वक्र अनुरेखण की चेकलिस्ट
स्केच एकदम सटीक प्लॉट नहीं होता। यह सही आकार और ज़रूरी बिंदु दिखाता है। यह सूची क्रम से करो:
- प्रांत (domain): x के कौन-से मान चलेंगे? (0 से भाग नहीं, ऋणात्मक का वर्गमूल नहीं।)
- अंतःखंड: x = 0 रखकर y-अंतःखंड; f(x) = 0 हल करके x-अंतःखंड।
- सममिति: f(−x) = f(x) हो तो ग्राफ़ y-अक्ष के प्रति सममित (सम फलन); f(−x) = −f(x) हो तो मूल बिंदु के प्रति (विषम फलन)।
- स्थिर बिंदु: f'(x) = 0 हल करो।
- चिह्न-तालिका (variation table): जहाँ f'(x) > 0 वहाँ वक्र बढ़ता है; जहाँ f'(x) < 0 वहाँ घटता है।
- अवतलता: f''(x) > 0 यानी कप जैसा (∪); f''(x) < 0 यानी टोपी जैसा (∩)।
- अनंतस्पर्शी और सिरे: x → ±∞ पर और प्रांत से बाहर वाले बिंदुओं के पास क्या होता है?
- सब बातें मानते हुए बिंदुओं को चिकने वक्र से जोड़ो।
स्थिर बिंदु: उच्चिष्ठ, निम्निष्ठ या कोई नहीं
स्थिर बिंदु वह है जहाँ स्पर्श रेखा सपाट हो: f'(x) = 0। इसका प्रकार दो तरीकों से तय करो।
प्रथम अवकलज परीक्षण: बिंदु से ठीक पहले और बाद f' का चिह्न देखो। + फिर − = स्थानीय उच्चिष्ठ; − फिर + = स्थानीय निम्निष्ठ; चिह्न न बदले तो स्थिर नति परिवर्तन बिंदु (जैसे y = x³ में 0 पर)।
द्वितीय अवकलज परीक्षण: f''(x) < 0 → उच्चिष्ठ; f''(x) > 0 → निम्निष्ठ; f''(x) = 0 → परीक्षण असफल, चिह्न-तालिका लगाओ।
अंतराल [a, b] पर निरपेक्ष (global) उच्चिष्ठ स्थानीय उच्चिष्ठों और सिरों के मान f(a), f(b) में सबसे बड़ा होता है।
अवतलता और नति परिवर्तन बिंदु
द्वितीय अवकलज बताता है कि ढाल कैसे बदलती है। f''(x) > 0 हो तो ढाल बढ़ती जाती है और वक्र कप की तरह पानी रोकता है (ऊपर की ओर अवतल)। f''(x) < 0 हो तो टोपी की तरह पानी गिरा देता है (नीचे की ओर अवतल)।
नति परिवर्तन बिंदु वह है जहाँ अवतलता बदलती है। f''(x) = 0 निकालो और जाँचो कि वहाँ f'' का चिह्न सच में बदलता है। y = x⁴ में f''(0) = 0 है पर चिह्न नहीं बदलता, इसलिए (0, 0) निम्निष्ठ है, नति परिवर्तन नहीं।
अनंतस्पर्शी और परिमेय फलन
अनंतस्पर्शी (asymptote) वह रेखा है जिसके वक्र पास-पास आता जाता है।
- ऊर्ध्वाधर: जहाँ हर 0 हो और अंश नहीं। y = (x + 1)/(x − 2) में x = 2।
- क्षैतिज: x → ±∞ पर y की सीमा। y = (x + 1)/(x − 2) में y → 1।
- तिरछी: जब अंश की घात हर से एक ज़्यादा हो, भाग दो: (x² + 1)/x = x + 1/x, तो y = x अनंतस्पर्शी है।
स्केच में पहले अनंतस्पर्शी को डैश रेखा से बनाओ, फिर वक्र को उनके आसपास बिठाओ।
अर्थशास्त्र के ग्राफ़ और वक्र की लंबाई
अर्थशास्त्र: लागत C(q), आय R(q) और लाभ P(q) = R(q) − C(q) मात्रा q के फलन हैं। लाभ वहाँ सबसे ज़्यादा है जहाँ P'(q) = 0 और P''(q) < 0, यानी जहाँ सीमांत आय = सीमांत लागत (R'(q) = C'(q))। औसत लागत C(q)/q अक्सर U-आकार की होती है।
चाप लंबाई: चिकने वक्र y = f(x) की x = a से x = b तक लंबाई
L = ∫ab √(1 + (f'(x))²) dx।
यह छोटे-छोटे तिरछे टुकड़े जोड़ता है, हर एक की लंबाई √(dx² + dy²)। गति में t = a से t = b तक तय दूरी = ∫ |v(t)| dt।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- स्थिर बिंदु: f'(x) = 0
- f'(x) > 0 → वर्धमान; f'(x) < 0 → ह्रासमान
- स्थिर बिंदु पर f''(x) < 0 → उच्चिष्ठ; f''(x) > 0 → निम्निष्ठ
- नति परिवर्तन: f''(x) = 0 और f'' का चिह्न बदले
- सम: f(−x) = f(x); विषम: f(−x) = −f(x)
- चाप लंबाई: L = ∫ₐᵇ √(1 + (f'(x))²) dx
हल किए गए उदाहरण
1. y = x² − 4x + 1 के स्थिर बिंदु और उनका प्रकार निकालो।
y' = 2x − 4 = 0 → x = 2, y = 4 − 8 + 1 = −3। y'' = 2 > 0, तो (2, −3) निम्निष्ठ है। परवलय ऊपर की ओर खुलता है।
2. y = x³ − 3x का स्केच बनाओ।
अंतःखंड: (0, 0), (±√3, 0)। y' = 3x² − 3 = 0 → x = ±1: (−1, 2) और (1, −2)। y' के चिह्न: + − +, तो (−1, 2) उच्चिष्ठ, (1, −2) निम्निष्ठ। y'' = 6x: (0, 0) पर नति परिवर्तन। सिरे: दाईं ओर ऊपर, बाईं ओर नीचे। विषम फलन, मूल बिंदु के प्रति सममित।
3. y = x³ − 6x² + 9x का स्केच बनाओ।
y = x(x − 3)², तो अंतःखंड (0, 0) और (3, 0); x = 3 पर अक्ष को छूता है। y' = 3x² − 12x + 9 = 3(x − 1)(x − 3) = 0 → x = 1, 3। y(1) = 4, y(3) = 0। y'' = 6x − 12: y''(1) = −6 → उच्चिष्ठ (1, 4); y''(3) = 6 → निम्निष्ठ (3, 0)। नति परिवर्तन: 6x − 12 = 0 → x = 2, y = 2।
4. y = (2x + 1)/(x − 1) के अनंतस्पर्शी और अंतःखंड निकालो।
ऊर्ध्वाधर: x = 1। क्षैतिज: x → ±∞ पर y → 2। y-अंतःखंड: x = 0 → y = −1। x-अंतःखंड: 2x + 1 = 0 → x = −0.5। y' = −3/(x − 1)² < 0, तो x = 1 के दोनों ओर वक्र घटता है।
5. लाभ P(q) = −2q² + 40q − 50 (हज़ार ₹ में)। सबसे अच्छी मात्रा और सबसे बड़ा लाभ निकालो।
P'(q) = −4q + 40 = 0 → q = 10। P''(q) = −4 < 0, तो उच्चिष्ठ। P(10) = −200 + 400 − 50 = 150 हज़ार ₹।
6. y = (2/3)x^(3/2) की x = 0 से x = 3 तक चाप लंबाई निकालो।
y' = x^(1/2), तो 1 + (y')² = 1 + x। L = ∫₀³ √(1 + x) dx = (2/3)(1 + x)^(3/2), 0 से 3 तक = (2/3)(8 − 1) = 14/3 ≈ 4.67 इकाई।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि f'(x) = 0 वाला हर बिंदु उच्चिष्ठ या निम्निष्ठ है। y = x³ में f'(0) = 0 है पर वक्र बढ़ता ही रहता है: यह नति परिवर्तन है।
- f''(x) = 0 वाले हर बिंदु को नति परिवर्तन कहना। जाँचो कि f'' का चिह्न बदलता है या नहीं (y = x⁴ में 0 पर नहीं बदलता)।
- बंद अंतराल पर सबसे बड़ा या सबसे छोटा मान निकालते समय सिरों के मान भूल जाना।
- वक्र को ऊर्ध्वाधर अनंतस्पर्शी के पार खींच देना। वहाँ फलन परिभाषित ही नहीं है।