Germany Jahrgangsstufe 11 Physics
अध्याय: 4
1. Circular motion
Circular motion and gravitation
- अभिकेंद्र बल, समतल सड़क और ढालू सड़क पर कार – वृत्त में चलती वस्तु की दिशा लगातार बदलती है, इसलिए उसे केंद्र की ओर नेट बल चाहिए: अभिकेंद्र बल F = mv²/r. यह कोई नया बल नहीं; तनाव, गुरुत्व, घर्षण या अभिलंब बल का हिस्सा इसे देता है। समतल सड़क पर सिर्फ़ घर्षण देता है, इसलिए vmax = √(μs r g). θ कोण पर ढालू सड़क पर अभिलंब बल का हिस्सा भी मदद करता है: घर्षण के बिना आदर्श चाल v₀ = √(r g tanθ), और घर्षण के साथ vmax = √[r g (μs + tanθ)/(1 − μs tanθ)].
2. Oscillations and waves
Oscillations and waves
- सरल आवर्त गति (SHM) – जो गति तय समय के बाद बार-बार दोहराती है, वह आवर्ती गति है। अगर वस्तु बीच की जगह के इधर-उधर आती-जाती है और वापस खींचने वाला बल दूरी के अनुपात में है (F = −kx), तो वह सरल आवर्त गति है। इसकी स्थिति x = A sin(ωt + φ) है, जहाँ ω = 2π/T = 2πf। बीच में चाल सबसे ज़्यादा, सिरों पर त्वरण सबसे ज़्यादा, और कुल ऊर्जा ½kA² हमेशा वही रहती है।
3. Independent work on physics topics
Astronomical world views · Introduction to special relativity · Energy supply
- केप्लर के ग्रहीय गति के नियम – केप्लर ने ग्रहों की चाल के तीन नियम दिए। 1) हर ग्रह दीर्घवृत्त (ellipse) में घूमता है और सूर्य उसके एक फोकस पर होता है। 2) सूर्य से ग्रह तक की रेखा बराबर समय में बराबर क्षेत्रफल घेरती है, इसलिए ग्रह सूर्य के पास तेज़ चलता है। 3) परिक्रमण काल का वर्ग (T²) अर्ध-दीर्घ अक्ष के घन (a³) के समानुपाती है। दूसरा नियम असल में कोणीय संवेग का संरक्षण है, और तीसरा नियम न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम से निकलता है।
- विशेष आपेक्षिकता (Special Relativity) – विशेष आपेक्षिकता (आइंस्टीन, 1905) दो अभिधारणाओं पर टिकी है: सभी जड़त्वीय निर्देश-तंत्रों में भौतिकी के नियम एक-से हैं, और निर्वात में प्रकाश की चाल c ≈ 3.00 × 10⁸ m/s हर प्रेक्षक के लिए एक-सी है। इससे निकलता है कि चलती घड़ी धीमी चलती है (t = γt₀), चलती वस्तु गति की दिशा में छोटी दिखती है (L = L₀/γ), और द्रव्यमान ऊर्जा का रूप है (E = mc²), जहाँ γ = 1/√(1 − v²/c²)। रोज़ की चाल पर γ ≈ 1, इसलिए न्यूटन की यांत्रिकी काम करती है; c के पास वह असफल होती है।
- खनिज तथा ऊर्जा संसाधन – खनिज चट्टानों में मिलने वाले प्राकृतिक पदार्थ हैं। ये धात्विक (लौह या अलौह), अधात्विक या ऊर्जा खनिज होते हैं। ऊर्जा पारंपरिक स्रोतों (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बिजली) और गैर-पारंपरिक स्रोतों (सूर्य, पवन, परमाणु, बायोगैस, ज्वार, भूतापीय) से मिलती है। दोनों का संरक्षण ज़रूरी है।
4. Profile area (science-technology school, 27 h)
Numerical modelling: method of small steps · Photovoltaics in practice · Extra-curricular physics activity · Applied physics projects
- संख्यात्मक विधियाँ: मूल और क्षेत्रफल कदम-दर-कदम – कुछ समीकरण और क्षेत्रफल किसी आसान सूत्र से नहीं निकलते। संख्यात्मक विधियाँ आसान कदमों को बार-बार दोहराकर उत्तर के जितना चाहो उतना पास पहुँचती हैं: चिह्न परिवर्तन जाँचो, अंतराल आधा करो (समद्विभाजन), स्पर्शरेखा पर फिसलो (न्यूटन-रैफ़सन), x = g(x) दोहराओ (स्थिर-बिंदु पुनरावृत्ति), क्षेत्रफल के लिए समलंब जोड़ो, और ढलान पर छोटे कदम चलो (ऑयलर)।
- सौर ऊर्जा: सूर्य से आपके प्लग तक – सूर्य नाभिकीय संलयन से ऊर्जा बनाता है: हाइड्रोजन के नाभिक जुड़कर हीलियम बनाते हैं और थोड़ा-सा द्रव्यमान बहुत ऊर्जा बन जाता है (E = mc²)। गरम सतह (लगभग 5800 K) ज़्यादातर दृश्य प्रकाश देती है (वीन नियम), और कुल शक्ति T⁴ के अनुपात में बढ़ती है (स्टीफ़न नियम)। वायुमंडल के ऊपर सूर्य के सामने हर वर्ग मीटर पर लगभग 1361 W पहुँचता है; साफ़ दिन में ज़मीन पर लगभग 1000 W/m²। तिरछी किरणें बड़े क्षेत्र में फैलती हैं, इसी से अक्षांश और ऋतुओं का फ़र्क है। सौर सेल प्रकाश को बिजली में बदलते हैं: P = तीव्रता × क्षेत्रफल × दक्षता × cos(कोण)। सौर जल तापक प्रकाश को ऊष्मा में बदलते हैं।