South 고등학교 3학년 Convergent Science
अध्याय: 6
1. Origin and evolution of the universe
Hubble's law · Particles after the Big Bang · Hydrogen and helium spectra · Life cycle of stars · Galaxies · Molecules in space
- ब्रह्मांड विज्ञान: फैलता ब्रह्मांड और बिग बैंग – ब्रह्मांड विज्ञान (कॉस्मोलॉजी) पूरे ब्रह्मांड की बनावट, इतिहास और भविष्य का अध्ययन है। आकाशगंगाएँ समूहों, गुच्छों और तंतुओं में विशाल रिक्तियों के चारों ओर जुटती हैं। दूर की आकाशगंगाएँ हमसे दूर जा रही हैं, और जितनी दूर उतनी तेज़ (हबल का नियम, v = H₀d), क्योंकि अंतरिक्ष ख़ुद फैल रहा है। इस फैलाव को उल्टा चलाने पर लगभग 13.8 अरब साल पहले की गर्म, घनी शुरुआत मिलती है: बिग बैंग। इसके मुख्य प्रमाण हैं रेडशिफ़्ट, कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड और हाइड्रोजन-हीलियम की मात्रा। ब्रह्मांड का ज़्यादातर हिस्सा डार्क मैटर और डार्क एनर्जी है।
- बोर मॉडल की ओर: प्रकाश, फोटॉन, स्पेक्ट्रम और बोर का परमाणु – प्रकाश एक विद्युत-चुंबकीय तरंग है: c = νλ और तरंग संख्या ν̄ = 1/λ। पर कुछ बातों के लिए कण चाहिए: प्लांक ने कहा ऊर्जा पैकेट (क्वांटम) में आती है, E = hν। आइंस्टीन ने फोटॉन से प्रकाश-विद्युत प्रभाव समझाया: इलेक्ट्रॉन तभी निकलता है जब hν, कार्य फलन W₀ = hν₀ से ज़्यादा हो; उसकी गतिज ऊर्जा hν − hν₀। परमाणु रेखा स्पेक्ट्रम देते हैं, यानी इलेक्ट्रॉन की ऊर्जाएँ तय हैं। बोर ने इलेक्ट्रॉन को तय कक्षाओं में रखा जहाँ कोणीय संवेग nh/2π; ऊर्जा Eₙ = −2.18 × 10⁻¹⁸ Z²/n² J, त्रिज्या rₙ = 52.9 n²/Z pm। कक्षा बदलने पर फोटॉन निकलता है, 1/λ = R_H(1/n₁² − 1/n₂²) से लाइमन, बामर, पाशन, ब्रैकेट, फुंड श्रेणियाँ मिलती हैं। बोर मॉडल सिर्फ़ एक-इलेक्ट्रॉन वाले कणों पर चलता है।
- तारे और आकाशगंगाएँ: तारे की रोशनी से बिग बैंग तक – तारों के बारे में हम जो भी जानते हैं, वह उनकी रोशनी से आता है। तारे के प्रकाश को स्पेक्ट्रम में तोड़ने पर काली रेखाएँ दिखती हैं, जो बताती हैं कि तारे में कौन-से तत्व हैं। रंग से ताप पता चलता है (नीला = गर्म, लाल = ठंडा), और तारों को O B A F G K M वर्गों में बाँटा जाता है। H-R आरेख में असली चमक को ताप के सामने दिखाते हैं: सूर्य समेत ज़्यादातर तारे मुख्य अनुक्रम पर हैं, दानव तारे ऊपर दाएँ और श्वेत वामन नीचे बाएँ। तारा नीहारिका में जन्म लेता है और द्रव्यमान उसका जीवन तय करता है: सूर्य जैसा तारा लाल दानव, फिर श्वेत वामन बनता है; लगभग 8 सूर्य से भारी तारा महादानव बनकर सुपरनोवा में फटता है और न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल छोड़ता है। तारे आकाशगंगाओं में रहते हैं, जो सर्पिल, दीर्घवृत्ताकार या अनियमित होती हैं। दूरियाँ बहुत बड़ी हैं, इसलिए खगोलीय इकाई, प्रकाश वर्ष और पारसेक काम आते हैं। आकाशगंगाएँ एक-दूसरे से दूर जा रही हैं, दूर वाली और तेज़ (हबल नियम)। यह और कॉस्मिक माइक्रोवेव पृष्ठभूमि (CMB) मिलकर बताते हैं कि लगभग 13.8 अरब वर्ष पहले बिग बैंग हुआ।
- अंतरतारकीय माध्यम: तारों के बीच की गैस, धूल और अणु – अंतरतारकीय माध्यम (ISM) वह बहुत हल्की गैस और धूल है जो तारों के बीच की जगह में फैली है। इसका लगभग 99% भाग गैस (ज़्यादातर हाइड्रोजन और हीलियम) और लगभग 1% सूक्ष्म ठोस धूल-कण हैं। ठंडे, घने बादलों में परमाणु जुड़कर H₂ और CO जैसे अणु बनाते हैं। धूल तारे की रोशनी को सोखती और बिखेरती है, नीली को लाल से ज़्यादा, इसलिए धूल के पीछे का तारा फीका (विलोपन) और ज़्यादा लाल (रक्तिमा) दिखता है।
2. Solar system and Earth
Formation of the solar system · Kepler's laws · Earth-Moon motions · Escape velocity and atmospheres · Evolution of Earth · Elements and compounds of Earth · Magnetosphere and ionosphere
- सौरमंडल – सौरमंडल = सूर्य और वह सब कुछ जिसे उसका गुरुत्व थामे रखता है: 8 ग्रह, उनके चंद्रमा, बौने ग्रह, क्षुद्रग्रह, धूमकेतु और धूल। भीतरी चार ग्रह (बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल) छोटे और चट्टानी हैं। क्षुद्रग्रह पट्टी के बाद विशाल ग्रह: गैस दानव बृहस्पति और शनि, हिम दानव यूरेनस और नेपच्यून। गुरुत्व ग्रहों को सूर्य की ओर खींचता है जबकि वे बगल में चलते हैं, इसलिए वे कक्षा में घूमते हैं; पास वाले तेज़ चलते हैं और उनका वर्ष छोटा होता है। यह सब लगभग 4.6 अरब साल पहले गैस और धूल के घूमते बादल से बना।
- केप्लर के ग्रहीय गति के नियम – केप्लर ने ग्रहों की चाल के तीन नियम दिए। 1) हर ग्रह दीर्घवृत्त (ellipse) में घूमता है और सूर्य उसके एक फोकस पर होता है। 2) सूर्य से ग्रह तक की रेखा बराबर समय में बराबर क्षेत्रफल घेरती है, इसलिए ग्रह सूर्य के पास तेज़ चलता है। 3) परिक्रमण काल का वर्ग (T²) अर्ध-दीर्घ अक्ष के घन (a³) के समानुपाती है। दूसरा नियम असल में कोणीय संवेग का संरक्षण है, और तीसरा नियम न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम से निकलता है।
- गुरुत्व – गुरुत्व वह खिंचाव है जो हर द्रव्यमान दूसरे द्रव्यमान पर लगाता है। पृथ्वी हर वस्तु को अपने केंद्र की ओर खींचती है। मुक्त रूप से गिरती वस्तु की गति हर सेकंड लगभग 9.8 मी/से बढ़ती है (g), और यह उसके द्रव्यमान पर निर्भर नहीं। भार = द्रव्यमान × g, इसलिए भार हर ग्रह पर बदलता है, द्रव्यमान नहीं। बगल से बहुत तेज़ फेंकी गेंद पृथ्वी का चक्कर लगाती है (लगभग 7.9 km/s) और 11.2 km/s पर बाहर निकल जाती है।
- पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास: धूल के बादल से जीवित ग्रह तक – पुराने विचारकों ने कहा कि ग्रह युवा सूर्य के चारों ओर घूमते गैस के बादल से बने (निहारिका परिकल्पना) या पास से गुज़रते तारे ने सूर्य से पदार्थ खींचा। आज वैज्ञानिक ब्रह्मांड को बिग बैंग से समझाते हैं: लगभग 13.7 अरब वर्ष पहले सब कुछ एक छोटे बिंदु से शुरू हुआ और आज भी फैल रहा है। गैस के गुच्छों से तारे बने; सूर्य के चारों ओर की धूल से ग्रह बने। लगभग 4.6 अरब वर्ष पुरानी पृथ्वी गरम और पिघली थी; भारी लोहा डूबकर क्रोड बना और हल्की चट्टान से भूपर्पटी बनी। ज्वालामुखियों की गैसों से शुरुआती हवा बनी, जलवाष्प बरसकर महासागर बनी, और लगभग 3.8 अरब वर्ष पहले महासागरों में जीवन शुरू हुआ।
- पृथ्वी की आंतरिक संरचना: भूकंपीय तरंगें, परतें और ज्वालामुखी – कोई पृथ्वी के केंद्र तक खोद नहीं सकता, इसलिए हम अंदर की जानकारी प्रत्यक्ष स्रोतों (खानों की चट्टान, गहरी खुदाई, लावा) और अप्रत्यक्ष स्रोतों (गहराई के साथ ताप और दबाव, उल्कापिंड, गुरुत्व, चुंबकत्व और सबसे बढ़कर भूकंपीय तरंगें) से लेते हैं। P-तरंगें ठोस और तरल दोनों से गुज़रती हैं; S-तरंगें सिर्फ़ ठोस से। जहाँ तरंगें नहीं पहुँचतीं, वहाँ छाया क्षेत्र बनता है, जो बताता है कि बाहरी क्रोड तरल है। भूकंप परिमाण (रिक्टर) और तीव्रता (मरकैली) से मापा जाता है। पृथ्वी में पतली भूपर्पटी, नरम दुर्बलतामंडल वाला मोटा मैंटल, तरल बाहरी क्रोड और ठोस आंतरिक क्रोड है। सतह तक पहुँचा मैग्मा ज्वालामुखी बनाता है; अंदर ठंडा हुआ मैग्मा बैथोलिथ, सिल, डाइक जैसी अंतर्वेधी आकृतियाँ बनाता है।
- पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र (भू-चुम्बकत्व) – पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र एक तिरछे छड़ चुम्बक जैसा है। इसे बाहरी कोर का बहता तरल लोहा बनाता है (डायनमो)। चुम्बकीय और भौगोलिक उत्तर के बीच का कोण विचलन है; क्षेत्र और ज़मीन के बीच का कोण नमन है (विषुवत पर 0°, चुम्बकीय ध्रुवों पर 90°)। यह क्षेत्र चुम्बकमंडल की ढाल बनाकर सौर पवन को मोड़ता है। कुछ कण ध्रुवों पर उतरकर ओरोरा बनाते हैं।
3. Evolution of life
Chemical evolution · Photosynthetic bacteria and oxygen · Fossils through time · From simple to complex life · Shared genetic code · Alleles and meiosis · Genes and evolution
- विकास: जीवन की उत्पत्ति, क्रियाविधि और मानव विकास – शुरुआती पृथ्वी पर सरल रसायनों से जीवन शुरू हुआ: ओपेरिन और हाल्डेन ने कहा और मिलर ने फ्लास्क में अमीनो अम्ल बनाए। विकास के प्रमाण जीवाश्म, समजात और समरूप अंग, भ्रूण, अणु और आज दिखने वाले बदलाव (औद्योगिक मेलानिनता, दवा प्रतिरोध) से मिलते हैं। डार्विन ने इसे आबादी की विभिन्नता पर प्राकृतिक वरण से समझाया; आधुनिक संश्लेषित सिद्धांत जीन जोड़ता है: उत्परिवर्तन, पुनर्योजन, जीन प्रवाह, आनुवंशिक विचलन और प्राकृतिक वरण अलील आवृत्ति बदलते हैं। अगर इनमें से कुछ न हो, आवृत्तियाँ स्थिर रहती हैं: हार्डी–वाइनबर्ग, p² + 2pq + q² = 1। वरण स्थायीकारी, दिशात्मक या विदारक होता है। एक पूर्वज का कई आवासों में फैलकर कई जातियाँ बनाना अनुकूली विकिरण है (डार्विन की फिंच, ऑस्ट्रेलियाई शिशुधानी)। मनुष्य ड्रायोपिथेकस जैसे कपियों से ऑस्ट्रेलोपिथेकस, होमो हैबिलिस, होमो इरेक्टस और निएंडरथल होते हुए होमो सेपियंस बना।
- पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास: धूल के बादल से जीवित ग्रह तक – पुराने विचारकों ने कहा कि ग्रह युवा सूर्य के चारों ओर घूमते गैस के बादल से बने (निहारिका परिकल्पना) या पास से गुज़रते तारे ने सूर्य से पदार्थ खींचा। आज वैज्ञानिक ब्रह्मांड को बिग बैंग से समझाते हैं: लगभग 13.7 अरब वर्ष पहले सब कुछ एक छोटे बिंदु से शुरू हुआ और आज भी फैल रहा है। गैस के गुच्छों से तारे बने; सूर्य के चारों ओर की धूल से ग्रह बने। लगभग 4.6 अरब वर्ष पुरानी पृथ्वी गरम और पिघली थी; भारी लोहा डूबकर क्रोड बना और हल्की चट्टान से भूपर्पटी बनी। ज्वालामुखियों की गैसों से शुरुआती हवा बनी, जलवाष्प बरसकर महासागर बनी, और लगभग 3.8 अरब वर्ष पहले महासागरों में जीवन शुरू हुआ।
- विकास: नए प्रकार के जीव कैसे बनते हैं – जनन के समय विविधताएँ आती हैं। प्रकृति उन विविधताओं को चुनती है जो जीवित रहने में मदद करें, और कई पीढ़ियों में आबादी बदल जाती है: यही विकास है। सिर्फ़ वंशागत (DNA वाले) बदलाव आगे जाते हैं, उपार्जित नहीं। अलग हुई आबादियाँ नई जातियाँ बन सकती हैं। समजात अंग, समरूप अंग और जीवाश्म बताते हैं कि कौन किससे संबंधित है, और जटिल अंग चरण-दर-चरण बने।
- गुणसूत्र, जीन, एलील और बहुजीनी वंशागति – हर कोशिका के केंद्रक में DNA से बने गुणसूत्र होते हैं। किसी जीव का सारा DNA उसका जीनोम है। जीन DNA का वह टुकड़ा है जो गुणसूत्र पर तय जगह पर होता है; उसके अलग रूप एलील हैं। गुणसूत्र जोड़ों में होते हैं, एक माता से और एक पिता से। अर्धसूत्री विभाजन में हर जोड़ी का एक गुणसूत्र हर युग्मक में जाता है और निषेचन में जोड़ियाँ लौट आती हैं। लंबाई जैसे गुण कई जीनों पर निर्भर (बहुजीनी) होते हैं, इसलिए उनमें सहज बदलाव दिखता है। सब जीव एक ही चार-अक्षरी DNA कोड इस्तेमाल करते हैं।
4. ICT and new materials
Signals and sensors · Kinds of sensors · Digital storage · Colour vision and displays · Energy bands · Doping and devices · Polymers · Mineral resources
- सेंसर: मशीनें दुनिया को कैसे महसूस करती हैं – सेंसर किसी भौतिक राशि (प्रकाश, तापमान, दूरी, नमी, ध्वनि, दाब) को विद्युत संकेत में बदलता है। एनालॉग सेंसर लगातार बदलता वोल्टेज देता है; ADC उसे संख्या में बदलता है जिसे कंप्यूटर समझता है। नियंत्रक संख्या को थ्रेशोल्ड (सीमा) से मिलाकर एक्चुएटर को, अक्सर रिले के ज़रिए, चालू-बंद करता है। तय समय पर बार-बार पढ़ना डेटा लॉगिंग है। अच्छे सेंसर की सही रेंज, संवेदनशीलता, शुद्धता और प्रतिक्रिया-समय होता है।
- कंप्यूटर का मूल संगठन – कंप्यूटर प्रणाली में हार्डवेयर (जिसे छू सकें) और सॉफ़्टवेयर (निर्देश) दोनों होते हैं। इनपुट उपकरण डेटा अंदर लाते हैं, CPU (ALU + कंट्रोल यूनिट + रजिस्टर) उस पर काम करता है, और आउटपुट उपकरण परिणाम देते हैं। मेमोरी एक सीढ़ी जैसी है: रजिस्टर और कैश छोटे पर सबसे तेज़, प्राथमिक मेमोरी (RAM, ROM) चलते प्रोग्राम रखती है, और द्वितीयक भंडारण (HDD, SSD, पेन ड्राइव) डेटा हमेशा के लिए रखता है। 8 बिट = 1 बाइट, और KB से आगे हर इकाई पिछली की 1024 गुना है।
- प्रकाश और रंग: रंग मिलाना, देखना और प्रकाश की ऊर्जा – सफ़ेद प्रकाश कई रंगों का मेल है (लाल से बैंगनी)। प्रकाश जुड़ता है: लाल + हरा + नीला = सफ़ेद (योगात्मक मिश्रण, स्क्रीन में)। रंग घटाते हैं: सियान + मैजेंटा + पीला = लगभग काला (व्यवकलनात्मक मिश्रण)। वस्तु का रंग वही है जो वह लौटाती है; बाक़ी सोख लेती है। आँख में तीन तरह की शंकु कोशिकाएँ हैं। प्रकाश का रंग उसकी ऊर्जा बताता है: E = hf, नीला फ़ोटॉन लाल से ज़्यादा ऊर्जा ले जाता है।
- अर्धचालक और p-n संधि डायोड – अर्धचालक में ऊर्जा अंतराल छोटा (लगभग 1 eV) होता है, इसलिए थोड़ी गर्मी से कुछ इलेक्ट्रॉन मुक्त हो जाते हैं। शुद्ध सिलिकॉन नैज है (इलेक्ट्रॉन = होल)। 5 संयोजकता वाला परमाणु मिलाने से n-प्रकार, 3 वाला मिलाने से p-प्रकार बनता है। p और n जोड़ने पर ह्रास परत और लगभग 0.7 V का विभव प्राचीर बनता है। डायोड अग्र बायस में धारा चलाता है, पश्च में लगभग नहीं, इसलिए यह AC को DC में बदल सकता है।
- बहुलक (Polymers) – बहुलक एक विशाल अणु है जो कई छोटे अणुओं (एकलकों) को लंबी श्रृंखला में जोड़कर बनता है। योगात्मक बहुलकीकरण में C=C द्विबंध वाले एकलक खुलकर जुड़ते हैं और कुछ नहीं निकलता (एथीन → पॉलीएथीन)। संघनन बहुलकीकरण में दोनों सिरों पर क्रियाशील समूह वाले दो तरह के एकलक जुड़ते हैं और हर जोड़ पर पानी जैसा छोटा अणु निकलता है (नायलॉन, पॉलिएस्टर)। प्रकृति भी बहुलक बनाती है: स्टार्च, सेलुलोज़, प्रोटीन, DNA, रबर। अलग-अलग श्रृंखलाएँ थर्मोप्लास्टिक बनाती हैं जो पिघलकर पुनः चक्रित होते हैं; अनुप्रस्थ-बंधित श्रृंखलाएँ थर्मोसेट बनाती हैं जो कभी नहीं पिघलते। ज़्यादातर प्लास्टिक सड़ते नहीं, इसलिए कम इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल और पुनः चक्रण ज़रूरी है।
- प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources) – प्राकृतिक संसाधन वे उपयोगी चीज़ें हैं जो हम प्रकृति से लेते हैं: धूप, पवन, पानी, मिट्टी, वन, खनिज, तेल, गैस और कोयला। नवीकरणीय संसाधन इंसान के जीवनकाल में फिर बन जाते हैं; अनवीकरणीय बनने में करोड़ों साल लगे और उपयोग से ख़त्म होते हैं। संसाधन असमान रूप से बँटे हैं क्योंकि वे वहीं बने जहाँ अतीत में ख़ास भूवैज्ञानिक प्रक्रियाएँ हुईं (पुराने समुद्र, ज्वालामुखी, पर्वत बनना)। इनके उपयोग से ऊर्जा, रोज़गार और सामग्री जैसे लाभ हैं, पर प्रदूषण, आवास का नुकसान और ख़तरे जैसी लागत भी, इसलिए समाज दोनों को तौलकर सतत उपयोग की कोशिश करता है।
5. Human health and technology
Nitrogen fixation and fertiliser · Sustainable food resources · Cell-level health · Bacteria and viruses · Medical devices · Biodiversity value · Cancer
- नाइट्रोजन: तत्व, उसके यौगिक और नाइट्रोजन चक्र – हवा का 78% हिस्सा नाइट्रोजन (N₂) है, पर इसका तिहरा बंधन इतना मज़बूत है कि ज़्यादातर जीव इसे सीधे इस्तेमाल नहीं कर पाते। जड़ की गाँठों के जीवाणु, बिजली और हेबर प्रक्रम इसे अमोनिया में बदलते हैं (स्थिरीकरण)। अमोनिया से नाइट्रिक अम्ल और उर्वरक बनते हैं। प्रकृति में नाइट्रोजन एक चक्र में घूमती है: स्थिरीकरण → नाइट्रीकरण → पौधे → जानवर → अपघटन (अमोनीकरण) → विनाइट्रीकरण से वापस हवा में।
- खाद्य सुरक्षा: हर किसी को, हर दिन भोजन – खाद्य सुरक्षा का मतलब है कि हर व्यक्ति को हर समय सक्रिय और स्वस्थ जीवन के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिले। यह चार स्तंभों पर टिकी है: उपलब्धता (भोजन पैदा हो या आयात हो), पहुँच (लोग उसे ख़रीद या पा सकें), उपयोग (अच्छा पोषण, साफ़ पानी, सुरक्षित पकाना) और स्थिरता (बुरे साल में भी आपूर्ति न टूटे)। दुनिया में भोजन बराबर नहीं बँटा। आबादी, आमदनी और खान-पान बदलने से माँग बढ़ती है, जबकि जलवायु परिवर्तन, पानी की कमी, मिट्टी का कटाव, युद्ध और बर्बादी आपूर्ति घटाते हैं। खाद्य असुरक्षा से भूख, कुपोषण, महँगाई, पलायन और अशांति होती है। सिंचाई, बेहतर बीज, नई तकनीक और बर्बादी घटाकर आपूर्ति बढ़ सकती है, पर लंबे समय के उपाय टिकाऊ और न्यायपूर्ण भी होने चाहिए।
- संक्रामक रोग: रोगाणु कैसे फैलते हैं और हम उन्हें कैसे रोकें – संक्रामक (संचारी) रोग एक बहुत छोटे जीव से होता है, जिसे रोगाणु (pathogen) कहते हैं: बैक्टीरिया, वायरस, कवक या प्रोटिस्ट। यह हवा, पानी-खाना, छूने या मच्छर जैसे वाहक से एक व्यक्ति से दूसरे में जाता है। शरीर त्वचा, बलगम, पेट के अम्ल और श्वेत रक्त कोशिकाओं से लड़ता है। टीका प्रतिरक्षा तंत्र को पहले से तैयार कर देता है। हाथ धोना, साफ पानी, अच्छी तरह पका खाना, मच्छरदानी और बीमार होने पर घर रहना फैलाव कम करते हैं।
- कैंसर: जब कोशिकाएँ बँटना बंद करना भूल जाती हैं – शरीर नई कोशिकाएँ समसूत्री विभाजन (mitosis) से तभी बनाता है जब ज़रूरत हो: बढ़ने, घाव भरने या पुरानी कोशिकाएँ बदलने के लिए। DNA के जीन इसे नियंत्रित करते हैं: आद्य-ऑन्कोजीन (proto-oncogene) एक्सीलरेटर हैं, अर्बुद-दमनकारी जीन (tumour-suppressor) ब्रेक हैं, और कुछ जीन DNA की मरम्मत करते हैं या खराब कोशिका को खुद नष्ट करवाते हैं (एपोप्टोसिस)। कैंसर तब शुरू होता है जब एक कोशिका में इन जीनों में कई उत्परिवर्तन (mutation) जमा हो जाते हैं। कोशिका रुकने का संकेत नहीं मानती और बार-बार बँटती है (1, 2, 4, 8…), जिससे गाँठ बनती है: अर्बुद या ट्यूमर। सुदम्य (benign) ट्यूमर एक जगह झिल्ली में रहता है; घातक (malignant) ट्यूमर आसपास के ऊतक में घुसता है और रक्त या लसीका से दूसरे अंगों तक फैल सकता है (मेटास्टेसिस)। उत्परिवर्तन कैंसरजनों (तंबाकू का धुआँ, UV, X-किरणें, कुछ रसायन, वायु प्रदूषण), कुछ वायरसों (HPV, हेपेटाइटिस B), जीवनशैली (शराब, मोटापा, खराब भोजन), उम्र और कभी-कभी विरासत में मिले जीनों (जैसे BRCA) से होते हैं। बहुत से कैंसर रोके जा सकते हैं और जल्दी पकड़ें तो इलाज अच्छा होता है।
6. Energy and environment
Forms of energy · The Sun as energy source · Efficiency of conversions · Atmosphere and ocean circulation · Fossil fuels and redox · Photosynthesis and carbon · Fossil and nuclear resources · Renewable sources · Solar cells, fuel cells, hybrids
- सौर ऊर्जा: सूर्य से आपके प्लग तक – सूर्य नाभिकीय संलयन से ऊर्जा बनाता है: हाइड्रोजन के नाभिक जुड़कर हीलियम बनाते हैं और थोड़ा-सा द्रव्यमान बहुत ऊर्जा बन जाता है (E = mc²)। गरम सतह (लगभग 5800 K) ज़्यादातर दृश्य प्रकाश देती है (वीन नियम), और कुल शक्ति T⁴ के अनुपात में बढ़ती है (स्टीफ़न नियम)। वायुमंडल के ऊपर सूर्य के सामने हर वर्ग मीटर पर लगभग 1361 W पहुँचता है; साफ़ दिन में ज़मीन पर लगभग 1000 W/m²। तिरछी किरणें बड़े क्षेत्र में फैलती हैं, इसी से अक्षांश और ऋतुओं का फ़र्क है। सौर सेल प्रकाश को बिजली में बदलते हैं: P = तीव्रता × क्षेत्रफल × दक्षता × cos(कोण)। सौर जल तापक प्रकाश को ऊष्मा में बदलते हैं।
- ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) – हर मशीन ऊर्जा को एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। इसका कुछ हिस्सा वह बनता है जो हमें चाहिए (उपयोगी ऊर्जा)। बाकी ज़्यादातर ऊष्मा बनकर बिखर जाता है (व्यर्थ ऊर्जा)। दक्षता = उपयोगी ऊर्जा ÷ कुल दी गई ऊर्जा × 100 %। कोई असली मशीन 100 % तक नहीं पहुँचती। दक्ष यंत्र और कम बर्बादी से पैसा और प्रदूषण दोनों बचते हैं।
- वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ – हवा का वज़न होता है, इसलिए वह नीचे दबाव डालती है: यही वायुदाब है (समुद्र तल पर लगभग 1013 mb)। पवन उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है; दाब प्रवणता बल इसे धकेलता है, कोरिऑलिस बल मोड़ता है (उत्तर में दाएँ, दक्षिण में बाएँ) और घर्षण ज़मीन के पास धीमा करता है। असमान गर्मी से दाब पेटियाँ बनती हैं (विषुवतीय निम्न, उपोष्ण उच्च, उपध्रुवीय निम्न, ध्रुवीय उच्च) और तीन कोष्ठ, जिनसे भूमंडलीय पवनें चलती हैं: व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें, ध्रुवीय पूर्वी पवनें। ऋतु के साथ पेटियाँ खिसकती हैं और मानसून जैसी मौसमी पवनें बनती हैं; स्थानीय पवनों में स्थल-समुद्र समीर और पर्वत-घाटी समीर हैं। एक जैसी गर्मी और नमी वाली विशाल हवा वायुराशि है; दो वायुराशियों की सीमा वाताग्र है। चक्रवात निम्न दाब वाले तूफ़ान हैं: उष्णकटिबंधीय गरम समुद्र पर, शीतोष्ण वाताग्रों पर बनते हैं। तड़ितझंझा और टॉरनेडो छोटे पर बहुत तेज़ तूफ़ान हैं।
- अपचयोपचय अभिक्रियाएँ: ऑक्सीजन से इलेक्ट्रॉन तक – पहले ऑक्सीकरण का मतलब था ऑक्सीजन जुड़ना या हाइड्रोजन हटना। अपचयन इसका उल्टा था। आज हम बड़ा विचार लेते हैं: इलेक्ट्रॉन खोना ऑक्सीकरण है और इलेक्ट्रॉन पाना अपचयन। दोनों हमेशा साथ होते हैं, इसलिए इन्हें अपचयोपचय (रेडॉक्स) अभिक्रिया कहते हैं। ज़्यादा सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु के आयन को इलेक्ट्रॉन देती है।
- कार्बन चक्र: कार्बन कहाँ रहता है और कैसे घूमता है – कार्बन हवा, जीवों, मिट्टी, महासागर और चट्टानों के बीच घूमता रहता है। इन जगहों को भंडार कहते हैं और कार्बन के आने-जाने को प्रवाह। प्रकाश संश्लेषण हवा से कार्बन डाइऑक्साइड निकालता है; श्वसन, अपघटन और दहन उसे वापस देते हैं। महासागर बहुत बड़ी मात्रा में कार्बन लेता और छोड़ता है। लाखों सालों में कार्बन चट्टानों और जीवाश्म ईंधन में बंद हो जाता है, और ज्वालामुखी व अपक्षय उसे धीरे-धीरे लौटाते हैं। आज मनुष्य ईंधन जलाकर और जंगल काटकर इतना कार्बन जोड़ रहे हैं कि प्राकृतिक भंडार उसे सोख नहीं पाते, इसलिए हवा में CO₂ बढ़ रही है और पृथ्वी गरम हो रही है।
- नाभिकीय विखंडन और संलयन – विखंडन (fission) यानी किसी बड़े, अस्थिर नाभिक जैसे यूरेनियम-235 या प्लूटोनियम-239 का टूटना। नाभिक एक धीमा न्यूट्रॉन सोखता है, दो छोटे नाभिकों में टूटता है और 2–3 न्यूट्रॉन, गामा किरणें और बहुत ऊर्जा छोड़ता है। नए न्यूट्रॉन और नाभिक तोड़ सकते हैं: शृंखला अभिक्रिया। रिएक्टर में मंदक न्यूट्रॉन को धीमा करता है और नियंत्रण छड़ें कुछ न्यूट्रॉन सोख लेती हैं, ताकि अभिक्रिया स्थिर रहे। संलयन (fusion) यानी दो हल्के नाभिकों, जैसे हाइड्रोजन, का जुड़कर भारी नाभिक, जैसे हीलियम, बनाना। थोड़ा द्रव्यमान ऊर्जा बन जाता है। सूर्य और तारे संलयन से चमकते हैं, पर इसके लिए बहुत ऊँचा ताप और दाब चाहिए।
- ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोत – अनवीकरणीय स्रोत (कोयला, तेल, गैस, यूरेनियम) प्रकृति के बनाने से तेज़ खर्च होते हैं, और जीवाश्म ईंधन CO₂ छोड़ते हैं। नवीकरणीय स्रोत प्रकृति फिर से भरती है: सौर (फ़ोटोवोल्टिक सेल और सौर तापन), पवन (P ∝ v³), जलविद्युत (P = η ρ g h Q), ज्वारीय, भूतापीय और जैव भार। हाइड्रोजन ईंधन सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बिजली और पानी बनाता है। धूप और हवा बदलती रहती हैं, इसलिए भंडारण (बैटरी, पंप किया पानी) और कई स्रोतों का मिश्रण चाहिए। हर स्रोत की कुछ क़ीमत है: ज़मीन, सामग्री, लागत और प्रकृति पर असर।