संख्यात्मक विधियों की ज़रूरत क्यों
कुछ समीकरण, जैसे x³ − x − 1 = 0 या eˣ = 3x, के लिए x का कोई आसान सूत्र नहीं है। संख्यात्मक विधि आसान कदमों का ऐसा समूह है जिसे दोहराकर हम उत्तर के और पास पहुँचते हैं। हर दोहराव को पुनरावृत्ति (iteration) कहते हैं।
चिह्न परिवर्तन
अगर f(x) अंतराल [a, b] पर सतत (continuous) है (कोई टूट या उछाल नहीं), और f(a) व f(b) के चिह्न उलटे हैं, तो a और b के बीच कम से कम एक मूल है।
उदाहरण: f(1) = −1 और f(2) = 5, तो x³ − x − 1 = 0 का एक मूल 1 और 2 के बीच है।
जब चिह्न जाँच धोखा देती है
- दो मूल बहुत पास: चिह्न दो बार बदलकर ऐसा लगे कि बदला ही नहीं।
- दोहरा मूल जो अक्ष को बस छूता है (जैसे y = (x − 2)²): चिह्न बदलता ही नहीं।
- टूट (अनंतस्पर्शी) जैसे y = 1/x, x = 0 पर चिह्न बदलता है पर वहाँ मूल नहीं है।
यह दिखाने के लिए कि मूल 2 दशमलव तक 1.32 है, जाँचो कि f(1.315) और f(1.325) के चिह्न उलटे हैं।
मूल निकालना: समद्विभाजन, न्यूटन-रैफ़सन और स्थिर-बिंदु पुनरावृत्ति
अंतराल समद्विभाजन
ऐसे [a, b] से शुरू करो जहाँ चिह्न बदलता है। बीच का बिंदु m = (a + b) ÷ 2 निकालो। वह आधा रखो जिसमें अब भी चिह्न बदलता है। हर कदम चौड़ाई आधी करता है, इसलिए यह हमेशा चलता है, पर धीमा है: एक और सही दशमलव अंक के लिए लगभग 3–4 बार आधा करना पड़ता है।
न्यूटन-रैफ़सन
xₙ₊₁ = xₙ − f(xₙ) ÷ f′(xₙ)
xₙ पर स्पर्शरेखा एक सीधी रेखा है जो वक्र से चिपकी रहती है। वह x-अक्ष को जहाँ काटे, वही अगला अनुमान है। मूल के पास हर कदम में सही अंक लगभग दोगुने होते हैं। अगर f′(xₙ) = 0 हो (सपाट स्पर्शरेखा) या शुरुआत बहुत दूर हो, तो यह विफल हो सकती है।
स्थिर-बिंदु पुनरावृत्ति
f(x) = 0 को x = g(x) में बदलो और xₙ₊₁ = g(xₙ) दोहराओ। y = x और y = g(x) के ग्राफ़ पर यह सीढ़ी या मकड़जाल (cobweb) बनाता है। मूल के पास |g′(x)| < 1 हो तो अभिसरण होता है। x³ − x − 1 = 0 के लिए x = ∛(x + 1) चलता है, पर x = x³ − 1 नहीं।
एल्गोरिद्म के रूप में
कंप्यूटर में समद्विभाजन एक लूप है: जब तक b − a > सहनशीलता: m = (a + b)/2; अगर f(a)·f(m) < 0 तो b = m वरना a = m। हर मान को सूची (list) में रखने से अनुमानों का अनुक्रम दिखता है।
संख्यात्मक समाकलन: समलंब नियम
∫ₐᵇ f(x) dx का अनुमान लगाने के लिए [a, b] को n पट्टियों में बाँटो, हर पट्टी की चौड़ाई h = (b − a) ÷ n। ऊपरी बिंदुओं को सीधी रेखाओं से जोड़ो, तो हर पट्टी समलंब बन जाती है।
क्षेत्रफल ≈ (h ÷ 2) × [y₀ + yₙ + 2(y₁ + y₂ + … + yₙ₋₁)]
पहली और आख़िरी ऊँचाई एक बार आती है; बीच की हर ऊँचाई दो पट्टियों में साझी है, इसलिए दो बार गिनी जाती है।
- वक्र ऊपर की ओर मुड़ा हो (उत्तल, जैसे y = x²) तो सीधी रेखाएँ ऊपर रहती हैं: ज़्यादा अनुमान।
- नीचे की ओर मुड़ा हो (अवतल, जैसे y = √x) तो कम अनुमान।
- n दोगुना करने से त्रुटि लगभग 4 गुना कम।
और नियम भी हैं: मध्य-कोटि नियम आयत लेता है, और सिम्पसन नियम सीधी रेखा की जगह परवलय लेता है।
छोटे कदम: गति और वृद्धि के लिए ऑयलर विधि
अक्सर हमें बदलाव का नियम (अवकल समीकरण) पता होता है, जैसे dy/dx = f(x, y), और शुरुआती मान। ऑयलर विधि h आकार के कदमों में आगे बढ़ती है:
xₙ₊₁ = xₙ + h, yₙ₊₁ = yₙ + h × f(xₙ, yₙ)
भौतिकी में इसे छोटे कदमों की विधि कहते हैं: हर छोटे समय Δt में, नया वेग = पुराना वेग + a × Δt, और नई स्थिति = पुरानी स्थिति + v × Δt। स्प्रेडशीट या छोटा प्रोग्राम इसे हज़ारों बार दोहराकर हवा के प्रतिरोध वाली गिरती गेंद या ठंडी होती चाय का मॉडल बनाता है।
छोटे कदम बेहतर उत्तर देते हैं पर मेहनत ज़्यादा। त्रुटियाँ भी कदम-दर-कदम जुड़ती हैं, इसलिए h आधा करके जाँचो कि उत्तर बदलता है या नहीं।
त्रुटि, शुद्धता और विधि चुनना
- निरपेक्ष त्रुटि = |अनुमान − सही मान|। सापेक्ष त्रुटि = निरपेक्ष त्रुटि ÷ |सही मान| (अक्सर % में)।
- पूर्णांकन त्रुटि कुछ ही अंक रखने से आती है; छँटाई (truncation) त्रुटि विधि जल्दी रोकने या वक्र की जगह सीधी रेखा लेने से।
- अगर अनुमान एक मान पर टिक जाएँ, तो विधि अभिसारी (converges) है।
| विधि | गति | हमेशा चलती है? |
|---|---|---|
| समद्विभाजन | धीमी, पक्की | हाँ, अगर चिह्न बदलता हो |
| न्यूटन-रैफ़सन | मूल के पास बहुत तेज़ | नहीं: f′ ≠ 0 और अच्छी शुरुआत चाहिए |
| स्थिर-बिंदु | मध्यम | सिर्फ़ |g′| < 1 हो तो |
घर पर करके देखो
कैलकुलेटर पर 1 लिखकर = दबाओ, फिर ∛(Ans + 1) लिखो और बार-बार = दबाते रहो। देखो संख्याएँ 1.3247 पर टिक जाती हैं। तुमने अभी स्थिर-बिंदु पुनरावृत्ति कर ली।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- चिह्न परिवर्तन: f [a, b] पर सतत और f(a)·f(b) < 0 ⇒ (a, b) में एक मूल है
- समद्विभाजन मध्यबिंदु: m = (a + b) ÷ 2
- न्यूटन-रैफ़सन: xₙ₊₁ = xₙ − f(xₙ) ÷ f′(xₙ)
- स्थिर-बिंदु पुनरावृत्ति: xₙ₊₁ = g(xₙ), मूल के पास |g′(x)| < 1 हो तो अभिसरण
- समलंब नियम: ∫ₐᵇ y dx ≈ (h/2)[y₀ + yₙ + 2(y₁ + … + yₙ₋₁)], h = (b − a)/n
- ऑयलर: yₙ₊₁ = yₙ + h·f(xₙ, yₙ)
- सापेक्ष त्रुटि = |अनुमान − सही मान| ÷ |सही मान|
हल किए गए उदाहरण
1. दिखाओ कि x³ − x − 1 = 0 का एक मूल 1 और 2 के बीच है।
f(1) = 1 − 1 − 1 = −1 < 0। f(2) = 8 − 2 − 1 = 5 > 0। f बहुपद है, इसलिए सतत है। चिह्न बदलता है, तो (1, 2) में एक मूल है।
2. [1, 2] से शुरू करके f(x) = x³ − x − 1 पर समद्विभाजन के दो कदम करो।
m = 1.5: f(1.5) = 3.375 − 1.5 − 1 = 0.875 > 0, चिह्न 1 और 1.5 के बीच बदलता है, नया अंतराल [1, 1.5]। m = 1.25: f(1.25) = 1.953 − 1.25 − 1 = −0.297 < 0, नया अंतराल [1.25, 1.5]।
3. x³ − x − 1 = 0 के लिए x₀ = 2 से न्यूटन-रैफ़सन लगाकर x₁ और x₂ निकालो।
f′(x) = 3x² − 1। x₁ = 2 − 5 ÷ 11 = 1.5455। f(1.5455) = 1.1458, f′(1.5455) = 6.1655, तो x₂ = 1.5455 − 1.1458 ÷ 6.1655 = 1.3596। (मूल 1.3247 है।)
4. xₙ₊₁ = ∛(xₙ + 1), x₀ = 1 से x₁, x₂, x₃ निकालो।
x₁ = ∛2 = 1.2599। x₂ = ∛2.2599 = 1.3123। x₃ = ∛2.3123 = 1.3224। मान सीढ़ी की तरह 1.3247 की ओर चढ़ते हैं।
5. 4 पट्टियों वाले समलंब नियम से ∫₀² x² dx का अनुमान लगाओ। यह ज़्यादा है या कम?
h = 0.5। ऊँचाइयाँ: 0, 0.25, 1, 2.25, 4। क्षेत्रफल ≈ 0.25 × [0 + 4 + 2(0.25 + 1 + 2.25)] = 0.25 × 11 = 2.75। सही = 8/3 = 2.667। ज़्यादा अनुमान, क्योंकि y = x² ऊपर की ओर मुड़ा है।
6. dy/dx = y, y(0) = 1। h = 0.5 से ऑयलर विधि द्वारा y(1) निकालो और प्रतिशत त्रुटि बताओ।
y₁ = 1 + 0.5 × 1 = 1.5 (x = 0.5 पर)। y₂ = 1.5 + 0.5 × 1.5 = 2.25 (x = 1 पर)। सही y(1) = e ≈ 2.718। त्रुटि = 0.468, सापेक्ष त्रुटि ≈ 0.468 ÷ 2.718 ≈ 17%।
7. एक गेंद गिराई गई (a = 9.8 m/s²)। Δt = 0.1 s के छोटे कदमों से 0.3 s बाद v और s निकालो।
हर कदम: v_नया = v + 9.8 × 0.1 = v + 0.98; s_नया = s + v × 0.1 (पुराना v लेकर)। t = 0.1: v = 0.98, s = 0। t = 0.2: v = 1.96, s = 0.098। t = 0.3: v = 2.94, s = 0.294 m। सही s = ½ × 9.8 × 0.09 = 0.441 m; छोटे कदम अंतर घटाते हैं।
आम गलतियाँ
- f सतत है या नहीं, यह न जाँचना: 1/x शून्य पर चिह्न बदलता है पर वहाँ मूल नहीं है।
- sin x या cos x वाले f में रेडियन की जगह डिग्री लगाना।
- समलंब नियम में पट्टियों की जगह ऊँचाइयाँ गिनना: 4 पट्टियों के लिए 5 ऊँचाइयाँ चाहिए।
- न्यूटन-रैफ़सन के हर कदम पर जल्दी पूर्णांकन करना: पूरे मान रखो, अंत में ही पूर्णांक करो।