आरंभिक सिद्धांत
पृथ्वी के जन्म पर सदियों से अनुमान लगाए गए। कुछ मुख्य विचार:
- निहारिका परिकल्पना (इमैनुअल कांट, फिर पियरे लाप्लास, 1796): युवा सूर्य के चारों ओर धीरे घूमता गैस का बादल (निहारिका) ठंडा होकर सिकुड़ा। पीछे छूटी रिंगों से ग्रह बने।
- ग्रहाणु परिकल्पना (चैम्बरलेन और मॉल्टन, 1900): पास से गुज़रते तारे ने सूर्य से पदार्थ खींचा; छोटे पिंड (ग्रहाणु) जुड़कर ग्रह बने।
- ज्वारीय / द्वैतारक विचार (जीन्स और जैफ़्री): साथी या गुज़रते तारे की भूमिका मानी।
- संशोधित निहारिका परिकल्पना (ओटो श्मिड्ट, कार्ल वाइज़ास्कर, लगभग 1950): सूर्य हाइड्रोजन, हीलियम और धूल की निहारिका से घिरा था; घर्षण और टक्कर से चपटी चकती बनी और उसमें कण अभिवृद्धि (चिपककर बढ़ना) से ग्रह बने।
संशोधित निहारिका विचार आज सौरमंडल के बारे में मान्य विचार के क़रीब है।
आधुनिक सिद्धांत: बिग बैंग
बिग बैंग सिद्धांत (विस्तारित ब्रह्मांड परिकल्पना) सिर्फ़ पृथ्वी नहीं, पूरे ब्रह्मांड की शुरुआत बताता है।
- शुरू में सारा पदार्थ एक बहुत छोटे, बेहद गरम और घने बिंदु में था।
- लगभग 13.7 अरब वर्ष पहले वह तेज़ी से फैला।
- लगभग 3 लाख वर्ष में वह इतना ठंडा हुआ कि परमाणु बन सके।
- ब्रह्मांड आज भी फैल रहा है। 1920 में एडविन हबल ने दिखाया कि मंदाकिनियाँ एक-दूसरे से दूर जा रही हैं।
गुब्बारे पर बिंदु बनाकर उसे फुलाइए: हर बिंदु बाकी सब से दूर जाता है, क्योंकि बीच की जगह बढ़ती है।
कुछ वैज्ञानिक पहले स्थिर अवस्था विचार मानते थे (ब्रह्मांड हमेशा एक जैसा), पर प्रमाण फैलाव के पक्ष में हैं।
तारे और ग्रह
तारे: शुरुआती ब्रह्मांड में गैस असमान थी। जहाँ गैस घनी थी, गुरुत्व ने उसे गुच्छों में खींचा। इनसे मंदाकिनियाँ (तारों के विशाल समूह) बनीं। मंदाकिनी के भीतर छोटे गुच्छे इतने गरम हुए कि चमकने लगे: ये तारे हैं। सूर्य लगभग 5 अरब वर्ष पुराना है।
ग्रह तीन चरणों में बने: (1) गैस के बादल में तारा बना; (2) बची हुई गैस-धूल की चकती में छोटे गोले चिपककर ग्रहाणु बने; (3) ग्रहाणु टकराकर जुड़े और कुछ बड़े ग्रह बने।
| भीतरी (पार्थिव) ग्रह | बाहरी (जोवियन / गैस दानव) ग्रह |
|---|---|
| बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल | बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण |
| छोटे, चट्टानी, घने | बहुत बड़े, ज़्यादातर गैस, कम घने |
| सूर्य के पास: गैस टिक न सकी | दूर: ठंड में गैस संघनित हुई |
| कम गुरुत्व; सौर पवन ने गैस उड़ा दी | ज़्यादा गुरुत्व ने गैस पकड़े रखी |
चंद्रमा: माना जाता है कि मंगल के आकार (या बड़ा) का पिंड युवा पृथ्वी से टकराया। उछला पदार्थ जुड़कर लगभग 4.44 अरब वर्ष पहले चंद्रमा बना। इसे बड़ी टक्कर विचार कहते हैं।
पृथ्वी का विकास: स्थलमंडल, वायुमंडल, जलमंडल
स्थलमंडल (ठोस पृथ्वी)
युवा पृथ्वी टक्करों और रेडियोधर्मी ताप से गरम और आंशिक रूप से पिघली थी। लोहे जैसे भारी पदार्थ बीच में डूबे; हल्के पदार्थ ऊपर आए। इसे विभेदन कहते हैं। इससे परतें बनीं: भूपर्पटी, मैंटल, बाहरी और आंतरिक क्रोड। सतह ठंडी होने पर ठोस भूपर्पटी बनी।
वायुमंडल तीन चरणों में
- पहली हवा (हाइड्रोजन, हीलियम) सौर पवन से उड़ गई।
- गरम भीतर से ज्वालामुखियों द्वारा गैसें निकलीं: जलवाष्प, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, अमोनिया। इसे गैस उत्सर्जन (डीगैसिंग) कहते हैं।
- बहुत बाद में प्रकाश-संश्लेषण करने वाले जीवों ने ऑक्सीजन जोड़ी।
जलमंडल (पानी)
पृथ्वी ठंडी हुई तो जलवाष्प बादल बनी। बहुत समय तक वर्षा हुई और पानी निचले भागों में भरा। कार्बन डाइऑक्साइड वर्षा के पानी में घुली, जिससे पृथ्वी और ठंडी हुई और और वर्षा हुई। पृथ्वी बनने के लगभग 50 करोड़ वर्ष में महासागर बन गए, यानी वे लगभग 4 अरब वर्ष पुराने हैं।
घर पर करें: किसी बड़े की मदद से केतली की भाप के ऊपर ठंडी स्टील की थाली रखिए। भाप को बूँदें बनते देखिए। पहली वर्षा ऐसे ही बनी।
जीवन की उत्पत्ति
वैज्ञानिक मानते हैं कि जीवन रसायन से शुरू हुआ। शुरुआती महासागरों में सरल अणु जुड़कर जटिल अणु (जैसे अमीनो अम्ल) बने, फिर ऐसे अणु जो अपनी नकल बना सकें। इनसे पहली सरल कोशिकाएँ बनीं।
- जीवन लगभग 3.8 अरब वर्ष पहले पानी में शुरू हुआ।
- नील-हरित शैवाल के जीवाश्म (परतदार चट्टानों, स्ट्रोमैटोलाइट में) 3 अरब वर्ष या उससे पुराने हैं।
- इन शैवालों ने ऑक्सीजन दी, जिससे बाद में जटिल जीवन संभव हुआ।
- पिछले 50 करोड़ वर्षों में पौधे और जीव ज़मीन पर फैले; मनुष्य बहुत हाल में आया।
| कितने समय पहले | घटना |
|---|---|
| 4.6 अरब वर्ष | पृथ्वी बनी |
| ~4 अरब वर्ष | भूपर्पटी जमी, महासागर बने |
| ~3.8 अरब वर्ष | समुद्र में पहला सरल जीवन |
| ~2.5 अरब वर्ष | हवा में ऑक्सीजन बढ़ी |
| ~0.5 अरब वर्ष | ज़मीन पर जीवन फैला |
अगर पृथ्वी का पूरा इतिहास एक दिन हो, तो मनुष्य आख़िरी कुछ सेकंड में आया।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ब्रह्मांड की आयु ≈ 13.7 अरब वर्ष; पृथ्वी की आयु ≈ 4.6 अरब वर्ष
- निहारिका परिकल्पना: कांट, लाप्लास (1796); संशोधन: ओटो श्मिड्ट, कार्ल वाइज़ास्कर
- ग्रहाणु परिकल्पना: चैम्बरलेन और मॉल्टन (1900)
- बिग बैंग = विस्तारित ब्रह्मांड; एडविन हबल (1920): मंदाकिनियाँ दूर हट रही हैं
- ग्रह निर्माण: तारा बना → धूल से ग्रहाणु → ग्रहाणु जुड़कर ग्रह
- भीतरी ग्रह = चट्टानी (पार्थिव); बाहरी ग्रह = गैस दानव (जोवियन)
- विभेदन: भारी लोहा क्रोड में, हल्की चट्टान भूपर्पटी में
- वायुमंडल: आदि गैसें उड़ीं → गैस उत्सर्जन → प्रकाश-संश्लेषण से ऑक्सीजन
- चंद्रमा: बड़ी टक्कर, लगभग 4.44 अरब वर्ष पहले
हल किए गए उदाहरण
1. भीतरी ग्रह चट्टानी और बाहरी ग्रह गैसीय क्यों हैं?
सूर्य के पास इतनी गर्मी थी कि हल्की गैसें संघनित नहीं हुईं और सौर पवन ने उन्हें उड़ा दिया। दूर ठंड में गैसें संघनित हुईं और बड़े बाहरी ग्रहों का गुरुत्व उन्हें पकड़े रहा।
2. बिग बैंग का गुब्बारा उदाहरण समझाइए।
गुब्बारे पर बिंदु बनाकर फुलाइए। रबर (अंतरिक्ष) खिंचने से हर बिंदु बाकी सबसे दूर जाता है। ब्रह्मांड फैलने पर मंदाकिनियाँ भी ऐसे ही दूर हटती हैं।
3. वायुमंडल के विकास के तीन चरण लिखिए।
1) पहली हाइड्रोजन-हीलियम हवा सौर पवन से उड़ी; 2) भीतर से और ज्वालामुखियों से गैस उत्सर्जन; 3) जीवों के प्रकाश-संश्लेषण से ऑक्सीजन।
4. महासागर कैसे बने?
ठंडी होती पृथ्वी की जलवाष्प बादल बनी। लगातार वर्षा का पानी निचले भागों में जमा हुआ। यह पृथ्वी बनने के लगभग 50 करोड़ वर्ष में हुआ।
5. पृथ्वी 4.6 अरब वर्ष पुरानी है और जीवन 3.8 अरब वर्ष पहले शुरू हुआ। कितने समय तक जीवन नहीं था?
4.6 − 3.8 = 0.8 अरब वर्ष, यानी लगभग 80 करोड़ वर्ष।
आम गलतियाँ
- बिग बैंग को अंतरिक्ष में हुआ धमाका समझना। यह एक बिंदु से अंतरिक्ष का ख़ुद फैलना था।
- मानना कि पृथ्वी शुरू से ऑक्सीजन वाली हवा के साथ बनी। ऑक्सीजन बहुत बाद में जीवों से आई।
- आयु उलझाना: ब्रह्मांड लगभग 13.7 अरब वर्ष, पृथ्वी लगभग 4.6 अरब वर्ष पुरानी।
- सभी ग्रहों को एक जैसा मानना। भीतरी चट्टानी हैं, बाहरी गैस के बड़े गोले।