United Grade 12 AP Calculus BC
अध्याय: 10
1. Limits and Continuity
Introducing Calculus: Can Change Occur at an Instant? · Defining Limits and Using Limit Notation · Estimating Limit Values from Graphs · Estimating Limit Values from Tables · Determining Limits Using Algebraic Properties of Limits · Determining Limits Using Algebraic Manipulation · Selecting Procedures for Determining Limits · Determining Limits Using the Squeeze Theorem · Connecting Multiple Representations of Limits · Exploring Types of Discontinuities · Defining Continuity at a Point · Confirming Continuity over an Interval · Removing Discontinuities · Connecting Infinite Limits and Vertical Asymptotes · Connecting Limits at Infinity and Horizontal Asymptotes · Working with the Intermediate Value Theorem (IVT)
- सीमा (कक्षा 11): फलन किस संख्या के पास जाता है – सीमा बताती है कि जब x किसी बिंदु के पास जाता है तो f(x) किस संख्या के पास पहुँचता है। हम बिंदु की ओर बाएँ से भी चलते हैं और दाएँ से भी। दोनों ओर से एक ही संख्या मिले, तो वही सीमा है। यहाँ बहुपद, परिमेय, त्रिकोणमितीय, चरघातांकी और लघुगणकीय फलनों की सीमाएँ और ज़रूरी मानक परिणाम सीखेंगे।
- सांतत्य तथा अवकलनीयता – किसी बिंदु पर फलन सतत तब है जब वहाँ ग्राफ़ टूटता नहीं: बायीं सीमा, दायीं सीमा और फलन का मान तीनों बराबर हों। अवकलज स्पर्श रेखा की ढाल है। शृंखला नियम, अस्पष्ट अवकलन, eˣ, ln x और प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के सूत्र, लघुगणकीय अवकलन और प्राचलिक रूप से कक्षा 12 का लगभग हर फलन अवकलित हो जाता है। द्वितीय अवकलज बताता है कि ढाल खुद कैसे बदल रही है, यानी वक्र कैसे मुड़ रहा है।
2. Differentiation: Definition and Fundamental Properties
Defining Average and Instantaneous Rates of Change at a Point · Defining the Derivative of a Function and Using Derivative Notation · Estimating Derivatives of a Function at a Point · Connecting Differentiability and Continuity: Determining When Derivatives Do and Do Not Exist · Applying the Power Rule · Derivative Rules: Constant, Sum, Difference, and Constant Multiple · Derivatives of cos x, sin x, ex, and ln x · The Product Rule · The Quotient Rule · Finding the Derivatives of Tangent, Cotangent, Secant, and/or Cosecant Functions
- अवकलज (कक्षा 11): ढाल, परिवर्तन की दर और नियम – अवकलज बताता है कि कोई चीज़ एक पल में कितनी तेज़ी से बदल रही है। ग्राफ़ पर यह स्पर्श रेखा की ढाल है। इसे सीमा से निकालते हैं: छोटा कदम h लो, औसत बदलाव निकालो, और h को 0 की ओर ले जाओ। फिर xⁿ, sin x, cos x, योग, अंतर, गुणनफल और भागफल के आसान नियम सीखेंगे।
- सांतत्य तथा अवकलनीयता – किसी बिंदु पर फलन सतत तब है जब वहाँ ग्राफ़ टूटता नहीं: बायीं सीमा, दायीं सीमा और फलन का मान तीनों बराबर हों। अवकलज स्पर्श रेखा की ढाल है। शृंखला नियम, अस्पष्ट अवकलन, eˣ, ln x और प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के सूत्र, लघुगणकीय अवकलन और प्राचलिक रूप से कक्षा 12 का लगभग हर फलन अवकलित हो जाता है। द्वितीय अवकलज बताता है कि ढाल खुद कैसे बदल रही है, यानी वक्र कैसे मुड़ रहा है।
3. Differentiation: Composite, Implicit, and Inverse Functions
The Chain Rule · Implicit Differentiation · Differentiating Inverse Functions · Differentiating Inverse Trigonometric Functions · Selecting Procedures for Calculating Derivatives · Calculating Higher Order Derivatives
- सांतत्य तथा अवकलनीयता – किसी बिंदु पर फलन सतत तब है जब वहाँ ग्राफ़ टूटता नहीं: बायीं सीमा, दायीं सीमा और फलन का मान तीनों बराबर हों। अवकलज स्पर्श रेखा की ढाल है। शृंखला नियम, अस्पष्ट अवकलन, eˣ, ln x और प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के सूत्र, लघुगणकीय अवकलन और प्राचलिक रूप से कक्षा 12 का लगभग हर फलन अवकलित हो जाता है। द्वितीय अवकलज बताता है कि ढाल खुद कैसे बदल रही है, यानी वक्र कैसे मुड़ रहा है।
4. Contextual Applications of Differentiation
Interpreting the Meaning of the Derivative in Context · Straight-Line Motion: Connecting Position, Velocity, and Acceleration · Rates of Change in Applied Contexts Other Than Motion · Introduction to Related Rates · Solving Related Rates Problems · Approximating Values of a Function Using Local Linearity and Linearization · Using L'Hospital's Rule for Determining Limits of Indeterminate Forms
- अवकलज के अनुप्रयोग – अवकलज बताता है कि एक राशि दूसरी के साथ कितनी तेज़ी से बदलती है। इसका चिह्न बताता है कि फलन बढ़ रहा है (f′ > 0, वर्धमान) या घट रहा है (f′ < 0, ह्रासमान)। जहाँ f′ = 0 हो वहाँ स्पर्श रेखा सपाट होती है: ये क्रांतिक बिंदु स्थानीय उच्चिष्ठ या निम्निष्ठ हो सकते हैं, जिन्हें प्रथम अवकलज परीक्षण (चिह्न बदलना) या द्वितीय अवकलज परीक्षण (f″ का चिह्न) से जाँचते हैं। इससे सबसे बड़ा डिब्बा या सबसे सस्ता टैंक जैसे असली सवाल हल होते हैं।
- रैखिकीकरण, अस्पष्ट वक्र और सदिश फलनों का अवकलज – किसी चिकने वक्र को बहुत पास से देखो तो वह सीधी रेखा जैसा लगता है — यही उसकी स्पर्श रेखा है। L(x) = f(a) + f′(a)(x − a) से x = a के पास जल्दी अनुमान मिलता है। x² + y² = 25 जैसे वक्रों में दोनों तरफ अवकलन करके dy/dx निकालते हैं; अंश शून्य हो तो क्षैतिज, हर शून्य हो तो ऊर्ध्वाधर स्पर्श रेखा। चलते बिंदु r(t) = (x(t), y(t)) का वेग r′(t) और चाल |r′(t)| है। nवें पद का परीक्षण: अगर पद 0 की ओर नहीं जाते, तो श्रेणी अपसारी है।
- सीमा (कक्षा 11): फलन किस संख्या के पास जाता है – सीमा बताती है कि जब x किसी बिंदु के पास जाता है तो f(x) किस संख्या के पास पहुँचता है। हम बिंदु की ओर बाएँ से भी चलते हैं और दाएँ से भी। दोनों ओर से एक ही संख्या मिले, तो वही सीमा है। यहाँ बहुपद, परिमेय, त्रिकोणमितीय, चरघातांकी और लघुगणकीय फलनों की सीमाएँ और ज़रूरी मानक परिणाम सीखेंगे।
5. Analytical Applications of Differentiation
Using the Mean Value Theorem · Extreme Value Theorem, Global Versus Local Extrema, and Critical Points · Determining Intervals on Which a Function Is Increasing or Decreasing · Using the First Derivative Test to Determine Relative (Local) Extrema · Using the Candidates Test to Determine Absolute (Global) Extrema · Determining Concavity of Functions over Their Domains · Using the Second Derivative Test to Determine Extrema · Sketching Graphs of Functions and Their Derivatives · Connecting a Function, Its First Derivative, and Its Second Derivative · Introduction to Optimization Problems · Solving Optimization Problems · Exploring Behaviors of Implicit Relations
- सांतत्य तथा अवकलनीयता – किसी बिंदु पर फलन सतत तब है जब वहाँ ग्राफ़ टूटता नहीं: बायीं सीमा, दायीं सीमा और फलन का मान तीनों बराबर हों। अवकलज स्पर्श रेखा की ढाल है। शृंखला नियम, अस्पष्ट अवकलन, eˣ, ln x और प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के सूत्र, लघुगणकीय अवकलन और प्राचलिक रूप से कक्षा 12 का लगभग हर फलन अवकलित हो जाता है। द्वितीय अवकलज बताता है कि ढाल खुद कैसे बदल रही है, यानी वक्र कैसे मुड़ रहा है।
- अवकलज के अनुप्रयोग – अवकलज बताता है कि एक राशि दूसरी के साथ कितनी तेज़ी से बदलती है। इसका चिह्न बताता है कि फलन बढ़ रहा है (f′ > 0, वर्धमान) या घट रहा है (f′ < 0, ह्रासमान)। जहाँ f′ = 0 हो वहाँ स्पर्श रेखा सपाट होती है: ये क्रांतिक बिंदु स्थानीय उच्चिष्ठ या निम्निष्ठ हो सकते हैं, जिन्हें प्रथम अवकलज परीक्षण (चिह्न बदलना) या द्वितीय अवकलज परीक्षण (f″ का चिह्न) से जाँचते हैं। इससे सबसे बड़ा डिब्बा या सबसे सस्ता टैंक जैसे असली सवाल हल होते हैं।
- रैखिकीकरण, अस्पष्ट वक्र और सदिश फलनों का अवकलज – किसी चिकने वक्र को बहुत पास से देखो तो वह सीधी रेखा जैसा लगता है — यही उसकी स्पर्श रेखा है। L(x) = f(a) + f′(a)(x − a) से x = a के पास जल्दी अनुमान मिलता है। x² + y² = 25 जैसे वक्रों में दोनों तरफ अवकलन करके dy/dx निकालते हैं; अंश शून्य हो तो क्षैतिज, हर शून्य हो तो ऊर्ध्वाधर स्पर्श रेखा। चलते बिंदु r(t) = (x(t), y(t)) का वेग r′(t) और चाल |r′(t)| है। nवें पद का परीक्षण: अगर पद 0 की ओर नहीं जाते, तो श्रेणी अपसारी है।
6. Integration and Accumulation of Change
Exploring Accumulations of Change · Approximating Areas with Riemann Sums · Riemann Sums, Summation Notation, and Definite Integral Notation · The Fundamental Theorem of Calculus and Accumulation Functions · Interpreting the Behavior of Accumulation Functions Involving Area · Applying Properties of Definite Integrals · The Fundamental Theorem of Calculus and Definite Integrals · Finding Antiderivatives and Indefinite Integrals: Basic Rules and Notation · Integrating Using Substitution · Integrating Functions Using Long Division and Completing the Square · Integrating Using Integration by Parts · Integrating Using Linear Partial Fractions · Evaluating Improper Integrals · Selecting Techniques for Antidifferentiation
- समाकलन यानी संचय: रीमान योग से आयतन तक – निश्चित समाकल किसी दर को जोड़ता है। क्षेत्र को पतले आयतों में काटो (रीमान योग), आयतों को और पतला करो, तो योग सटीक क्षेत्रफल बन जाता है। इसी विचार से कुल बदलाव, औसत मान, विस्थापन और दूरी, और घुमाकर या टुकड़े जोड़कर बने ठोस का आयतन निकलता है।
- समाकलन – समाकलन अवकलन को उलट देता है: अगर F′(x) = f(x), तो ∫f(x) dx = F(x) + C। हम मानक सूत्रों, प्रतिस्थापन (अंदर वाले हिस्से को u मानना), आंशिक भिन्न (भिन्न को तोड़ना) और खंडशः समाकलन (∫u dv = uv − ∫v du) से समाकलन करते हैं। निश्चित समाकल ∫ₐᵇ f(x) dx, a से b तक वक्र के नीचे का चिह्नित क्षेत्रफल है, और मूल प्रमेय के अनुसार यह F(b) − F(a) के बराबर है।
7. Differential Equations
Modeling Situations with Differential Equations · Verifying Solutions for Differential Equations · Sketching Slope Fields · Reasoning Using Slope Fields · Approximating Solutions Using Euler's Method · Finding General Solutions Using Separation of Variables · Finding Particular Solutions Using Initial Conditions and Separation of Variables · Exponential Models with Differential Equations · Logistic Models with Differential Equations
- अवकल समीकरण – अवकल समीकरण एक फलन y को उसके अवकलजों से जोड़ता है। इसकी कोटि सबसे ऊँचा अवकलज है और घात उस अवकलज की घात (जब समीकरण अवकलजों में बहुपद हो)। व्यापक हल में स्वेच्छ अचर होते हैं; y(0) = 1 जैसी शर्त उन्हें तय करके विशिष्ट हल देती है। कक्षा 12 में तीन प्रकार के प्रथम कोटि समीकरण हल करते हैं: चर पृथक्करणीय, समघातीय (y = vx रखो) और रैखिक dy/dx + Py = Q (समाकलन गुणक e^∫P dx से गुणा करो)।
- ढाल क्षेत्र, ऑयलर विधि और लॉजिस्टिक मॉडल – अवकल समीकरण dy/dx = f(x, y) हर बिंदु पर ढाल बताता है। उन ढालों की छोटी रेखाएँ बनाने से ढाल क्षेत्र बनता है, और हल-वक्र उन रेखाओं के साथ चलते हैं। ऑयलर विधि सीधे कदमों में चलती है: yₙ₊₁ = yₙ + h·f(xₙ, yₙ)। लॉजिस्टिक मॉडल dP/dt = kP(1 − P/K) में वृद्धि P = K/2 पर सबसे तेज़ है और P अंत में K पर रुकता है। वायु प्रतिरोध के साथ गिरती वस्तु, m dv/dt = mg − bv, सीमांत वेग v_t = mg/b की ओर जाती है।
8. Applications of Integration
Finding the Average Value of a Function on an Interval · Connecting Position, Velocity, and Acceleration of Functions Using Integrals · Using Accumulation Functions and Definite Integrals in Applied Contexts · Finding the Area Between Curves Expressed · Finding the Area Between Curves Expressed · Finding the Area Between Curves That Intersect at More Than Two Points · Volumes with Cross Sections: Squares and Rectangles · Volumes with Cross Sections: Triangles and Semicircles · Volume with Disc Method: Revolving · Volume with Disc Method: Revolving Around Other Axes · Volume with Washer Method: Revolving · Volume with Washer Method: Revolving Around Other Axes · The Arc Length of a Smooth, Planar Curve and Distance Traveled
- समाकलन यानी संचय: रीमान योग से आयतन तक – निश्चित समाकल किसी दर को जोड़ता है। क्षेत्र को पतले आयतों में काटो (रीमान योग), आयतों को और पतला करो, तो योग सटीक क्षेत्रफल बन जाता है। इसी विचार से कुल बदलाव, औसत मान, विस्थापन और दूरी, और घुमाकर या टुकड़े जोड़कर बने ठोस का आयतन निकलता है।
- समाकलनों के अनुप्रयोग: वक्रों के नीचे क्षेत्रफल – वक्र y = f(x), x-अक्ष और रेखाओं x = a, x = b से घिरा क्षेत्रफल ∫ₐᵇ |f(x)| dx है: ऊँचाई y और चौड़ाई dx वाली पतली खड़ी पट्टियाँ जोड़ते हैं। x = g(y) रूप वाले वक्रों के लिए क्षैतिज पट्टियाँ लेते हैं। सममिति से काम बचता है: वृत्त, परवलय या दीर्घवृत्त का एक हिस्सा निकालो और गुणा करो। त्रिज्या r के वृत्त का क्षेत्रफल πr² और अर्ध-अक्ष a, b वाले दीर्घवृत्त का πab।
- अवकलज की मदद से वक्र अनुरेखण – y = f(x) का स्केच बनाने के लिए: प्रांत और अंतःखंड निकालो, f'(x) = 0 से स्थिर बिंदु निकालो, f'(x) के चिह्न से देखो वक्र कहाँ बढ़ता-घटता है, f''(x) से अवतलता और नति परिवर्तन बिंदु निकालो, अनंतस्पर्शी और सिरों का व्यवहार देखो, फिर सब कुछ चिकने वक्र से जोड़ो। उदाहरण: y = x³ − 3x का उच्चिष्ठ (−1, 2), निम्निष्ठ (1, −2) और नति परिवर्तन बिंदु (0, 0) है।
9. Unit 9
Defining and Differentiating Parametric Equations · Second Derivatives of Parametric Equations · Finding Arc Lengths of Curves Given by Parametric Equations · Defining and Differentiating VectorValued Functions · Integrating VectorValued Functions · Solving Motion Problems Using Parametric and Vector-Valued Functions · Defining Polar Coordinates and Differentiating in Polar Form · Find the Area of a Polar Region or the Area Bounded by a Single Polar Curve · Finding the Area of the Region Bounded by Two Polar Curves
- प्राचलिक समीकरण: वक्र, ढाल और चाप लंबाई – प्राचलिक रूप में x और y दोनों को एक तीसरे चर t से लिखा जाता है, जिसे प्राचल (parameter) कहते हैं। t के हर मान से एक बिंदु मिलता है, और t बदलने पर बिंदु एक वक्र बनाता है। t हटाकर कार्तीय समीकरण मिलता है, dy/dx = (dy/dt)/(dx/dt) से ढाल, और t समय हो तो चाल और चाप लंबाई।
- रैखिकीकरण, अस्पष्ट वक्र और सदिश फलनों का अवकलज – किसी चिकने वक्र को बहुत पास से देखो तो वह सीधी रेखा जैसा लगता है — यही उसकी स्पर्श रेखा है। L(x) = f(a) + f′(a)(x − a) से x = a के पास जल्दी अनुमान मिलता है। x² + y² = 25 जैसे वक्रों में दोनों तरफ अवकलन करके dy/dx निकालते हैं; अंश शून्य हो तो क्षैतिज, हर शून्य हो तो ऊर्ध्वाधर स्पर्श रेखा। चलते बिंदु r(t) = (x(t), y(t)) का वेग r′(t) और चाल |r′(t)| है। nवें पद का परीक्षण: अगर पद 0 की ओर नहीं जाते, तो श्रेणी अपसारी है।
- समाकलन यानी संचय: रीमान योग से आयतन तक – निश्चित समाकल किसी दर को जोड़ता है। क्षेत्र को पतले आयतों में काटो (रीमान योग), आयतों को और पतला करो, तो योग सटीक क्षेत्रफल बन जाता है। इसी विचार से कुल बदलाव, औसत मान, विस्थापन और दूरी, और घुमाकर या टुकड़े जोड़कर बने ठोस का आयतन निकलता है।
10. Unit 10
Defining Convergent and Divergent Infinite Series · Working with Geometric Series · The nth Term Test for Divergence · Integral Test for Convergence · Harmonic Series and p-Series · Comparison Tests for Convergence · Alternating Series Test for Convergence · Ratio Test for Convergence · Determining Absolute or Conditional Convergence · Alternating Series Error Bound · Finding Taylor Polynomial Approximations of Functions · Lagrange Error Bound · Radius and Interval of Convergence of Power Series · Finding Taylor or Maclaurin Series for a Function · Representing Functions as Power Series
- अनंत श्रेणी (Infinite Series) – अनंत श्रेणी किसी अनुक्रम के पदों को हमेशा जोड़ती जाती है: a₁ + a₂ + a₃ + … इसे हम आंशिक योग Sₙ से समझते हैं। अगर Sₙ किसी एक संख्या S पर टिक जाए तो श्रेणी अभिसारी (convergent) है, वरना अपसारी (divergent)। गुणोत्तर श्रेणी a + ar + ar² + … का योग |r| < 1 होने पर a/(1 − r) होता है। पदों का 0 की ओर जाना ज़रूरी है पर काफ़ी नहीं: हरात्मक श्रेणी 1 + 1/2 + 1/3 + … अपसारी है। nवाँ-पद, p-श्रेणी, तुलना, समाकल, अनुपात और एकांतर परीक्षण बताते हैं कि कौन-सी श्रेणी अभिसारी है।
- अनुक्रम तथा श्रेणी: AP, GP, समांतर और गुणोत्तर माध्य – अनुक्रम एक निश्चित क्रम में लिखी संख्याओं की सूची है: a₁, a₂, a₃, … पदों को जोड़ने पर श्रेणी बनती है। समांतर श्रेढ़ी (AP) में हर बार एक ही संख्या d जुड़ती है; aₙ = a + (n − 1)d और Sₙ = n/2[2a + (n − 1)d]। a और b का समांतर माध्य (a + b)/2 है; उनके बीच n समांतर माध्य डालने के लिए d = (b − a)/(n + 1)। गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP) में हर बार एक ही संख्या r से गुणा होता है; aₙ = arⁿ⁻¹ और r ≠ 1 पर Sₙ = a(rⁿ − 1)/(r − 1)। यदि |r| < 1 हो तो पद छोटे होते जाते हैं और अनंत योग S∞ = a/(1 − r)। दो धनात्मक संख्याओं का गुणोत्तर माध्य √(ab) है, और n गुणोत्तर माध्य के लिए r = (b/a)^(1/(n+1))। धनात्मक a, b के लिए A ≥ G, बराबरी केवल a = b पर।
- रैखिकीकरण, अस्पष्ट वक्र और सदिश फलनों का अवकलज – किसी चिकने वक्र को बहुत पास से देखो तो वह सीधी रेखा जैसा लगता है — यही उसकी स्पर्श रेखा है। L(x) = f(a) + f′(a)(x − a) से x = a के पास जल्दी अनुमान मिलता है। x² + y² = 25 जैसे वक्रों में दोनों तरफ अवकलन करके dy/dx निकालते हैं; अंश शून्य हो तो क्षैतिज, हर शून्य हो तो ऊर्ध्वाधर स्पर्श रेखा। चलते बिंदु r(t) = (x(t), y(t)) का वेग r′(t) और चाल |r′(t)| है। nवें पद का परीक्षण: अगर पद 0 की ओर नहीं जाते, तो श्रेणी अपसारी है।