अनुकरण क्यों करें?
किसी घटना की सैद्धांतिक प्रायिकता तर्क से आती है: साफ़ पासे के 6 फलक समान संभावित हैं, तो P(6) = 1/6। प्रायोगिक प्रायिकता करके देखने से आती है: बहुत बार फेंको और सापेक्ष बारंबारता निकालो = (घटना कितनी बार हुई) ÷ (कुल प्रयास)।
कुछ प्रश्न सिद्धांत से हल करना कठिन है, जैसे "सभी 6 खिलौने पाने के लिए कितने डिब्बे ख़रीदने पड़ेंगे?" अनुकरण यादृच्छिक संख्याओं (कैलकुलेटर, कंप्यूटर या यादृच्छिक अंक सारणी) से उस प्रक्रिया की नक़ल करता है, ताकि जल्दी और सस्ते में अनुमान मिल जाए।
अनुकरण की योजना: कदम-दर-कदम
- प्रश्न: लिखो कि क्या अनुमान लगाना है, जैसे P(4 बार में कम से कम एक 6)।
- मॉडल: हर परिणाम को सही अनुपात में अंक दो। 30% संभावना के लिए 0–2 = "हाँ", 3–9 = "नहीं"। पासे के लिए 1–6, और 0, 7, 8, 9 छोड़ो। 0.45 जैसी संभावना के लिए 00–44 = हाँ, 45–99 = नहीं।
- प्रयास: साफ़ बताओ कि एक प्रयास क्या है (जैसे 4 काम के अंक पढ़ो) और घटना क्या मानी जाएगी। दोहराव की अनुमति है या नहीं, यह भी बताओ।
- चलाओ: बहुत सारे प्रयास करो और नतीजे लिखो।
- उत्तर: अनुमान = घटना की गिनती ÷ प्रयास, संदर्भ के साथ लिखो।
हर प्रयास स्वतंत्र हो और एक ही नियम से चले, वरना अनुमान पक्षपाती (biased) होगा।
बड़ी संख्याओं का नियम
कम प्रयासों में सापेक्ष बारंबारता सच से दूर हो सकती है: 10 में 3 बार छह = 0.3, जो 1/6 का लगभग दुगुना है। प्रयास बढ़ने पर सापेक्ष बारंबारता सही प्रायिकता के और पास टिकती जाती है। यही बड़ी संख्याओं का नियम (law of large numbers) है।
यह सिर्फ़ लंबे समय में काम करता है। इसका मतलब यह नहीं कि कई बार छह न आए तो अब छह "आना ही है"। पासे की याददाश्त नहीं होती; हर बार 1/6 ही है। इस ग़लत सोच को जुआरी की भ्रांति (gambler's fallacy) कहते हैं।
मोटा नियम: अनुमान की आम ग़लती 1 ÷ √(प्रयास) की तरह घटती है। 4 गुना प्रयास करो तो ग़लती आधी।
हल किया हुआ अनुकरण और करके देखो
उदाहरण: एक खिलाड़ी 70% फ़्री थ्रो डालती है। P(तीनों थ्रो सफल) का अनुमान लगाओ।
- मॉडल: अंक 0–6 = सफल, 7–9 = चूक।
- प्रयास: 3 अंक पढ़ो; घटना = तीनों 0–6 में।
- अंक 512 | 873 | 046 | 390 | 621 → प्रयास 1, 3 और 5 में सब सफल; प्रयास 2 में 8 और 7, प्रयास 4 में 9।
- 5 प्रयासों से अनुमान: 3/5 = 0.6। बहुत ज़्यादा प्रयासों में यह 0.7³ = 0.343 के पास टिकता है, यानी 5 प्रयास काफ़ी नहीं।
करके देखो: सिक्का 20 बार उछालो और हर बार के बाद चित का अब तक का अनुपात लिखो। इसका ग्राफ़ बनाओ। फिर 3D खेल में "चलाओ 1000" दबाओ और काँपती शुरुआत को सपाट अंत से मिलाओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सापेक्ष बारंबारता = घटना की गिनती ÷ प्रयासों की संख्या
- सैद्धांतिक प्रायिकता = अनुकूल परिणाम ÷ कुल समान संभावित परिणाम
- प्रायिकता p के लिए अंक: कुल अंकों का p भाग "हाँ" को दो
- P(कम से कम एक) = 1 − P(एक भी नहीं); जैसे 1 − (5/6)⁴ ≈ 0.518
- आम ग़लती ≈ 1 ÷ √n (प्रयास n बढ़ने पर घटती है)
हल किए गए उदाहरण
1. एक चक्री 0.4 प्रायिकता से लाल पर रुकती है। एक घुमाव के लिए अंक बाँटो।
एक अंक: 0–3 = लाल (10 में 4 = 0.4), 4–9 = लाल नहीं।
2. 50 प्रयासों में घटना 13 बार हुई। अनुमान?
13 ÷ 50 = 0.26।
3. परिवार में 3 बच्चे; हर बच्चा लड़की या लड़का बराबर संभावना से। P(कम से कम 2 लड़कियाँ) का अनुकरण बनाओ।
मॉडल: सम अंक = लड़की, विषम = लड़का। प्रयास: 3 अंक। घटना: कम से कम 2 सम अंक। 100+ प्रयास। उत्तर: गिनती ÷ प्रयास (सिद्धांत: 4/8 = 0.5)।
4. अंक 3 8 1 7 2 9 5 0 4 6 (सम = लड़की) से पहली तीन तिकड़ियों में कितनों में कम से कम 2 लड़कियाँ हैं?
381 → 8 सम: 1 लड़की (नहीं)। 729 → 2: 1 (नहीं)। 504 → 0, 4: 2 (हाँ)। 3 में 1, अनुमान 1/3, प्रयास बहुत कम हैं।
5. 5 सही/ग़लत प्रश्न। P(अंदाज़े से कम से कम 4 सही) का अनुकरण बनाओ।
मॉडल: 0–4 = सही, 5–9 = ग़लत। प्रयास: 5 अंक। घटना: कम से कम 4 अंक 0–4 में। बहुत प्रयास चलाओ; सिद्धांत 6/32 ≈ 0.19 से मिलाओ।
6. 400 प्रयासों के अनुकरण से "4 बार में कम से कम एक 6" का अनुमान 0.52 आया। क्या यह ठीक है?
सिद्धांत: 1 − (5/6)⁴ ≈ 0.518। आम ग़लती ≈ 1/√400 = 0.05, और 0.52 सच से सिर्फ़ 0.002 दूर है, तो हाँ।
आम गलतियाँ
- ग़लत अनुपात में अंक देना, जैसे 40% के लिए 0–4 (यह 5 अंक = 50% है)।
- बेकार अंक (पासे के लिए 0, 7, 8, 9) छोड़ना भूल जाना, या दोहराव का नियम न बताना।
- बहुत कम प्रयासों के अनुमान पर भरोसा करना। सैकड़ों प्रयास करो।
- जुआरी की भ्रांति: पिछले नतीजे अगले स्वतंत्र प्रयास को नहीं बदलते।