द्रव्यमान केंद्र क्या है?
कणों का निकाय यानी पदार्थ के छोटे-छोटे टुकड़ों का समूह, जिसे हम एक साथ पढ़ते हैं। दृढ़ पिंड वह है जिसका आकार कभी नहीं बदलता: उसके किन्हीं दो कणों की दूरी हमेशा उतनी ही रहती है।
द्रव्यमान केंद्र (CM) निकाय का वह ख़ास बिंदु है जो ऐसे चलता है मानो सारा द्रव्यमान वहीं हो और सारे बाहरी बल वहीं लगें। यह द्रव्यमान से भारित औसत स्थिति है।
इसकी ज़रूरत क्यों? हवा में उछाला गया घूमता बल्ला उलझे तरीके से चलता है। पर उसका द्रव्यमान केंद्र एक साफ़ परवलय (parabola) पर चलता है, एक छोटी गेंद जैसा। इसलिए बड़े पिंड को एक बिंदु मान सकते हैं।
दो कणों का द्रव्यमान केंद्र
m₁ द्रव्यमान x₁ पर और m₂ द्रव्यमान x₂ पर रखो। तब
x_cm = (m₁x₁ + m₂x₂)/(m₁ + m₂)
- अगर m₁ = m₂, तो x_cm = (x₁ + x₂)/2, ठीक बीच।
- द्रव्यमान केंद्र हमेशा दोनों को जोड़ने वाली रेखा पर, दोनों के बीच होता है।
- यह भारी कण के पास होता है। दूरियाँ द्रव्यमानों के उल्टे अनुपात में: r₁/r₂ = m₂/m₁।
मूलबिंदु (origin) कहीं भी चुनो, द्रव्यमान केंद्र का असली स्थान वही रहेगा; सिर्फ़ उसकी संख्या बदलेगी।
कई कणों और दृढ़ पिंड का द्रव्यमान केंद्र
n कणों के लिए हर दिशा में भारित औसत लो:
x_cm = Σmᵢxᵢ / M, y_cm = Σmᵢyᵢ / M, z_cm = Σmᵢzᵢ / M, जहाँ M = Σmᵢ।
सदिश रूप में R_cm = Σmᵢrᵢ / M।
दृढ़ पिंड में अनगिनत छोटे कण होते हैं, इसलिए जोड़ समाकलन (integral) बन जाता है: x_cm = (1/M)∫x dm। एकसमान और सममित पिंडों (गोला, वलय, चकती, घन, छड़) का द्रव्यमान केंद्र उनके ज्यामितीय केंद्र पर होता है। कभी-कभी यह पदार्थ के बाहर भी होता है, जैसे चूड़ी का खाली केंद्र।
एकसमान छड़ का द्रव्यमान केंद्र
M द्रव्यमान और L लंबाई की पतली एकसमान छड़ x-अक्ष पर x = 0 से x = L तक रखो। एकसमान यानी हर सेंटीमीटर का द्रव्यमान बराबर। प्रति एकांक लंबाई द्रव्यमान λ = M/L।
चरण 1: x पर dx लंबाई का छोटा टुकड़ा लो। उसका द्रव्यमान dm = λ dx।
चरण 2: x_cm = (1/M)∫₀ᴸ x λ dx = (λ/M)·(L²/2)।
चरण 3: λ = M/L रखो। x_cm = L/2।
यानी एकसमान छड़ का द्रव्यमान केंद्र उसका मध्य बिंदु है। सममिति वाला कारण: बीच से d दूरी बाएँ वाले हर टुकड़े का जोड़ीदार d दूरी दाएँ है।
द्रव्यमान केंद्र की गति
पूरे निकाय के लिए न्यूटन का दूसरा नियम: M a_cm = F_ext। आंतरिक बल बराबर और उल्टे जोड़ों में आते हैं (तीसरा नियम), इसलिए कट जाते हैं। मतलब:
- F_ext = 0 हो तो v_cm नहीं बदलता। रुका द्रव्यमान केंद्र रुका रहता है।
- कुल संवेग P = M v_cm।
इसीलिए शांत पानी में तैरती नाव पर आदमी आगे चले तो नाव पीछे खिसकती है: आदमी + नाव का द्रव्यमान केंद्र नहीं हिलता।
घर पर करके देखो
30 cm का स्केल एक उँगली पर टिकाओ। वह 15 cm पर टिकेगा। अब 25 cm के निशान पर दो सिक्के चिपकाओ और नया संतुलन बिंदु ढूँढो। वह सिक्कों की ओर खिसकेगा। स्केल के अपने द्रव्यमान के साथ सूत्र लगाकर जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- x_cm = (m₁x₁ + m₂x₂)/(m₁ + m₂)
- R_cm = Σmᵢrᵢ / Σmᵢ
- x_cm = (1/M)∫x dm (सतत पिंड)
- L लंबाई की एकसमान छड़: x_cm = L/2
- r₁/r₂ = m₂/m₁ (दो कण, CM से दूरियाँ)
- M v_cm = Σmᵢvᵢ = कुल संवेग P
- M a_cm = F_ext
हल किए गए उदाहरण
1. 2-2 kg की दो गेंदें x = 0 और x = 6 m पर हैं। x_cm निकालो।
द्रव्यमान बराबर हैं, इसलिए बीच में। x_cm = (2×0 + 2×6)/(2 + 2) = 12/4 = 3 m।
2. 1 kg x = 0 पर और 3 kg x = 4 m पर। द्रव्यमान केंद्र कहाँ है?
x_cm = (1×0 + 3×4)/(1 + 3) = 12/4 = 3 m। हल्के से 3 m और भारी से 1 m दूर। जाँच: r₁/r₂ = 3/1 = m₂/m₁ ✔
3. पृथ्वी (6 × 10²⁴ kg) और चंद्रमा (7.4 × 10²² kg) 3.84 × 10⁸ m दूर हैं। इनका द्रव्यमान केंद्र पृथ्वी के केंद्र से कितनी दूर है?
पृथ्वी x = 0 पर। x_cm = (7.4 × 10²² × 3.84 × 10⁸)/(6.074 × 10²⁴) ≈ 4.68 × 10⁶ m ≈ 4680 km। यह पृथ्वी के अंदर है (त्रिज्या 6400 km)।
4. तीन कण: 1 kg (0, 0) पर, 2 kg (4, 0) पर, 1 kg (0, 4) पर (मीटर में)। द्रव्यमान केंद्र?
M = 4 kg। x_cm = (0 + 8 + 0)/4 = 2 m। y_cm = (0 + 0 + 4)/4 = 1 m। CM = (2 m, 1 m)।
5. तीन बराबर द्रव्यमान 2 m भुजा वाले समबाहु त्रिभुज के कोनों (0,0), (2,0), (1, √3) पर हैं। CM?
x_cm = (0 + 2 + 1)/3 = 1 m। y_cm = √3/3 = 0.577 m। यह त्रिभुज का केंद्रक है, जैसा सममिति कहती है।
6. 1 m लंबी, 2 kg की एकसमान छड़ के दाएँ सिरे पर 1 kg की गेंद लगी है। बाएँ सिरे से CM कितनी दूर?
छड़ का पूरा द्रव्यमान उसके बीच (0.5 m) पर मानो। x_cm = (2×0.5 + 1×1)/3 = 2/3 ≈ 0.67 m।
7. शांत पानी में रुकी 40 kg, 5 m लंबी नाव के एक सिरे पर 60 kg का आदमी है। वह दूसरे सिरे तक चलता है। नाव कितनी खिसकेगी?
बाहरी क्षैतिज बल नहीं, तो CM नहीं हिलेगा। नाव d पीछे खिसके तो आदमी ज़मीन के सापेक्ष 5 − d आगे। 60(5 − d) = 40d → d = 3 m। नाव 3 m पीछे, आदमी 2 m आगे।
8. 20 m/s से क्षैतिज चलता गोला दो बराबर टुकड़ों में फटता है। एक टुकड़ा फटते ही रुक जाता है। दूसरे की चाल?
विस्फोट आंतरिक है, संवेग संरक्षित। M×20 = (M/2)×0 + (M/2)v → v = 40 m/s उसी दिशा में। CM 20 m/s से चलता रहता है।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि द्रव्यमान केंद्र पिंड के अंदर ही होगा। वलय या चूड़ी में यह खाली केंद्र पर है।
- द्रव्यमान अलग होने पर भी ठीक बीच वाला बिंदु ले लेना। CM भारी की ओर होता है।
- छड़ + गेंद वाले सवाल में छड़ का अपना द्रव्यमान भूल जाना। छड़ को उसके L/2 पर रखा द्रव्यमान मानो।
- यह सोचना कि आंतरिक बल (विस्फोट, नाव पर चलना) CM हिला सकते हैं। v_cm सिर्फ़ बाहरी बल से बदलता है।