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सांतत्य तथा अवकलनीयता

किसी बिंदु पर फलन सतत तब है जब वहाँ ग्राफ़ टूटता नहीं: बायीं सीमा, दायीं सीमा और फलन का मान तीनों बराबर हों। अवकलज स्पर्श रेखा की ढाल है। शृंखला नियम, अस्पष्ट अवकलन, eˣ, ln x और प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के सूत्र, लघुगणकीय अवकलन और प्राचलिक रूप से कक्षा 12 का लगभग हर फलन अवकलित हो जाता है। द्वितीय अवकलज बताता है कि ढाल खुद कैसे बदल रही है, यानी वक्र कैसे मुड़ रहा है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. सांतत्य: अगर पेंसिल उठाए बिना ग्राफ़ बन जाए तो फलन सतत है। लाल ग्राफ़ x = 1 पर कूदता है, वहाँ टूटता है। हरा ग्राफ़ जुड़ा हुआ है।
  2. अवकलज स्पर्श रेखा की ढाल है। y = sin(2x) में अंदर 2x है और बाहर sin। शृंखला नियम: बाहर का अवकलज गुणा अंदर का अवकलज।
  3. अस्पष्ट फलन: वृत्त x² + y² = 9 में y अलग नहीं लिखा है। दोनों ओर x के सापेक्ष अवकलन करो, फिर dy/dx निकालो।
  4. eˣ की ढाल हर बिंदु पर उसकी ऊँचाई के बराबर है। ln x की ढाल 1/x है। xˣ जैसी घातों में पहले ln लेने से काम आसान होता है।
  5. प्राचलिक रूप: x = t², y = 2t। तब dy/dx = (dy/dt) ÷ (dx/dt)। द्वितीय अवकलज बताता है कि वक्र कैसे मुड़ता है।
  6. अब आपकी बारी: फलन चुनो, x खिसकाओ और मान, ढाल तथा मोड़ पढ़ो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

ग्राफ़ असतत किस वजह से होता है?

टूटने वाले बिंदु पर बायीं ओर से पहुँचा मान दायीं ओर वाले मान से अलग होता है, या f(a) से मेल नहीं खाता। 3D में लाल ग्राफ़ बायीं ओर से 2 पर आता है और दायीं ओर 3 से शुरू होता है।

शृंखला नियम में अंदर के अवकलज से गुणा क्यों?

अंदर वाला हिस्सा x से तेज़ या धीमे बदलता है। sin(2x) में अंदर वाला x से दोगुना तेज़ चलता है, इसलिए हर ढाल दोगुनी होती है। स्पर्श रेखा की ढाल 2 तक पहुँचती है, 1 तक नहीं।

d/dx(y²) में dy/dx क्यों आता है?

y खुद x पर निर्भर है। y² फलन के अंदर फलन है: पहले 2y, फिर y के बदलने की दर dy/dx से गुणा।

वृत्त की स्पर्श रेखा की ढाल −x/y क्यों?

वृत्त के ऊपर-दाएँ भाग में x और y धनात्मक हैं, इसलिए ढाल ऋणात्मक (नीचे जाती)। सबसे ऊपर x = 0 पर ढाल 0, सपाट रेखा। चलता बिंदु देखो।

eˣ खास क्यों है?

इसकी ढाल हमेशा इसकी ऊँचाई के बराबर रहती है। रीडआउट में ऊँचाई और ढाल एक ही संख्या दिखती है।

d²y/dt² को d²x/dt² से भाग क्यों नहीं दे सकते?

द्वितीय अवकलज को बताना है कि dy/dx, x के साथ कैसे बदलता है। इसलिए dy/dx का t के सापेक्ष अवकलन करो, फिर एक बार dx/dt से भाग दो।

सांतत्य क्या है?

फलन f, x = a पर सतत है जब ये तीनों बराबर हों:

छोटे में: lim(x→a) f(x) = f(a)। अगर कोई एक गायब हो या अलग हो तो ग्राफ़ में छेद या छलाँग होती है।

बहुपद, sin x, cos x, eˣ और ln x (x > 0 के लिए) अपने पूरे प्रांत में सतत हैं। सतत फलनों का योग, अंतर, गुणनफल और भागफल (हर शून्य न हो) भी सतत होता है।

अवकलनीय है तो सतत है, उल्टा ज़रूरी नहीं

जिस बिंदु पर अवकलज है, वहाँ फलन सतत होगा ही। पर |x| शून्य पर सतत है फिर भी वहाँ अवकलज नहीं: ग्राफ़ में नुकीला कोना है, बायीं ढाल −1 और दायीं ढाल +1 है।

अवकलज और शृंखला नियम

अवकलज f′(x) = x पर स्पर्श रेखा की ढाल = lim(h→0) [f(x + h) − f(x)] / h।

शृंखला नियम (फलन के अंदर फलन): y = f(u), u = g(x) हो तो dy/dx = (dy/du) × (du/dx)।

उदाहरण: y = (3x + 1)⁵। बाहर: u⁵ → 5u⁴। अंदर: 3x + 1 → 3। तो dy/dx = 15(3x + 1)⁴।

प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के अवकलज

tan⁻¹x क्यों: y = tan⁻¹x रखो, तो tan y = x। अवकलन: sec²y · dy/dx = 1, इसलिए dy/dx = 1/(1 + tan²y) = 1/(1 + x²)।

सुझाव: x = tan θ जैसा प्रतिस्थापन उलझे व्यंजक को सरल बना देता है।

अस्पष्ट फलन

कभी x और y मिले होते हैं, जैसे x² + y² = 9। y अलग करने की ज़रूरत नहीं। हर पद का x के सापेक्ष अवकलन करो; y वाले पद के अवकलन पर dy/dx से गुणा करो (शृंखला नियम)। फिर dy/dx वाले पद एक ओर करो।

x² + y² = 9 → 2x + 2y·dy/dx = 0 → dy/dx = −x/y।

चरघातांकी और लघुगणकीय फलन

शृंखला नियम के साथ: d/dx (e^(3x)) = 3e^(3x), d/dx ln(sin x) = cot x।

लघुगणकीय अवकलन

जब घात में ही x हो (जैसे xˣ) या लंबा गुणनफल/भागफल हो।

  1. दोनों ओर ln लो: ln y = x ln x।
  2. अवकलन करो: (1/y) dy/dx = ln x + 1।
  3. y से गुणा करो: dy/dx = xˣ(1 + ln x)।

प्राचलिक रूप में फलन

जब x और y दोनों किसी तीसरे चर t (प्राचल) पर निर्भर हों, जैसे x = t², y = 2t, तब

dy/dx = (dy/dt) / (dx/dt), जहाँ dx/dt ≠ 0।

वृत्त x = r cos t, y = r sin t के लिए dy/dx = −cot t।

द्वितीय कोटि का अवकलज

एक बार और अवकलन: d²y/dx² = d/dx (dy/dx), जिसे f″(x) या y₂ भी लिखते हैं।

यह बताता है कि ढाल कैसे बदल रही है। f″ > 0: वक्र कटोरी की तरह ऊपर मुड़ता है। f″ < 0: टोपी की तरह नीचे मुड़ता है।

उदाहरण: y = x³ → y′ = 3x² → y″ = 6x।

प्राचलिक रूप में: d²y/dx² = [d/dt (dy/dx)] ÷ (dx/dt)।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. f(x) = 2x + 3 (x ≤ 1) और f(x) = 6 − x (x > 1)। क्या f, x = 1 पर सतत है?

बायीं सीमा: 2(1) + 3 = 5। दायीं सीमा: 6 − 1 = 5। f(1) = 5। तीनों बराबर, इसलिए सतत है।

2. k ज्ञात करो ताकि f(x) = kx² (x ≤ 2) और f(x) = 3 (x > 2), x = 2 पर सतत हो।

बायीं सीमा = मान = 4k, दायीं सीमा = 3। 4k = 3, तो k = 3/4।

3. y = sin(x² + 5) का अवकलन करो।

बाहर sin u → cos u; अंदर x² + 5 → 2x। dy/dx = 2x cos(x² + 5)।

4. −1 < x < 1 के लिए y = tan⁻¹(2x/(1 − x²)) का अवकलन करो।

x = tan θ रखो। 2x/(1 − x²) = tan 2θ, तो y = 2θ = 2 tan⁻¹x। dy/dx = 2/(1 + x²)।

5. x² + xy + y² = 7 हो तो dy/dx ज्ञात करो।

2x + (y + x·dy/dx) + 2y·dy/dx = 0। dy/dx (x + 2y) = −(2x + y), अतः dy/dx = −(2x + y)/(x + 2y)।

6. y = e^(3x) · ln x का अवकलन करो।

गुणन नियम: dy/dx = 3e^(3x) ln x + e^(3x)/x = e^(3x)(3 ln x + 1/x)।

7. y = xˣ (x > 0) का अवकलन करो।

ln y = x ln x। (1/y) dy/dx = ln x + 1। dy/dx = xˣ(1 + ln x)।

8. x = a cos t, y = a sin t हो तो dy/dx और d²y/dx² ज्ञात करो।

dx/dt = −a sin t, dy/dt = a cos t, तो dy/dx = −cot t। d/dt(−cot t) = cosec²t। d²y/dx² = cosec²t ÷ (−a sin t) = −1/(a sin³t)।

9. y = 3e^(2x) + 2e^(−x) हो तो दिखाओ y″ − y′ − 2y = 0।

y′ = 6e^(2x) − 2e^(−x); y″ = 12e^(2x) + 2e^(−x)। y″ − y′ − 2y = (12 − 6 − 6)e^(2x) + (2 + 2 − 4)e^(−x) = 0।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. f, x = a पर सतत है जब:
2. d/dx (tan⁻¹x) =
3. x² + y² = 25 हो तो dy/dx =
4. d/dx (e^(5x)) =
5. x = t², y = t³ हो तो dy/dx =

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कक्षा 12 सांतत्य तथा अवकलनीयता में क्या पढ़ते हैं?

किसी बिंदु पर सांतत्य, शृंखला नियम, प्रतिलोम त्रिकोणमितीय, अस्पष्ट, चरघातांकी व लघुगणकीय फलनों का अवकलन, लघुगणकीय अवकलन, प्राचलिक रूप और द्वितीय अवकलज।

क्या हर सतत फलन अवकलनीय होता है?

नहीं। फलन सतत होकर भी नुकीला कोना रख सकता है, जैसे |x| शून्य पर, जहाँ अवकलज नहीं होता।

लघुगणकीय अवकलन कब लगाएँ?

जब घात में x हो, जैसे xˣ, या लंबा गुणनफल/भागफल हो।

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