वायुमंडल का संघटन
वायुमंडल पृथ्वी के चारों ओर गुरुत्व से टिकी हवा की परत है। यह गैसों का मिश्रण है:
- नाइट्रोजन लगभग 78%: पौधों को चाहिए (मिट्टी के जीवाणुओं के ज़रिए)।
- ऑक्सीजन लगभग 21%: हम और जीव साँस में लेते हैं।
- आर्गन लगभग 0.9%, कार्बन डाइऑक्साइड लगभग 0.04%: CO₂ कम है पर पौधों को चाहिए और यह गर्मी रोकती है।
- जलवाष्प, धूल और बारीक कण: ये बादल और वर्षा बनने में मदद करते हैं।
संरचना: पाँच परतें
| परत | ऊँचाई (लगभग) | मुख्य बात |
|---|---|---|
| क्षोभमंडल | 0 – 8 से 18 km (औसत 13 km) | सारा मौसम: बादल, वर्षा, तूफ़ान। ऊपर जाने पर ठंडा। |
| समतापमंडल | ~50 km तक | ओज़ोन परत UV किरणें रोकती है। शांत हवा, जेट विमानों के लिए अच्छी। |
| मध्यमंडल | ~80 km तक | उल्काएँ यहाँ जल जाती हैं। |
| तापमंडल | ~400 km+ तक | आयनमंडल रेडियो तरंगें लौटाता है; ध्रुवीय ज्योति चमकती है। |
| बहिर्मंडल | सबसे ऊपर | बहुत पतली हवा जो अंतरिक्ष में घुल जाती है। |
मौसम के तत्व
मौसम = किसी जगह और समय पर हवा का हाल। इसके तत्व हैं:
- तापमान: कितना गरम या ठंडा (थर्मामीटर, °C)।
- वायुदाब: नीचे दबाती हवा का भार (बैरोमीटर)। गरम हवा उठती है → निम्न दाब।
- हवा (पवन): उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती हवा (दिशा के लिए पवन सूचक)।
- आर्द्रता: हवा में जलवाष्प (हाइग्रोमीटर)।
- बादल और वर्षण: वर्षा, हिम, ओले (वर्षामापी)।
जलवायु किसी जगह के 30 या ज़्यादा सालों के मौसम का औसत है। उदाहरण: "आज मुंबई में बारिश हो रही है" मौसम है; "मुंबई में हर जून–सितंबर भारी बारिश होती है" जलवायु है।
भारत की ऋतुएँ और मानसून
मानसून शब्द अरबी भाषा के "मौसिम" (ऋतु) से आया है। मानसूनी हवाएँ ऋतु के साथ दिशा बदलती हैं।
- शीत ऋतु (दिसं–फ़र): ठंडी सूखी हवाएँ ज़मीन से समुद्र की ओर।
- ग्रीष्म ऋतु (मार्च–मई): ज़मीन गरम; उत्तर में लू; धूल भरी आँधियाँ।
- वर्षा ऋतु / दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून–सितं): ज़मीन गरम, निम्न दाब; समुद्र से नम हवाएँ वर्षा लाती हैं। पश्चिमी घाट और उत्तर-पूर्व की पहाड़ियों में सबसे ज़्यादा।
- लौटता मानसून (अक्टू–नवं): हवाएँ वापस मुड़ती हैं; तमिलनाडु तट पर वर्षा; चक्रवात बन सकते हैं।
भारत में छह पारंपरिक ऋतुएँ भी मानी जाती हैं: वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर।
जलवायु परिवर्तन, बाढ़ और कार्बन फ़ुटप्रिंट
CO₂ और मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसें धूप को अंदर आने देती हैं पर कुछ गर्मी रोक लेती हैं, जैसे ग्रीनहाउस का काँच। इससे धरती रहने लायक गरम रहती है। पर कोयला, पेट्रोल और जंगल जलाने से अतिरिक्त CO₂ बढ़ती है, तो धरती गरम हो रही है। यही जलवायु परिवर्तन है।
प्रभाव: हिमनद पिघलते हैं, समुद्र का स्तर बढ़ता है, लू तेज़ होती है, और बारिश कम समय में बहुत भारी होती है, जिससे बाढ़ आती है (नालियाँ बंद होने और ज़मीन पक्की होने से शहर भी डूबते हैं)।
आपकी गतिविधियों से बनी कुल ग्रीनहाउस गैस आपका कार्बन फ़ुटप्रिंट है। पैदल या साइकिल से चलें, बस-ट्रेन लें, बत्ती बंद करें, खाना बर्बाद न करें और पेड़ लगाएँ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- हवा ≈ 78% नाइट्रोजन + 21% ऑक्सीजन + 1% अन्य (आर्गन, CO₂, …)
- परतें (नीचे → ऊपर): क्षोभमंडल → समतापमंडल → मध्यमंडल → तापमंडल → बहिर्मंडल
- मौसम = अभी हवा का हाल; जलवायु = 30+ सालों का औसत मौसम
- हवा उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है
- कार्बन फ़ुटप्रिंट ≈ Σ (गतिविधि × उत्सर्जन गुणांक), जैसे 1 यूनिट बिजली ≈ 0.7 kg CO₂
हल किए गए उदाहरण
1. हवा के 100 अणुओं में लगभग कितने ऑक्सीजन के हैं?
लगभग 21।
2. "दिल्ली हर साल जनवरी में ठंडी रहती है।" यह मौसम है या जलवायु?
जलवायु, क्योंकि यह कई सालों का सामान्य पैटर्न है।
3. गरमी के दिन हवा समुद्र से ज़मीन की ओर क्यों चलती है?
ज़मीन जल्दी गरम होती है, ऊपर की हवा उठकर निम्न दाब बनाती है। ठंडी समुद्री हवा (उच्च दाब) उसे भरने आती है।
4. एक परिवार रोज़ 6 यूनिट बिजली इस्तेमाल करता है। 0.7 kg CO₂ प्रति यूनिट से बिजली का रोज़ का फ़ुटप्रिंट कितना?
6 × 0.7 = 4.2 kg CO₂ प्रतिदिन।
5. आप रोज़ 20 km कार (0.15 kg/km) से जाते हैं। बस (0.05 kg/km) लें तो रोज़ कितनी CO₂ बचेगी?
कार 20 × 0.15 = 3 kg; बस 20 × 0.05 = 1 kg; बचत = 2 kg प्रतिदिन।
6. क्षोभमंडल में हर 1 km ऊपर तापमान लगभग 6.5 °C घटता है। ज़मीन पर 30 °C हो तो 4 km ऊपर कितना?
30 − 4 × 6.5 = 30 − 26 = 4 °C।
आम गलतियाँ
- मौसम और जलवायु को एक शब्द मानना। मौसम थोड़े समय का है; जलवायु लंबे समय का औसत।
- सोचना कि ओज़ोन क्षोभमंडल में है जहाँ हम साँस लेते हैं। बचाने वाली ओज़ोन परत समतापमंडल में है।
- कहना कि हवा निम्न से उच्च दाब की ओर चलती है। यह हमेशा उच्च से निम्न की ओर चलती है।
- सोचना कि CO₂ हर मात्रा में बुरी है। पौधों और गर्मी के लिए कुछ ज़रूरी है; समस्या हमारी जोड़ी अतिरिक्त मात्रा है।