केप्लर कौन थे, उन्होंने क्या खोजा?
पहले लोग मानते थे कि ग्रह पूरे गोल घेरे में घूमते हैं। टाइको ब्राहे ने कई साल तक ग्रहों को देखकर बहुत सही आँकड़े लिखे। केप्लर ने इन आँकड़ों को जाँचा और तीन आसान नियम पाए। इन्हें केप्लर के नियम कहते हैं।
केप्लर को यह नहीं पता था कि ये नियम क्यों सही हैं। बाद में न्यूटन ने दिखाया कि तीनों नियम एक ही बल से आते हैं: गुरुत्वाकर्षण।
पहला नियम: कक्षाओं का नियम
हर ग्रह दीर्घवृत्ताकार कक्षा में घूमता है और सूर्य उसके एक फोकस पर होता है।
दीर्घवृत्त एक खिंचा हुआ वृत्त है। इसके अंदर दो खास बिंदु होते हैं, इन्हें नाभियाँ (foci) कहते हैं। दीर्घवृत्त के किसी भी बिंदु से दोनों नाभियों की दूरियों का जोड़ हमेशा बराबर रहता है।
- सबसे लंबी चौड़ाई = दीर्घ अक्ष। उसका आधा = अर्ध-दीर्घ अक्ष a।
- सूर्य के सबसे पास का बिंदु = उपसौर (perihelion), सबसे दूर = अपसौर (aphelion)।
- कितना खिंचा है, यह बताती है उत्केंद्रता e। e = 0 मतलब वृत्त। पृथ्वी की e ≈ 0.017, यानी लगभग गोल।
उपसौर दूरी = a(1 − e), अपसौर दूरी = a(1 + e)।
दूसरा नियम: क्षेत्रफलों का नियम
सूर्य और ग्रह को मिलाने वाली रेखा बराबर समय में बराबर क्षेत्रफल घेरती है।
सूर्य के पास रेखा छोटी है, इसलिए उतना ही क्षेत्रफल घेरने के लिए ग्रह को ज़्यादा दूरी चलनी पड़ती है, यानी वह तेज़ चलता है। दूर रेखा लंबी है, इसलिए थोड़ा चलकर ही उतना क्षेत्रफल बन जाता है, यानी वह धीमा चलता है।
यह सही क्यों है: कोणीय संवेग
छोटे समय Δt में घेरा गया पतला टुकड़ा लगभग त्रिभुज है: ΔA = ½ r² Δθ। इसलिए क्षेत्रीय वेग
ΔA/Δt = ½ r² ω = L / (2m), जहाँ L = m r² ω कोणीय संवेग है।
गुरुत्व बल सीधे सूर्य की ओर है, इसलिए सूर्य के परितः बल-आघूर्ण शून्य है (r और F एक ही रेखा पर)। बल-आघूर्ण शून्य तो L नियत। L नियत तो क्षेत्रीय वेग नियत। यही दूसरा नियम है।
उपयोगी बात: उपसौर और अपसौर पर वेग r के लंबवत होता है, इसलिए v_p r_p = v_a r_a।
तीसरा नियम: परिक्रमण कालों का नियम
ग्रह के परिक्रमण काल का वर्ग उसकी कक्षा के अर्ध-दीर्घ अक्ष के घन के समानुपाती है: T² ∝ a³।
यानी सूर्य के सब ग्रहों के लिए T²/a³ एक ही संख्या है। दोगुनी दूरी वाला ग्रह लगभग 2.83 गुना समय लेता है।
न्यूटन के नियम से तीसरा नियम (वृत्तीय कक्षा)
- द्रव्यमान m का ग्रह, सूर्य (द्रव्यमान M) के चारों ओर r त्रिज्या में घूमता है। गुरुत्व ही अभिकेंद्र बल देता है: GMm/r² = m v²/r।
- इसलिए v² = GM/r।
- एक चक्कर का समय T = 2πr/v, तो T² = 4π²r²/v² = 4π²r³/GM।
- T² = (4π²/GM) r³। कोष्ठक में सिर्फ़ सूर्य की बात है, इसलिए T² ∝ r³।
इसी से सूर्य या किसी ग्रह का द्रव्यमान निकलता है: M = 4π²r³/(G T²)।
घर पर करके देखो: दीर्घवृत्त बनाओ
एक गत्ते पर 8 cm दूरी पर दो पिन लगाओ। लगभग 24 cm धागे का फंदा बनाकर दोनों पिन पर डालो। पेंसिल को फंदे में रखकर धागा तना रखते हुए घुमाओ। दीर्घवृत्त बन जाएगा। पिन ही दोनों नाभियाँ हैं। पिन पास लाओ तो आकार गोल होता जाता है (e कम)। दोनों एक जगह हों तो वृत्त बनता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- नियम 1: कक्षा दीर्घवृत्त, सूर्य एक फोकस पर
- r_min = a(1 − e), r_max = a(1 + e)
- नियम 2: ΔA/Δt = L/(2m) = नियत
- v_p r_p = v_a r_a
- नियम 3: T² ∝ a³, T₁²/T₂² = a₁³/a₂³
- T² = (4π²/GM) a³
हल किए गए उदाहरण
1. किसी ग्रह की कक्षा का a = 4 AU है। उसका परिक्रमण काल वर्षों में निकालो (पृथ्वी: a = 1 AU, T = 1 वर्ष)।
T²/a³ बराबर है: T² = 1 × 4³ = 64, तो T = 8 वर्ष।
2. मंगल सूर्य से लगभग 1.52 AU दूर है। उसका वर्ष कितना होगा?
T = a^1.5 = 1.52 × √1.52 ≈ 1.52 × 1.233 ≈ 1.87 वर्ष (लगभग 687 दिन)।
3. एक धूमकेतु उपसौर पर 0.5 AU और अपसौर पर 35 AU दूर है। उपसौर पर चाल 60 km/s है। अपसौर पर चाल?
v_p r_p = v_a r_a, तो v_a = 60 × 0.5 / 35 ≈ 0.86 km/s।
4. a = 10 AU और e = 0.6 वाली कक्षा में सूर्य से सबसे कम और सबसे ज़्यादा दूरी निकालो।
r_min = 10 × (1 − 0.6) = 4 AU, r_max = 10 × 1.6 = 16 AU।
5. एक ग्रह के दो उपग्रह हैं। पहले की त्रिज्या r, काल 2 घंटे। दूसरे की त्रिज्या 4r है। उसका काल?
T₂/T₁ = 4^1.5 = 8, तो T₂ = 16 घंटे।
6. चंद्रमा 3.84 × 10⁸ m दूरी पर 27.3 दिन (2.36 × 10⁶ s) में पृथ्वी का चक्कर लगाता है। पृथ्वी का द्रव्यमान निकालो। (G = 6.67 × 10⁻¹¹)
M = 4π²r³/(GT²)। r³ = 5.66 × 10²⁵, 4π²r³ ≈ 2.24 × 10²⁷, GT² ≈ 371.5। M ≈ 6.0 × 10²⁴ kg।
7. दिखाओ कि ग्रह का क्षेत्रीय वेग L/(2m) है।
dt समय में त्रिज्या dθ घूमती है। dA = ½ r (r dθ) = ½ r² dθ, तो dA/dt = ½ r² ω। L = m r² ω, इसलिए dA/dt = L/(2m)।
आम गलतियाँ
- सूर्य को दीर्घवृत्त के केंद्र पर मानना। सूर्य एक नाभि (फोकस) पर होता है, दूसरी नाभि खाली रहती है।
- दूसरे नियम को 'बराबर समय में बराबर दूरी' समझना। नियम बराबर क्षेत्रफल का है, दूरियाँ अलग होती हैं।
- T ∝ a³ या T² ∝ a² लिख देना। सही है T² ∝ a³।
- अलग-अलग तारों के ग्रहों के लिए T²/a³ बराबर मान लेना। नियतांक 4π²/GM हर केंद्रीय पिंड के लिए अलग है।