Poland Szkoła podstawowa, klasa VII Geography
अध्याय: 5
1. IX. Natural environment of Poland in the context of Europe
Location and coordinates of Poland · Relief and climate · Baltic Sea and rivers · Soils, forests and protected nature · Mineral resources
- मौसम और जलवायु: वायुमंडल से मानसून तक – वायुमंडल पृथ्वी के चारों ओर हवा का कंबल है: 78% नाइट्रोजन, 21% ऑक्सीजन और 1% अन्य गैसें। इसकी पाँच परतें हैं; सारा मौसम सबसे नीचे क्षोभमंडल में बनता है। मौसम किसी एक दिन की हवा का हाल है: तापमान, दाब, हवा, आर्द्रता, बादल और वर्षा। जलवायु 30 या ज़्यादा सालों के मौसम का औसत है। भारत में चार ऋतुएँ हैं और ज़्यादातर वर्षा मानसूनी हवाएँ लाती हैं। ईंधन जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ती है, जो धरती को गरम करती है और बाढ़ व लू बढ़ाती है। हमारी ज़िंदगी से कितनी यह गैस बनती है, वह हमारा कार्बन फ़ुटप्रिंट है।
- नदियाँ और झीलें – ज़मीन पर गिरा बारिश का पानी ढलान पर नीचे बहकर धाराएँ बनाता है। छोटी नदियाँ (सहायक नदियाँ) मुख्य नदी में मिलती हैं; सब मिलकर नदी तंत्र बनाती हैं। जितनी ज़मीन का पानी एक नदी में जाता है, वह उसका बेसिन है, और दो बेसिनों के बीच की ऊँची ज़मीन जल विभाजक है। झील ज़मीन के गड्ढे में भरा पानी है; गड्ढा कैसे बना, उससे झील का नाम पड़ता है। पानी ज़मीन में रिसकर भूजल बनता है, जिसकी ऊपरी सतह भौम जलस्तर है। नदी मुहाने पर समुद्र या झील में मिलती है। लगभग बंद समुद्रों में प्रदूषण जमा होता है और ऑक्सीजन घट सकती है।
- मृदा: कैसे बनती है, उसकी परतें और उसे कैसे बचाएँ – मृदा (मिट्टी) ज़मीन की ऊपरी, ढीली और पतली परत है जिसमें पौधे उगते हैं। इसमें लगभग 45% चट्टान के कण, 5% जैविक पदार्थ (ह्यूमस), 25% पानी और 25% हवा होती है। जब अपक्षय जनक चट्टान को तोड़ता है और जीव ह्यूमस जोड़ते हैं, तब बहुत धीरे-धीरे मृदा बनती है। इसके पाँच कारक हैं: जनक चट्टान, जलवायु, जीव, उच्चावच (ढाल) और समय। ज़मीन को काटकर देखें तो परतें दिखती हैं, जिन्हें संस्तर कहते हैं: O (पत्तियाँ और ह्यूमस), A (ऊपरी मृदा), B (अवमृदा), C (टूटी चट्टान) और R (आधार शैल)। मृदा का गठन रेत, गाद और चिकनी मिट्टी के हिस्से पर निर्भर है। मृदा भोजन उगाती है, पानी जमा और साफ़ करती है, कार्बन रखती है और अनगिनत जीवों का घर है, पर अपरदन, लवण और प्रदूषण इसे बनने से कहीं तेज़ी से नष्ट कर सकते हैं।
2. X. Society and economy of Poland in the context of Europe
Population of Poland · Economy, cities and farming · Industry, services and tourism
- विश्व जनसंख्या: वितरण, घनत्व और वृद्धि – धरती पर लोग बराबर नहीं फैले। ज़्यादातर लोग पानी के पास उपजाऊ मैदानों में रहते हैं; मरुस्थल, ऊँचे पर्वत और बर्फ़ीले इलाक़ों में बहुत कम। घनत्व बताता है कि हर वर्ग किमी पर कितने लोग हैं। भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक कारक यह पैटर्न समझाते हैं। हज़ारों साल जनसंख्या धीरे बढ़ी, फिर 1800 के बाद बहुत तेज़ी से। जनसंख्या जन्म, मृत्यु और प्रवास से बदलती है। जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत बताता है कि गाँव की खेती से शहरी उद्योग की ओर बढ़ते समाज में जन्म और मृत्यु दर कैसे गिरती हैं। देश परिवार नियोजन और स्वास्थ्य सेवा से वृद्धि नियंत्रित करते हैं।
- क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन – एक क्षेत्र खेती (प्राथमिक), कारख़ानों (द्वितीयक) और परिवहन-पर्यटन जैसी सेवाओं (तृतीयक) से अपनी रोज़ी कमाता है। प्रकृति (भू-आकृति, मिट्टी, जलवायु, तट) और लोग (शहर, बाज़ार, सड़कें, बंदरगाह) तय करते हैं कि कहाँ क्या बनेगा। उद्योग समय के साथ बदलते हैं, परिवहन केंद्र बड़े शहर बन जाते हैं, और पर्यटन रोज़गार देता है पर उसे जगह की वहन क्षमता से नीचे रहना चाहिए।
- पर्यटन भूगोल: संसाधन, प्रकार, प्रभाव और नियोजन – पर्यटन का अर्थ है घर से दूर कम से कम एक रात के लिए घूमने, व्यापार, इलाज या रिश्तेदारों से मिलने जाना। पर्यटन भूगोल पूछता है कि लोग कहाँ जाते हैं, क्यों, और पर्यटन जगहों पर क्या असर डालता है। जगहें प्राकृतिक संसाधनों (पर्वत, तट, वन्यजीव) और सांस्कृतिक संसाधनों (धरोहर, उत्सव, भोजन) से लोगों को खींचती हैं। लोग घर से धकेले और गंतव्य की ओर खींचे जाते हैं। पर्यटन घरेलू या अंतरराष्ट्रीय होता है, और इसके कई प्रकार हैं: इको, साहसिक, सांस्कृतिक, चिकित्सा और समुद्री। रिसॉर्ट अक्सर खोज से ठहराव और फिर पतन या पुनर्जीवन तक एक जीवन-चक्र से गुज़रते हैं। पर्यटन रोज़गार और पैसा लाता है, पर वहन क्षमता से ज़्यादा पर्यटक प्रकृति और संस्कृति को नुक़सान पहुँचाते हैं, इसलिए अच्छा नियोजन टिकाऊ पर्यटन चाहता है।
3. XI. Links between parts of the geographical environment in selected regions of Poland
Floods and energy · Cities, villages and jobs · Transport and tourism
- प्राकृतिक संकट (Natural Hazards) – प्राकृतिक संकट (hazard) ऐसी प्राकृतिक घटना है जो लोगों और चीज़ों को नुकसान पहुँचा सकती है, जैसे भूकंप, ज्वालामुखी, भूस्खलन, बाढ़, सूखा या चक्रवात। जब यह ऐसे लोगों पर पड़ती है जो तैयार नहीं हैं, तब यह आपदा (disaster) बन जाती है। भूगर्भीय संकट धरती के अंदर से आते हैं, मौसमी संकट हवा और पानी से। जोखिम = संकट × सुभेद्यता ÷ क्षमता, इसलिए चेतावनी, मज़बूत मकान और प्रशिक्षित लोग नुकसान घटाते हैं।
- नगरीकरण: शहर क्यों बढ़ते हैं और उन्हें बेहतर कैसे बनाएँ – नगरीकरण किसी देश या दुनिया के उन लोगों के हिस्से का बढ़ना है जो कस्बों और शहरों में रहते हैं। 1950 में दुनिया के लगभग 30% लोग नगरीय थे; 2007 से आधे से ज़्यादा हैं, और 2050 तक लगभग 68% होने का अनुमान है। शहर ग्रामीण-नगरीय प्रवास (गाँव से धक्का देने वाले और शहर की ओर खींचने वाले कारक) और प्राकृतिक वृद्धि से बढ़ते हैं। आज सबसे तेज़ बढ़त एशिया और अफ़्रीका के कम आय वाले और उभरते देशों में है, जहाँ 1 करोड़ से ज़्यादा के महानगर बन रहे हैं; कई अमीर देशों में बढ़त धीमी है और लोग उपनगरों या गाँवों की ओर भी जाते हैं (उपनगरीकरण और प्रति-नगरीकरण)। तेज़ बढ़त से अवसर (रोज़गार, सेवाएँ) और समस्याएँ (अनौपचारिक बस्तियाँ, ट्रैफ़िक, प्रदूषण, कचरा, बाढ़, नगरीय ऊष्मा द्वीप) आती हैं। टिकाऊ नगरीय विकास इन्हें सार्वजनिक परिवहन, हरी जगहों, साफ़ पानी, पुनर्चक्रण, सस्ते घरों और नवीकरणीय ऊर्जा से सुधारता है।
- क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन – एक क्षेत्र खेती (प्राथमिक), कारख़ानों (द्वितीयक) और परिवहन-पर्यटन जैसी सेवाओं (तृतीयक) से अपनी रोज़ी कमाता है। प्रकृति (भू-आकृति, मिट्टी, जलवायु, तट) और लोग (शहर, बाज़ार, सड़कें, बंदरगाह) तय करते हैं कि कहाँ क्या बनेगा। उद्योग समय के साथ बदलते हैं, परिवहन केंद्र बड़े शहर बन जाते हैं, और पर्यटन रोज़गार देता है पर उसे जगह की वहन क्षमता से नीचे रहना चाहिए।
4. XII. Home region
Studying the home region
- प्रादेशिक भूगोल: हम दुनिया को प्रदेशों में कैसे बाँटते हैं – प्रदेश (region) वह क्षेत्र है जिसमें एक या अधिक लक्षण साझा हों, जो उसे आसपास के क्षेत्रों से अलग बनाएँ। औपचारिक (एकरूप) प्रदेश अंदर से एक जैसे होते हैं, जैसे कोई मैदान या धान पट्टी। क्रियात्मक (नोडल) प्रदेश किसी केंद्र से जुड़ाव से बनते हैं, जैसे शहर और वहाँ आने-जाने वाले गाँव। बोधगम्य प्रदेश लोगों के मन में होते हैं। प्रदेशों के किनारे आम तौर पर संक्रमण क्षेत्र होते हैं, और प्रदेश लोगों, सामान, पानी और विचारों के प्रवाह से एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं।
5. XIII. "Small homeland"
Local area and identity
- स्थान-बोध: खाली स्थान जगह कैसे बनता है – कोई खाली स्थान (space) तब जगह (place) बनता है जब लोग उसे अर्थ देते हैं। हर जगह की एक अवस्थिति (कहाँ है), एक परिवेश या locale (वहाँ जीवन कैसा है) और एक स्थान-बोध (लोग उसके बारे में क्या महसूस करते हैं) होता है। अंदर वाले और बाहर वाले एक ही जगह को अलग ढंग से देखते हैं। जगहें अंतर्जात (अंदरूनी) कारकों जैसे उच्चावच, भूमि उपयोग, जनसंख्या से और बहिर्जात (बाहरी) रिश्तों जैसे लोगों, पैसे, सामान और विचारों के प्रवाह से बनती हैं। जगहें समय के साथ बदलती हैं और जनगणना के आँकड़ों से लेकर गीतों-फ़िल्मों तक कई तरह से दिखाई जाती हैं।