विस्पंद क्या हैं?
लगभग बराबर आवृत्ति की दो ध्वनियाँ साथ बजाओ। एक ही सुर सुनाई देता है पर उसकी तेज़ी बार-बार बढ़ती-घटती है: तेज़, धीमा, तेज़, धीमा। तेज़ी के इस नियमित बढ़ने-घटने को विस्पंद कहते हैं। एक तेज़ से अगले तेज़ तक = एक विस्पंद।
विस्पंद समय में अध्यारोपण से बनते हैं: किसी पल दोनों तरंगें कदम मिलाकर जुड़ती हैं (तेज़); थोड़ी देर बाद एक आधा चक्र आगे हो जाती है और दोनों कट जाती हैं (धीमा)।
विस्पंद आवृत्ति: गणित
एक ही जगह बराबर आयाम की दो तरंगें:
s₁ = a cos(ω₁t), s₂ = a cos(ω₂t)
cos A + cos B = 2 cos((A − B)/2) cos((A + B)/2) से:
s = [2a cos(ω_b t)] cos(ω_a t), जहाँ ω_a = (ω₁ + ω₂)/2 और ω_b = (ω₁ − ω₂)/2।
- cos(ω_a t) तेज़ तरंग है जो हम सुनते हैं, औसत आवृत्ति (f₁ + f₂)/2 पर।
- 2a cos(ω_b t) धीरे बदलता आयाम ("लिफ़ाफ़ा") है।
- तेज़ी आयाम के आकार पर निर्भर है, जो cos(ω_b t) के हर चक्र में दो बार शिखर पर आता है। इसलिए विस्पंद आवृत्ति 2 × (f₁ − f₂)/2 है:
f_विस्पंद = |f₁ − f₂|, एक विस्पंद का समय = 1/|f₁ − f₂|।
हमारे कान लगभग 10 विस्पंद प्रति सेकंड तक ही गिन पाते हैं। उससे तेज़ हों तो खुरदुरी आवाज़ लगती है।
विस्पंद के उपयोग
- वाद्य मिलाना: मानक सुर के साथ तार बजाओ; विस्पंद ग़ायब होने तक कसो।
- अज्ञात आवृत्ति निकालना: ज्ञात स्वरित्र के साथ बजाकर विस्पंद गिनो। फिर एक को थोड़ा बदलो (मोम लगाओ तो आवृत्ति घटे, रेती से घिसो तो बढ़े) और देखो विस्पंद बढ़े या घटे, इससे सही उत्तर चुनो।
- छोटे बदलाव पकड़ना, जैसे कुछ चाल नापने वाले (डॉप्लर) यंत्रों में।
मोम और रेती का नियम
- स्वरित्र पर मोम → आवृत्ति घटती।
- भुजाएँ घिसना → आवृत्ति बढ़ती।
करके देखो: दो फ़ोन से विस्पंद
दो फ़ोन पर कोई मुफ़्त टोन-जनरेटर ऐप खोलो। एक पर 440 Hz, दूसरे पर 443 Hz रखकर पास-पास बजाओ। 5 सेकंड तक लहरें गिनो: लगभग 15, यानी हर सेकंड 3। अब दूसरे को 441 Hz करो: अंदाज़ा लगाओ 1 विस्पंद प्रति सेकंड, फिर जाँचो। 3D के चरण 5 में स्लाइडर से भी यही करो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- f_विस्पंद = |f₁ − f₂|
- दो विस्पंदों के बीच समय = 1/|f₁ − f₂|
- s = 2a cos(ω_b t) cos(ω_a t), ω_a = (ω₁ + ω₂)/2, ω_b = (ω₁ − ω₂)/2
- सुनाई देने वाला सुर = (f₁ + f₂)/2
- मोम → f घटे; घिसना → f बढ़े
हल किए गए उदाहरण
1. 384 Hz और 380 Hz के स्वरित्र साथ बजाए। हर सेकंड कितने विस्पंद?
384 − 380 = 4 विस्पंद प्रति सेकंड।
2. ऊपर वाले में दो तेज़ ध्वनियों के बीच समय और सुनाई देने वाला सुर?
समय = 1/4 = 0.25 s। सुर = (384 + 380)/2 = 382 Hz।
3. 256 Hz का स्वरित्र अज्ञात स्वरित्र के साथ 5 विस्पंद/s देता है। अज्ञात आवृत्ति क्या हो सकती है?
256 ± 5, यानी 251 Hz या 261 Hz।
4. ऊपर अज्ञात स्वरित्र पर मोम लगाया तो विस्पंद 7 प्रति सेकंड हो गए। आवृत्ति?
मोम अज्ञात आवृत्ति घटाता है। 261 होती तो 256 के पास आती और विस्पंद घटते। विस्पंद बढ़े, तो वह 251 Hz थी।
5. स्वरित्र A, 320 Hz के साथ 4 विस्पंद/s देता है। A को घिसने पर 2 विस्पंद/s। A की मूल आवृत्ति?
A = 316 या 324। घिसने से A बढ़ता है। 316 से 320 की ओर जाए तो विस्पंद घटेंगे: सही। A = 316 Hz।
6. सितार के दो तार 300 Hz पर होने चाहिए, पर 10 s में 30 विस्पंद गिने। आवृत्तियों में अंतर?
30/10 = 3 विस्पंद/s, तो अंतर 3 Hz।
7. दो ऑर्गन पाइप साथ 5 विस्पंद/s देते हैं। एक 0.5 m का खुला पाइप है (v = 340 m/s)। दूसरे की आवृत्ति?
खुला पाइप f = 340/1 = 340 Hz। दूसरा 335 Hz या 345 Hz।
8. y₁ = a sin(600πt), y₂ = a sin(608πt)। विस्पंद आवृत्ति?
f₁ = 300 Hz, f₂ = 304 Hz। 4 विस्पंद/s।
आम गलतियाँ
- विस्पंद आवृत्ति (f₁ − f₂)/2 लिखना। वह लिफ़ाफ़े की आवृत्ति है; तेज़ पल हर चक्र में दो बार, तो विस्पंद = |f₁ − f₂|।
- मानना कि बड़े अंतर पर भी विस्पंद सुनाई देंगे। सिर्फ़ छोटे अंतर (लगभग 10 Hz से कम) पर।
- मोम और रेती को उलट देना: मोम आवृत्ति घटाता है, घिसना बढ़ाता है।
- विस्पंद से अज्ञात आवृत्ति निकालते समय ± भूल जाना। जाँच से पहले दो उत्तर संभव हैं।