South 고등학교 3학년 Probability and Statistics
अध्याय: 3
1. Counting
Circular and repeated permutations · Repeated combinations · Binomial theorem
- क्रमचय और संचय – इस अध्याय का मूल है: बिना सूची बनाए गिनना। गणना का मूल सिद्धांत कहता है: यदि एक काम m तरीकों से और उसके बाद दूसरा n तरीकों से हो सकता है, तो दोनों मिलकर m × n तरीकों से होते हैं। n! (n क्रमगुणित) = 1 × 2 × … × n, और 0! = 1। क्रमचय एक व्यवस्था है, जिसमें क्रम मायने रखता है: n भिन्न वस्तुओं में से r को व्यवस्थित करने के तरीके ⁿPᵣ = n!/(n − r)!। संचय एक चयन है, जिसमें क्रम मायने नहीं रखता: ⁿCᵣ = n!/(r!(n − r)!)। हर चयन को r! तरीकों से सजा सकते हैं, इसलिए ⁿPᵣ = ⁿCᵣ × r!। उपयोगी तथ्य: ⁿCᵣ = ⁿCₙ₋ᵣ और ⁿCᵣ + ⁿCᵣ₋₁ = ⁿ⁺¹Cᵣ। कुछ वस्तुएँ समान हों तो हर दोहराव की संख्या के क्रमगुणित से भाग दें।
- धन पूर्णांक घातांक के लिए द्विपद प्रमेय – द्विपद यानी दो पदों वाला व्यंजक, जैसे a + b। द्विपद प्रमेय बताता है कि किसी भी धन पूर्णांक n के लिए (a + b)ⁿ को बार-बार गुणा किए बिना कैसे खोलें: (a + b)ⁿ = ⁿC₀aⁿ + ⁿC₁aⁿ⁻¹b + ⁿC₂aⁿ⁻²b² + … + ⁿCₙbⁿ। कुल n + 1 पद होते हैं। हर पद में a की घात 1 घटती और b की घात 1 बढ़ती है, और दोनों घातों का योग हमेशा n रहता है। गुणांक ⁿCᵣ पास्कल त्रिभुज की पंक्ति n की संख्याएँ हैं, जहाँ हर संख्या ऊपर की दो संख्याओं का योग है। (r + 1)वाँ पद Tᵣ₊₁ = ⁿCᵣ aⁿ⁻ʳ bʳ है। यह पैटर्न भारत में बहुत पहले ज्ञात था (पिंगल का मेरु प्रस्तार), फ़ारस और चीन में भी, और बाद में पास्कल ने इसका विस्तार से अध्ययन किया। प्रमेय की उपपत्ति ⁿCᵣ₋₁ + ⁿCᵣ = ⁿ⁺¹Cᵣ की मदद से गणितीय आगमन से होती है।
2. Probability
Statistical vs mathematical probability · Basic properties · Addition rule · Complements · Conditional probability · Independence · Multiplication rule
- प्रायिकता: घटनाएँ, घटनाओं का बीजगणित और अभिगृहीत – घटना प्रतिदर्श समष्टि S का कोई भी उपसमुच्चय है। घटनाओं A और B से नई घटनाएँ बनती हैं: A नहीं (A′), A और B (A ∩ B), A या B (A ∪ B)। कोई साझा परिणाम न हो तो घटनाएँ परस्पर अपवर्जी, और मिलकर पूरा S बनाएँ तो निःशेष। अभिगृहीत: हर P(E) ≥ 0, P(S) = 1, और परस्पर अपवर्जी A, B के लिए P(A ∪ B) = P(A) + P(B)। इनसे P(A′) = 1 − P(A) और P(A ∪ B) = P(A) + P(B) − P(A ∩ B) मिलते हैं।
- सप्रतिबंध प्रायिकता, गुणन नियम और स्वतंत्र घटनाएँ – सप्रतिबंध प्रायिकता का मतलब है: जब हमें पहले से पता हो कि घटना B हो चुकी है, तब A का मौका। B के बाहर के सारे परिणाम हटाओ और फिर से गिनो: P(A|B) = P(A ∩ B) ÷ P(B)। इसी से गुणन नियम मिलता है: P(A ∩ B) = P(B)·P(A|B)। अगर B जानकर A का मौका न बदले, तो घटनाएँ स्वतंत्र हैं और P(A ∩ B) = P(A)·P(B)।
3. Statistics
Random variables · Expected value and SD · Binomial distribution · Normal distribution · Population and sampling · Sample means · Estimating the mean
- यादृच्छिक चर और प्रायिकता बंटन – यादृच्छिक चर (random variable) X किसी संयोग वाले प्रयोग के हर परिणाम को एक संख्या देता है। असतत (discrete) यादृच्छिक चर अलग-अलग मान लेता है; उसका प्रायिकता बंटन हर मान x और उसकी प्रायिकता P(X = x) बताता है, जिनका जोड़ 1 होता है। माध्य (प्रत्याशित मान) E(X) = Σ x·P(x) है। प्रसरण Var(X) = E(X²) − [E(X)]² फैलाव मापता है, और मानक विचलन इसका वर्गमूल है।
- द्विपद बंटन (Binomial Distribution) – एक ही हाँ/ना वाला प्रयोग n बार दोहराओ, हर बार स्वतंत्र रूप से और हर बार सफलता की प्रायिकता p बराबर। तब सफलताओं की संख्या X द्विपद बंटन B(n, p) मानती है: P(X = k) = ⁿCₖ pᵏ qⁿ⁻ᵏ, जहाँ q = 1 − p। माध्य np और प्रसरण npq होता है।
- प्रसामान्य बंटन (Normal Distribution) – प्रसामान्य बंटन एक सतत, सममित, घंटी जैसा बंटन है जो माध्य μ (केंद्र) और मानक विचलन σ (फैलाव) से तय होता है: X ~ N(μ, σ²)। माध्य = माध्यिका = बहुलक। लगभग 68% मान μ से 1σ के भीतर, 95% 2σ के भीतर और 99.7% 3σ के भीतर होते हैं। किसी भी मान को मानक स्कोर z = (x − μ)/σ में बदलते हैं, जो N(0, 1) का पालन करता है; प्रायिकता वक्र के नीचे का क्षेत्रफल है, जिसे तालिका या कैलकुलेटर से Φ(z) के रूप में पढ़ते हैं।
- प्रतिचयन: प्रतिदर्श से पूरी समष्टि को जानना – समष्टि (population) वह पूरा समूह है जिसके बारे में हम जानना चाहते हैं; प्रतिदर्श (sample) उसका छोटा भाग है जिसे हम सच में जाँचते हैं। अच्छा प्रतिदर्श यादृच्छिक रूप से चुना जाता है ताकि वह पूरी समष्टि जैसा दिखे। सरल यादृच्छिक प्रतिचयन में सबको बराबर मौका; स्तरीकृत में हर समूह से सही हिस्सा; क्रमबद्ध में हर k-वाँ सदस्य। अलग-अलग प्रतिदर्श थोड़े अलग उत्तर देते हैं (प्रतिचयन-विचलन), पर बड़े प्रतिदर्श कम डगमगाते हैं (बड़ी संख्याओं का नियम)। पक्षपाती प्रतिदर्श कितना भी बड़ा हो, ग़लत उत्तर देता है।
- प्रतिदर्श बंटन (Sampling Distribution) और केंद्रीय सीमा प्रमेय – नमूने से निकाली संख्या (जैसे नमूना माध्य x̄ या नमूना अनुपात p̂) हर नमूने में थोड़ी बदलती है। अगर हम बहुत सारे नमूने लें और हर बार यह संख्या लिखें, तो जो पैटर्न बनता है वह उसका प्रतिदर्श बंटन है। इसका केंद्र असली मान (μ या p) होता है, फैलाव मानक त्रुटि (माध्य के लिए σ/√n, अनुपात के लिए √(p(1−p)/n)) होता है, और केंद्रीय सीमा प्रमेय के अनुसार बड़ा n होने पर इसका आकार लगभग सामान्य (घंटी जैसा) हो जाता है।
- विश्वास्यता अंतराल (Confidence Interval) – विश्वास्यता अंतराल किसी अज्ञात जनसंख्या संख्या (माध्य μ या अनुपात p) के लिए मानने लायक मानों की एक सीमा है, जो एक नमूने से निकाली जाती है। इसका रूप है: अनुमान ± त्रुटि सीमा, जहाँ त्रुटि सीमा = क्रांतिक मान × मानक त्रुटि। 95% स्तर का मतलब है कि यह तरीका लगभग 95% नमूनों में असली मान को पकड़ लेता है। ज़्यादा भरोसा चाहिए तो अंतराल चौड़ा होगा; नमूना बड़ा हो तो पतला। अगर कोई दावा अंतराल के बाहर है, तो आँकड़े उस दावे के ख़िलाफ़ सबूत देते हैं।