National Year 13 Further Mathematics
अध्याय: 12
1. B Complex numbers (part 2)
De Moivre and roots
- द मुआवर प्रमेय और इकाई के मूल – सम्मिश्र संख्या को उसकी लंबाई r और कोण θ से लिख सकते हैं: z = r(cos θ + i sin θ) = re^{iθ}। गुणा करने पर लंबाइयाँ गुणा होती हैं और कोण जुड़ते हैं। इसलिए zⁿ = rⁿ(cos nθ + i sin nθ) — यही द मुआवर प्रमेय है। इससे घात जल्दी निकलती है, cos nθ और sin nθ के सूत्र मिलते हैं, और किसी भी संख्या के n मूल मिलते हैं। 1 के n मूल इकाई वृत्त पर बराबर दूरी पर, सम बहुभुज के कोनों पर बैठते हैं।
2. C Matrices (part 2)
3×3 systems and eigen-theory
- सारणिक (Determinants): उपसारणिक, सहखंड, सहखंडज, व्युत्क्रम और समीकरण निकाय – सारणिक एक वर्ग आव्यूह से बनी एक संख्या है, जिसे |A| लिखते हैं। 2 × 2 के लिए यह ad − bc है और स्तंभों से बने समांतर चतुर्भुज के क्षेत्रफल के बराबर है। 3 × 3 में हम उपसारणिक और सहखंड से एक पंक्ति पर प्रसार करते हैं। |A| = 0 हो तो A अव्युत्क्रमणीय है, उसका व्युत्क्रम नहीं होता। सारणिक का आधा त्रिभुज का क्षेत्रफल देता है। सहखंडज (सहखंड आव्यूह का परिवर्त) से A⁻¹ = (adj A)/|A| मिलता है, फिर AX = B का हल X = A⁻¹B। |A| और (adj A)B से पता चलता है कि निकाय संगत है या नहीं।
3. D Further algebra and functions (part 2)
Maclaurin series and limits · Modulus and reciprocal graphs
- मैक्लॉरिन और टेलर श्रेणी – मैक्लॉरिन श्रेणी किसी फलन को कभी न ख़त्म होने वाले बहुपद के रूप में लिखती है: f(x) = f(0) + f′(0)x + f″(0)x²/2! + … । x = 0 के पास कुछ ही पद वक्र की बहुत अच्छी नकल करते हैं। eˣ, sin x, cos x, ln(1+x) और (1+x)ⁿ की मानक श्रेणियाँ और उनका वैधता परास याद रखना ज़रूरी है। टेलर श्रेणी यही काम किसी भी बिंदु a के आसपास करती है। श्रेणी से कठिन सीमाएँ भी आसान हो जाती हैं।
- परिमेय फलन: ग्राफ़, अनंतस्पर्शी और स्केच बनाना – परिमेय फलन एक बहुपद को दूसरे बहुपद से भाग देकर बनता है, जैसे y = (2x + 1)/(x − 1)। जहाँ हर (नीचे वाला) शून्य हो, वहाँ फलन परिभाषित नहीं। वहाँ ग्राफ़ ऊर्ध्वाधर अनंतस्पर्शी के साथ ऊपर-नीचे भागता है। दूर जाकर वह क्षैतिज या तिरछे अनंतस्पर्शी के पास टिक जाता है।
4. E Further calculus (part 2)
Advanced integration
- समाकलन – समाकलन अवकलन को उलट देता है: अगर F′(x) = f(x), तो ∫f(x) dx = F(x) + C। हम मानक सूत्रों, प्रतिस्थापन (अंदर वाले हिस्से को u मानना), आंशिक भिन्न (भिन्न को तोड़ना) और खंडशः समाकलन (∫u dv = uv − ∫v du) से समाकलन करते हैं। निश्चित समाकल ∫ₐᵇ f(x) dx, a से b तक वक्र के नीचे का चिह्नित क्षेत्रफल है, और मूल प्रमेय के अनुसार यह F(b) − F(a) के बराबर है।
5. F Further vectors (part 2)
Planes and vector product
- त्रिविमीय ज्यामिति – आकाश में रेखा एक बिंदु और एक दिशा से तय होती है। दिक्-कोसाइन l, m, n के लिए l² + m² + n² = 1; इनके समानुपाती संख्याएँ दिक्-अनुपात हैं, दो बिंदुओं से (x₂ − x₁, y₂ − y₁, z₂ − z₁)। सदिश समीकरण r = a + λb, कार्तीय (x − x₁)/a = (y − y₁)/b = (z − z₁)/c। दो रेखाओं के बीच कोण: cosθ = |b₁·b₂|/(|b₁||b₂|)। आकाश में दो रेखाएँ समांतर, प्रतिच्छेदी या विषमतलीय होती हैं। विषमतलीय रेखाओं के बीच न्यूनतम दूरी d = |(a₂ − a₁)·(b₁ × b₂)|/|b₁ × b₂|; समांतर के लिए d = |b × (a₂ − a₁)|/|b|; d = 0 तो रेखाएँ मिलती हैं।
6. G Polar coordinates (part 2)
Polar curves
- ध्रुवीय निर्देशांक (Polar Coordinates) – ध्रुवीय निर्देशांक में बिंदु की स्थिति एक स्थिर बिंदु (ध्रुव) से दूरी r और एक स्थिर किरण (आरंभिक रेखा) से वामावर्त घूमे कोण θ से बताई जाती है। बदलने के लिए x = r cosθ, y = r sinθ, और वापस r² = x² + y², tanθ = y/x (चतुर्थांश देखकर)। r = f(θ) से वृत्त, कार्डियॉइड, गुलाब और सर्पिल बनते हैं। ढाल dy/dx = (dy/dθ)/(dx/dθ), क्षेत्रफल = ½∫r²dθ।
7. H Hyperbolic functions (part 2)
Hyperbolic functions
- अतिपरवलयिक फलन (Hyperbolic Functions) – अतिपरवलयिक फलन eˣ और e⁻ˣ से बनते हैं: cosh x = (eˣ + e⁻ˣ)/2, sinh x = (eˣ − e⁻ˣ)/2, tanh x = sinh x/cosh x। बिंदु (cosh t, sinh t) अतिपरवलय x² − y² = 1 पर रहता है, इसलिए cosh²x − sinh²x = 1। इनके प्रतिलोमों के लघुगणक रूप हैं, जैसे arsinh x = ln(x + √(x² + 1))। इनका अवकलन आसान है (sinh का cosh, cosh का sinh) और ये ∫ 1/√(x² + 1) dx = arsinh x + c जैसे मानक समाकलन देते हैं।
8. I Differential equations
First and second order ODEs
- अवकल समीकरण – अवकल समीकरण एक फलन y को उसके अवकलजों से जोड़ता है। इसकी कोटि सबसे ऊँचा अवकलज है और घात उस अवकलज की घात (जब समीकरण अवकलजों में बहुपद हो)। व्यापक हल में स्वेच्छ अचर होते हैं; y(0) = 1 जैसी शर्त उन्हें तय करके विशिष्ट हल देती है। कक्षा 12 में तीन प्रकार के प्रथम कोटि समीकरण हल करते हैं: चर पृथक्करणीय, समघातीय (y = vx रखो) और रैखिक dy/dx + Py = Q (समाकलन गुणक e^∫P dx से गुणा करो)।
9. J Numerical methods
Numerical integration and ODEs
- संख्यात्मक विधियाँ: मूल और क्षेत्रफल कदम-दर-कदम – कुछ समीकरण और क्षेत्रफल किसी आसान सूत्र से नहीं निकलते। संख्यात्मक विधियाँ आसान कदमों को बार-बार दोहराकर उत्तर के जितना चाहो उतना पास पहुँचती हैं: चिह्न परिवर्तन जाँचो, अंतराल आधा करो (समद्विभाजन), स्पर्शरेखा पर फिसलो (न्यूटन-रैफ़सन), x = g(x) दोहराओ (स्थिर-बिंदु पुनरावृत्ति), क्षेत्रफल के लिए समलंब जोड़ो, और ढलान पर छोटे कदम चलो (ऑयलर)।
10. Optional application 1 Mechanics (part 2)
MD Circular motion · ME Centres of mass and moments
- ऊर्ध्वाधर वृत्त में गति – डोरी से बँधी गेंद ऊर्ध्वाधर वृत्त में नीचे तेज़ और ऊपर धीमी चलती है, क्योंकि गुरुत्व उस पर कार्य करता है। हर बिंदु पर केंद्र की ओर कुल बल mv²/r होना चाहिए। नीचे T = mg + mv²/r (सबसे ज़्यादा); ऊपर T = mv²/r − mg (सबसे कम)। ऊपर डोरी तनी रहे इसके लिए v_ऊपर ≥ √(gr)। ऊर्जा संरक्षण से नीचे u ≥ √(5gr) चाहिए।
- द्रव्यमान केंद्र: दो कण, दृढ़ पिंड और एकसमान छड़ – द्रव्यमान केंद्र वह एक बिंदु है जो ऐसे चलता है मानो पूरे निकाय का सारा द्रव्यमान वहीं इकट्ठा हो। एक रेखा पर दो कणों के लिए x_cm = (m₁x₁ + m₂x₂)/(m₁ + m₂)। यह दोनों को मिलाने वाली रेखा पर, भारी कण के पास होता है। कई कणों के लिए x_cm = Σmx/Σm (y और z के लिए भी ऐसे ही)। L लंबाई की एकसमान छड़ का द्रव्यमान केंद्र L/2 पर, यानी ठीक बीच में होता है। आंतरिक बल द्रव्यमान केंद्र को नहीं हिला सकते, सिर्फ़ बाहरी बल: M·a_cm = F_ext।
11. Optional application 2 Statistics (part 2)
SC Type I and II errors · SD Continuous random variables · SE Yates correction · SF Exponential distribution · SG-SH t-tests and confidence intervals
- परिकल्पना परीक्षण (Hypothesis Testing) – परिकल्पना परीक्षण नमूने (sample) से पूरी जनसंख्या के बारे में किसी दावे को जाँचता है। शुरुआत शून्य परिकल्पना H₀ (कोई बदलाव नहीं, जैसे p = 0.5) और वैकल्पिक परिकल्पना H₁ (जो हमें शक है, जैसे p > 0.5) से होती है। सार्थकता स्तर चुनो, जैसे 5%। अगर H₀ सच हो तो हमारा नतीजा (या उससे भी चरम) कितना संभव है, यही p-मान है। p-मान स्तर से कम हो या नतीजा क्रांतिक क्षेत्र में हो, तो H₀ अस्वीकार। वरना H₀ अस्वीकार करने का पर्याप्त प्रमाण नहीं। टाइप I त्रुटि: सच्ची H₀ को अस्वीकार करना; टाइप II: झूठी H₀ को अस्वीकार न करना।
- यादृच्छिक चर और प्रायिकता बंटन – यादृच्छिक चर (random variable) X किसी संयोग वाले प्रयोग के हर परिणाम को एक संख्या देता है। असतत (discrete) यादृच्छिक चर अलग-अलग मान लेता है; उसका प्रायिकता बंटन हर मान x और उसकी प्रायिकता P(X = x) बताता है, जिनका जोड़ 1 होता है। माध्य (प्रत्याशित मान) E(X) = Σ x·P(x) है। प्रसरण Var(X) = E(X²) − [E(X)]² फैलाव मापता है, और मानक विचलन इसका वर्गमूल है।
- काई-वर्ग परीक्षण: स्वतंत्रता और समरूपता – काई-वर्ग (χ²) परीक्षण देखता है कि सारणी की गिनतियाँ संयोग से अपेक्षित गिनतियों से बहुत दूर तो नहीं हैं। E = पंक्ति योग × स्तंभ योग ÷ कुल योग, χ² = Σ (O − E)² ÷ E, df = (r − 1)(c − 1)। अगर χ² क्रांतिक मान से बड़ा हो (या p < सार्थकता स्तर), तो H0 (कोई संबंध नहीं) अस्वीकार। 2×2 सारणी में येट्स संशोधन (|O − E| − 0.5)² लेता है।
- असतत यादृच्छिक चर का प्रायिकता बंटन – यादृच्छिक चर X किसी प्रयोग के हर परिणाम को एक संख्या में बदलता है। उसका प्रायिकता बंटन हर मान x और उसकी प्रायिकता P(X = x) की सूची है; हर P, 0 और 1 के बीच होता है और सबका जोड़ 1 होता है। माध्य E(X) = Σx·P(x) लंबे समय का औसत (संतुलन बिंदु) है। प्रसरण Var(X) = Σ(x − μ)²P(x) = E(X²) − μ² फैलाव बताता है; σ = √Var। खास मॉडल: एकसमान, द्विपद B(n, p) जिसका माध्य np और प्रसरण np(1 − p), और प्वासों जिसमें माध्य = प्रसरण = λ।
- विश्वास्यता अंतराल (Confidence Interval) – विश्वास्यता अंतराल किसी अज्ञात जनसंख्या संख्या (माध्य μ या अनुपात p) के लिए मानने लायक मानों की एक सीमा है, जो एक नमूने से निकाली जाती है। इसका रूप है: अनुमान ± त्रुटि सीमा, जहाँ त्रुटि सीमा = क्रांतिक मान × मानक त्रुटि। 95% स्तर का मतलब है कि यह तरीका लगभग 95% नमूनों में असली मान को पकड़ लेता है। ज़्यादा भरोसा चाहिए तो अंतराल चौड़ा होगा; नमूना बड़ा हो तो पतला। अगर कोई दावा अंतराल के बाहर है, तो आँकड़े उस दावे के ख़िलाफ़ सबूत देते हैं।
12. Optional application 3 Discrete (part 2)
DA Planarity and isomorphism · DC Network flows · DD Simplex algorithm · DE Critical path analysis · DF Game theory (larger games) · DG Binary operations and groups
- ग्राफ़ सिद्धांत: बिंदु, रेखाएँ और नेटवर्क – ग्राफ़ शीर्षों (बिंदुओं) का समूह है जिन्हें किनारे (रेखाएँ) जोड़ते हैं। किसी शीर्ष की घात उसे छूने वाले किनारों की संख्या है, और सभी घातों का योग किनारों का दुगुना होता है। ऑयलर पथ हर किनारे का एक बार उपयोग करता है और तभी संभव है जब 0 या 2 शीर्ष विषम घात के हों। वृक्ष ऐसा जुड़ा ग्राफ़ है जिसमें चक्र नहीं और n − 1 किनारे हैं। भारित ग्राफ़ सड़कें और नेटवर्क दिखाते हैं; क्रुस्कल और प्रिम विधियाँ न्यूनतम विस्तृत वृक्ष ढूँढती हैं।
- ग्राफ़ एल्गोरिद्म – ग्राफ़ शीर्षों (vertices) का समूह है जो किनारों (edges) से जुड़े होते हैं, और किनारों पर भार हो सकता है। चौड़ाई-प्रथम खोज (BFS) कतार से परत-दर-परत खोजती है और सबसे कम किनारों वाला रास्ता देती है। गहराई-प्रथम खोज (DFS) ढेर या रिकर्शन से गहराई में जाती है और लौटती है। ट्री को प्री-ऑर्डर, इन-ऑर्डर और पोस्ट-ऑर्डर में घूमा जाता है। डाइक्स्ट्रा एल्गोरिद्म ग़ैर-ऋणात्मक भार पर एक शीर्ष से सबसे छोटे रास्ते देता है। क्रुस्कल और प्रिम न्यूनतम स्पैनिंग ट्री बनाते हैं। रूट इंस्पेक्शन हर किनारे पर चलने वाला सबसे छोटा बंद रास्ता ढूँढ़ता है; ट्रैवलिंग सेल्सपर्सन हर शीर्ष का सबसे छोटा चक्कर। प्रवाह नेटवर्क में अधिकतम प्रवाह = न्यूनतम कट की क्षमता।
- सिंप्लेक्स विधि: तालिका से रैखिक प्रोग्रामन हल करना – आलेखीय विधि दो चरों तक काम करती है, पर असली समस्याओं में बहुत चर होते हैं। सिंप्लेक्स विधि उन्हें एक तालिका (tableau) से हल करती है। हर ≤ शर्त में एक स्लैक चर जोड़ो, मूल बिंदु से शुरू करो, और पिवट करो: उद्देश्य पंक्ति में सबसे ऋणात्मक संख्या का स्तंभ चुनो, अनुपात परीक्षण से पंक्ति चुनो, और स्तंभ साफ़ करो। हर पिवट संभव क्षेत्र के बेहतर कोने पर ले जाता है। जब उद्देश्य पंक्ति में कोई ऋणात्मक न बचे, हल इष्टतम है। C न्यूनतम करना हो तो −C अधिकतम करो।
- क्रांतिक पथ विश्लेषण (Critical Path Analysis) – बड़ा प्रोजेक्ट कई छोटे कामों (activities) से बनता है। कुछ काम दूसरों के ख़त्म होने का इंतज़ार करते हैं। इन्हें activity-on-node नेटवर्क में दिखाते हैं। आगे की गिनती (forward pass) से हर काम का सबसे जल्दी शुरू होने का समय (ES) मिलता है, पीछे की गिनती (backward pass) से सबसे देर से ख़त्म होने का समय (LF)। फ़्लोट = LS − ES बताता है कि काम कितना खिसक सकता है। जिन कामों का फ़्लोट 0 है, वे क्रांतिक पथ बनाते हैं — सबसे लंबा रास्ता, जो पूरे प्रोजेक्ट का कम-से-कम समय तय करता है। गैंट चार्ट नेटवर्क को समय-रेखा पर पट्टियों में बदलता है, और संसाधन हिस्टोग्राम बताता है कि हर दिन कितने मज़दूर चाहिए। फ़्लोट के अंदर काम खिसकाकर इसे समतल करना संसाधन समतलन (resource levelling) है।
- खेल सिद्धांत: जब दूसरे भी चुनें, तब सबसे अच्छा फ़ैसला – खेल सिद्धांत (game theory) ऐसे फ़ैसलों का अध्ययन है जिनमें आपका नतीजा दूसरों के चुनाव पर भी निर्भर हो। पे-ऑफ़ मैट्रिक्स हर चुनाव-जोड़ी पर हर खिलाड़ी का लाभ दिखाता है। अधीन (dominated) रणनीति हमेशा बदतर होती है, उसे हटा दो। नैश संतुलन वह जोड़ी है जहाँ कोई खिलाड़ी अकेले बदलकर फ़ायदा नहीं ले सकता; कैदी की दुविधा दिखाती है कि यह सबके लिए सहयोग से बुरा भी हो सकता है। शून्य-योग खेल में सुरक्षित (मैक्सिमिन/मिनिमैक्स) रणनीतियाँ बराबर हों तो सैडल बिंदु मिलता है; नहीं तो खिलाड़ी मिश्रित रणनीति अपनाते हैं, जो ग्राफ़ की निचली किनारी के सबसे ऊँचे बिंदु से मिलती है।
- समूह सिद्धांत: द्विआधारी संक्रिया, समूह, वलय और क्षेत्र – समूह (group) एक समुच्चय और एक संक्रिया है जो संवृत हो, साहचर्य हो, जिसमें तत्समक हो और हर अवयव का प्रतिलोम हो। घड़ी वाला गणित Z6 यह सब दिखाता है: सारणी, उपसमूह, अवयव की कोटि और लाग्रांज प्रमेय। वलय (ring) और क्षेत्र (field) में दूसरी संक्रिया भी जुड़ती है।