Romania Clasa a XI-a Mathematics M1
अध्याय: 2
1. Matrices and linear systems
Permutations · Matrices · Determinants · Linear systems
- समूह सिद्धांत: द्विआधारी संक्रिया, समूह, वलय और क्षेत्र – समूह (group) एक समुच्चय और एक संक्रिया है जो संवृत हो, साहचर्य हो, जिसमें तत्समक हो और हर अवयव का प्रतिलोम हो। घड़ी वाला गणित Z6 यह सब दिखाता है: सारणी, उपसमूह, अवयव की कोटि और लाग्रांज प्रमेय। वलय (ring) और क्षेत्र (field) में दूसरी संक्रिया भी जुड़ती है।
- आव्यूह (Matrices): कोटि, प्रकार, परिवर्त, संक्रियाएँ और व्युत्क्रम – आव्यूह संख्याओं का एक डिब्बा है जिसमें संख्याएँ पंक्तियों और स्तंभों में रखी होती हैं। इसकी कोटि = पंक्तियाँ × स्तंभ। शून्य, तत्समक, विकर्ण, अदिश, पंक्ति, स्तंभ और वर्ग आव्यूह इसके खास प्रकार हैं। परिवर्त में पंक्तियाँ स्तंभ बन जाती हैं। Aᵀ = A हो तो सममित, Aᵀ = −A हो तो विषम-सममित। योग जगह-जगह करते हैं, गुणन पंक्ति × स्तंभ से। आव्यूह गुणन क्रमविनिमेय नहीं है (AB प्रायः BA नहीं)। यदि AB = BA = I हो तो B, A का व्युत्क्रम है और वह एक ही (अद्वितीय) होता है।
- सारणिक (Determinants): उपसारणिक, सहखंड, सहखंडज, व्युत्क्रम और समीकरण निकाय – सारणिक एक वर्ग आव्यूह से बनी एक संख्या है, जिसे |A| लिखते हैं। 2 × 2 के लिए यह ad − bc है और स्तंभों से बने समांतर चतुर्भुज के क्षेत्रफल के बराबर है। 3 × 3 में हम उपसारणिक और सहखंड से एक पंक्ति पर प्रसार करते हैं। |A| = 0 हो तो A अव्युत्क्रमणीय है, उसका व्युत्क्रम नहीं होता। सारणिक का आधा त्रिभुज का क्षेत्रफल देता है। सहखंडज (सहखंड आव्यूह का परिवर्त) से A⁻¹ = (adj A)/|A| मिलता है, फिर AX = B का हल X = A⁻¹B। |A| और (adj A)B से पता चलता है कि निकाय संगत है या नहीं।
- युगपत समीकरण – युगपत समीकरण वे दो या ज़्यादा समीकरण हैं जो एक ही समय पर सही होने चाहिए। उनका हल वे मान हैं जो हर समीकरण में ठीक बैठें। ग्राफ़ पर हर हल वह बिंदु है जहाँ ग्राफ़ मिलते हैं। एक रेखा और एक वक्र हो तो रेखा को वक्र में रखें (प्रतिस्थापन); द्विघात समीकरण बनेगा, जिसका विविक्तकर बताएगा कि 2, 1 या 0 हल हैं। तीन रैखिक समीकरणों में एक-एक करके चर हटाएँ।
2. Elements of mathematical analysis
Limits of sequences and functions · Continuous functions · Differentiable functions · Studying functions with derivatives
- सीमा (कक्षा 11): फलन किस संख्या के पास जाता है – सीमा बताती है कि जब x किसी बिंदु के पास जाता है तो f(x) किस संख्या के पास पहुँचता है। हम बिंदु की ओर बाएँ से भी चलते हैं और दाएँ से भी। दोनों ओर से एक ही संख्या मिले, तो वही सीमा है। यहाँ बहुपद, परिमेय, त्रिकोणमितीय, चरघातांकी और लघुगणकीय फलनों की सीमाएँ और ज़रूरी मानक परिणाम सीखेंगे।
- सांतत्य तथा अवकलनीयता – किसी बिंदु पर फलन सतत तब है जब वहाँ ग्राफ़ टूटता नहीं: बायीं सीमा, दायीं सीमा और फलन का मान तीनों बराबर हों। अवकलज स्पर्श रेखा की ढाल है। शृंखला नियम, अस्पष्ट अवकलन, eˣ, ln x और प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के सूत्र, लघुगणकीय अवकलन और प्राचलिक रूप से कक्षा 12 का लगभग हर फलन अवकलित हो जाता है। द्वितीय अवकलज बताता है कि ढाल खुद कैसे बदल रही है, यानी वक्र कैसे मुड़ रहा है।
- अवकलज के अनुप्रयोग – अवकलज बताता है कि एक राशि दूसरी के साथ कितनी तेज़ी से बदलती है। इसका चिह्न बताता है कि फलन बढ़ रहा है (f′ > 0, वर्धमान) या घट रहा है (f′ < 0, ह्रासमान)। जहाँ f′ = 0 हो वहाँ स्पर्श रेखा सपाट होती है: ये क्रांतिक बिंदु स्थानीय उच्चिष्ठ या निम्निष्ठ हो सकते हैं, जिन्हें प्रथम अवकलज परीक्षण (चिह्न बदलना) या द्वितीय अवकलज परीक्षण (f″ का चिह्न) से जाँचते हैं। इससे सबसे बड़ा डिब्बा या सबसे सस्ता टैंक जैसे असली सवाल हल होते हैं।