Russia 9 класс Probability and Statistics
अध्याय: 5
1. Data
Real data
- सांख्यिकी: वर्गीकृत आँकड़ों का माध्य, माध्यक और बहुलक – जब आँकड़े वर्गों में बँटे हों (जैसे अंक 20–30), तो हर एक मान नहीं दिखता। माध्य के लिए हर वर्ग का बीच का मान लेते हैं, माध्यक के लिए चलता जोड़ (संचयी बारंबारता), और बहुलक के लिए सबसे ऊँचा खंभा। तीनों अलग तरीके से आँकड़ों का 'केंद्र' बताते हैं।
2. Combinatorics
Counting
- क्रमचय और संचय – इस अध्याय का मूल है: बिना सूची बनाए गिनना। गणना का मूल सिद्धांत कहता है: यदि एक काम m तरीकों से और उसके बाद दूसरा n तरीकों से हो सकता है, तो दोनों मिलकर m × n तरीकों से होते हैं। n! (n क्रमगुणित) = 1 × 2 × … × n, और 0! = 1। क्रमचय एक व्यवस्था है, जिसमें क्रम मायने रखता है: n भिन्न वस्तुओं में से r को व्यवस्थित करने के तरीके ⁿPᵣ = n!/(n − r)!। संचय एक चयन है, जिसमें क्रम मायने नहीं रखता: ⁿCᵣ = n!/(r!(n − r)!)। हर चयन को r! तरीकों से सजा सकते हैं, इसलिए ⁿPᵣ = ⁿCᵣ × r!। उपयोगी तथ्य: ⁿCᵣ = ⁿCₙ₋ᵣ और ⁿCᵣ + ⁿCᵣ₋₁ = ⁿ⁺¹Cᵣ। कुछ वस्तुएँ समान हों तो हर दोहराव की संख्या के क्रमगुणित से भाग दें।
3. Geometric probability
Random point
जल्द आ रहा है
4. Bernoulli trials
Series of trials
- द्विपद बंटन (Binomial Distribution) – एक ही हाँ/ना वाला प्रयोग n बार दोहराओ, हर बार स्वतंत्र रूप से और हर बार सफलता की प्रायिकता p बराबर। तब सफलताओं की संख्या X द्विपद बंटन B(n, p) मानती है: P(X = k) = ⁿCₖ pᵏ qⁿ⁻ᵏ, जहाँ q = 1 − p। माध्य np और प्रसरण npq होता है।
5. Random variables
Distribution, expectation, variance · Law of large numbers
- यादृच्छिक चर और प्रायिकता बंटन – यादृच्छिक चर (random variable) X किसी संयोग वाले प्रयोग के हर परिणाम को एक संख्या देता है। असतत (discrete) यादृच्छिक चर अलग-अलग मान लेता है; उसका प्रायिकता बंटन हर मान x और उसकी प्रायिकता P(X = x) बताता है, जिनका जोड़ 1 होता है। माध्य (प्रत्याशित मान) E(X) = Σ x·P(x) है। प्रसरण Var(X) = E(X²) − [E(X)]² फैलाव मापता है, और मानक विचलन इसका वर्गमूल है।
- बड़ी संख्याओं का नियम (Law of Large Numbers) – किसी यादृच्छिक प्रयोग को बार-बार दोहराओ तो किसी घटना की आपेक्षिक बारंबारता उसकी प्रायिकता p के और पास आती जाती है। ठीक-ठीक कहें तो किसी भी छोटी दूरी ε के लिए, बारंबारता (या नमूना माध्य) के असली मान से ε से ज़्यादा दूर होने की प्रायिकता, प्रयासों की संख्या n बढ़ने पर 0 की ओर जाती है। चेबीशेव असमिका सीमा देती है: P(|X̄ − μ| ≥ ε) ≤ σ² ÷ (nε²)।