वेग और त्वरण अवकलज के रूप में
मान लो कण सीधी रेखा में चलता है। समय t पर उसकी स्थिति s(t) (मीटर) है। दो समयों के बीच औसत वेग = s में बदलाव ÷ t में बदलाव। समय-अंतर बहुत छोटा करें तो तात्क्षणिक वेग मिलता है:
v(t) = ds/dt = s′(t)
इसी तरह त्वरण वेग के बदलने की दर है:
a(t) = dv/dt = d²s/dt²
s–t ग्राफ़ पर स्पर्श-रेखा की ढाल वेग है। v–t ग्राफ़ पर स्पर्श-रेखा की ढाल त्वरण है। मात्रक: s मीटर, v मी/से, a मी/से²।
चिह्न: v > 0 यानी धनात्मक दिशा में गति, v < 0 ऋणात्मक दिशा में, v = 0 यानी पल भर के लिए विराम। v और a का चिह्न एक-सा हो तो कण तेज़ होता है; उल्टा हो तो धीमा।
विराम, मोड़ के बिंदु और चाल
कण विराम में तब है जब v = 0। अगर वहाँ v का चिह्न बदले तो कण वापस मुड़ता है। 3D ग्राफ़ में यह वहाँ है जहाँ s–t की स्पर्श-रेखा सपाट है (s की चोटी या घाटी)।
चाल |v| है, हमेशा धनात्मक। वेग का चिह्न होता है, चाल का नहीं। कार का वेग −5 मी/से (पीछे) और चाल 5 मी/से हो सकती है।
उदाहरण: s = t³ − 6t² + 9t। तब v = 3t² − 12t + 9 = 3(t − 1)(t − 3), इसलिए t = 1 और t = 3 पर v = 0। कण t = 1 तक आगे जाता है (s = 4), t = 3 तक पीछे आता है (s = 0) और फिर आगे जाता है।
समाकलन से विस्थापन और दूरी
प्रक्रिया उलट दो। v(t) पता हो तो t = a से t = b तक विस्थापन v का निश्चित समाकलन है:
विस्थापन = ∫ₐᵇ v(t) dt = s(b) − s(a)
यह v–t ग्राफ़ के नीचे का चिह्नित क्षेत्रफल है: अक्ष के ऊपर धनात्मक, नीचे ऋणात्मक। इसलिए कण बहुत चला हो तब भी विस्थापन 0 हो सकता है।
तय की गई दूरी में हर हिस्सा धनात्मक गिना जाता है, इसलिए वह चाल का समाकलन है:
दूरी = ∫ₐᵇ |v(t)| dt
कैसे निकालें: v = 0 वाले समय खोजो, अंतराल वहाँ तोड़ो, हर टुकड़े का समाकलन करो, उसका निरपेक्ष मान लो और जोड़ो।
समतल में गति: प्राचल (पैरामीट्रिक) स्थिति
कण समतल में चले तो उसकी स्थिति दो फलनों से दी जाती है: x(t) और y(t)। दोनों का अवकलन करो:
- वेग सदिश: (x′(t), y′(t))
- त्वरण सदिश: (x″(t), y″(t))
- चाल: √(x′(t)² + y′(t)²)
उदाहरण: x = 2t, y = t²। वेग = (2, 2t), त्वरण = (0, 2), और t = 1 पर चाल √(4 + 4) = 2√2 ≈ 2.83 मी/से। यही फेंकी हुई गेंद का पथ है: बगल में एकसमान गति और ऊपर-नीचे त्वरित गति।
वक्र के अनुदिश दूरी (चाप की लंबाई)
कण वक्र पर चले तो तय की दूरी उसकी चाल का समाकलन है:
L = ∫ₐᵇ √(x′(t)² + y′(t)²) dt
विचार: छोटे समय dt में कण dx बगल में और dy ऊपर चलता है; पाइथागोरस से छोटा क़दम √(dx² + dy²) है। समाकलन से सब छोटे क़दम जुड़ जाते हैं।
अगर वक्र y = f(x) के रूप में हो, तो सूत्र L = ∫ₐᵇ √(1 + f′(x)²) dx बन जाता है।
जाँच: त्रिज्या 3 के वृत्त के लिए x = 3cos t, y = 3 sin t की चाल 3 है, इसलिए आधे वृत्त (t = 0 से π) की लंबाई 3π ≈ 9.42, जो 2πr का आधा है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- v = ds/dt, a = dv/dt = d²s/dt²
- विस्थापन = ∫ₐᵇ v dt = s(b) − s(a)
- दूरी = ∫ₐᵇ |v| dt (जहाँ v = 0 वहाँ तोड़ो)
- समतल: v = (x′, y′), चाल = √(x′² + y′²), a = (x″, y″)
- वक्र की लंबाई: L = ∫ √(x′² + y′²) dt या ∫ √(1 + f′(x)²) dx
हल किए गए उदाहरण
1. एक कण s = 5t² + 2t (s मीटर में, t सेकंड में) से चलता है। t = 3 पर उसका वेग और त्वरण निकालो।
v = ds/dt = 10t + 2, इसलिए v(3) = 32 मी/से। a = dv/dt = 10 मी/से² (स्थिर)।
2. s = t³ − 6t² + 9t के लिए बताओ कण कब विराम में है और तब उसकी स्थितियाँ क्या हैं।
v = 3t² − 12t + 9 = 3(t − 1)(t − 3)। v = 0 पर t = 1 और t = 3। s(1) = 1 − 6 + 9 = 4 मी। s(3) = 27 − 54 + 27 = 0 मी।
3. कण का a = 6t, v(0) = 2 और s(0) = 1 है। v(t) और s(t) निकालो, और t = 2 पर v और s।
v = ∫6t dt = 3t² + C। v(0) = 2 से C = 2, तो v = 3t² + 2। s = ∫(3t² + 2) dt = t³ + 2t + D; s(0) = 1 से D = 1, तो s = t³ + 2t + 1। t = 2 पर: v = 12 + 2 = 14 मी/से, s = 8 + 4 + 1 = 13 मी।
4. 0 ≤ t ≤ 5 के लिए वेग v = 2t − 6 (मी/से) है। विस्थापन और तय की गई दूरी निकालो।
विस्थापन = ∫₀⁵ (2t − 6) dt = [t² − 6t]₀⁵ = 25 − 30 = −5 मी। v = 0 पर t = 3। 0–3 में: [t² − 6t] = 9 − 18 = −9, दूरी 9। 3–5 में: (25 − 30) − (9 − 18) = 4, दूरी 4। कुल दूरी = 9 + 4 = 13 मी।
5. कण x = 2t, y = t² से चलता है। t = 1 पर वेग सदिश, त्वरण सदिश और चाल निकालो।
x′ = 2, y′ = 2t, तो वेग = (2, 2t) = t = 1 पर (2, 2)। x″ = 0, y″ = 2, तो त्वरण = (0, 2)। चाल = √(2² + 2²) = √8 ≈ 2.83 मी/से।
6. 0 ≤ t ≤ 4 के लिए v = t² − 4t + 3 है। विस्थापन और कुल दूरी निकालो।
प्रतिअवकलज: s = t³/3 − 2t² + 3t। t = 4 पर: 64/3 − 32 + 12 = 4/3। t = 0 पर 0। विस्थापन = 4/3 मी ≈ 1.33 मी। v = (t − 1)(t − 3) = 0 पर t = 1 और 3। 0–1 में: s(1) − s(0) = 1/3 − 2 + 3 = 4/3। 1–3 में: s(3) − s(1) = 0 − 4/3 = −4/3, निरपेक्ष 4/3। 3–4 में: 4/3 − 0 = 4/3। दूरी = 4/3 + 4/3 + 4/3 = 4 मी।
7. वक्र y = (2/3)x^(3/2) की x = 0 से x = 3 तक लंबाई निकालो।
f′(x) = x^(1/2), इसलिए 1 + f′² = 1 + x। L = ∫₀³ √(1 + x) dx = (2/3)(1 + x)^(3/2), 0 से 3 तक = (2/3)(8 − 1) = 14/3 ≈ 4.67 इकाई।
आम गलतियाँ
- विस्थापन को दूरी मान लेना। विस्थापन चिह्न सहित ∫v dt है; दूरी ∫|v| dt है।
- दूरी निकालते समय v = 0 पर अंतराल न तोड़ना। एक ही समाकलन में पीछे का हिस्सा आगे वाले को काट देता है।
- a से v निकालते समय स्थिरांक भूल जाना। आरंभिक मान (initial conditions) से उसे निकालो।
- समतल में चाल = x′ + y′ लिख देना। चाल √(x′² + y′²) है, यानी वेग सदिश की लंबाई।