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भारत की प्राकृतिक वनस्पति: वन, वन्यजीव और जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

प्राकृतिक वनस्पति वे पौधे हैं जो बिना इंसान के लगाए अपने-आप उगते हैं। भारत में वर्षा और तापमान तय करते हैं कि कहाँ कौन-सा वन होगा। बहुत गीली जगहों पर ऊँचे उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन हैं। मध्यम वर्षा वाली जगहों पर पर्णपाती वन हैं, जो सूखे मौसम में पत्ते गिराते हैं; ये सबसे ज़्यादा हैं। सूखी जगहों पर कँटीली झाड़ियाँ हैं। पहाड़ों पर ऊँचाई के साथ वन बदलते हैं और नदियों के मुहानों पर मैंग्रोव हैं। वन लकड़ी, भोजन, दवा और साफ़ हवा देते हैं और वन्यजीवों का घर हैं। भारत इन्हें क़ानून, राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, परियोजनाओं और जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों से बचाता है, जिनमें सुरक्षित कोर, बफ़र और बाहरी संक्रमण क्षेत्र होते हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. वर्षा वन तय करती है: कम वर्षा में कँटीली झाड़ियाँ, कुछ वर्षा में पर्णपाती पेड़, बहुत वर्षा में ऊँचे सदाबहार वन।
  2. सागौन और साल जैसे पर्णपाती पेड़ सूखे महीनों में पानी बचाने के लिए पत्ते गिराते हैं और बरसात में फिर हरे होते हैं।
  3. पहाड़ पर ऊँचाई के साथ वन बदलता है: नीचे चौड़ी पत्ती, बीच में चीड़-देवदार, ऊपर घास के मैदान और बर्फ़।
  4. मैंग्रोव वहाँ उगते हैं जहाँ नदी समुद्र से मिलती है। इनकी जड़ें खारे पानी में खड़ी रहकर तट को बचाती हैं।
  5. वन घट रहे हैं। भारत में लगभग 22% वन है; लक्ष्य 33% है। क़ानून और परियोजनाएँ पेड़ों और जीवों को बचाती हैं।
  6. करके देखें: जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र में कोर, बफ़र और संक्रमण क्षेत्र हैं। गतिविधि चुनिए और देखिए कहाँ अनुमति है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

पूरे भारत में एक जैसे वन क्यों नहीं उगते?

जगह-जगह वर्षा और तापमान अलग हैं और हर वन को एक तय मात्रा में पानी चाहिए। चरण 1 में वर्षा का स्लाइडर चलाकर वन बदलते देखिए।

पर्णपाती पेड़ पत्ते गिराकर क्या सूखे में मर जाते हैं?

नहीं, वे आराम करते हैं। पत्ते गिराने से पानी बचता है; बरसात में नए पत्ते आते हैं। चरण 2 में चक्र देखिए।

शंकुधारी पेड़ ऊपर और चौड़ी पत्ती वाले नीचे क्यों उगते हैं?

ऊँचाई पर ठंड बढ़ती है। नुकीली पत्तियों वाले शंकु आकार के पेड़ ठंड सहते हैं और बर्फ़ उन पर से फिसल जाती है। चरण 3 के क्षेत्र देखिए।

पेड़ खारे पानी में कैसे जीते हैं?

मैंग्रोव नमक छानते या बाहर निकालते हैं और उनकी कुछ जड़ें ऊपर निकलकर भाटे के समय हवा लेती हैं। चरण 4 में टेक जड़ें देखिए।

भारत में 22% वन है, तो 33% क्यों चाहिए?

एक-तिहाई वन से मिट्टी, पानी और जलवायु संतुलित रहते हैं। चरण 5 में 'पेड़ लगाएँ' दबाकर देखिए लक्ष्य कितना दूर है।

क्या पर्यटक जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र में कहीं भी जा सकते हैं?

नहीं। इको-पर्यटन बफ़र और संक्रमण क्षेत्र में ही, कोर में नहीं। चरण 6 में 'इको-पर्यटन' चुनिए।

भारत के वनों के प्रकार और उनका वितरण

प्राकृतिक वनस्पति का अर्थ है वे पौधे जो अपने-आप उगते हैं और लंबे समय तक इंसान से अछूते रहे हैं। इसका प्रकार वर्षा और तापमान तय करते हैं।

1. उष्ण कटिबंधीय सदाबहार और अर्ध-सदाबहार वन

200 सेमी से ज़्यादा वर्षा और साल भर गर्मी। परतों में ऊँचे पेड़ (60 मी तक), इतने घने कि धूप ज़मीन तक मुश्किल से पहुँचती है। पत्ते गिरने का कोई तय समय नहीं, इसलिए साल भर हरे दिखते हैं। पेड़: रोज़वुड, आबनूस, महोगनी। कहाँ: पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल, उत्तर-पूर्व की पहाड़ियाँ, अंडमान-निकोबार द्वीप। कुछ कम वर्षा वाले भागों में अर्ध-सदाबहार वन।

2. उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन (सबसे ज़्यादा फैले)

इन्हें मानसूनी वन भी कहते हैं। सूखे मौसम में 6–8 हफ़्ते पत्ते गिराते हैं। आर्द्र पर्णपाती (100–200 सेमी): सागौन, साल, शीशम, चंदन; उत्तर-पूर्व की तलहटी, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिमी घाट के पूर्वी ढाल। शुष्क पर्णपाती (70–100 सेमी): सागौन, तेंदू, बेल; प्रायद्वीप के अधिक वर्षा वाले भाग और उत्तर प्रदेश-बिहार के मैदान। बहुत-से वन खेती के लिए साफ़ हो चुके हैं।

3. उष्ण कटिबंधीय कँटीले वन

लगभग 70 सेमी से कम वर्षा (सबसे सूखे भाग 50 सेमी से कम)। कँटीली झाड़ियाँ, कैक्टस जैसे पौधे, बबूल, बेर, खेजड़ी। पानी बचाने के लिए लंबी जड़ें और छोटे या बिना पत्ते। कहाँ: राजस्थान, कच्छ, दक्षिण-पश्चिम पंजाब, हरियाणा और दक्कन के सूखे भीतरी भाग।

4. पर्वतीय वन

पहाड़ पर ऊँचाई के साथ तापमान घटता है, इसलिए वन ऐसे बदलते हैं जैसे उष्ण कटिबंध से ध्रुव की ओर जा रहे हों। हिमालय में: 1,000–2,000 मी पर आर्द्र शीतोष्ण चौड़ी पत्ती वाले वन (ओक, चेस्टनट); 1,500–3,000 मी पर शंकुधारी (चीड़, देवदार, स्प्रूस, फ़र); लगभग 3,600 मी से ऊपर अल्पाइन वन और घास के मैदान (बुग्याल या मर्ग) जहाँ गर्मी में पशु चरते हैं; फिर काई, लाइकेन और बर्फ़। दक्षिण में: नीलगिरि, अन्नामलाई और पालनी पहाड़ियों में शोला वन।

5. वेलांचली और अनूप वन (मैंग्रोव)

दलदल, डेल्टा और ज्वारीय तटों पर उगते हैं। मैंग्रोव की टेक और श्वसन जड़ें खारे पानी में रहती हैं। कहाँ: गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा (सुंदरबन, रॉयल बंगाल टाइगर और सुंदरी पेड़ का घर), महानदी, गोदावरी, कृष्णा डेल्टा और अंडमान-निकोबार। दुनिया के लगभग 3% मैंग्रोव भारत में हैं।

वन और वन्यजीव संरक्षण

वन क्यों ज़रूरी हैं

वन लकड़ी, ईंधन, फल, गोंद, दवा और रोज़गार देते हैं। ये मिट्टी थामते हैं, नदियों को बहता रखते हैं, कार्बन जमा करते हैं और जीवों को घर देते हैं। भारत दुनिया के 17 महाविविधता वाले देशों में है; धरती की केवल 2.4% ज़मीन पर दुनिया की लगभग 8% प्रजातियाँ।

वन क्यों घट रहे हैं

खेती, बाँध, खदान, सड़क और शहर के लिए कटाई, ज़्यादा चराई, जंगल की आग और अवैध शिकार व व्यापार।

भारत क्या करता है

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (जैवमंडल निचय) ज़मीन या तट का बड़ा संरक्षित क्षेत्र है जो पूरे पारितंत्र — पौधे, जीव और स्थानीय लोगों की जीवन-शैली — को बचाता है और साथ में सावधानी से उपयोग भी होने देता है। यह यूनेस्को के मानव और जैवमंडल कार्यक्रम पर आधारित है।

तीन क्षेत्र

  1. कोर क्षेत्र: केंद्र, पूरी तरह सुरक्षित। अनुसंधान और निगरानी के सिवा कोई मानवीय गतिविधि नहीं।
  2. बफ़र क्षेत्र: कोर के चारों ओर। अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण और सीमित इको-पर्यटन।
  3. संक्रमण क्षेत्र: बाहरी घेरा। गाँव, खेत और अन्य काम, जहाँ लोग और प्रबंधक मिलकर काम करते हैं।

भारत के जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

भारत में 18 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र हैं। पहला नीलगिरि (1986) था, जो तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में फैला है। इनमें से 12 से ज़्यादा यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में हैं, जैसे नीलगिरि, मन्नार की खाड़ी, सुंदरबन, नंदा देवी, नोकरेक, पचमढ़ी, सिमलीपाल, अचानकमार-अमरकंटक, ग्रेट निकोबार, अगस्त्यमलई, कंचनजंगा और पन्ना। अन्य: मानस, डिब्रू-सैखोवा, देहांग-देबांग, कच्छ, शेषाचलम और शीत मरुस्थल।

अंतर: राष्ट्रीय उद्यान में इंसानी उपयोग नहीं; अभयारण्य में कुछ गतिविधियाँ; जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र पूरे भू-दृश्य को उसके लोगों के साथ बचाता है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. किसी जगह 250 सेमी वर्षा होती है और साल भर गर्मी रहती है। वहाँ कौन-सा वन उगेगा? एक पेड़ बताइए।

200 सेमी से ज़्यादा वर्षा और गर्मी → उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन। पेड़: रोज़वुड, आबनूस या महोगनी।

2. मध्य प्रदेश में सागौन के पेड़ मार्च–मई में पत्ते क्यों गिराते हैं?

ये सूखे महीने हैं। पत्तों के छोटे छिद्रों से पानी उड़ता है। पत्ते गिराकर पेड़ मानसून लौटने तक पानी बचाता है; इसीलिए इन्हें पर्णपाती या मानसूनी वन कहते हैं।

3. एक पर्वतारोही उत्तराखंड में 1,200 मी से 4,000 मी तक चढ़ती है। रास्ते की वनस्पति बताइए।

लगभग 1,200–2,000 मी: ओक और चेस्टनट (आर्द्र शीतोष्ण)। 2,000–3,000 मी: चीड़, देवदार, स्प्रूस, फ़र। लगभग 3,600 मी से ऊपर: अल्पाइन झाड़ियाँ और बुग्याल। 4,000 मी के पास और ऊपर: काई, लाइकेन, फिर बर्फ़।

4. एक राज्य की भूमि 90,000 वर्ग किमी और वन 18,000 वर्ग किमी है। वन कितने प्रतिशत है और 33% लक्ष्य से कितना दूर है?

18,000 ÷ 90,000 × 100 = 20%। 90,000 का 33% = 29,700 वर्ग किमी। और चाहिए 29,700 − 18,000 = 11,700 वर्ग किमी वन (13 प्रतिशत अंक)।

5. जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र में (क) बाघ अनुसंधान शिविर, (ख) प्रकृति भ्रमण पथ, (ग) गाँव का विद्यालय कहाँ होगा?

(क) कोर क्षेत्र (केवल अनुसंधान)। (ख) बफ़र क्षेत्र (सीमित इको-पर्यटन)। (ग) संक्रमण क्षेत्र (लोग रहते और काम करते हैं)।

6. मैंग्रोव को 'तट के रक्षक' क्यों कहते हैं?

इनकी घनी टेक जड़ें लहरों और तूफ़ानी ज्वार को धीमा करती हैं, कीचड़ थामकर तट को कटने से बचाती हैं और मछलियों को अंडे देने की जगह देती हैं। चक्रवात के बाद मैंग्रोव के पीछे बसे गाँवों को कम नुक़सान होता है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. भारत में सबसे ज़्यादा फैले वन हैं:
2. सुंदरी पेड़ कहाँ उगते हैं?
3. जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र के किस भाग में केवल अनुसंधान की अनुमति है?
4. भारत का पहला जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र था:
5. हिमालय में चीड़ और देवदार के वन लगभग कितनी ऊँचाई पर मिलते हैं?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में वनों के मुख्य प्रकार कौन-से हैं?

उष्ण कटिबंधीय सदाबहार व अर्ध-सदाबहार, उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती (आर्द्र और शुष्क), उष्ण कटिबंधीय कँटीले, पर्वतीय, और वेलांचली व अनूप (मैंग्रोव) वन।

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र के तीन भाग कौन-से हैं?

कोर (पूरी तरह सुरक्षित, केवल अनुसंधान), बफ़र (अनुसंधान, शिक्षा, सीमित इको-पर्यटन) और संक्रमण (गाँव, खेत और सतत उपयोग)।

भारत में कितने जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र हैं?

भारत में 18 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र हैं; पहला नीलगिरि (1986) था, और 12 से ज़्यादा यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 11जलवायु, वनस्पति और मृदा
चीन高一Comp.1 Ch.5 Vegetation and soil

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