मिट्टी का निर्माण और अपरदन
मिट्टी मूल पदार्थ से शुरू होती है: अपक्षय (weathering) से टूटी चट्टान।
- भौतिक अपक्षय: जमना–पिघलना, गर्म–ठंडा होना, जड़ों का चट्टान चीरना।
- रासायनिक अपक्षय: पानी और अम्ल खनिजों को घोलते या बदलते हैं।
- जैविक: लाइकेन, जड़ें, केंचुए और सूक्ष्मजीव चट्टान तोड़ते और ह्यूमस जोड़ते हैं।
पाँच कारक मिट्टी तय करते हैं: जलवायु, जीव, ढलान, मूल पदार्थ और समय। 2–3 cm ऊपरी मिट्टी बनने में सैकड़ों साल लग सकते हैं।
मृदा संस्तर
O (जैविक कचरा), A (ऊपरी मिट्टी, ह्यूमस से भरपूर), E (निक्षालन: पोषक तत्व नीचे धुल जाते हैं), B (अवमृदा: खनिज और क्ले जमा), C (अपक्षयित मूल चट्टान), R (आधार चट्टान)।
अपरदन
अपरदन यानी पानी या हवा से मिट्टी का हटना। यह खड़ी, नंगी, जोती हुई या ज़्यादा चराई वाली ज़मीन पर सबसे ज़्यादा है। नतीजे: कम उपजाऊ खेत, गंदली नदियाँ, बाँधों में गाद। बचाव: पौधों का आवरण, सीढ़ीदार खेत, समोच्च जुताई, वायु-रोधी पेड़, बिना जुताई खेती, आवरण फसलें।
मिट्टी की संरचना और गुण
अच्छी मिट्टी में लगभग 45% खनिज, 5% जैविक पदार्थ, 25% पानी और 25% हवा होती है।
गठन (texture) कण-आकारों का मिश्रण है: रेत (0.05–2 mm), गाद (0.002–0.05 mm), मृत्तिका (< 0.002 mm)। मृदा गठन त्रिभुज प्रतिशत से मिट्टी का नाम बताता है; दोमट (loam) (लगभग 40% रेत, 40% गाद, 20% क्ले) ज़्यादातर फसलों के लिए अच्छी है।
- सरंध्रता: कणों के बीच खाली जगह का हिस्सा।
- पारगम्यता: पानी कितनी तेज़ी से गुज़रता है। रेत: ज़्यादा। क्ले: कम।
- जल-धारण क्षमता: क्ले और ह्यूमस पानी रोकते हैं; रेत जल्दी सूखती है।
- उर्वरता: पोषक तत्व (N, P, K), pH और जैविक पदार्थ। क्ले और ह्यूमस पोषक आयन पकड़ते हैं।
जलग्रहण क्षेत्र
जलग्रहण क्षेत्र (अपवाह द्रोणी, catchment) वह सारी ज़मीन है जिसका पानी एक नदी, झील या निकास में जाता है। ऊँची ज़मीन, जल-विभाजक, एक क्षेत्र को दूसरे से अलग करती है।
इसका व्यवहार क्षेत्रफल, ढलान, मिट्टी, वनस्पति और भूमि-उपयोग पर निर्भर है। जंगल बहाव धीमा करते और पानी छानते हैं; पक्की सड़कें और खेत पानी, गाद, उर्वरक और प्रदूषण तेज़ी से नीचे भेजते हैं। गंगा या अमेज़न जैसे बड़े क्षेत्रों में कई छोटे क्षेत्र होते हैं। ऊपर की ज़मीन बचाना नीचे का पीने का पानी बचाना है।
सौर विकिरण और ऋतुएँ
सूर्यातप (insolation) किसी सतह तक पहुँचने वाली सौर ऊर्जा है, W/m² में। जहाँ सूर्य आसमान में ऊँचा हो (भूमध्य रेखा के पास) वहाँ सबसे ज़्यादा, क्योंकि सीधी किरणें कम क्षेत्र पर फैलती हैं; तिरछी किरणें ज़्यादा फैलती हैं और ज़्यादा हवा से गुज़रती हैं।
पृथ्वी की धुरी 23.5° झुकी है और साल भर एक ही दिशा में रहती है। परिक्रमा में:
- जून संक्रांति: सूर्य 23.5°N (कर्क रेखा) पर सिर के ऊपर; उत्तर में लंबे दिन।
- दिसंबर संक्रांति: सूर्य 23.5°S पर; दक्षिण में गर्मी।
- मार्च और सितंबर विषुव: सूर्य भूमध्य रेखा पर; हर जगह दिन-रात लगभग बराबर।
दोपहर का सूर्य कोण = 90° − |अक्षांश − सूर्य का शीर्ष अक्षांश|। ऋतुएँ झुकाव से हैं, दूरी से नहीं: पृथ्वी जनवरी की शुरुआत में सूर्य के सबसे पास होती है।
करके देखो: जार में मिट्टी और टॉर्च से ऋतु
एक जार एक-तिहाई बगीचे की मिट्टी से भरो, पानी और चुटकी भर नमक डालो, हिलाओ और एक दिन छोड़ दो। पहले रेत बैठती है, फिर गाद, फिर क्ले: हर परत नापकर अपनी मिट्टी का गठन जानो। फिर टॉर्च को कागज़ पर सीधा और तिरछा चमकाओ: तिरछा धब्बा बड़ा और फीका होता है। इसीलिए सर्दियों का नीचा सूरज कम गर्म करता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मिट्टी के कारक: जलवायु, जीव, ढलान, मूल पदार्थ, समय
- ऊपर से संस्तर: O, A, E, B, C, R
- रेत 0.05–2 mm > गाद > मृत्तिका < 0.002 mm
- दोपहर का सूर्य कोण = 90° − |अक्षांश − सूर्य का शीर्ष अक्षांश|
- उसी किरण-पुंज के लिए सूर्यातप ∝ sin(सूर्य कोण)
- ऋतुएँ: 23.5° झुकाव + परिक्रमा, दूरी नहीं
हल किए गए उदाहरण
1. एक मिट्टी पानी बहुत जल्दी निकाल देती है और जल्दी सूखती है। वह ज़्यादातर रेत है या क्ले? पानी रोकने में क्या मदद करेगा?
ज़्यादातर रेत: बड़े छिद्र, ज़्यादा पारगम्यता, कम जल-धारण। कम्पोस्ट (ह्यूमस) मिलाने से पानी और पोषक तत्व रुकते हैं।
2. कौन-सा संस्तर सबसे गहरे रंग का और ह्यूमस से भरपूर होगा, और क्यों?
O परत के ठीक नीचे A संस्तर (ऊपरी मिट्टी), क्योंकि सड़ते पौधे इसमें मिल जाते हैं।
3. पहाड़ी किसान मिट्टी का अपरदन घटाने के तीन तरीके बताओ।
सीढ़ीदार खेत, समोच्च जुताई, और पौधों का आवरण रखना (आवरण फसलें, घास की पट्टियाँ, वायु-रोधी पेड़)।
4. 30°N पर जून और दिसंबर संक्रांति को दोपहर का सूर्य कोण निकालो।
जून: 90 − |30 − 23.5| = 83.5°। दिसंबर: 90 − |30 + 23.5| = 36.5°।
5. जलग्रहण क्षेत्र की ऊपरी ढलानों पर शहर बसने से नीचे बाढ़ का खतरा क्यों बढ़ता है?
सड़कें और छतें पानी को सोखने नहीं देतीं, तो ज़्यादा और तेज़ बहाव नालों में जाता है और नीचे नदी का स्तर बढ़ता है।
6. गर्मियों में दिन लंबे क्यों होते हैं?
सूर्य की ओर झुका गोलार्ध हर घूर्णन का बड़ा हिस्सा धूप में बिताता है, तो उसे ज़्यादा घंटे और ज़्यादा सीधी धूप मिलती है।
आम गलतियाँ
- कहना कि गर्मियों में पृथ्वी सूर्य के पास होती है इसलिए ऋतुएँ होती हैं। कारण झुकाव है; दूरी का बदलाव छोटा है।
- मानना कि क्ले बारीक है इसलिए पानी अच्छा निकालती है। छोटे छिद्रों से क्ले धीरे निकालती है।
- अपक्षय (चट्टान का वहीं टूटना) और अपरदन (मिट्टी का हटना) को मिला देना।
- जलग्रहण क्षेत्र को कोई इमारत या टंकी समझना। यह जल-विभाजक से घिरा ज़मीन का क्षेत्र है।