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प्रकाश का विवर्तन (Diffraction)

जब तरंग किसी पतले छेद या किनारे से गुज़रती है तो फैल जाती है। इसे विवर्तन कहते हैं। चौड़ाई a की झिरी में अँधेरे धब्बे a sin θ = nλ पर बनते हैं। दूरी d वाली ग्रेटिंग में तेज़ चमकीली रेखाएँ d sin θ = nλ पर बनती हैं। छेद जितना छोटा या तरंगदैर्घ्य जितना बड़ा, प्रकाश उतना ज़्यादा फैलता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. लेज़र एक चौड़े छेद से गुज़रता है। पर्दे पर एक छोटा चमकीला धब्बा बनता है। लगता है प्रकाश सीधा चलता है।
  2. अब छेद बहुत पतला है, प्रकाश की तरंग जितना। प्रकाश मुड़कर फैलता है। पर्दे पर बीच में चौड़ी चमकीली पट्टी और दोनों ओर हल्की पट्टियाँ बनती हैं।
  3. छेद को और पतला करो। पैटर्न और चौड़ा हो जाता है। पतला छेद यानी ज़्यादा फैलाव।
  4. अब दीवार में कई बराबर छेद हैं, यानी ग्रेटिंग। पर्दे पर पतली, तेज़, चमकीली रेखाएँ बनती हैं।
  5. रंग को नीले से लाल करो। लाल की तरंगदैर्घ्य ज़्यादा है, इसलिए रेखाएँ बाहर खिसकती हैं। लाल ज़्यादा मुड़ता है।
  6. खुद करो: छेद की चौड़ाई, रंग और छेदों की संख्या बदलो और पर्दा देखो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

रोज़ की ज़िंदगी में प्रकाश सीधा क्यों दिखता है?

रोज़ के छेद प्रकाश की नन्ही तरंग से बहुत बड़े हैं, इसलिए मोड़ दिखता ही नहीं। 3D में चौड़ा छेद देखो।

केंद्रीय पट्टी क्या है?

यह बीच की सबसे चौड़ी और चमकीली पट्टी है, जिसके दोनों ओर हल्की पट्टियाँ होती हैं।

पतले छेद पर पैटर्न चौड़ा क्यों होता है?

क्योंकि sin θ = λ/a। a छोटा तो कोण बड़ा। छेद घटाते समय पट्टी को फैलते देखो।

ग्रेटिंग में अलग क्या है?

कई छेदों का प्रकाश आपस में जुड़ता है, इसलिए चमकीली रेखाएँ पतली और तेज़ हो जाती हैं।

लाल ज़्यादा क्यों मुड़ता है?

लाल की तरंगदैर्घ्य बड़ी है और कोण तरंगदैर्घ्य के साथ बढ़ता है। रंग बदलते ही रेखाएँ बाहर गईं।

क्या मैं अलग संख्याएँ आज़मा सकता हूँ?

हाँ, तीनों स्लाइडर चलाओ। एक बार में एक ही चीज़ बदलो ताकि कारण पता चले।

विवर्तन क्या है?

जब कोई तरंग छोटे छेद से निकलती है या किसी वस्तु के किनारे से गुज़रती है तो वह फैल जाती है। इसे विवर्तन (diffraction) कहते हैं।

सभी तरंगें ऐसा करती हैं: पानी की, ध्वनि की और प्रकाश की। यह तभी साफ़ दिखता है जब छेद तरंगदैर्घ्य के बराबर छोटा हो। ध्वनि की तरंगदैर्घ्य लगभग 1 मीटर होती है, इसलिए वह दरवाज़े से मुड़ जाती है। प्रकाश की तरंगदैर्घ्य लगभग 0.0005 मिलीमीटर है, इसलिए छेद बहुत ही बारीक चाहिए।

एकल झिरी विवर्तन

चौड़ाई a की एक पतली झिरी से प्रकाश डालो। पर्दे पर बीच में बहुत चमकीली चौड़ी केंद्रीय पट्टी और दोनों ओर हल्की पट्टियाँ दिखती हैं। बीच-बीच में अँधेरे धब्बे होते हैं।

पहला अँधेरा धब्बा उस कोण θ पर है जहाँ a sin θ = λ। n-वाँ अँधेरा धब्बा: a sin θ = nλ।

केंद्रीय पट्टी किनारे की पट्टियों से लगभग दुगुनी चौड़ी होती है। a छोटा करो तो sin θ बड़ा हो जाता है, यानी पट्टी चौड़ी।

विवर्तन ग्रेटिंग

ग्रेटिंग काँच की पट्टी है जिस पर हज़ारों बहुत पतली, बराबर, समानांतर रेखाएँ खिंची होती हैं। दो पास की रेखाओं की दूरी d है। यदि प्रति मीटर N रेखाएँ हैं तो d = 1/N।

सभी छेदों से आया प्रकाश जुड़ता है। चमकीली रेखाएँ वहाँ बनती हैं जहाँ d sin θ = nλ, n = 0, 1, 2 … (कोटि)। रेखाएँ पतली और तेज़ होती हैं। रेखाएँ जितनी ज़्यादा, पैटर्न उतना तीखा।

θ तरंगदैर्घ्य पर निर्भर है, इसलिए ग्रेटिंग सफ़ेद प्रकाश को रंगों में बाँट देती है। n = 0 वाली रेखा सफ़ेद रहती है। ऊँची कोटि में बैंगनी केंद्र के पास और लाल सबसे दूर होता है।

विवर्तन के उपयोग

विवर्तन और व्यतिकरण साथ-साथ

व्यतिकरण (interference) अलग-अलग स्रोतों की तरंगों के जुड़ने से होता है। विवर्तन एक छेद से तरंग का फैलना है। असली पैटर्न में दोनों होते हैं: हर छेद विवर्तन करता है और छेद आपस में व्यतिकरण करते हैं। इसीलिए ग्रेटिंग की तेज़ रेखाएँ एक चौड़े चिकने घेरे के अंदर होती हैं। देखें प्रकाश का व्यतिकरण।

करके देखो

CD को लैंप के नीचे तिरछा करो, रंग हिलते दिखेंगे। या दो उँगलियाँ सटाकर बल्ब को उनके बारीक बीच से देखो: काली रेखाएँ दिखेंगी। 3D में पहले अंदाज़ा लगाओ: छेद आधा करने पर पैटर्न चौड़ा होगा या पतला? फिर जाँचो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 600 nm के प्रकाश को 1.2 µm चौड़ी झिरी पर डाला गया। पहले अँधेरे धब्बे का कोण निकालो।

a sin θ = λ। sin θ = 600×10⁻⁹ / 1.2×10⁻⁶ = 0.5। इसलिए θ = 30°।

2. एक ग्रेटिंग में 5000 रेखाएँ प्रति cm हैं। d निकालो।

5000 प्रति cm = 5,00,000 प्रति m। d = 1/5,00,000 = 2×10⁻⁶ m = 2 µm।

3. इसी ग्रेटिंग पर 500 nm का प्रकाश डालो। प्रथम कोटि का कोण निकालो।

d sin θ = λ। sin θ = 500×10⁻⁹ / 2×10⁻⁶ = 0.25। θ ≈ 14.5°।

4. वही ग्रेटिंग और 500 nm। द्वितीय कोटि की रेखा का कोण निकालो।

d sin θ = 2λ। sin θ = 0.5। θ = 30°।

5. d = 2 µm और λ = 500 nm पर अधिकतम कितनी कोटि दिखेगी?

n < d/λ = 2000/500 = 4। n, 4 से छोटा होना चाहिए, इसलिए अधिकतम कोटि n = 3 है (n = 4 पर रेखा 90° पर होगी, दिखेगी नहीं)।

6. झिरी को पतला करने पर केंद्रीय पट्टी का क्या होगा?

a sin θ = λ। a घटने पर sin θ बढ़ता है, इसलिए केंद्रीय पट्टी चौड़ी हो जाती है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. विवर्तन का अर्थ है:
2. एकल झिरी विवर्तन में केंद्रीय पट्टी:
3. ग्रेटिंग में चमकीली रेखाएँ कब बनती हैं?
4. ग्रेटिंग में कौन-सा रंग सबसे ज़्यादा मुड़ता है?
5. झिरी की चौड़ाई आधी करने पर केंद्रीय पट्टी:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हम कोने के पीछे से सुन सकते हैं पर देख क्यों नहीं सकते?

ध्वनि की तरंग लगभग एक मीटर लंबी है, दरवाज़े जितनी। प्रकाश की तरंग किसी दरवाज़े से बहुत छोटी है, इसलिए वह बहुत कम मुड़ती है। वह केवल बहुत बारीक छेद पर मुड़ती दिखती है।

विवर्तन और व्यतिकरण में क्या अंतर है?

विवर्तन एक छेद से तरंग का फैलना है। व्यतिकरण अलग स्रोतों की तरंगों का जुड़ना है। ग्रेटिंग के पैटर्न में दोनों चाहिए।

CD पर इंद्रधनुष के रंग क्यों दिखते हैं?

उसकी बारीक गोल पटरियाँ ग्रेटिंग का काम करती हैं। हर रंग का अपना कोण होता है, इसलिए सफ़ेद प्रकाश रंगों में बँट जाता है।

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