द्विआधारी संक्रिया और स्थायी भाग
समुच्चय M पर द्विआधारी संक्रिया (binary operation) ∗ ऐसा नियम है जो M के किन्हीं दो अवयवों a, b से ठीक एक अवयव a ∗ b देता है, और वह भी M में ही।
- पूर्णांकों Z पर + और × द्विआधारी संक्रियाएँ हैं।
- प्राकृत संख्याओं N पर घटाना नहीं है: 2 − 5 = −3, जो N में नहीं।
- R पर a ∗ b = a + b − ab द्विआधारी संक्रिया है।
M का उपसमुच्चय H स्थायी भाग (संवृत) है अगर a, b ∈ H से हमेशा a ∗ b ∈ H मिले। उदाहरण: सम संख्याएँ + के लिए संवृत हैं; विषम नहीं (3 + 5 = 8)।
∗ के गुण: क्रमविनिमेय (a ∗ b = b ∗ a), साहचर्य ((a ∗ b) ∗ c = a ∗ (b ∗ c)), तत्समक e (a ∗ e = e ∗ a = a), प्रतिलोम a′ (a ∗ a′ = e)। छोटे समुच्चय के लिए ∗ को संक्रिया सारणी (Cayley table) में दिखाते हैं: पंक्ति a, स्तंभ b, ख़ाने में a ∗ b।
समूह क्या है? उदाहरण
समूह (G, ∗) वह समुच्चय है जिस पर द्विआधारी संक्रिया संवृत, साहचर्य हो, तत्समक हो और हर अवयव का प्रतिलोम हो। अगर क्रमविनिमेय भी हो तो आबेली समूह (abelian group)।
संख्याओं के समूह
- (Z, +), (Q, +), (R, +), (C, +): तत्समक 0, प्रतिलोम −a।
- (Q*, ×), (R*, ×): तत्समक 1, प्रतिलोम 1/a। (Z, ×) समूह नहीं: 2 का पूर्णांक प्रतिलोम नहीं है।
Zn, घड़ी वाले समूह
Zn = {0, 1, …, n − 1}, mod n जोड़ के साथ, कोटि n का आबेली समूह है। अभाज्य p के लिए Zp के शून्येतर अवयव गुणा के साथ समूह बनाते हैं।
आव्यूह समूह
व्युत्क्रमणीय 2×2 आव्यूह (det ≠ 0) गुणा के साथ समूह हैं, पर आबेली नहीं: सामान्यतः AB ≠ BA।
क्रमचय समूह
{1, 2, 3} के सभी क्रमचय S3 बनाते हैं: 3! = 6 अवयव, संक्रिया "पहले एक, फिर दूसरा" (संयोजन)। S3 सबसे छोटा अनाबेली समूह है। समबाहु त्रिभुज की सममितियाँ (3 घुमाव, 3 पलट) बिल्कुल S3 जैसी हैं।
उपसमूह, अवयव की कोटि और लाग्रांज प्रमेय
G का उपसमूह H ऐसा अरिक्त उपसमुच्चय है जो उसी संक्रिया से ख़ुद समूह हो। जल्दी जाँच: H ≠ ∅ और a, b ∈ H ⇒ a ∗ b′ ∈ H।
अवयव a की कोटि (order) सबसे छोटा k ≥ 1 है जिससे a ∗ a ∗ … ∗ a (k बार) = e। Zn में + के साथ a की कोटि = n / gcd(a, n)। a की घातें चक्रीय उपसमूह ⟨a⟩ बनाती हैं।
लाग्रांज प्रमेय: परिमित समूह में हर उपसमूह की कोटि समूह की कोटि को विभाजित करती है। इसलिए हर अवयव की कोटि |G| को बाँटती है और a|G| = e। अभाज्य कोटि p वाला समूह चक्रीय होता है।
उदाहरण: Z6 में ⟨2⟩ = {0, 2, 4} (कोटि 3), ⟨3⟩ = {0, 3} (कोटि 2), और 1 व 5 पूरा Z6 बनाते हैं।
समाकारिता और तुल्याकारिता
समूह समाकारिता (morphism) f : (G, ∗) → (H, ∘) संक्रिया को बचाए रखती है: f(a ∗ b) = f(a) ∘ f(b)। तब f(e) = e′ और f(a′) = f(a)′।
तुल्याकारिता (isomorphism) एकैकी आच्छादक समाकारिता है। तुल्याकारी समूहों की सारणी एक जैसी होती है, बस अवयवों के नाम अलग। उदाहरण: f(x) = ln x, (0, ∞), × से (R, +) तक तुल्याकारिता है, क्योंकि ln(ab) = ln a + ln b। वर्ग के घुमाव ≅ Z4।
दो परिमित समूह तुल्याकारी नहीं हैं, यह दिखाने के लिए कोई ऐसा गुण ढूँढो जो एक में हो, दूसरे में नहीं: अलग कोटि, एक आबेली दूसरा नहीं, या किसी कोटि के अवयवों की गिनती अलग।
वलय और क्षेत्र
वलय (ring) (A, +, ·) में दो संक्रियाएँ हैं: (A, +) आबेली समूह, · साहचर्य, और · का + पर वितरण। अक्सर इकाई 1 भी होती है। उदाहरण: Z, Q, R, C, Zn, n×n आव्यूहों का वलय, वास्तविक फलनों का वलय।
क्षेत्र (field) ऐसा क्रमविनिमेय वलय है जिसमें हर शून्येतर अवयव का गुणन प्रतिलोम हो। उदाहरण: Q, R, C और अभाज्य p के लिए Zp। Z क्षेत्र नहीं (2 का प्रतिलोम नहीं)। Z6 क्षेत्र नहीं: 2 · 3 = 0, यानी इसमें शून्य भाजक हैं।
वलय समाकारिता दोनों संक्रियाएँ बचाती है: f(a + b) = f(a) + f(b), f(ab) = f(a)f(b), f(1) = 1। उदाहरण: C पर संयुग्मी लेना।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- समूह के नियम: संवृत, साहचर्य, तत्समक e, प्रतिलोम a′ (CAIN)
- आबेली: सभी a, b के लिए a ∗ b = b ∗ a
- Zn: a + b mod n; a की कोटि = n / gcd(a, n)
- उपसमूह जाँच: H ≠ ∅, a, b ∈ H ⇒ a ∗ b′ ∈ H
- लाग्रांज: |H|, |G| को विभाजित करता है; a^|G| = e
- समाकारिता: f(a ∗ b) = f(a) ∘ f(b); तुल्याकारिता = एकैकी आच्छादक समाकारिता
- |Sn| = n!
- क्षेत्र: क्रमविनिमेय वलय, हर a ≠ 0 का a⁻¹; Zn क्षेत्र ⇔ n अभाज्य
हल किए गए उदाहरण
1. क्या (Z, ∗) समूह है, जहाँ a ∗ b = a + b − 3?
संवृत: हाँ, पूर्णांक मिलते हैं। साहचर्य: (a∗b)∗c = a + b + c − 6 = a∗(b∗c)। तत्समक: a + e − 3 = a ⇒ e = 3। प्रतिलोम: a + a′ − 3 = 3 ⇒ a′ = 6 − a, पूर्णांक। हाँ, तत्समक 3 वाला आबेली समूह।
2. Z8 (जोड़) के हर अवयव की कोटि निकालो।
a की कोटि = 8 / gcd(a, 8)। 0 → 1; 1, 3, 5, 7 → 8; 2, 6 → 4; 4 → 2। सब 8 को बाँटते हैं, जैसा लाग्रांज कहता है। जनक: 1, 3, 5, 7।
3. क्या कोटि 10 के समूह में कोटि 4 का उपसमूह हो सकता है?
नहीं। लाग्रांज से उपसमूह की कोटि 10 को बाँटनी चाहिए। 4, 10 को नहीं बाँटता।
4. Z7 में 3x = 4 हल करो (mod 7 गुणा)।
3⁻¹ ढूँढो: 3 · 5 = 15 = 1 (mod 7), तो 3⁻¹ = 5। x = 5 · 4 = 20 = 6 (mod 7)। जाँच: 3 · 6 = 18 = 4। x = 6।
5. दिखाओ f : (R, +) → (0, ∞), f(x) = 2^x, × के साथ तुल्याकारिता है।
f(x + y) = 2^(x+y) = 2^x · 2^y = f(x) f(y), यानी समाकारिता। यह एकैकी है (2^x सख़्ती से बढ़ता है) और आच्छादक है (हर धनात्मक y = 2^(log₂ y))। इसलिए तुल्याकारिता।
6. S3 में σ, 1 और 2 बदलता है, τ, 2 और 3 बदलता है। क्या στ = τσ?
στ (पहले τ): 1→1→2, 2→3→3, 3→2→1, तो στ = (1 2 3)। τσ: 1→2→3, 2→1→1, 3→3→2, तो τσ = (1 3 2)। अलग हैं, इसलिए S3 आबेली नहीं।
आम गलतियाँ
- पहले संवृतता न जाँचना: N पर घटाना तत्समक ढूँढने से पहले ही फ़ेल हो जाता है।
- नई संक्रिया के लिए भी तत्समक 0 या 1 मान लेना। हमेशा दिए नियम से a ∗ e = a हल करो।
- हर समूह को क्रमविनिमेय मानना। आव्यूह समूह और S3 नहीं हैं।
- हर n के लिए Zn को क्षेत्र मानना। Z6 में 2 · 3 = 0, तो 2 का प्रतिलोम नहीं; सिर्फ़ अभाज्य n पर क्षेत्र।