National Year 12 Further Mathematics
अध्याय: 11
1. B Complex numbers (part 1)
Complex number basics
- सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण – x² + 1 = 0 जैसे समीकरण का कोई वास्तविक हल नहीं है, क्योंकि किसी वास्तविक संख्या का वर्ग ऋणात्मक नहीं होता। इसलिए एक नई संख्या i ली गई, जिसमें i² = −1। सम्मिश्र संख्या z = a + ib है: a वास्तविक भाग और b काल्पनिक भाग। जोड़, घटाव, गुणा साधारण बीजगणित जैसे होते हैं, बस i² की जगह −1 लिखें। भाग के लिए ऊपर-नीचे हर के संयुग्मी से गुणा करें। आर्गंड तल पर a + ib बिंदु (a, b) है। संयुग्मी a − ib वास्तविक अक्ष में उसका दर्पण प्रतिबिंब है और मापांक √(a² + b²) मूल बिंदु से दूरी है। जब D = b² − 4ac < 0 हो, तो द्विघात समीकरण के दोनों मूल सम्मिश्र और एक-दूसरे के संयुग्मी होते हैं।
2. C Matrices (part 1)
Matrix algebra and transformations
- आव्यूह (Matrices): कोटि, प्रकार, परिवर्त, संक्रियाएँ और व्युत्क्रम – आव्यूह संख्याओं का एक डिब्बा है जिसमें संख्याएँ पंक्तियों और स्तंभों में रखी होती हैं। इसकी कोटि = पंक्तियाँ × स्तंभ। शून्य, तत्समक, विकर्ण, अदिश, पंक्ति, स्तंभ और वर्ग आव्यूह इसके खास प्रकार हैं। परिवर्त में पंक्तियाँ स्तंभ बन जाती हैं। Aᵀ = A हो तो सममित, Aᵀ = −A हो तो विषम-सममित। योग जगह-जगह करते हैं, गुणन पंक्ति × स्तंभ से। आव्यूह गुणन क्रमविनिमेय नहीं है (AB प्रायः BA नहीं)। यदि AB = BA = I हो तो B, A का व्युत्क्रम है और वह एक ही (अद्वितीय) होता है।
3. D Further algebra and functions (part 1)
Roots of polynomials · Summation of series · Graphs and inequalities · Standard Maclaurin series
- बहुपद के मूल और बहुपद सर्वसमिकाएँ – बहुपद के मूल पता हों तो उसके गुणांक तय हो जाते हैं, और उलटा भी। ax³ + bx² + cx + d = 0 के मूल α, β, γ हों तो: α + β + γ = −b/a, αβ + βγ + γα = c/a और αβγ = −d/a (विएता के सूत्र)। इनसे बिना हल किए मूलों वाले व्यंजक निकलते हैं, और प्रतिस्थापन से ऐसे नए समीकरण बनते हैं जिनके मूल बदले हुए (रूपांतरित) हों। बहुपद सर्वसमिका वह समीकरण है जो चर के हर मान के लिए सच हो; इसे एक पक्ष को फैलाकर या गुणनखंड करके दूसरे पक्ष तक पहुँचाकर सिद्ध करते हैं।
- अनुक्रम तथा श्रेणी: AP, GP, समांतर और गुणोत्तर माध्य – अनुक्रम एक निश्चित क्रम में लिखी संख्याओं की सूची है: a₁, a₂, a₃, … पदों को जोड़ने पर श्रेणी बनती है। समांतर श्रेढ़ी (AP) में हर बार एक ही संख्या d जुड़ती है; aₙ = a + (n − 1)d और Sₙ = n/2[2a + (n − 1)d]। a और b का समांतर माध्य (a + b)/2 है; उनके बीच n समांतर माध्य डालने के लिए d = (b − a)/(n + 1)। गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP) में हर बार एक ही संख्या r से गुणा होता है; aₙ = arⁿ⁻¹ और r ≠ 1 पर Sₙ = a(rⁿ − 1)/(r − 1)। यदि |r| < 1 हो तो पद छोटे होते जाते हैं और अनंत योग S∞ = a/(1 − r)। दो धनात्मक संख्याओं का गुणोत्तर माध्य √(ab) है, और n गुणोत्तर माध्य के लिए r = (b/a)^(1/(n+1))। धनात्मक a, b के लिए A ≥ G, बराबरी केवल a = b पर।
- परिमेय ग्राफ़, शांकव और असमिकाएँ – y = (ax + b)/(cx + d) बनाने के लिए देखो हर कहाँ शून्य है (ऊर्ध्वाधर अनंतस्पर्शी), दूर जाकर a/c क्या है (क्षैतिज अनंतस्पर्शी) और अक्षों को कहाँ काटता है। द्विघात/द्विघात के लिए y = k रखकर विविक्तकर से निकालो कि y कौन-से मान ले सकता है। शांकव y² = 4ax, x²/a² + y²/b² = 1 और x²/a² − y²/b² = 1 सरल बदलाव (x → x − p, x → x/s) से खिसकते और खिंचते हैं। परिमेय और बहुपद असमिकाएँ क्रांतिक मानों और चिह्न जाँच से हल होती हैं, अज्ञात चिह्न वाली राशि से गुणा करके कभी नहीं।
- मैक्लॉरिन और टेलर श्रेणी – मैक्लॉरिन श्रेणी किसी फलन को कभी न ख़त्म होने वाले बहुपद के रूप में लिखती है: f(x) = f(0) + f′(0)x + f″(0)x²/2! + … । x = 0 के पास कुछ ही पद वक्र की बहुत अच्छी नकल करते हैं। eˣ, sin x, cos x, ln(1+x) और (1+x)ⁿ की मानक श्रेणियाँ और उनका वैधता परास याद रखना ज़रूरी है। टेलर श्रेणी यही काम किसी भी बिंदु a के आसपास करती है। श्रेणी से कठिन सीमाएँ भी आसान हो जाती हैं।
4. E Further calculus (part 1)
Volumes and mean values
- परिक्रमण ठोस (Solids of Revolution) – जब कोई सपाट आकृति किसी सीधी रेखा (अक्ष) के चारों ओर पूरा 360° घूमती है, तो जो 3D आकृति बनती है उसे परिक्रमण ठोस कहते हैं। आयत से बेलन, समकोण त्रिभुज से शंकु, अर्धवृत्त से गोला और समलंब से छिन्नक बनता है। इनके आयतन हैं V = πr²h, ⅓πr²h, ⁴⁄₃πr³ और ⅓πh(R² + Rr + r²)। कलन में वक्र y = f(x) को x-अक्ष पर घुमाने से V = π∫y² dx।
5. F Further vectors (part 1)
Lines in 3D
- त्रिविमीय ज्यामिति – आकाश में रेखा एक बिंदु और एक दिशा से तय होती है। दिक्-कोसाइन l, m, n के लिए l² + m² + n² = 1; इनके समानुपाती संख्याएँ दिक्-अनुपात हैं, दो बिंदुओं से (x₂ − x₁, y₂ − y₁, z₂ − z₁)। सदिश समीकरण r = a + λb, कार्तीय (x − x₁)/a = (y − y₁)/b = (z − z₁)/c। दो रेखाओं के बीच कोण: cosθ = |b₁·b₂|/(|b₁||b₂|)। आकाश में दो रेखाएँ समांतर, प्रतिच्छेदी या विषमतलीय होती हैं। विषमतलीय रेखाओं के बीच न्यूनतम दूरी d = |(a₂ − a₁)·(b₁ × b₂)|/|b₁ × b₂|; समांतर के लिए d = |b × (a₂ − a₁)|/|b|; d = 0 तो रेखाएँ मिलती हैं।
6. G Polar coordinates (part 1)
Polar basics
- ध्रुवीय निर्देशांक (Polar Coordinates) – ध्रुवीय निर्देशांक में बिंदु की स्थिति एक स्थिर बिंदु (ध्रुव) से दूरी r और एक स्थिर किरण (आरंभिक रेखा) से वामावर्त घूमे कोण θ से बताई जाती है। बदलने के लिए x = r cosθ, y = r sinθ, और वापस r² = x² + y², tanθ = y/x (चतुर्थांश देखकर)। r = f(θ) से वृत्त, कार्डियॉइड, गुलाब और सर्पिल बनते हैं। ढाल dy/dx = (dy/dθ)/(dx/dθ), क्षेत्रफल = ½∫r²dθ।
7. H Hyperbolic functions (part 1)
Hyperbolic basics
- अतिपरवलयिक फलन (Hyperbolic Functions) – अतिपरवलयिक फलन eˣ और e⁻ˣ से बनते हैं: cosh x = (eˣ + e⁻ˣ)/2, sinh x = (eˣ − e⁻ˣ)/2, tanh x = sinh x/cosh x। बिंदु (cosh t, sinh t) अतिपरवलय x² − y² = 1 पर रहता है, इसलिए cosh²x − sinh²x = 1। इनके प्रतिलोमों के लघुगणक रूप हैं, जैसे arsinh x = ln(x + √(x² + 1))। इनका अवकलन आसान है (sinh का cosh, cosh का sinh) और ये ∫ 1/√(x² + 1) dx = arsinh x + c जैसे मानक समाकलन देते हैं।
8. A Proof
Proof by induction
- गणितीय आगमन द्वारा उपपत्ति – गणितीय आगमन (mathematical induction) से हम सिद्ध करते हैं कि कोई कथन P(n) हर प्राकृत संख्या n के लिए सत्य है। चरण 1 (आधार चरण): दिखाओ कि P(1) सत्य है। चरण 2 (आगमन चरण): मान लो किसी k के लिए P(k) सत्य है, और इससे दिखाओ कि P(k + 1) भी सत्य है। फिर डोमिनो की कतार की तरह P(1) से P(2), P(2) से P(3)… हमेशा के लिए सब सत्य।
9. Optional application 1 Mechanics (part 1)
MA Dimensional analysis · MB Momentum and collisions · MC Work, energy and power · MD Circular motion (constant speed)
- विमाएँ और विमीय विश्लेषण – किसी राशि की विमाएँ बताती हैं कि वह मूल राशियों से कैसे बनी है: द्रव्यमान [M], लंबाई [L], समय [T] (और धारा [A], ताप [K], पदार्थ की मात्रा [mol], ज्योति तीव्रता [cd])। बल = [M L T⁻²]। सही समीकरण में हर पद की विमा एक जैसी होती है (विमीय समांगता का सिद्धांत)। इससे हम समीकरण जाँचते हैं, एक पद्धति से दूसरी में मात्रक बदलते हैं और यह पता करते हैं कि एक राशि दूसरी पर कैसे निर्भर है। यह 2π जैसे संख्यात्मक स्थिरांक नहीं दे सकता, और जोड़, sin, log वाले सूत्र नहीं निकाल सकता।
- एक और दो विमाओं में प्रत्यास्थ और अप्रत्यास्थ संघट्ट – हर संघट्ट (टक्कर) में कुल संवेग संरक्षित रहता है (छोटी सी टक्कर में बाहरी बल नहीं)। प्रत्यास्थ संघट्ट में गतिज ऊर्जा भी संरक्षित रहती है। अप्रत्यास्थ में कुछ गतिज ऊर्जा ऊष्मा, ध्वनि या पिचकने में जाती है; वस्तुएँ चिपक जाएँ तो पूर्णतः अप्रत्यास्थ। 1D प्रत्यास्थ में (वस्तु 2 रुकी हो): v₁ = (m₁ − m₂)u₁/(m₁ + m₂), v₂ = 2m₁u₁/(m₁ + m₂)। 2D में x और y दोनों दिशाओं में अलग-अलग संवेग संरक्षित।
- कार्य, गतिज ऊर्जा, कार्य-ऊर्जा प्रमेय और शक्ति – जब बल किसी चीज़ को अपनी दिशा में खिसकाता है तो कार्य होता है: W = F·s = F s cos θ। बदलते बल का कार्य F–x ग्राफ़ के नीचे का क्षेत्रफल है। चलती वस्तु की गतिज ऊर्जा K = ½mv² है। कार्य-ऊर्जा प्रमेय: कुल कार्य = गतिज ऊर्जा में बदलाव। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W/t = F·v।
- अभिकेंद्र बल, समतल सड़क और ढालू सड़क पर कार – वृत्त में चलती वस्तु की दिशा लगातार बदलती है, इसलिए उसे केंद्र की ओर नेट बल चाहिए: अभिकेंद्र बल F = mv²/r. यह कोई नया बल नहीं; तनाव, गुरुत्व, घर्षण या अभिलंब बल का हिस्सा इसे देता है। समतल सड़क पर सिर्फ़ घर्षण देता है, इसलिए vmax = √(μs r g). θ कोण पर ढालू सड़क पर अभिलंब बल का हिस्सा भी मदद करता है: घर्षण के बिना आदर्श चाल v₀ = √(r g tanθ), और घर्षण के साथ vmax = √[r g (μs + tanθ)/(1 − μs tanθ)].
10. Optional application 2 Statistics (part 1)
SA Discrete random variables · SB Poisson distribution · SC Type I and II errors (part 1) · SD Continuous random variables (part 1) · SE Chi-squared tests for association · SH Confidence intervals (normal)
- यादृच्छिक चर और प्रायिकता बंटन – यादृच्छिक चर (random variable) X किसी संयोग वाले प्रयोग के हर परिणाम को एक संख्या देता है। असतत (discrete) यादृच्छिक चर अलग-अलग मान लेता है; उसका प्रायिकता बंटन हर मान x और उसकी प्रायिकता P(X = x) बताता है, जिनका जोड़ 1 होता है। माध्य (प्रत्याशित मान) E(X) = Σ x·P(x) है। प्रसरण Var(X) = E(X²) − [E(X)]² फैलाव मापता है, और मानक विचलन इसका वर्गमूल है।
- असतत यादृच्छिक चर का प्रायिकता बंटन – यादृच्छिक चर X किसी प्रयोग के हर परिणाम को एक संख्या में बदलता है। उसका प्रायिकता बंटन हर मान x और उसकी प्रायिकता P(X = x) की सूची है; हर P, 0 और 1 के बीच होता है और सबका जोड़ 1 होता है। माध्य E(X) = Σx·P(x) लंबे समय का औसत (संतुलन बिंदु) है। प्रसरण Var(X) = Σ(x − μ)²P(x) = E(X²) − μ² फैलाव बताता है; σ = √Var। खास मॉडल: एकसमान, द्विपद B(n, p) जिसका माध्य np और प्रसरण np(1 − p), और प्वासों जिसमें माध्य = प्रसरण = λ।
- परिकल्पना परीक्षण (Hypothesis Testing) – परिकल्पना परीक्षण नमूने (sample) से पूरी जनसंख्या के बारे में किसी दावे को जाँचता है। शुरुआत शून्य परिकल्पना H₀ (कोई बदलाव नहीं, जैसे p = 0.5) और वैकल्पिक परिकल्पना H₁ (जो हमें शक है, जैसे p > 0.5) से होती है। सार्थकता स्तर चुनो, जैसे 5%। अगर H₀ सच हो तो हमारा नतीजा (या उससे भी चरम) कितना संभव है, यही p-मान है। p-मान स्तर से कम हो या नतीजा क्रांतिक क्षेत्र में हो, तो H₀ अस्वीकार। वरना H₀ अस्वीकार करने का पर्याप्त प्रमाण नहीं। टाइप I त्रुटि: सच्ची H₀ को अस्वीकार करना; टाइप II: झूठी H₀ को अस्वीकार न करना।
- काई-वर्ग परीक्षण: स्वतंत्रता और समरूपता – काई-वर्ग (χ²) परीक्षण देखता है कि सारणी की गिनतियाँ संयोग से अपेक्षित गिनतियों से बहुत दूर तो नहीं हैं। E = पंक्ति योग × स्तंभ योग ÷ कुल योग, χ² = Σ (O − E)² ÷ E, df = (r − 1)(c − 1)। अगर χ² क्रांतिक मान से बड़ा हो (या p < सार्थकता स्तर), तो H0 (कोई संबंध नहीं) अस्वीकार। 2×2 सारणी में येट्स संशोधन (|O − E| − 0.5)² लेता है।
- विश्वास्यता अंतराल (Confidence Interval) – विश्वास्यता अंतराल किसी अज्ञात जनसंख्या संख्या (माध्य μ या अनुपात p) के लिए मानने लायक मानों की एक सीमा है, जो एक नमूने से निकाली जाती है। इसका रूप है: अनुमान ± त्रुटि सीमा, जहाँ त्रुटि सीमा = क्रांतिक मान × मानक त्रुटि। 95% स्तर का मतलब है कि यह तरीका लगभग 95% नमूनों में असली मान को पकड़ लेता है। ज़्यादा भरोसा चाहिए तो अंतराल चौड़ा होगा; नमूना बड़ा हो तो पतला। अगर कोई दावा अंतराल के बाहर है, तो आँकड़े उस दावे के ख़िलाफ़ सबूत देते हैं।
11. Optional application 3 Discrete (part 1)
DA Graphs · DB Networks · DC Network flows (part 1) · DD Linear programming · DE Critical path analysis (part 1) · DF Game theory · DG Binary operations (part 1)
- ग्राफ़ सिद्धांत: बिंदु, रेखाएँ और नेटवर्क – ग्राफ़ शीर्षों (बिंदुओं) का समूह है जिन्हें किनारे (रेखाएँ) जोड़ते हैं। किसी शीर्ष की घात उसे छूने वाले किनारों की संख्या है, और सभी घातों का योग किनारों का दुगुना होता है। ऑयलर पथ हर किनारे का एक बार उपयोग करता है और तभी संभव है जब 0 या 2 शीर्ष विषम घात के हों। वृक्ष ऐसा जुड़ा ग्राफ़ है जिसमें चक्र नहीं और n − 1 किनारे हैं। भारित ग्राफ़ सड़कें और नेटवर्क दिखाते हैं; क्रुस्कल और प्रिम विधियाँ न्यूनतम विस्तृत वृक्ष ढूँढती हैं।
- ग्राफ़ एल्गोरिद्म – ग्राफ़ शीर्षों (vertices) का समूह है जो किनारों (edges) से जुड़े होते हैं, और किनारों पर भार हो सकता है। चौड़ाई-प्रथम खोज (BFS) कतार से परत-दर-परत खोजती है और सबसे कम किनारों वाला रास्ता देती है। गहराई-प्रथम खोज (DFS) ढेर या रिकर्शन से गहराई में जाती है और लौटती है। ट्री को प्री-ऑर्डर, इन-ऑर्डर और पोस्ट-ऑर्डर में घूमा जाता है। डाइक्स्ट्रा एल्गोरिद्म ग़ैर-ऋणात्मक भार पर एक शीर्ष से सबसे छोटे रास्ते देता है। क्रुस्कल और प्रिम न्यूनतम स्पैनिंग ट्री बनाते हैं। रूट इंस्पेक्शन हर किनारे पर चलने वाला सबसे छोटा बंद रास्ता ढूँढ़ता है; ट्रैवलिंग सेल्सपर्सन हर शीर्ष का सबसे छोटा चक्कर। प्रवाह नेटवर्क में अधिकतम प्रवाह = न्यूनतम कट की क्षमता।
- रैखिक प्रोग्रामन (कक्षा 12): ग्राफ से सबसे अच्छा उत्तर खोजो – रैखिक प्रोग्रामन से हम कुछ नियम मानते हुए सबसे ज़्यादा लाभ या सबसे कम खर्च निकालते हैं। नियम सीधी रेखा वाली असमिकाएँ होती हैं, जिन्हें व्यवरोध (constraints) कहते हैं। सब व्यवरोध मिलकर अनुमत बिंदुओं का एक क्षेत्र बनाते हैं, यही सुसंगत क्षेत्र (feasible region) है। लक्ष्य Z = ax + by (उद्देश्य फलन) हमेशा इस क्षेत्र के किसी कोने पर सबसे अच्छा होता है। इसलिए: रेखाएँ खींचो, सही तरफ़ रंगो, कोने निकालो, हर कोने को Z में रखो और सबसे बड़ा या छोटा चुनो। क्षेत्र खुला (अपरिबद्ध) हो तो एक बार जाँच ज़रूर करो।
- क्रांतिक पथ विश्लेषण (Critical Path Analysis) – बड़ा प्रोजेक्ट कई छोटे कामों (activities) से बनता है। कुछ काम दूसरों के ख़त्म होने का इंतज़ार करते हैं। इन्हें activity-on-node नेटवर्क में दिखाते हैं। आगे की गिनती (forward pass) से हर काम का सबसे जल्दी शुरू होने का समय (ES) मिलता है, पीछे की गिनती (backward pass) से सबसे देर से ख़त्म होने का समय (LF)। फ़्लोट = LS − ES बताता है कि काम कितना खिसक सकता है। जिन कामों का फ़्लोट 0 है, वे क्रांतिक पथ बनाते हैं — सबसे लंबा रास्ता, जो पूरे प्रोजेक्ट का कम-से-कम समय तय करता है। गैंट चार्ट नेटवर्क को समय-रेखा पर पट्टियों में बदलता है, और संसाधन हिस्टोग्राम बताता है कि हर दिन कितने मज़दूर चाहिए। फ़्लोट के अंदर काम खिसकाकर इसे समतल करना संसाधन समतलन (resource levelling) है।
- खेल सिद्धांत: जब दूसरे भी चुनें, तब सबसे अच्छा फ़ैसला – खेल सिद्धांत (game theory) ऐसे फ़ैसलों का अध्ययन है जिनमें आपका नतीजा दूसरों के चुनाव पर भी निर्भर हो। पे-ऑफ़ मैट्रिक्स हर चुनाव-जोड़ी पर हर खिलाड़ी का लाभ दिखाता है। अधीन (dominated) रणनीति हमेशा बदतर होती है, उसे हटा दो। नैश संतुलन वह जोड़ी है जहाँ कोई खिलाड़ी अकेले बदलकर फ़ायदा नहीं ले सकता; कैदी की दुविधा दिखाती है कि यह सबके लिए सहयोग से बुरा भी हो सकता है। शून्य-योग खेल में सुरक्षित (मैक्सिमिन/मिनिमैक्स) रणनीतियाँ बराबर हों तो सैडल बिंदु मिलता है; नहीं तो खिलाड़ी मिश्रित रणनीति अपनाते हैं, जो ग्राफ़ की निचली किनारी के सबसे ऊँचे बिंदु से मिलती है।
- समूह सिद्धांत: द्विआधारी संक्रिया, समूह, वलय और क्षेत्र – समूह (group) एक समुच्चय और एक संक्रिया है जो संवृत हो, साहचर्य हो, जिसमें तत्समक हो और हर अवयव का प्रतिलोम हो। घड़ी वाला गणित Z6 यह सब दिखाता है: सारणी, उपसमूह, अवयव की कोटि और लाग्रांज प्रमेय। वलय (ring) और क्षेत्र (field) में दूसरी संक्रिया भी जुड़ती है।