South 고등학교 3학년 Calculus
अध्याय: 3
1. Limits of sequences
Convergence and divergence · Limit laws · Geometric sequence limits · Series · Geometric series · Applications of geometric series
- अनुक्रम की सीमा: पद आख़िर कहाँ जाते हैं? – अनुक्रम (sequence) की सीमा L तब होती है जब n बहुत बड़ा होने पर उसके पद L के जितने चाहें उतने पास आ जाएँ और पास ही रहें। जो अनुक्रम किसी एक संख्या पर नहीं टिकता, वह अपसारी है। सीमा के नियमों से जोड़, गुणा और भाग की सीमा निकलती है। rⁿ की सीमा |r| < 1 पर 0, r = 1 पर 1 है; बाकी पर अपसारी।
- अनंत श्रेणी (Infinite Series) – अनंत श्रेणी किसी अनुक्रम के पदों को हमेशा जोड़ती जाती है: a₁ + a₂ + a₃ + … इसे हम आंशिक योग Sₙ से समझते हैं। अगर Sₙ किसी एक संख्या S पर टिक जाए तो श्रेणी अभिसारी (convergent) है, वरना अपसारी (divergent)। गुणोत्तर श्रेणी a + ar + ar² + … का योग |r| < 1 होने पर a/(1 − r) होता है। पदों का 0 की ओर जाना ज़रूरी है पर काफ़ी नहीं: हरात्मक श्रेणी 1 + 1/2 + 1/3 + … अपसारी है। nवाँ-पद, p-श्रेणी, तुलना, समाकल, अनुपात और एकांतर परीक्षण बताते हैं कि कौन-सी श्रेणी अभिसारी है।
2. Differentiation techniques
Limits of exponentials and logs · Derivatives of exponentials and logs · Trig addition formulas · Trig limits · Derivatives of sine and cosine · Quotient rule · Chain rule · Parametric differentiation · Implicit and inverse functions · Second derivatives · Tangent lines · Graph shapes · Equations and inequalities · Velocity and acceleration
- सीमा (कक्षा 11): फलन किस संख्या के पास जाता है – सीमा बताती है कि जब x किसी बिंदु के पास जाता है तो f(x) किस संख्या के पास पहुँचता है। हम बिंदु की ओर बाएँ से भी चलते हैं और दाएँ से भी। दोनों ओर से एक ही संख्या मिले, तो वही सीमा है। यहाँ बहुपद, परिमेय, त्रिकोणमितीय, चरघातांकी और लघुगणकीय फलनों की सीमाएँ और ज़रूरी मानक परिणाम सीखेंगे।
- सांतत्य तथा अवकलनीयता – किसी बिंदु पर फलन सतत तब है जब वहाँ ग्राफ़ टूटता नहीं: बायीं सीमा, दायीं सीमा और फलन का मान तीनों बराबर हों। अवकलज स्पर्श रेखा की ढाल है। शृंखला नियम, अस्पष्ट अवकलन, eˣ, ln x और प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के सूत्र, लघुगणकीय अवकलन और प्राचलिक रूप से कक्षा 12 का लगभग हर फलन अवकलित हो जाता है। द्वितीय अवकलज बताता है कि ढाल खुद कैसे बदल रही है, यानी वक्र कैसे मुड़ रहा है।
- अवकलज के अनुप्रयोग – अवकलज बताता है कि एक राशि दूसरी के साथ कितनी तेज़ी से बदलती है। इसका चिह्न बताता है कि फलन बढ़ रहा है (f′ > 0, वर्धमान) या घट रहा है (f′ < 0, ह्रासमान)। जहाँ f′ = 0 हो वहाँ स्पर्श रेखा सपाट होती है: ये क्रांतिक बिंदु स्थानीय उच्चिष्ठ या निम्निष्ठ हो सकते हैं, जिन्हें प्रथम अवकलज परीक्षण (चिह्न बदलना) या द्वितीय अवकलज परीक्षण (f″ का चिह्न) से जाँचते हैं। इससे सबसे बड़ा डिब्बा या सबसे सस्ता टैंक जैसे असली सवाल हल होते हैं।
- कलन से गति: वेग, त्वरण और दूरी – अगर स्थिति s(t) है, तो वेग v = ds/dt और त्वरण a = dv/dt है। उल्टी दिशा में, v dt का समाकलन विस्थापन देता है। तय की गई दूरी में |v| लगता है। समतल में चाल = √(x′² + y′²) और वक्र की लंबाई इसी चाल का समाकलन है।
3. Integration techniques
Substitution · Integration by parts · Integrals of various functions · Definite integrals and series · Areas · Volumes · Distance and curve length
- समाकलन – समाकलन अवकलन को उलट देता है: अगर F′(x) = f(x), तो ∫f(x) dx = F(x) + C। हम मानक सूत्रों, प्रतिस्थापन (अंदर वाले हिस्से को u मानना), आंशिक भिन्न (भिन्न को तोड़ना) और खंडशः समाकलन (∫u dv = uv − ∫v du) से समाकलन करते हैं। निश्चित समाकल ∫ₐᵇ f(x) dx, a से b तक वक्र के नीचे का चिह्नित क्षेत्रफल है, और मूल प्रमेय के अनुसार यह F(b) − F(a) के बराबर है।
- समाकलनों के अनुप्रयोग: वक्रों के नीचे क्षेत्रफल – वक्र y = f(x), x-अक्ष और रेखाओं x = a, x = b से घिरा क्षेत्रफल ∫ₐᵇ |f(x)| dx है: ऊँचाई y और चौड़ाई dx वाली पतली खड़ी पट्टियाँ जोड़ते हैं। x = g(y) रूप वाले वक्रों के लिए क्षैतिज पट्टियाँ लेते हैं। सममिति से काम बचता है: वृत्त, परवलय या दीर्घवृत्त का एक हिस्सा निकालो और गुणा करो। त्रिज्या r के वृत्त का क्षेत्रफल πr² और अर्ध-अक्ष a, b वाले दीर्घवृत्त का πab।
- परिक्रमण ठोस (Solids of Revolution) – जब कोई सपाट आकृति किसी सीधी रेखा (अक्ष) के चारों ओर पूरा 360° घूमती है, तो जो 3D आकृति बनती है उसे परिक्रमण ठोस कहते हैं। आयत से बेलन, समकोण त्रिभुज से शंकु, अर्धवृत्त से गोला और समलंब से छिन्नक बनता है। इनके आयतन हैं V = πr²h, ⅓πr²h, ⁴⁄₃πr³ और ⅓πh(R² + Rr + r²)। कलन में वक्र y = f(x) को x-अक्ष पर घुमाने से V = π∫y² dx।
- कलन से गति: वेग, त्वरण और दूरी – अगर स्थिति s(t) है, तो वेग v = ds/dt और त्वरण a = dv/dt है। उल्टी दिशा में, v dt का समाकलन विस्थापन देता है। तय की गई दूरी में |v| लगता है। समतल में चाल = √(x′² + y′²) और वक्र की लंबाई इसी चाल का समाकलन है।