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केप्लर के ग्रहीय गति के नियम

केप्लर ने ग्रहों की चाल के तीन नियम दिए। 1) हर ग्रह दीर्घवृत्त (ellipse) में घूमता है और सूर्य उसके एक फोकस पर होता है। 2) सूर्य से ग्रह तक की रेखा बराबर समय में बराबर क्षेत्रफल घेरती है, इसलिए ग्रह सूर्य के पास तेज़ चलता है। 3) परिक्रमण काल का वर्ग (T²) अर्ध-दीर्घ अक्ष के घन (a³) के समानुपाती है। दूसरा नियम असल में कोणीय संवेग का संरक्षण है, और तीसरा नियम न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम से निकलता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. नीले ग्रह को देखो। इसका रास्ता गोल नहीं, थोड़ा खिंचा हुआ है। इसे दीर्घवृत्त कहते हैं। सूर्य बीच में नहीं, एक खास बिंदु पर है, जिसे फोकस कहते हैं।
  2. अब चाल देखो। सूर्य के पास ग्रह दौड़ता है। दूर जाकर धीमा हो जाता है। लेबल पर तेज़ और धीमा लिखा है।
  3. दो रंगीन टुकड़े देखो। दोनों बराबर समय में घेरे गए हैं। एक छोटा-चौड़ा, दूसरा लंबा-पतला। पर दोनों का क्षेत्रफल बराबर है। यही क्षेत्रफल का नियम है।
  4. अब दो ग्रह हैं। बाहर वाले की कक्षा बड़ी है, उसे बहुत ज़्यादा समय लगता है। दोनों के लिए T² ÷ a³ एक ही संख्या आती है।
  5. एक हल किया उदाहरण। ग्रह पृथ्वी से 4 गुना दूर है (a = 4 AU)। बटन दबाओ और लाइन-दर-लाइन उसका साल निकालो।
  6. अब तुम्हारी बारी। कक्षा का आकार a और खिंचाव e बदलो। समय T और चाल बदलते देखो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

कक्षा दीर्घवृत्त है, फिर सवालों में उसे वृत्त क्यों मानते हैं?

ज़्यादातर ग्रहों की उत्केंद्रता बहुत कम है (पृथ्वी की 0.017), इसलिए कक्षा लगभग गोल है। वृत्त भी e = 0 वाला दीर्घवृत्त ही है, तो तीनों नियम लागू रहते हैं, a = त्रिज्या।

कोई आगे धक्का नहीं दे रहा, फिर ग्रह सूर्य के पास तेज़ क्यों होता है?

अंदर आते समय गुरुत्व का एक हिस्सा गति की दिशा में होता है, जैसे ढलान पर लुढ़कती गेंद तेज़ होती है। बाहर जाते समय वह धीमा होता है, जैसे चढ़ाई पर। कोणीय संवेग नियत रहना बताता है कि कितना।

टुकड़े इतने अलग दिखते हैं, क्या सच में क्षेत्रफल बराबर है?

हाँ। पास वाला टुकड़ा छोटा और चौड़ा है, दूर वाला लंबा और पतला। क्षेत्रफल = ½ × r² × कोण। छोटे r वाले का कोण बड़ा है, दोनों बराबर हो जाते हैं।

क्या तीसरा नियम ग्रह के द्रव्यमान पर निर्भर है?

नहीं। T² = (4π²/GM) a³ में सिर्फ़ सूर्य का द्रव्यमान M है। एक ही a पर छोटा क्षुद्रग्रह और बड़ा ग्रह, दोनों का काल बराबर।

1 AU क्या है?

एक खगोलीय इकाई = पृथ्वी से सूर्य की औसत दूरी, लगभग 1.5 × 10¹¹ m। AU और वर्ष लें तो सूर्य के ग्रहों के लिए सीधे T² = a³।

केप्लर कौन थे, उन्होंने क्या खोजा?

पहले लोग मानते थे कि ग्रह पूरे गोल घेरे में घूमते हैं। टाइको ब्राहे ने कई साल तक ग्रहों को देखकर बहुत सही आँकड़े लिखे। केप्लर ने इन आँकड़ों को जाँचा और तीन आसान नियम पाए। इन्हें केप्लर के नियम कहते हैं।

केप्लर को यह नहीं पता था कि ये नियम क्यों सही हैं। बाद में न्यूटन ने दिखाया कि तीनों नियम एक ही बल से आते हैं: गुरुत्वाकर्षण।

पहला नियम: कक्षाओं का नियम

हर ग्रह दीर्घवृत्ताकार कक्षा में घूमता है और सूर्य उसके एक फोकस पर होता है।

दीर्घवृत्त एक खिंचा हुआ वृत्त है। इसके अंदर दो खास बिंदु होते हैं, इन्हें नाभियाँ (foci) कहते हैं। दीर्घवृत्त के किसी भी बिंदु से दोनों नाभियों की दूरियों का जोड़ हमेशा बराबर रहता है।

उपसौर दूरी = a(1 − e), अपसौर दूरी = a(1 + e)।

दूसरा नियम: क्षेत्रफलों का नियम

सूर्य और ग्रह को मिलाने वाली रेखा बराबर समय में बराबर क्षेत्रफल घेरती है।

सूर्य के पास रेखा छोटी है, इसलिए उतना ही क्षेत्रफल घेरने के लिए ग्रह को ज़्यादा दूरी चलनी पड़ती है, यानी वह तेज़ चलता है। दूर रेखा लंबी है, इसलिए थोड़ा चलकर ही उतना क्षेत्रफल बन जाता है, यानी वह धीमा चलता है।

यह सही क्यों है: कोणीय संवेग

छोटे समय Δt में घेरा गया पतला टुकड़ा लगभग त्रिभुज है: ΔA = ½ r² Δθ। इसलिए क्षेत्रीय वेग

ΔA/Δt = ½ r² ω = L / (2m), जहाँ L = m r² ω कोणीय संवेग है।

गुरुत्व बल सीधे सूर्य की ओर है, इसलिए सूर्य के परितः बल-आघूर्ण शून्य है (r और F एक ही रेखा पर)। बल-आघूर्ण शून्य तो L नियत। L नियत तो क्षेत्रीय वेग नियत। यही दूसरा नियम है।

उपयोगी बात: उपसौर और अपसौर पर वेग r के लंबवत होता है, इसलिए v_p r_p = v_a r_a।

तीसरा नियम: परिक्रमण कालों का नियम

ग्रह के परिक्रमण काल का वर्ग उसकी कक्षा के अर्ध-दीर्घ अक्ष के घन के समानुपाती है: T² ∝ a³।

यानी सूर्य के सब ग्रहों के लिए T²/a³ एक ही संख्या है। दोगुनी दूरी वाला ग्रह लगभग 2.83 गुना समय लेता है।

न्यूटन के नियम से तीसरा नियम (वृत्तीय कक्षा)

  1. द्रव्यमान m का ग्रह, सूर्य (द्रव्यमान M) के चारों ओर r त्रिज्या में घूमता है। गुरुत्व ही अभिकेंद्र बल देता है: GMm/r² = m v²/r।
  2. इसलिए v² = GM/r।
  3. एक चक्कर का समय T = 2πr/v, तो T² = 4π²r²/v² = 4π²r³/GM।
  4. T² = (4π²/GM) r³। कोष्ठक में सिर्फ़ सूर्य की बात है, इसलिए T² ∝ r³।

इसी से सूर्य या किसी ग्रह का द्रव्यमान निकलता है: M = 4π²r³/(G T²)।

घर पर करके देखो: दीर्घवृत्त बनाओ

एक गत्ते पर 8 cm दूरी पर दो पिन लगाओ। लगभग 24 cm धागे का फंदा बनाकर दोनों पिन पर डालो। पेंसिल को फंदे में रखकर धागा तना रखते हुए घुमाओ। दीर्घवृत्त बन जाएगा। पिन ही दोनों नाभियाँ हैं। पिन पास लाओ तो आकार गोल होता जाता है (e कम)। दोनों एक जगह हों तो वृत्त बनता है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. किसी ग्रह की कक्षा का a = 4 AU है। उसका परिक्रमण काल वर्षों में निकालो (पृथ्वी: a = 1 AU, T = 1 वर्ष)।

T²/a³ बराबर है: T² = 1 × 4³ = 64, तो T = 8 वर्ष।

2. मंगल सूर्य से लगभग 1.52 AU दूर है। उसका वर्ष कितना होगा?

T = a^1.5 = 1.52 × √1.52 ≈ 1.52 × 1.233 ≈ 1.87 वर्ष (लगभग 687 दिन)।

3. एक धूमकेतु उपसौर पर 0.5 AU और अपसौर पर 35 AU दूर है। उपसौर पर चाल 60 km/s है। अपसौर पर चाल?

v_p r_p = v_a r_a, तो v_a = 60 × 0.5 / 35 ≈ 0.86 km/s।

4. a = 10 AU और e = 0.6 वाली कक्षा में सूर्य से सबसे कम और सबसे ज़्यादा दूरी निकालो।

r_min = 10 × (1 − 0.6) = 4 AU, r_max = 10 × 1.6 = 16 AU।

5. एक ग्रह के दो उपग्रह हैं। पहले की त्रिज्या r, काल 2 घंटे। दूसरे की त्रिज्या 4r है। उसका काल?

T₂/T₁ = 4^1.5 = 8, तो T₂ = 16 घंटे।

6. चंद्रमा 3.84 × 10⁸ m दूरी पर 27.3 दिन (2.36 × 10⁶ s) में पृथ्वी का चक्कर लगाता है। पृथ्वी का द्रव्यमान निकालो। (G = 6.67 × 10⁻¹¹)

M = 4π²r³/(GT²)। r³ = 5.66 × 10²⁵, 4π²r³ ≈ 2.24 × 10²⁷, GT² ≈ 371.5। M ≈ 6.0 × 10²⁴ kg।

7. दिखाओ कि ग्रह का क्षेत्रीय वेग L/(2m) है।

dt समय में त्रिज्या dθ घूमती है। dA = ½ r (r dθ) = ½ r² dθ, तो dA/dt = ½ r² ω। L = m r² ω, इसलिए dA/dt = L/(2m)।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. केप्लर के पहले नियम के अनुसार सूर्य होता है:
2. केप्लर का दूसरा नियम किसके संरक्षण से आता है?
3. ग्रह सबसे तेज़ कहाँ चलता है?
4. कक्षा की त्रिज्या 9 गुनी करने पर परिक्रमण काल हो जाएगा:
5. वृत्तीय कक्षा के लिए T² बराबर है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केप्लर के तीन नियम छोटे में क्या हैं?

1) कक्षा दीर्घवृत्त, सूर्य एक नाभि पर। 2) बराबर समय में बराबर क्षेत्रफल। 3) T² ∝ a³।

केप्लर का दूसरा नियम किस संरक्षण नियम से आता है?

कोणीय संवेग संरक्षण से, क्योंकि गुरुत्व केंद्रीय बल है और सूर्य के परितः आघूर्ण नहीं देता।

केप्लर का तीसरा नियम कैसे निकालते हैं?

GMm/r² = mv²/r रखो और v = 2πr/T लगाओ। T² = (4π²/GM) r³ मिलता है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

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