बरनौली परीक्षण: एक हाँ/ना प्रयोग
बरनौली परीक्षण ऐसा प्रयोग है जिसके सिर्फ़ दो परिणाम होते हैं। एक को हम सफलता कहते हैं, दूसरे को असफलता। सफलता की प्रायिकता p, असफलता की q = 1 − p।
उदाहरण: सिक्के पर चित आना या न आना; बीज का उगना या न उगना; पेनल्टी पर गोल होना या न होना।
जो चर सफलता पर 1 और असफलता पर 0 ले, वह बरनौली बंटन मानता है। इसका माध्य p और प्रसरण p(1 − p) है।
कब कोई स्थिति द्विपद है?
चार बातें जाँचो (याद रखो BINS):
- B – दो ही परिणाम: सफलता या असफलता।
- I – स्वतंत्र: एक परीक्षण अगले को नहीं बदलता।
- N – परीक्षणों की संख्या n पहले से तय।
- S – हर बार सफलता की प्रायिकता p वही।
चारों सही हों तो X = सफलताओं की संख्या, B(n, p) मानती है। पत्ते वापस रखकर निकालना द्विपद है। बिना वापस रखे निकालना द्विपद नहीं, क्योंकि p बदल जाता है (अतिगुणोत्तर वाला भाग देखो)।
द्विपद सूत्र, कदम-दर-कदम
n स्तरों वाला वृक्ष आरेख (tree diagram) सोचो। k सफलता और n − k असफलता वाले एक रास्ते की प्रायिकता pᵏ qⁿ⁻ᵏ है (रास्ते पर गुणा करो, क्योंकि परीक्षण स्वतंत्र हैं)।
ऐसे रास्ते कितने? n जगहों में से k जगह सफलता के लिए चुननी हैं: ⁿCₖ तरीक़े।
P(X = k) = ⁿCₖ pᵏ qⁿ⁻ᵏ, k = 0, 1, …, n
यहाँ ⁿCₖ = n! ÷ (k! (n − k)!)। नाम द्विपद प्रमेय से आया: (q + p)ⁿ के पद ठीक यही प्रायिकताएँ हैं, इसलिए इनका जोड़ (q + p)ⁿ = 1ⁿ = 1।
माध्य, प्रसरण और आलेख का आकार
X असल में n बरनौली चरों का योग है, हर एक का माध्य p और प्रसरण pq। इसलिए:
- माध्य E(X) = np
- प्रसरण Var(X) = npq
- मानक विचलन σ = √(npq)
सबसे ऊँचा स्तंभ (बहुलक) हमेशा np के पास होता है। p = 0.5 हो तो आलेख सममित है। p छोटा हो तो बाईं ओर झुका, p बड़ा हो तो दाईं ओर। n बहुत बड़ा हो तो आलेख घंटी जैसा दिखता है।
अनुकरण, उतार-चढ़ाव और परीक्षण का विचार
कंप्यूटर प्रयोग की नकल (अनुकरण) कर सकता है: 0 और 1 के बीच एक यादृच्छिक संख्या लो; अगर वह p से कम है तो सफलता गिनो। बार-बार दोहराओ।
अलग-अलग नमूने अलग नतीजे देते हैं। इसे नमूना उतार-चढ़ाव कहते हैं। n आकार के नमूने में सफलता का अनुपात f प्रायः p − 1/√n से p + 1/√n के बीच रहता है (लगभग 95% नमूनों में, जब n ≥ 25 और 0.2 ≤ p ≤ 0.8)।
परीक्षण का विचार: एक कंपनी कहती है 50% लोग उसका पेय पसंद करते हैं। 100 लोगों के निष्पक्ष नमूने में सिर्फ़ 35 पसंद करते हैं। अंतराल 0.5 ± 0.1 = [0.4, 0.6]। 0.35 बाहर है, इसलिए दावे पर शक होता है। अगर नमूना यादृच्छिक न हो, जैसे सिर्फ़ कंपनी की दुकान में पूछना, तो सर्वे पक्षपाती हो जाता है।
बिना वापस रखे: अतिगुणोत्तर बंटन
एक डिब्बे में N चीज़ें हैं, उनमें K “अच्छी”। हम n चीज़ें बिना वापस रखे निकालते हैं। X = निकली अच्छी चीज़ों की संख्या।
P(X = k) = ᴷCₖ × ᴺ⁻ᴷCₙ₋ₖ ÷ ᴺCₙ
इसका माध्य भी n × K/N है। परीक्षण स्वतंत्र नहीं, इसलिए यह द्विपद नहीं। अगर N, n से बहुत बड़ा हो तो यह लगभग B(n, K/N) जैसा ही होता है।
करके देखो: पहले अनुमान, फिर जाँच
4 सिक्के एक साथ 32 बार उछालो और हर बार चित गिनो। पहले अनुमान लगाओ: B(4, 0.5) के हिसाब से 0 चित लगभग 2 बार, 1 चित 8 बार, 2 चित 12 बार, 3 चित 8 बार, 4 चित 2 बार। अब उछालकर मिलान करो। फिर 3D में n = 4, p = 0.5 रखकर “100 बार चलाओ” दबाओ और तुलना करो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- P(X = k) = ⁿCₖ pᵏ qⁿ⁻ᵏ, q = 1 − p
- ⁿCₖ = n! / (k! (n − k)!)
- E(X) = np, Var(X) = npq, σ = √(npq)
- P(X ≥ 1) = 1 − qⁿ
- बरनौली: माध्य = p, प्रसरण = pq
- अतिगुणोत्तर: P(X = k) = ᴷCₖ · ᴺ⁻ᴷCₙ₋ₖ / ᴺCₙ
- उतार-चढ़ाव अंतराल (≈95%): [p − 1/√n, p + 1/√n]
हल किए गए उदाहरण
1. एक न्याय्य सिक्का 5 बार उछाला गया। ठीक 3 चित आने की प्रायिकता ज्ञात करो।
n = 5, p = 0.5, k = 3। P = ⁵C₃ × 0.5³ × 0.5² = 10 × 1/32 = 0.3125।
2. गेंदबाज़ हर गेंद पर 0.3 प्रायिकता से विकेट उड़ाता है। 6 गेंदों में ठीक 2 बार की प्रायिकता?
n = 6, p = 0.3, q = 0.7। P = ⁶C₂ × 0.3² × 0.7⁴ = 15 × 0.09 × 0.2401 ≈ 0.324।
3. 5% बल्ब ख़राब हैं। 20 बल्ब यादृच्छिक चुने। एक भी ख़राब न होने और कम से कम एक ख़राब होने की प्रायिकता?
P(X = 0) = 0.95²⁰ ≈ 0.358। P(X ≥ 1) = 1 − 0.358 = 0.642।
4. X ~ B(10, 0.4)। माध्य, प्रसरण और मानक विचलन ज्ञात करो।
माध्य = np = 4। प्रसरण = npq = 10 × 0.4 × 0.6 = 2.4। σ = √2.4 ≈ 1.55।
5. एक द्विपद चर का माध्य 6 और प्रसरण 4.2 है। n और p ज्ञात करो।
q = npq ÷ np = 4.2 ÷ 6 = 0.7, तो p = 0.3। n = 6 ÷ 0.3 = 20।
6. पासा कम से कम कितनी बार फेंकें कि कम से कम एक छक्का आने की प्रायिकता 0.9 से ज़्यादा हो?
1 − (5/6)ⁿ > 0.9 ⇒ (5/6)ⁿ < 0.1। (5/6)¹² ≈ 0.112, (5/6)¹³ ≈ 0.093। इसलिए n = 13।
7. थैले में 6 लाल और 4 नीली गोलियाँ हैं। 3 गोलियाँ बिना वापस रखे निकालीं। ठीक 2 लाल की प्रायिकता?
अतिगुणोत्तर: ⁶C₂ × ⁴C₁ ÷ ¹⁰C₃ = 15 × 4 ÷ 120 = 0.5। (वापस रखकर होता तो ³C₂ × 0.6² × 0.4 = 0.432।)
आम गलतियाँ
- ⁿCₖ भूल जाना और सिर्फ़ pᵏ qⁿ⁻ᵏ लिखना — यह तो सिर्फ़ एक क्रम की प्रायिकता है।
- बिना वापस रखे निकालने पर भी द्विपद लगाना; तब p बदलता है और अतिगुणोत्तर चाहिए।
- “कम से कम एक” के लिए कई पद जोड़ना, जबकि 1 − P(X = 0) आसान है।
- प्रसरण और मानक विचलन में गड़बड़: प्रसरण = npq, σ = √(npq)।