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आव्यूह (Matrices): कोटि, प्रकार, परिवर्त, संक्रियाएँ और व्युत्क्रम

आव्यूह संख्याओं का एक डिब्बा है जिसमें संख्याएँ पंक्तियों और स्तंभों में रखी होती हैं। इसकी कोटि = पंक्तियाँ × स्तंभ। शून्य, तत्समक, विकर्ण, अदिश, पंक्ति, स्तंभ और वर्ग आव्यूह इसके खास प्रकार हैं। परिवर्त में पंक्तियाँ स्तंभ बन जाती हैं। Aᵀ = A हो तो सममित, Aᵀ = −A हो तो विषम-सममित। योग जगह-जगह करते हैं, गुणन पंक्ति × स्तंभ से। आव्यूह गुणन क्रमविनिमेय नहीं है (AB प्रायः BA नहीं)। यदि AB = BA = I हो तो B, A का व्युत्क्रम है और वह एक ही (अद्वितीय) होता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. आव्यूह संख्याओं का एक साफ़-सुथरा डिब्बा है। हर संख्या एक ब्लॉक है। 2 पंक्तियाँ और 3 स्तंभ, तो कोटि 2 × 3। सुनहरा ब्लॉक पंक्ति 2, स्तंभ 3 में है, इसलिए उसे a₂₃ कहते हैं।
  2. दो मशहूर आव्यूह। सारे ब्लॉक सपाट यानी हर संख्या 0: यह शून्य आव्यूह O है। अब सिर्फ़ मुख्य विकर्ण पर 1 उठते हैं: यह तत्समक आव्यूह I है।
  3. परिवर्त: हर ब्लॉक (i, j) से कूदकर (j, i) पर जाता है। पंक्ति 1 बन जाती है स्तंभ 1। 2 × 3 का आव्यूह 3 × 2 का हो जाता है।
  4. योग: एक ही जगह वाले ब्लॉक जोड़ दें। दोनों आव्यूहों की कोटि एक होनी चाहिए, वरना कुछ ब्लॉकों का जोड़ीदार ही नहीं मिलेगा।
  5. गुणन: A की एक पंक्ति और B का एक स्तंभ लें। जोड़ियों का गुणा करें और जोड़ दें। उत्तर के ब्लॉक एक-एक करके बढ़ते हैं। A और B की जगह बदलें तो उत्तर बदल जाता है: AB ≠ BA।
  6. खुला खेल: अपने A और B लिखें। A + B, AB, BA, Aᵀ, 3A या A⁻¹ दबाएँ और हल की हर लाइन देखें।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

कोटि पंक्ति × स्तंभ ही क्यों लिखते हैं, उल्टा क्यों नहीं?

यह एक तय नियम है ताकि सब एक जैसा पढ़ें। 3D में पहले पंक्तियाँ गिनें (2), फिर स्तंभ (3): 2 × 3।

क्या शून्य आव्यूह और संख्या 0 एक ही हैं?

नहीं। O शून्यों का पूरा डिब्बा है जिसकी कोटि होती है, जैसे 2 × 2। योग में यह 0 जैसा काम करता है: A + O = A।

I को तत्समक क्यों कहते हैं?

I से गुणा करने पर आव्यूह वही रहता है (AI = A), जैसे 1 से गुणा करने पर संख्या वही रहती है। इसके 1 सिर्फ़ विकर्ण पर होते हैं।

परिवर्त में a₁₂ कहाँ जाता है?

(2, 1) पर। चरण 3 में ब्लॉक कूदते दिखते हैं: हर (i, j) → (j, i), इसलिए विकर्ण वाले ब्लॉक अपनी जगह रहते हैं।

क्या 2 × 3 और 3 × 2 आव्यूह जोड़ सकते हैं?

नहीं। कुछ ब्लॉकों का उसी जगह जोड़ीदार नहीं मिलेगा। योग के लिए कोटि समान चाहिए।

गुणन में योग की तरह जगह-जगह गुणा क्यों नहीं करते?

क्योंकि गुणनफल में पूरी पंक्ति और पूरा स्तंभ मिलते हैं (मात्रा × दाम, फिर कुल)। चरण 5 में हर उत्तर ब्लॉक एक पूरी पंक्ति और पूरे स्तंभ से बनता है।

AB, BA के बराबर क्यों नहीं?

AB में A की पंक्तियाँ B के स्तंभों से मिलती हैं; BA में B की पंक्तियाँ A के स्तंभों से। अलग जोड़ियाँ, अलग कुल। खुले खेल में AB और BA बटन दबाकर देखें।

किसी आव्यूह का व्युत्क्रम कब नहीं होता?

2 × 2 आव्यूह में जब ad − bc = 0। खुले खेल में A = [2 4; 1 2] भरें और A⁻¹ दबाएँ: हल में कारण दिख जाएगा।

आव्यूह क्या है? संकेतन और कोटि

आव्यूह (matrix) संख्याओं की एक आयताकार व्यवस्था है, जो कोष्ठक में लिखी जाती है। इन्हें A, B, C जैसे बड़े अक्षरों से लिखते हैं।

उदाहरण: A = [5 −2 7; 0 3 1] की कोटि 2 × 3 है और a₁₃ = 7। 3D का चरण 1 देखें।

आव्यूहों की समानता

दो आव्यूह तभी बराबर हैं जब (1) उनकी कोटि एक हो और (2) हर संगत अवयव बराबर हो। जैसे [x 2; 5 y] = [4 2; 5 1] से x = 4 और y = 1। बोर्ड परीक्षा में इससे छोटे समीकरण बनवाए जाते हैं।

आव्यूहों के प्रकार

शून्य आव्यूह और तत्समक आव्यूह

शून्य आव्यूह O में हर अवयव 0 होता है। O जोड़ने से कुछ नहीं बदलता: A + O = A।

तत्समक आव्यूह I एक वर्ग आव्यूह है जिसके मुख्य विकर्ण पर 1 और बाकी जगह 0 होते हैं। I से गुणा करने पर कुछ नहीं बदलता: AI = IA = A। यह संख्या 1 जैसा काम करता है। 3D के चरण 2 में O (सब सपाट) से I (विकर्ण पर 1) बनता दिखता है।

आव्यूह का परिवर्त

परिवर्त Aᵀ (या A′) में पंक्तियाँ स्तंभ बन जाती हैं। (i, j) वाला अवयव (j, i) पर चला जाता है। m × n आव्यूह n × m बन जाता है।

नियम: (Aᵀ)ᵀ = A, (A + B)ᵀ = Aᵀ + Bᵀ, (kA)ᵀ = kAᵀ और (AB)ᵀ = BᵀAᵀ (क्रम उलट जाता है, जैसे पहले जूते फिर मोज़े उतारते हैं)।

सममित और विषम-सममित आव्यूह

वर्ग आव्यूह सममित है यदि Aᵀ = A, यानी aᵢⱼ = aⱼᵢ। मुख्य विकर्ण के आर-पार यह दर्पण जैसा दिखता है।

यह विषम-सममित है यदि Aᵀ = −A, यानी aᵢⱼ = −aⱼᵢ। तब हर विकर्ण अवयव 0 होगा, क्योंकि aᵢᵢ = −aᵢᵢ से aᵢᵢ = 0।

ज़रूरी बात: हर वर्ग आव्यूह को एक सममित और एक विषम-सममित आव्यूह के योग में लिख सकते हैं: A = ½(A + Aᵀ) + ½(A − Aᵀ)।

योग, अंतर और अदिश गुणज

एक ही कोटि के दो आव्यूहों को संगत अवयव जोड़कर (या घटाकर) जोड़ते हैं। A + B = B + A और (A + B) + C = A + (B + C)।

अदिश गुणज kA में हर अवयव को k से गुणा करते हैं। जैसे 3[1 −2; 0 4] = [3 −6; 0 12]।

3D के चरण 4 में उत्तर के ब्लॉक संगत ब्लॉकों के योग तक बढ़ते हैं।

आव्यूहों का गुणन

AB तभी बनता है जब A के स्तंभ = B की पंक्तियाँ। A यदि m × n और B यदि n × p है, तो AB की कोटि m × p।

cᵢⱼ पाने के लिए: A की पंक्ति i पर चलें और B के स्तंभ j पर नीचे उतरें, जोड़ियों का गुणा करें, फिर जोड़ें।

उदाहरण: [2 1; 3 4][1 0; 2 1]: c₁₁ = 2×1 + 1×2 = 4, c₁₂ = 2×0 + 1×1 = 1, c₂₁ = 3×1 + 4×2 = 11, c₂₂ = 3×0 + 4×1 = 4। तो AB = [4 1; 11 4]। 3D के चरण 5 में पंक्ति और स्तंभ चमकते हैं और हर ब्लॉक बढ़ता है।

ये नियम चलते हैं: A(BC) = (AB)C, A(B + C) = AB + AC, AI = IA = A।

क्रमविनिमेय नहीं: AB ≠ BA

संख्याओं में 2 × 3 = 3 × 2। आव्यूहों में प्रायः AB ≠ BA। ऊपर वाले A और B से BA = [2 1; 7 6], जो [4 1; 11 4] नहीं है।

कभी-कभी BA बनता ही नहीं: 2 × 3 को 3 × 1 से गुणा कर सकते हैं, पर 3 × 1 को 2 × 3 से नहीं।

एक और अजीब बात: A ≠ O और B ≠ O होने पर भी AB = O हो सकता है। इसलिए संख्याओं की तरह आव्यूह "काट" नहीं सकते। और (A + B)² = A² + AB + BA + B², न कि A² + 2AB + B²।

व्युत्क्रमणीय आव्यूह और अद्वितीय व्युत्क्रम

वर्ग आव्यूह A व्युत्क्रमणीय है यदि उसी कोटि का कोई B ऐसा हो कि AB = BA = I। तब B को A का व्युत्क्रम A⁻¹ कहते हैं।

व्युत्क्रम एक ही क्यों? मान लें B और C दोनों व्युत्क्रम हैं। तब B = BI = B(AC) = (BA)C = IC = C। यानी B और C एक ही हैं। व्युत्क्रम अद्वितीय है।

2 × 2 आव्यूह [a b; c d] के लिए, यदि ad − bc ≠ 0: A⁻¹ = (1/(ad − bc))·[d −b; −c a]। ad − bc = 0 हो तो व्युत्क्रम नहीं होता (कारण सारणिक वाले पाठ में)। साथ ही (AB)⁻¹ = B⁻¹A⁻¹।

करके देखें: कैंटीन का बिल

घर में 2 दिन कितने कप चाय और कितने बिस्किट लगे, इसे 2 × 2 आव्यूह Q में लिखें, और दाम स्तंभ P = [10; 5] में। हाथ से QP निकालें। फिर 3D के खुले खेल में यही संख्याएँ A और B में भरें (दाम B के पहले स्तंभ में, दूसरे में 0) और AB दबाएँ। क्या पहला स्तंभ आपके उत्तर से मिलता है?

परीक्षा टिप: आव्यूह और सारणिक मिलकर लगभग 10 अंक। कोटि और प्रकार पर 1 अंक के MCQ, गुणन, परिवर्त और सममित भाग पर 2–3 अंक के प्रश्न आते हैं।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. A = [5 −2 7; 0 3 1] की कोटि, a₁₃, a₂₂ और अवयवों की संख्या लिखिए।

2 पंक्तियाँ, 3 स्तंभ, तो कोटि 2 × 3। a₁₃ = पंक्ति 1, स्तंभ 3 = 7। a₂₂ = 3। अवयव = 2 × 3 = 6।

2. aᵢⱼ = i + 2j से 2 × 2 आव्यूह बनाइए।

a₁₁ = 1 + 2 = 3, a₁₂ = 1 + 4 = 5, a₂₁ = 2 + 2 = 4, a₂₂ = 2 + 4 = 6। तो A = [3 5; 4 6]।

3. यदि [x + y 2; 5 x − y] = [6 2; 5 2], तो x और y ज्ञात कीजिए।

बराबर आव्यूहों के संगत अवयव बराबर: x + y = 6 और x − y = 2। जोड़ें: 2x = 8, x = 4। फिर y = 2।

4. A = [1 2; 3 4], B = [2 0; 1 −1]। A + B और 2A − B ज्ञात कीजिए।

A + B = [1+2 2+0; 3+1 4−1] = [3 2; 4 3]। 2A = [2 4; 6 8], तो 2A − B = [2−2 4−0; 6−1 8+1] = [0 4; 5 9]।

5. A = [1 2; 0 1], B = [1 0; 3 1]। AB और BA निकालिए। क्या ये बराबर हैं?

AB: c₁₁ = 1·1 + 2·3 = 7, c₁₂ = 1·0 + 2·1 = 2, c₂₁ = 0·1 + 1·3 = 3, c₂₂ = 1 → AB = [7 2; 3 1]। BA: c₁₁ = 1, c₁₂ = 2, c₂₁ = 3·1 + 1·0 = 3, c₂₂ = 3·2 + 1·1 = 7 → BA = [1 2; 3 7]। बराबर नहीं, यानी AB ≠ BA।

6. A = [1 4; 2 3] को एक सममित और एक विषम-सममित आव्यूह के योग में लिखिए।

Aᵀ = [1 2; 4 3]। P = ½(A + Aᵀ) = ½[2 6; 6 6] = [1 3; 3 3] (सममित)। Q = ½(A − Aᵀ) = ½[0 2; −2 0] = [0 1; −1 0] (विषम-सममित)। जाँच: P + Q = [1 4; 2 3] = A ✓।

7. दिखाइए कि B = [3 −1; −5 2], A = [2 1; 5 3] का व्युत्क्रम है।

AB = [2·3 + 1·(−5) 2·(−1) + 1·2; 5·3 + 3·(−5) 5·(−1) + 3·2] = [1 0; 0 1] = I। BA = [3·2 − 1·5 3·1 − 1·3; −5·2 + 2·5 −5·1 + 2·3] = [1 0; 0 1] = I। दोनों I, तो B = A⁻¹।

8. A = [3 1; −1 2] के लिए दिखाइए कि A² − 5A + 7I = O और इससे A⁻¹ निकालिए।

A² = [9 − 1 3 + 2; −3 − 2 −1 + 4] = [8 5; −5 3]। 5A = [15 5; −5 10]। A² − 5A = [−7 0; 0 −7] = −7I, तो A² − 5A + 7I = O ✓। दोनों ओर A⁻¹ से गुणा: A − 5I + 7A⁻¹ = O, तो A⁻¹ = (5I − A)/7 = (1/7)[2 −1; 1 3]।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. 3 पंक्तियों और 4 स्तंभों वाले आव्यूह की कोटि है:
2. कोटि 2 का तत्समक आव्यूह कौन सा है?
3. A यदि 2 × 3 और B यदि 3 × 5 है, तो AB की कोटि:
4. विषम-सममित आव्यूह में हमेशा:
5. (AB)ᵀ बराबर है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आव्यूह गुणन पंक्ति × स्तंभ से ही क्यों होता है?

क्योंकि असली काम में यही चाहिए: पंक्ति में मात्राएँ, स्तंभ में दाम; जोड़ियों का गुणा करके जोड़ने से कुल मिलता है। इसी से समीकरण निकाय AX = B के रूप में लिखे जाते हैं।

क्या CBSE 2026-27 कक्षा 12 में प्रारंभिक पंक्ति संक्रियाएँ हैं?

सूची में संकेतन, प्रकार, परिवर्त, सममित व विषम-सममित आव्यूह, संक्रियाएँ, क्रमविनिमेयता का न होना और अद्वितीय व्युत्क्रम वाले व्युत्क्रमणीय आव्यूह हैं। 2 × 2 और 3 × 3 का व्युत्क्रम सहखंडज (adjoint) से सारणिक पाठ में सीखते हैं।

आव्यूह के कितने अंक आते हैं?

80 अंक के CBSE पेपर में बीजगणित इकाई (आव्यूह + सारणिक) के 10 अंक हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

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