डूबने से पहले सतह के पास लहरों ने उसे काट दिया था।
आम गलतियाँ
- सोचना कि महासागर बीच में सबसे गहरा है। खाइयाँ ज़्यादातर महाद्वीपों और द्वीप चापों के पास, प्लेट सीमाओं पर हैं।
- कहना कि लवणता विषुवत पर सबसे ज़्यादा है। यह उपोष्ण क्षेत्रों में सबसे ज़्यादा है; विषुवत पर भारी बारिश होती है।
- लवणता को प्रतिशत में लिखना। यह प्रति हज़ार (‰) है: 35‰ = 3.5%।
- सोचना कि उष्ण कटिबंध में गहरा पानी गरम है। थर्मोक्लाइन के नीचे हर जगह ठंडा है।