भारत के वनों के प्रकार और उनका वितरण
प्राकृतिक वनस्पति का अर्थ है वे पौधे जो अपने-आप उगते हैं और लंबे समय तक इंसान से अछूते रहे हैं। इसका प्रकार वर्षा और तापमान तय करते हैं।
1. उष्ण कटिबंधीय सदाबहार और अर्ध-सदाबहार वन
200 सेमी से ज़्यादा वर्षा और साल भर गर्मी। परतों में ऊँचे पेड़ (60 मी तक), इतने घने कि धूप ज़मीन तक मुश्किल से पहुँचती है। पत्ते गिरने का कोई तय समय नहीं, इसलिए साल भर हरे दिखते हैं। पेड़: रोज़वुड, आबनूस, महोगनी। कहाँ: पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल, उत्तर-पूर्व की पहाड़ियाँ, अंडमान-निकोबार द्वीप। कुछ कम वर्षा वाले भागों में अर्ध-सदाबहार वन।
2. उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन (सबसे ज़्यादा फैले)
इन्हें मानसूनी वन भी कहते हैं। सूखे मौसम में 6–8 हफ़्ते पत्ते गिराते हैं। आर्द्र पर्णपाती (100–200 सेमी): सागौन, साल, शीशम, चंदन; उत्तर-पूर्व की तलहटी, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिमी घाट के पूर्वी ढाल। शुष्क पर्णपाती (70–100 सेमी): सागौन, तेंदू, बेल; प्रायद्वीप के अधिक वर्षा वाले भाग और उत्तर प्रदेश-बिहार के मैदान। बहुत-से वन खेती के लिए साफ़ हो चुके हैं।
3. उष्ण कटिबंधीय कँटीले वन
लगभग 70 सेमी से कम वर्षा (सबसे सूखे भाग 50 सेमी से कम)। कँटीली झाड़ियाँ, कैक्टस जैसे पौधे, बबूल, बेर, खेजड़ी। पानी बचाने के लिए लंबी जड़ें और छोटे या बिना पत्ते। कहाँ: राजस्थान, कच्छ, दक्षिण-पश्चिम पंजाब, हरियाणा और दक्कन के सूखे भीतरी भाग।
4. पर्वतीय वन
पहाड़ पर ऊँचाई के साथ तापमान घटता है, इसलिए वन ऐसे बदलते हैं जैसे उष्ण कटिबंध से ध्रुव की ओर जा रहे हों। हिमालय में: 1,000–2,000 मी पर आर्द्र शीतोष्ण चौड़ी पत्ती वाले वन (ओक, चेस्टनट); 1,500–3,000 मी पर शंकुधारी (चीड़, देवदार, स्प्रूस, फ़र); लगभग 3,600 मी से ऊपर अल्पाइन वन और घास के मैदान (बुग्याल या मर्ग) जहाँ गर्मी में पशु चरते हैं; फिर काई, लाइकेन और बर्फ़। दक्षिण में: नीलगिरि, अन्नामलाई और पालनी पहाड़ियों में शोला वन।
5. वेलांचली और अनूप वन (मैंग्रोव)
दलदल, डेल्टा और ज्वारीय तटों पर उगते हैं। मैंग्रोव की टेक और श्वसन जड़ें खारे पानी में रहती हैं। कहाँ: गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा (सुंदरबन, रॉयल बंगाल टाइगर और सुंदरी पेड़ का घर), महानदी, गोदावरी, कृष्णा डेल्टा और अंडमान-निकोबार। दुनिया के लगभग 3% मैंग्रोव भारत में हैं।
वन और वन्यजीव संरक्षण
वन क्यों ज़रूरी हैं
वन लकड़ी, ईंधन, फल, गोंद, दवा और रोज़गार देते हैं। ये मिट्टी थामते हैं, नदियों को बहता रखते हैं, कार्बन जमा करते हैं और जीवों को घर देते हैं। भारत दुनिया के 17 महाविविधता वाले देशों में है; धरती की केवल 2.4% ज़मीन पर दुनिया की लगभग 8% प्रजातियाँ।
वन क्यों घट रहे हैं
खेती, बाँध, खदान, सड़क और शहर के लिए कटाई, ज़्यादा चराई, जंगल की आग और अवैध शिकार व व्यापार।
भारत क्या करता है
- वन नीति: राष्ट्रीय वन नीति का लक्ष्य एक-तिहाई (33%) भूमि पर वन; आज वन क्षेत्र लगभग 22% है (वनों के बाहर के पेड़ जोड़कर लगभग 25%)।
- सामाजिक वानिकी: सरकारी और बंजर ज़मीन, सड़क व नहर किनारे पेड़ लगाना; कृषि वानिकी — किसान अपने खेतों में पेड़ उगाते हैं; शहरी वानिकी — शहरों में पार्क और हरित पट्टी।
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: संरक्षित जीवों के शिकार और व्यापार पर रोक, राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य बनाने का प्रावधान। भारत में 100 से ज़्यादा राष्ट्रीय उद्यान और 550 से ज़्यादा वन्यजीव अभयारण्य हैं।
- विशेष परियोजनाएँ: बाघ परियोजना (1973), हाथी परियोजना (1992), मगरमच्छ प्रजनन परियोजना, और गैंडा, हिम तेंदुआ व गोडावण के लिए परियोजनाएँ।
- जन आंदोलन: चिपको, अप्पिको, और संयुक्त वन प्रबंधन जिसमें गाँव वाले वन बचाते हैं और उपज बाँटते हैं।
जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र
जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (जैवमंडल निचय) ज़मीन या तट का बड़ा संरक्षित क्षेत्र है जो पूरे पारितंत्र — पौधे, जीव और स्थानीय लोगों की जीवन-शैली — को बचाता है और साथ में सावधानी से उपयोग भी होने देता है। यह यूनेस्को के मानव और जैवमंडल कार्यक्रम पर आधारित है।
तीन क्षेत्र
- कोर क्षेत्र: केंद्र, पूरी तरह सुरक्षित। अनुसंधान और निगरानी के सिवा कोई मानवीय गतिविधि नहीं।
- बफ़र क्षेत्र: कोर के चारों ओर। अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण और सीमित इको-पर्यटन।
- संक्रमण क्षेत्र: बाहरी घेरा। गाँव, खेत और अन्य काम, जहाँ लोग और प्रबंधक मिलकर काम करते हैं।
भारत के जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र
भारत में 18 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र हैं। पहला नीलगिरि (1986) था, जो तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में फैला है। इनमें से 12 से ज़्यादा यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में हैं, जैसे नीलगिरि, मन्नार की खाड़ी, सुंदरबन, नंदा देवी, नोकरेक, पचमढ़ी, सिमलीपाल, अचानकमार-अमरकंटक, ग्रेट निकोबार, अगस्त्यमलई, कंचनजंगा और पन्ना। अन्य: मानस, डिब्रू-सैखोवा, देहांग-देबांग, कच्छ, शेषाचलम और शीत मरुस्थल।
अंतर: राष्ट्रीय उद्यान में इंसानी उपयोग नहीं; अभयारण्य में कुछ गतिविधियाँ; जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र पूरे भू-दृश्य को उसके लोगों के साथ बचाता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- वर्षा > 200 सेमी → उष्ण सदाबहार; 100–200 सेमी → आर्द्र पर्णपाती; 70–100 सेमी → शुष्क पर्णपाती; < 70 सेमी → कँटीले वन व झाड़ियाँ
- हिमालय में ऊँचाई: 1,000–2,000 मी ओक/चेस्टनट → 1,500–3,000 मी चीड़/देवदार → 3,600 मी+ अल्पाइन घास → बर्फ़
- मैंग्रोव = डेल्टा और ज्वारीय तटों के वेलांचली व अनूप वन (सबसे बड़ा: सुंदरबन)
- लक्ष्य वन क्षेत्र = भूमि का 33%; अभी ≈ 22%
- जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र = कोर (सुरक्षित) + बफ़र (अनुसंधान, इको-पर्यटन) + संक्रमण (लोग रहते और काम करते)
- भारत: 18 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र; पहला = नीलगिरि (1986)
हल किए गए उदाहरण
1. किसी जगह 250 सेमी वर्षा होती है और साल भर गर्मी रहती है। वहाँ कौन-सा वन उगेगा? एक पेड़ बताइए।
200 सेमी से ज़्यादा वर्षा और गर्मी → उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन। पेड़: रोज़वुड, आबनूस या महोगनी।
2. मध्य प्रदेश में सागौन के पेड़ मार्च–मई में पत्ते क्यों गिराते हैं?
ये सूखे महीने हैं। पत्तों के छोटे छिद्रों से पानी उड़ता है। पत्ते गिराकर पेड़ मानसून लौटने तक पानी बचाता है; इसीलिए इन्हें पर्णपाती या मानसूनी वन कहते हैं।
3. एक पर्वतारोही उत्तराखंड में 1,200 मी से 4,000 मी तक चढ़ती है। रास्ते की वनस्पति बताइए।
लगभग 1,200–2,000 मी: ओक और चेस्टनट (आर्द्र शीतोष्ण)। 2,000–3,000 मी: चीड़, देवदार, स्प्रूस, फ़र। लगभग 3,600 मी से ऊपर: अल्पाइन झाड़ियाँ और बुग्याल। 4,000 मी के पास और ऊपर: काई, लाइकेन, फिर बर्फ़।
4. एक राज्य की भूमि 90,000 वर्ग किमी और वन 18,000 वर्ग किमी है। वन कितने प्रतिशत है और 33% लक्ष्य से कितना दूर है?
18,000 ÷ 90,000 × 100 = 20%। 90,000 का 33% = 29,700 वर्ग किमी। और चाहिए 29,700 − 18,000 = 11,700 वर्ग किमी वन (13 प्रतिशत अंक)।
5. जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र में (क) बाघ अनुसंधान शिविर, (ख) प्रकृति भ्रमण पथ, (ग) गाँव का विद्यालय कहाँ होगा?
(क) कोर क्षेत्र (केवल अनुसंधान)। (ख) बफ़र क्षेत्र (सीमित इको-पर्यटन)। (ग) संक्रमण क्षेत्र (लोग रहते और काम करते हैं)।
6. मैंग्रोव को 'तट के रक्षक' क्यों कहते हैं?
इनकी घनी टेक जड़ें लहरों और तूफ़ानी ज्वार को धीमा करती हैं, कीचड़ थामकर तट को कटने से बचाती हैं और मछलियों को अंडे देने की जगह देती हैं। चक्रवात के बाद मैंग्रोव के पीछे बसे गाँवों को कम नुक़सान होता है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि सदाबहार वन कभी पत्ते नहीं गिराते। गिराते हैं, पर अलग-अलग पेड़ अलग समय पर, इसलिए वन साल भर हरा दिखता है।
- कहना कि भारत में सबसे ज़्यादा सदाबहार वन हैं। सबसे बड़ा क्षेत्र उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती (मानसूनी) वनों का है।
- राष्ट्रीय उद्यान और जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र को एक समझना। जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र स्थानीय लोगों सहित पूरे पारितंत्र को तीन क्षेत्रों में बचाता है।
- यह मानना कि वन क्षेत्र का लक्ष्य 50% है। राष्ट्रीय वन नीति का लक्ष्य भूमि का 33% (एक-तिहाई) है।