आव्यूह क्या है? संकेतन और कोटि
आव्यूह (matrix) संख्याओं की एक आयताकार व्यवस्था है, जो कोष्ठक में लिखी जाती है। इन्हें A, B, C जैसे बड़े अक्षरों से लिखते हैं।
- पंक्तियाँ (rows) आड़ी चलती हैं। स्तंभ (columns) खड़े चलते हैं।
- m पंक्तियों और n स्तंभों वाले आव्यूह की कोटि m × n होती है। इसमें m·n संख्याएँ (अवयव) होती हैं।
- पंक्ति i और स्तंभ j वाले अवयव को aᵢⱼ लिखते हैं। A = [aᵢⱼ]ₘₓₙ।
उदाहरण: A = [5 −2 7; 0 3 1] की कोटि 2 × 3 है और a₁₃ = 7। 3D का चरण 1 देखें।
आव्यूहों की समानता
दो आव्यूह तभी बराबर हैं जब (1) उनकी कोटि एक हो और (2) हर संगत अवयव बराबर हो। जैसे [x 2; 5 y] = [4 2; 5 1] से x = 4 और y = 1। बोर्ड परीक्षा में इससे छोटे समीकरण बनवाए जाते हैं।
आव्यूहों के प्रकार
- पंक्ति आव्यूह: सिर्फ़ एक पंक्ति (1 × n)।
- स्तंभ आव्यूह: सिर्फ़ एक स्तंभ (m × 1)।
- वर्ग आव्यूह: पंक्तियाँ = स्तंभ (n × n)। a₁₁, a₂₂, … मिलकर मुख्य विकर्ण बनाते हैं।
- विकर्ण आव्यूह: वर्ग आव्यूह जिसमें विकर्ण के बाहर सब 0।
- अदिश आव्यूह: विकर्ण आव्यूह जिसके सारे विकर्ण अवयव बराबर हों, जैसे [3 0; 0 3]।
शून्य आव्यूह और तत्समक आव्यूह
शून्य आव्यूह O में हर अवयव 0 होता है। O जोड़ने से कुछ नहीं बदलता: A + O = A।
तत्समक आव्यूह I एक वर्ग आव्यूह है जिसके मुख्य विकर्ण पर 1 और बाकी जगह 0 होते हैं। I से गुणा करने पर कुछ नहीं बदलता: AI = IA = A। यह संख्या 1 जैसा काम करता है। 3D के चरण 2 में O (सब सपाट) से I (विकर्ण पर 1) बनता दिखता है।
आव्यूह का परिवर्त
परिवर्त Aᵀ (या A′) में पंक्तियाँ स्तंभ बन जाती हैं। (i, j) वाला अवयव (j, i) पर चला जाता है। m × n आव्यूह n × m बन जाता है।
नियम: (Aᵀ)ᵀ = A, (A + B)ᵀ = Aᵀ + Bᵀ, (kA)ᵀ = kAᵀ और (AB)ᵀ = BᵀAᵀ (क्रम उलट जाता है, जैसे पहले जूते फिर मोज़े उतारते हैं)।
सममित और विषम-सममित आव्यूह
वर्ग आव्यूह सममित है यदि Aᵀ = A, यानी aᵢⱼ = aⱼᵢ। मुख्य विकर्ण के आर-पार यह दर्पण जैसा दिखता है।
यह विषम-सममित है यदि Aᵀ = −A, यानी aᵢⱼ = −aⱼᵢ। तब हर विकर्ण अवयव 0 होगा, क्योंकि aᵢᵢ = −aᵢᵢ से aᵢᵢ = 0।
ज़रूरी बात: हर वर्ग आव्यूह को एक सममित और एक विषम-सममित आव्यूह के योग में लिख सकते हैं: A = ½(A + Aᵀ) + ½(A − Aᵀ)।
योग, अंतर और अदिश गुणज
एक ही कोटि के दो आव्यूहों को संगत अवयव जोड़कर (या घटाकर) जोड़ते हैं। A + B = B + A और (A + B) + C = A + (B + C)।
अदिश गुणज kA में हर अवयव को k से गुणा करते हैं। जैसे 3[1 −2; 0 4] = [3 −6; 0 12]।
3D के चरण 4 में उत्तर के ब्लॉक संगत ब्लॉकों के योग तक बढ़ते हैं।
आव्यूहों का गुणन
AB तभी बनता है जब A के स्तंभ = B की पंक्तियाँ। A यदि m × n और B यदि n × p है, तो AB की कोटि m × p।
cᵢⱼ पाने के लिए: A की पंक्ति i पर चलें और B के स्तंभ j पर नीचे उतरें, जोड़ियों का गुणा करें, फिर जोड़ें।
उदाहरण: [2 1; 3 4][1 0; 2 1]: c₁₁ = 2×1 + 1×2 = 4, c₁₂ = 2×0 + 1×1 = 1, c₂₁ = 3×1 + 4×2 = 11, c₂₂ = 3×0 + 4×1 = 4। तो AB = [4 1; 11 4]। 3D के चरण 5 में पंक्ति और स्तंभ चमकते हैं और हर ब्लॉक बढ़ता है।
ये नियम चलते हैं: A(BC) = (AB)C, A(B + C) = AB + AC, AI = IA = A।
क्रमविनिमेय नहीं: AB ≠ BA
संख्याओं में 2 × 3 = 3 × 2। आव्यूहों में प्रायः AB ≠ BA। ऊपर वाले A और B से BA = [2 1; 7 6], जो [4 1; 11 4] नहीं है।
कभी-कभी BA बनता ही नहीं: 2 × 3 को 3 × 1 से गुणा कर सकते हैं, पर 3 × 1 को 2 × 3 से नहीं।
एक और अजीब बात: A ≠ O और B ≠ O होने पर भी AB = O हो सकता है। इसलिए संख्याओं की तरह आव्यूह "काट" नहीं सकते। और (A + B)² = A² + AB + BA + B², न कि A² + 2AB + B²।
व्युत्क्रमणीय आव्यूह और अद्वितीय व्युत्क्रम
वर्ग आव्यूह A व्युत्क्रमणीय है यदि उसी कोटि का कोई B ऐसा हो कि AB = BA = I। तब B को A का व्युत्क्रम A⁻¹ कहते हैं।
व्युत्क्रम एक ही क्यों? मान लें B और C दोनों व्युत्क्रम हैं। तब B = BI = B(AC) = (BA)C = IC = C। यानी B और C एक ही हैं। व्युत्क्रम अद्वितीय है।
2 × 2 आव्यूह [a b; c d] के लिए, यदि ad − bc ≠ 0: A⁻¹ = (1/(ad − bc))·[d −b; −c a]। ad − bc = 0 हो तो व्युत्क्रम नहीं होता (कारण सारणिक वाले पाठ में)। साथ ही (AB)⁻¹ = B⁻¹A⁻¹।
करके देखें: कैंटीन का बिल
घर में 2 दिन कितने कप चाय और कितने बिस्किट लगे, इसे 2 × 2 आव्यूह Q में लिखें, और दाम स्तंभ P = [10; 5] में। हाथ से QP निकालें। फिर 3D के खुले खेल में यही संख्याएँ A और B में भरें (दाम B के पहले स्तंभ में, दूसरे में 0) और AB दबाएँ। क्या पहला स्तंभ आपके उत्तर से मिलता है?
परीक्षा टिप: आव्यूह और सारणिक मिलकर लगभग 10 अंक। कोटि और प्रकार पर 1 अंक के MCQ, गुणन, परिवर्त और सममित भाग पर 2–3 अंक के प्रश्न आते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कोटि m × n: m पंक्तियाँ, n स्तंभ, m·n अवयव; A = [aᵢⱼ]
- A = B ⇔ कोटि समान और हर i, j के लिए aᵢⱼ = bᵢⱼ
- (A + B)ᵢⱼ = aᵢⱼ + bᵢⱼ (सिर्फ़ समान कोटि); (kA)ᵢⱼ = k·aᵢⱼ
- (AB)ᵢⱼ = aᵢ₁b₁ⱼ + aᵢ₂b₂ⱼ + … + aᵢₙbₙⱼ; (m × n)(n × p) = m × p
- AI = IA = A, A + O = A, प्रायः AB ≠ BA
- (Aᵀ)ᵀ = A, (A + B)ᵀ = Aᵀ + Bᵀ, (kA)ᵀ = kAᵀ, (AB)ᵀ = BᵀAᵀ
- सममित: Aᵀ = A; विषम-सममित: Aᵀ = −A (विकर्ण सब 0)
- A = ½(A + Aᵀ) + ½(A − Aᵀ)
- AB = BA = I ⇒ B = A⁻¹ (अद्वितीय); (AB)⁻¹ = B⁻¹A⁻¹
- 2 × 2: [a b; c d]⁻¹ = (1/(ad − bc))[d −b; −c a], ad − bc ≠ 0
हल किए गए उदाहरण
1. A = [5 −2 7; 0 3 1] की कोटि, a₁₃, a₂₂ और अवयवों की संख्या लिखिए।
2 पंक्तियाँ, 3 स्तंभ, तो कोटि 2 × 3। a₁₃ = पंक्ति 1, स्तंभ 3 = 7। a₂₂ = 3। अवयव = 2 × 3 = 6।
2. aᵢⱼ = i + 2j से 2 × 2 आव्यूह बनाइए।
a₁₁ = 1 + 2 = 3, a₁₂ = 1 + 4 = 5, a₂₁ = 2 + 2 = 4, a₂₂ = 2 + 4 = 6। तो A = [3 5; 4 6]।
3. यदि [x + y 2; 5 x − y] = [6 2; 5 2], तो x और y ज्ञात कीजिए।
बराबर आव्यूहों के संगत अवयव बराबर: x + y = 6 और x − y = 2। जोड़ें: 2x = 8, x = 4। फिर y = 2।
4. A = [1 2; 3 4], B = [2 0; 1 −1]। A + B और 2A − B ज्ञात कीजिए।
A + B = [1+2 2+0; 3+1 4−1] = [3 2; 4 3]। 2A = [2 4; 6 8], तो 2A − B = [2−2 4−0; 6−1 8+1] = [0 4; 5 9]।
5. A = [1 2; 0 1], B = [1 0; 3 1]। AB और BA निकालिए। क्या ये बराबर हैं?
AB: c₁₁ = 1·1 + 2·3 = 7, c₁₂ = 1·0 + 2·1 = 2, c₂₁ = 0·1 + 1·3 = 3, c₂₂ = 1 → AB = [7 2; 3 1]। BA: c₁₁ = 1, c₁₂ = 2, c₂₁ = 3·1 + 1·0 = 3, c₂₂ = 3·2 + 1·1 = 7 → BA = [1 2; 3 7]। बराबर नहीं, यानी AB ≠ BA।
6. A = [1 4; 2 3] को एक सममित और एक विषम-सममित आव्यूह के योग में लिखिए।
Aᵀ = [1 2; 4 3]। P = ½(A + Aᵀ) = ½[2 6; 6 6] = [1 3; 3 3] (सममित)। Q = ½(A − Aᵀ) = ½[0 2; −2 0] = [0 1; −1 0] (विषम-सममित)। जाँच: P + Q = [1 4; 2 3] = A ✓।
7. दिखाइए कि B = [3 −1; −5 2], A = [2 1; 5 3] का व्युत्क्रम है।
AB = [2·3 + 1·(−5) 2·(−1) + 1·2; 5·3 + 3·(−5) 5·(−1) + 3·2] = [1 0; 0 1] = I। BA = [3·2 − 1·5 3·1 − 1·3; −5·2 + 2·5 −5·1 + 2·3] = [1 0; 0 1] = I। दोनों I, तो B = A⁻¹।
8. A = [3 1; −1 2] के लिए दिखाइए कि A² − 5A + 7I = O और इससे A⁻¹ निकालिए।
A² = [9 − 1 3 + 2; −3 − 2 −1 + 4] = [8 5; −5 3]। 5A = [15 5; −5 10]। A² − 5A = [−7 0; 0 −7] = −7I, तो A² − 5A + 7I = O ✓। दोनों ओर A⁻¹ से गुणा: A − 5I + 7A⁻¹ = O, तो A⁻¹ = (5I − A)/7 = (1/7)[2 −1; 1 3]।
आम गलतियाँ
- कोटि को स्तंभ × पंक्ति लिखना। कोटि हमेशा पंक्ति × स्तंभ होती है।
- गुणन में संगत अवयवों का गुणा करना (जैसे योग में), पंक्ति × स्तंभ न करना।
- मान लेना कि AB = BA, या आव्यूहों के लिए (A + B)² = A² + 2AB + B² लिखना।
- (AB)ᵀ = AᵀBᵀ या (AB)⁻¹ = A⁻¹B⁻¹ लिखना; क्रम उलटना ज़रूरी है।