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द्विपद बंटन (Binomial Distribution)

एक ही हाँ/ना वाला प्रयोग n बार दोहराओ, हर बार स्वतंत्र रूप से और हर बार सफलता की प्रायिकता p बराबर। तब सफलताओं की संख्या X द्विपद बंटन B(n, p) मानती है: P(X = k) = ⁿCₖ pᵏ qⁿ⁻ᵏ, जहाँ q = 1 − p। माध्य np और प्रसरण npq होता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. एक प्रयोग के सिर्फ़ दो नतीजे हैं: सफलता (हरा) या असफलता (धूसर)। सफलता की प्रायिकता p = 0.3, तो असफलता की q = 0.7।
  2. अब यही प्रयोग 4 बार करो। एक बार का नतीजा दूसरे पर असर नहीं डालता। क्रम S S F F की प्रायिकता = 0.3 × 0.3 × 0.7 × 0.7 = 0.0441।
  3. ठीक 2 सफलता 6 अलग क्रमों में आ सकती है। पंक्तियाँ गिनो: ⁴C₂ = 6। इसलिए P(X = 2) = 6 × 0.0441 ≈ 0.265।
  4. यही 0, 1, 2, 3 और 4 सफलता के लिए करो। स्तंभ सारी प्रायिकताएँ दिखाते हैं। सबका जोड़ 1 है।
  5. 10 बार और p = 0.3 हो तो सबसे ऊँचा स्तंभ 3 के पास है। यही माध्य np = 3 है। फैलाव यानी प्रसरण npq = 2.1।
  6. तुम्हारी बारी: स्लाइडर से n और p बदलो। 100 असली प्रयोग चलाओ और नीले बिंदुओं को स्तंभों से मिलाओ।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

एक क्रम में प्रायिकताओं को गुणा क्यों करते हैं?

परीक्षण स्वतंत्र हैं, इसलिए “यह और यह और यह” की प्रायिकता गुणनफल है। कदम 2 में 0.3 × 0.3 × 0.7 × 0.7 दिखता है।

P(X = 2) सिर्फ़ 0.3² × 0.7² क्यों नहीं?

वह सिर्फ़ एक क्रम है। 2 सफलता वाले 6 क्रम हैं; कदम 3 की छह पंक्तियाँ गिनो।

क्या सारी प्रायिकताओं का जोड़ सच में 1 है?

हाँ। X को 0, 1, …, n में से कुछ होना ही है, और ये पद (q + p)ⁿ = 1 के विस्तार के पद हैं। कदम 4 में सारे स्तंभ देखो।

क्या सबसे संभावित मान हमेशा ठीक np होता है?

हमेशा ठीक नहीं, पर सबसे ऊँचा स्तंभ np के बिलकुल पास होता है। कदम 5 में np = 3 और सबसे ऊँचा स्तंभ 3 पर है।

मेरे असली नतीजे सूत्र से पूरे क्यों नहीं मिलते?

यादृच्छिक नमूने ऊपर-नीचे होते हैं। खेल वाले कदम में 100 प्रयोग कई बार चलाओ: बिंदु स्तंभों के आसपास उछलते हैं, पर पास रहते हैं।

p बढ़ाने से क्या बदलता है?

स्तंभ दाईं ओर खिसकते हैं, क्योंकि ज़्यादा सफलताएँ संभव हो जाती हैं। p स्लाइडर से ख़ुद देखो।

बरनौली परीक्षण: एक हाँ/ना प्रयोग

बरनौली परीक्षण ऐसा प्रयोग है जिसके सिर्फ़ दो परिणाम होते हैं। एक को हम सफलता कहते हैं, दूसरे को असफलता। सफलता की प्रायिकता p, असफलता की q = 1 − p।

उदाहरण: सिक्के पर चित आना या न आना; बीज का उगना या न उगना; पेनल्टी पर गोल होना या न होना।

जो चर सफलता पर 1 और असफलता पर 0 ले, वह बरनौली बंटन मानता है। इसका माध्य p और प्रसरण p(1 − p) है।

कब कोई स्थिति द्विपद है?

चार बातें जाँचो (याद रखो BINS):

चारों सही हों तो X = सफलताओं की संख्या, B(n, p) मानती है। पत्ते वापस रखकर निकालना द्विपद है। बिना वापस रखे निकालना द्विपद नहीं, क्योंकि p बदल जाता है (अतिगुणोत्तर वाला भाग देखो)।

द्विपद सूत्र, कदम-दर-कदम

n स्तरों वाला वृक्ष आरेख (tree diagram) सोचो। k सफलता और n − k असफलता वाले एक रास्ते की प्रायिकता pᵏ qⁿ⁻ᵏ है (रास्ते पर गुणा करो, क्योंकि परीक्षण स्वतंत्र हैं)।

ऐसे रास्ते कितने? n जगहों में से k जगह सफलता के लिए चुननी हैं: ⁿCₖ तरीक़े।

P(X = k) = ⁿCₖ pᵏ qⁿ⁻ᵏ,  k = 0, 1, …, n

यहाँ ⁿCₖ = n! ÷ (k! (n − k)!)। नाम द्विपद प्रमेय से आया: (q + p)ⁿ के पद ठीक यही प्रायिकताएँ हैं, इसलिए इनका जोड़ (q + p)ⁿ = 1ⁿ = 1।

माध्य, प्रसरण और आलेख का आकार

X असल में n बरनौली चरों का योग है, हर एक का माध्य p और प्रसरण pq। इसलिए:

सबसे ऊँचा स्तंभ (बहुलक) हमेशा np के पास होता है। p = 0.5 हो तो आलेख सममित है। p छोटा हो तो बाईं ओर झुका, p बड़ा हो तो दाईं ओर। n बहुत बड़ा हो तो आलेख घंटी जैसा दिखता है।

अनुकरण, उतार-चढ़ाव और परीक्षण का विचार

कंप्यूटर प्रयोग की नकल (अनुकरण) कर सकता है: 0 और 1 के बीच एक यादृच्छिक संख्या लो; अगर वह p से कम है तो सफलता गिनो। बार-बार दोहराओ।

अलग-अलग नमूने अलग नतीजे देते हैं। इसे नमूना उतार-चढ़ाव कहते हैं। n आकार के नमूने में सफलता का अनुपात f प्रायः p − 1/√n से p + 1/√n के बीच रहता है (लगभग 95% नमूनों में, जब n ≥ 25 और 0.2 ≤ p ≤ 0.8)।

परीक्षण का विचार: एक कंपनी कहती है 50% लोग उसका पेय पसंद करते हैं। 100 लोगों के निष्पक्ष नमूने में सिर्फ़ 35 पसंद करते हैं। अंतराल 0.5 ± 0.1 = [0.4, 0.6]। 0.35 बाहर है, इसलिए दावे पर शक होता है। अगर नमूना यादृच्छिक न हो, जैसे सिर्फ़ कंपनी की दुकान में पूछना, तो सर्वे पक्षपाती हो जाता है।

बिना वापस रखे: अतिगुणोत्तर बंटन

एक डिब्बे में N चीज़ें हैं, उनमें K “अच्छी”। हम n चीज़ें बिना वापस रखे निकालते हैं। X = निकली अच्छी चीज़ों की संख्या।

P(X = k) = ᴷCₖ × ᴺ⁻ᴷCₙ₋ₖ ÷ ᴺCₙ

इसका माध्य भी n × K/N है। परीक्षण स्वतंत्र नहीं, इसलिए यह द्विपद नहीं। अगर N, n से बहुत बड़ा हो तो यह लगभग B(n, K/N) जैसा ही होता है।

करके देखो: पहले अनुमान, फिर जाँच

4 सिक्के एक साथ 32 बार उछालो और हर बार चित गिनो। पहले अनुमान लगाओ: B(4, 0.5) के हिसाब से 0 चित लगभग 2 बार, 1 चित 8 बार, 2 चित 12 बार, 3 चित 8 बार, 4 चित 2 बार। अब उछालकर मिलान करो। फिर 3D में n = 4, p = 0.5 रखकर “100 बार चलाओ” दबाओ और तुलना करो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक न्याय्य सिक्का 5 बार उछाला गया। ठीक 3 चित आने की प्रायिकता ज्ञात करो।

n = 5, p = 0.5, k = 3। P = ⁵C₃ × 0.5³ × 0.5² = 10 × 1/32 = 0.3125।

2. गेंदबाज़ हर गेंद पर 0.3 प्रायिकता से विकेट उड़ाता है। 6 गेंदों में ठीक 2 बार की प्रायिकता?

n = 6, p = 0.3, q = 0.7। P = ⁶C₂ × 0.3² × 0.7⁴ = 15 × 0.09 × 0.2401 ≈ 0.324।

3. 5% बल्ब ख़राब हैं। 20 बल्ब यादृच्छिक चुने। एक भी ख़राब न होने और कम से कम एक ख़राब होने की प्रायिकता?

P(X = 0) = 0.95²⁰ ≈ 0.358। P(X ≥ 1) = 1 − 0.358 = 0.642।

4. X ~ B(10, 0.4)। माध्य, प्रसरण और मानक विचलन ज्ञात करो।

माध्य = np = 4। प्रसरण = npq = 10 × 0.4 × 0.6 = 2.4। σ = √2.4 ≈ 1.55।

5. एक द्विपद चर का माध्य 6 और प्रसरण 4.2 है। n और p ज्ञात करो।

q = npq ÷ np = 4.2 ÷ 6 = 0.7, तो p = 0.3। n = 6 ÷ 0.3 = 20।

6. पासा कम से कम कितनी बार फेंकें कि कम से कम एक छक्का आने की प्रायिकता 0.9 से ज़्यादा हो?

1 − (5/6)ⁿ > 0.9 ⇒ (5/6)ⁿ < 0.1। (5/6)¹² ≈ 0.112, (5/6)¹³ ≈ 0.093। इसलिए n = 13।

7. थैले में 6 लाल और 4 नीली गोलियाँ हैं। 3 गोलियाँ बिना वापस रखे निकालीं। ठीक 2 लाल की प्रायिकता?

अतिगुणोत्तर: ⁶C₂ × ⁴C₁ ÷ ¹⁰C₃ = 15 × 4 ÷ 120 = 0.5। (वापस रखकर होता तो ³C₂ × 0.6² × 0.4 = 0.432।)

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. द्विपद स्थिति के लिए कौन-सी शर्त ज़रूरी नहीं है?
2. X ~ B(8, 0.25)। X का माध्य:
3. B(n, p) में P(X = k) बराबर है:
4. X ~ B(10, 0.5)। Var(X) =
5. बिना वापस रखे 3 पत्ते निकालकर इक्के गिनना किस बंटन का उदाहरण है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

द्विपद बंटन आसान शब्दों में क्या है?

जब एक ही हाँ/ना वाला प्रयोग n बार दोहराया जाए और परीक्षण एक-दूसरे पर असर न डालें, तो ठीक k सफलता की प्रायिकता द्विपद बंटन से मिलती है।

बरनौली और द्विपद में क्या अंतर है?

बरनौली परीक्षण एक अकेला हाँ/ना प्रयोग है। द्विपद बंटन n ऐसे स्वतंत्र परीक्षणों में सफलताएँ गिनता है। B(1, p) ही बरनौली बंटन है।

द्विपद बंटन का माध्य np क्यों होता है?

हर परीक्षण औसतन p सफलता जोड़ता है और परीक्षण n हैं, इसलिए औसत कुल n × p।

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