अध्यारोपण और कला-संबद्ध स्रोत
दो तरंगें मिलें तो किसी बिंदु पर कुल विक्षोभ दोनों का योग होता है: यह अध्यारोपण का सिद्धांत है। a आयाम की दो प्रकाश तरंगें कलांतर φ से मिलें तो परिणामी तीव्रता I = 4I₀ cos²(φ/2)।
- संपोषी व्यतिकरण: φ = 0, 2π, 4π… (पथांतर 0, λ, 2λ…) → I = 4I₀ (दीप्त)।
- विनाशी व्यतिकरण: φ = π, 3π… (पथांतर λ/2, 3λ/2…) → I = 0 (अदीप्त)।
स्थिर पैटर्न के लिए स्रोत कला-संबद्ध हों: समान आवृत्ति और स्थिर कलांतर। दो अलग बल्ब कला-संबद्ध नहीं होते — उनकी कला हर सेकंड लाखों बार बेतरतीब बदलती है, फ्रिंज इतनी तेज़ी से खिसकते हैं कि दिखते नहीं और पर्दा एक जैसा रोशन लगता है (I = I₁ + I₂)। इसीलिए यंग ने एक स्रोत का प्रकाश दो झिरियों में बाँटा। लेज़र बहुत कला-संबद्ध प्रकाश देता है।
यंग का द्वि-झिरी प्रयोग
थॉमस यंग (1801) ने एक पतली झिरी का प्रकाश दो पास-पास की समांतर झिरियों S₁ और S₂ (दूरी d) पर डाला। पर्दा D दूरी पर था (D ≫ d)। उन्हें समान दूरी पर दीप्त और अदीप्त पट्टियाँ दिखीं, जिन्हें फ्रिंज कहते हैं।
पथांतर
केंद्र O से y ऊँचाई पर बिंदु P के लिए S₂ से अतिरिक्त दूरी Δ = S₂P − S₁P ≈ yd/D।
दीप्त फ्रिंज
Δ = nλ → yₙ = nλD/d (n = 0, 1, 2…)। केंद्र O (n = 0) हमेशा दीप्त।
अदीप्त फ्रिंज
Δ = (n + ½)λ → yₙ = (n + ½)λD/d।
फ्रिंज चौड़ाई
दो पड़ोसी दीप्त (या अदीप्त) फ्रिंजों के बीच की दूरी:
β = λD/d
सभी फ्रिंज समान चौड़े होते हैं। कोणीय फ्रिंज चौड़ाई θ = λ/d।
फ्रिंज किससे बदलते हैं?
- बड़ी λ (लाल) → चौड़े फ्रिंज; नीला प्रकाश → पतले फ्रिंज।
- पर्दा दूर (बड़ा D) → चौड़े फ्रिंज।
- झिरियाँ पास (छोटा d) → चौड़े फ्रिंज।
- पूरा उपकरण पानी में → λ घटकर λ/n, इसलिए β भी β/n।
- श्वेत प्रकाश → केंद्रीय फ्रिंज सफ़ेद, बाकी रंगीन (अंदर बैंगनी किनारा, बाहर लाल), और कुछ ही फ्रिंज दिखते हैं।
- ऊर्जा नष्ट नहीं होती: वह केवल अदीप्त जगहों से दीप्त जगहों पर पहुँच जाती है।
एकल झिरी विवर्तन
विवर्तन यानी किसी छोटे छेद या अवरोध के किनारे से प्रकाश का मुड़ना और फैलना। यह तब दिखता है जब छेद तरंगदैर्ध्य से बहुत बड़ा न हो।
a चौड़ाई की एक पतली झिरी पर प्रकाश डालें। झिरी को पास-पास रखे बहुत से छोटे हाइगेंस स्रोत मानें। ठीक सामने सब एक साथ पहुँचते हैं: केंद्रीय उच्चिष्ठ चमकीला।
पहली अदीप्त पट्टी
जिस कोण पर ऊपरी और निचले किनारों का पथांतर λ हो, झिरी को दो आधों में बाँटें: ऊपरी आधे का हर बिंदु निचले आधे के एक साथी को काट देता है। इसलिए पहला निम्निष्ठ a sin θ = λ पर, यानी θ ≈ λ/a। निम्निष्ठ: a sin θ = nλ।
केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई
−λ/a से +λ/a तक, इसलिए कोणीय चौड़ाई 2λ/a और पर्दे पर
केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई = 2λD/a
यह हर पार्श्व पट्टी से दोगुनी चौड़ी है, और पार्श्व उच्चिष्ठ (लगभग a sin θ ≈ (n + ½)λ पर) बहुत हल्के हैं। पतली झिरी से केंद्रीय पट्टी चौड़ी होती है।
व्यतिकरण बनाम विवर्तन
| व्यतिकरण | विवर्तन (एकल झिरी) |
|---|---|
| दो कला-संबद्ध स्रोतों की तरंगें मिलती हैं | एक ही झिरी के अलग-अलग भागों की तरंगिकाएँ मिलती हैं |
| सभी फ्रिंज समान चौड़े | केंद्रीय उच्चिष्ठ बाकी से दोगुना चौड़ा |
| सभी दीप्त फ्रिंज लगभग समान चमकीले | केंद्र से दूर चमक तेज़ी से घटती है |
| अदीप्त फ्रिंज पूरी तरह काले | निम्निष्ठ काले, पार्श्व उच्चिष्ठ हल्के |
असली द्वि-झिरी में दोनों होते हैं: व्यतिकरण फ्रिंज हर झिरी के चौड़े विवर्तन पैटर्न के अंदर बैठते हैं।
करके देखें: उँगलियों से विवर्तन
दो उँगलियों को एक आँख के सामने बहुत पास रखें, बाल जितना बारीक फ़ासला छोड़ें, और उसमें से ट्यूबलाइट देखें। फ़ासले के साथ पतली काली रेखाएँ दिखेंगी — विवर्तन पैटर्न। फ़ासला और पतला करें: पैटर्न और फैलता है (छोटा a, बड़ा 2λD/a)। 3D में पहले अनुमान लगाएँ कि d दोगुना करने पर β का क्या होगा, फिर स्लाइडर से जाँचें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- I = 4I₀ cos²(φ/2); φ = (2π/λ) × पथांतर
- पथांतर Δ = yd/D
- दीप्त: Δ = nλ, yₙ = nλD/d
- अदीप्त: Δ = (n + ½)λ, yₙ = (n + ½)λD/d
- फ्रिंज चौड़ाई β = λD/d; कोणीय चौड़ाई = λ/d
- एकल झिरी निम्निष्ठ: a sin θ = nλ
- केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई = 2λD/a (कोणीय 2λ/a)
हल किए गए उदाहरण
1. यंग के प्रयोग में λ = 600 nm, d = 0.5 mm, D = 1 m। फ्रिंज चौड़ाई बताएँ।
चरण 1: β = λD/d। चरण 2: = 600 × 10⁻⁹ × 1 / 0.5 × 10⁻³। चरण 3: β = 1.2 × 10⁻³ मी = 1.2 mm।
2. उसी व्यवस्था (β = 1.2 mm) में केंद्र से तीसरे दीप्त और दूसरे अदीप्त फ्रिंज की दूरी बताएँ।
चरण 1: तीसरा दीप्त: y = 3β = 3.6 mm। चरण 2: दूसरा अदीप्त (n = 1): y = 1.5 × 1.2 = 1.8 mm।
3. D = 1.2 m और d = 0.3 mm पर फ्रिंज चौड़ाई 2 mm है। तरंगदैर्ध्य बताएँ।
चरण 1: λ = βd/D। चरण 2: = 2 × 10⁻³ × 0.3 × 10⁻³ / 1.2। चरण 3: λ = 500 nm।
4. β = 1.2 mm का क्या होगा यदि (a) D दोगुना, (b) d दोगुना, (c) उपकरण पानी (n = 4/3) में?
चरण 1: β ∝ D, (a) 2.4 mm। चरण 2: β ∝ 1/d, (b) 0.6 mm। चरण 3: λ घटकर λ/n, (c) 1.2 × 3/4 = 0.9 mm।
5. पर्दे के बिंदु P पर λ = 600 nm के लिए पथांतर 1800 nm है। P दीप्त है या अदीप्त? λ = 720 nm हो तो?
चरण 1: 1800/600 = 3, पूर्ण संख्या → दीप्त (तीसरा दीप्त फ्रिंज)। चरण 2: 1800/720 = 2.5 → आधी संख्या → अदीप्त।
6. I₀ तीव्रता की दो कला-संबद्ध तरंगें π/2 कलांतर से मिलती हैं। परिणामी तीव्रता बताएँ।
चरण 1: I = 4I₀ cos²(φ/2)। चरण 2: = 4I₀ cos²(45°) = 4I₀ × ½। चरण 3: I = 2I₀।
7. λ = 500 nm का प्रकाश 0.2 mm चौड़ी एकल झिरी पर पड़ता है। पर्दा 2 m दूर है। केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई बताएँ।
चरण 1: चौड़ाई = 2λD/a। चरण 2: = 2 × 500 × 10⁻⁹ × 2 / 0.2 × 10⁻³। चरण 3: = 10 mm।
8. एकल झिरी प्रयोग में लाल प्रकाश (660 nm) का पहला निम्निष्ठ 30° पर है। झिरी की चौड़ाई बताएँ।
चरण 1: a sin θ = λ। चरण 2: a = 660/0.5 nm। चरण 3: a = 1320 nm = 1.32 μm।
9. 650 nm और 520 nm दोनों तरंगदैर्ध्य एक साथ द्वि-झिरी (d = 2 mm, D = 1.2 m) में हैं। केंद्र से वह न्यूनतम दूरी बताएँ जहाँ दोनों के दीप्त फ्रिंज मिलते हैं।
चरण 1: n₁ × 650 = n₂ × 520 → n₁/n₂ = 4/5। चरण 2: y = 4 × 650 × 10⁻⁹ × 1.2 / 2 × 10⁻³। चरण 3: y = 1.56 mm।
आम गलतियाँ
- β = λd/D लिखना। सही सूत्र β = λD/d है (D ऊपर, d नीचे)।
- मात्रक न बदलना: mm में d और nm में λ को मीटर में बदलना ज़रूरी है।
- एकल झिरी के केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई λD/a बताना। यह 2λD/a है।
- यह मानना कि दो अलग टॉर्च स्थिर फ्रिंज बना सकती हैं। वे कला-संबद्ध नहीं हैं।