France Terminale Mathematics (specialty)
अध्याय: 4
1. Algebra and geometry
Combinatorics and counting · Vectors, lines and planes in space · Orthogonality and distances in space · Parametric and Cartesian equations
- क्रमचय और संचय – इस अध्याय का मूल है: बिना सूची बनाए गिनना। गणना का मूल सिद्धांत कहता है: यदि एक काम m तरीकों से और उसके बाद दूसरा n तरीकों से हो सकता है, तो दोनों मिलकर m × n तरीकों से होते हैं। n! (n क्रमगुणित) = 1 × 2 × … × n, और 0! = 1। क्रमचय एक व्यवस्था है, जिसमें क्रम मायने रखता है: n भिन्न वस्तुओं में से r को व्यवस्थित करने के तरीके ⁿPᵣ = n!/(n − r)!। संचय एक चयन है, जिसमें क्रम मायने नहीं रखता: ⁿCᵣ = n!/(r!(n − r)!)। हर चयन को r! तरीकों से सजा सकते हैं, इसलिए ⁿPᵣ = ⁿCᵣ × r!। उपयोगी तथ्य: ⁿCᵣ = ⁿCₙ₋ᵣ और ⁿCᵣ + ⁿCᵣ₋₁ = ⁿ⁺¹Cᵣ। कुछ वस्तुएँ समान हों तो हर दोहराव की संख्या के क्रमगुणित से भाग दें।
- त्रिविमीय ज्यामिति – आकाश में रेखा एक बिंदु और एक दिशा से तय होती है। दिक्-कोसाइन l, m, n के लिए l² + m² + n² = 1; इनके समानुपाती संख्याएँ दिक्-अनुपात हैं, दो बिंदुओं से (x₂ − x₁, y₂ − y₁, z₂ − z₁)। सदिश समीकरण r = a + λb, कार्तीय (x − x₁)/a = (y − y₁)/b = (z − z₁)/c। दो रेखाओं के बीच कोण: cosθ = |b₁·b₂|/(|b₁||b₂|)। आकाश में दो रेखाएँ समांतर, प्रतिच्छेदी या विषमतलीय होती हैं। विषमतलीय रेखाओं के बीच न्यूनतम दूरी d = |(a₂ − a₁)·(b₁ × b₂)|/|b₁ × b₂|; समांतर के लिए d = |b × (a₂ − a₁)|/|b|; d = 0 तो रेखाएँ मिलती हैं।
2. Analysis
Sequences: induction and limits · Limits of functions · Chain rule, second derivative, convexity · Continuity and intermediate value theorem · Natural logarithm · Sine and cosine functions · Antiderivatives and differential equations · Integration
- गणितीय आगमन द्वारा उपपत्ति – गणितीय आगमन (mathematical induction) से हम सिद्ध करते हैं कि कोई कथन P(n) हर प्राकृत संख्या n के लिए सत्य है। चरण 1 (आधार चरण): दिखाओ कि P(1) सत्य है। चरण 2 (आगमन चरण): मान लो किसी k के लिए P(k) सत्य है, और इससे दिखाओ कि P(k + 1) भी सत्य है। फिर डोमिनो की कतार की तरह P(1) से P(2), P(2) से P(3)… हमेशा के लिए सब सत्य।
- सीमा (कक्षा 11): फलन किस संख्या के पास जाता है – सीमा बताती है कि जब x किसी बिंदु के पास जाता है तो f(x) किस संख्या के पास पहुँचता है। हम बिंदु की ओर बाएँ से भी चलते हैं और दाएँ से भी। दोनों ओर से एक ही संख्या मिले, तो वही सीमा है। यहाँ बहुपद, परिमेय, त्रिकोणमितीय, चरघातांकी और लघुगणकीय फलनों की सीमाएँ और ज़रूरी मानक परिणाम सीखेंगे।
- सांतत्य तथा अवकलनीयता – किसी बिंदु पर फलन सतत तब है जब वहाँ ग्राफ़ टूटता नहीं: बायीं सीमा, दायीं सीमा और फलन का मान तीनों बराबर हों। अवकलज स्पर्श रेखा की ढाल है। शृंखला नियम, अस्पष्ट अवकलन, eˣ, ln x और प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के सूत्र, लघुगणकीय अवकलन और प्राचलिक रूप से कक्षा 12 का लगभग हर फलन अवकलित हो जाता है। द्वितीय अवकलज बताता है कि ढाल खुद कैसे बदल रही है, यानी वक्र कैसे मुड़ रहा है।
- सांतत्य (Continuity) और मध्यमान प्रमेय – फलन किसी बिंदु पर संतत होता है जब वहाँ उसकी सीमा और उसका मान बराबर हों। अंतराल पर संतत फलन में कोई छलांग नहीं होती, इसलिए वह दो मानों के बीच का कोई मान छोड़ नहीं सकता (मध्यमान प्रमेय)। अगर वह कड़ाई से एकदिष्ट भी हो, तो हर ऐसा मान ठीक एक बार मिलता है।
- लघुगणक (Logarithm) – लघुगणक बताता है कि कौन-सी घात चाहिए। log_b x = y का मतलब b^y = x। जैसे log₂ 8 = 3, क्योंकि 2³ = 8। लघुगणक गुणा को जोड़ में बदल देता है: log(ab) = log a + log b, log(a/b) = log a − log b, log(aⁿ) = n log a। आधार 10 = साधारण लघुगणक, आधार e = प्राकृतिक लघुगणक (ln)। आधार बदल सकते हैं: log_b x = log x ÷ log b।
- त्रिकोणमितीय फलन: रेडियन, इकाई वृत्त, ग्राफ़ और सर्वसमिकाएँ – एक रेडियन वह कोण है जिसका चाप त्रिज्या के बराबर हो, इसलिए π रेडियन = 180°। इकाई वृत्त पर कोण x वाला बिंदु P = (cos x, sin x) है, जिससे sin²x + cos²x = 1 मिलता है और sin, cos हर वास्तविक संख्या के लिए बन जाते हैं। चारों चतुर्थांशों में चिह्न 'All, Sin, Tan, Cos' से याद रखो; sin x और cos x हर 2π पर दोहराते हैं और −1 से 1 के बीच रहते हैं। cos(A + B) = cos A cos B − sin A sin B जैसे सूत्रों से tan(A + B), cot(A + B), योग-गुणनफल, द्विगुण और त्रिगुण कोण सूत्र निकलते हैं।
- अवकल समीकरण – अवकल समीकरण एक फलन y को उसके अवकलजों से जोड़ता है। इसकी कोटि सबसे ऊँचा अवकलज है और घात उस अवकलज की घात (जब समीकरण अवकलजों में बहुपद हो)। व्यापक हल में स्वेच्छ अचर होते हैं; y(0) = 1 जैसी शर्त उन्हें तय करके विशिष्ट हल देती है। कक्षा 12 में तीन प्रकार के प्रथम कोटि समीकरण हल करते हैं: चर पृथक्करणीय, समघातीय (y = vx रखो) और रैखिक dy/dx + Py = Q (समाकलन गुणक e^∫P dx से गुणा करो)।
- समाकलन – समाकलन अवकलन को उलट देता है: अगर F′(x) = f(x), तो ∫f(x) dx = F(x) + C। हम मानक सूत्रों, प्रतिस्थापन (अंदर वाले हिस्से को u मानना), आंशिक भिन्न (भिन्न को तोड़ना) और खंडशः समाकलन (∫u dv = uv − ∫v du) से समाकलन करते हैं। निश्चित समाकल ∫ₐᵇ f(x) dx, a से b तक वक्र के नीचे का चिह्नित क्षेत्रफल है, और मूल प्रमेय के अनुसार यह F(b) − F(a) के बराबर है।
3. Probability
Bernoulli trials and binomial distribution · Sums of random variables · Concentration inequalities, law of large numbers
- द्विपद बंटन (Binomial Distribution) – एक ही हाँ/ना वाला प्रयोग n बार दोहराओ, हर बार स्वतंत्र रूप से और हर बार सफलता की प्रायिकता p बराबर। तब सफलताओं की संख्या X द्विपद बंटन B(n, p) मानती है: P(X = k) = ⁿCₖ pᵏ qⁿ⁻ᵏ, जहाँ q = 1 − p। माध्य np और प्रसरण npq होता है।
- यादृच्छिक चर और प्रायिकता बंटन – यादृच्छिक चर (random variable) X किसी संयोग वाले प्रयोग के हर परिणाम को एक संख्या देता है। असतत (discrete) यादृच्छिक चर अलग-अलग मान लेता है; उसका प्रायिकता बंटन हर मान x और उसकी प्रायिकता P(X = x) बताता है, जिनका जोड़ 1 होता है। माध्य (प्रत्याशित मान) E(X) = Σ x·P(x) है। प्रसरण Var(X) = E(X²) − [E(X)]² फैलाव मापता है, और मानक विचलन इसका वर्गमूल है।
- बड़ी संख्याओं का नियम (Law of Large Numbers) – किसी यादृच्छिक प्रयोग को बार-बार दोहराओ तो किसी घटना की आपेक्षिक बारंबारता उसकी प्रायिकता p के और पास आती जाती है। ठीक-ठीक कहें तो किसी भी छोटी दूरी ε के लिए, बारंबारता (या नमूना माध्य) के असली मान से ε से ज़्यादा दूर होने की प्रायिकता, प्रयासों की संख्या n बढ़ने पर 0 की ओर जाती है। चेबीशेव असमिका सीमा देती है: P(|X̄ − μ| ≥ ε) ≤ σ² ÷ (nε²)।
4. Algorithms
Lists, sequence algorithms, bisection, Newton’s method
- संख्यात्मक विधियाँ: मूल और क्षेत्रफल कदम-दर-कदम – कुछ समीकरण और क्षेत्रफल किसी आसान सूत्र से नहीं निकलते। संख्यात्मक विधियाँ आसान कदमों को बार-बार दोहराकर उत्तर के जितना चाहो उतना पास पहुँचती हैं: चिह्न परिवर्तन जाँचो, अंतराल आधा करो (समद्विभाजन), स्पर्शरेखा पर फिसलो (न्यूटन-रैफ़सन), x = g(x) दोहराओ (स्थिर-बिंदु पुनरावृत्ति), क्षेत्रफल के लिए समलंब जोड़ो, और ढलान पर छोटे कदम चलो (ऑयलर)।