प्रकाश के प्राकृतिक और कृत्रिम स्रोत
दीप्त वस्तु अपना प्रकाश खुद बनाती है। अदीप्त वस्तु सिर्फ़ किसी स्रोत का प्रकाश लौटाती है। चंद्रमा अदीप्त है: वह इसलिए चमकता है कि सूर्य उस पर पड़ता है।
प्राकृतिक स्रोत: सूर्य और दूसरे तारे, बिजली, आग, और जुगनू तथा कुछ गहरे समुद्र की मछलियाँ। कृत्रिम स्रोत इंसान बनाता है:
- तंतु (ज्वलनदीप्त) बल्ब: पतला तार इतना गरम होता है कि चमकने लगता है। ज़्यादातर ऊर्जा ऊष्मा बनकर निकल जाती है।
- फ्लोरोसेंट ट्यूब / CFL: गैस में बिजली की धारा अदृश्य पराबैंगनी प्रकाश बनाती है। काँच पर सफ़ेद परत उसे दृश्य प्रकाश में बदल देती है (यह संदीप्ति है)।
- LED (प्रकाश उत्सर्जक डायोड): छोटे अर्धचालक में धारा बहने से सीधे प्रकाश बनता है। गरमी कम, उम्र लंबी।
बिजली की जितनी ऊर्जा प्रकाश बनती है, वह दक्षता है: तंतु बल्ब में लगभग 5%, फ्लोरोसेंट में 25%, अच्छे LED में 45% या ज़्यादा। कंपनी के हिसाब से संख्या थोड़ी बदलती है।
रंग-प्रदर्शन सूचकांक (CRI)
अलग लैंप में रंग अलग दिखते हैं। रंग-प्रदर्शन सूचकांक (CRI) 0 से 100 की संख्या है। यह बताती है कि लैंप वस्तुओं के रंग प्राकृतिक संदर्भ प्रकाश की तुलना में कितने सच्चे दिखाता है। सूर्य का प्रकाश 100 है।
- CRI 70 से कम: रंग फीके या ग़लत दिखते हैं (कुछ पुरानी सड़क बत्तियाँ)।
- CRI 80 या ज़्यादा: घर और दफ़्तर के लिए ठीक।
- CRI 90 या ज़्यादा: दुकान, कला-कक्ष, फ़ोटो स्टूडियो, अस्पताल।
CRI का मतलब गरम या ठंडी रोशनी नहीं है। गरम (लगभग 2700 K, पीली) और ठंडी (लगभग 6500 K, नीली) दोनों रोशनियों का CRI ऊँचा हो सकता है। जो लैंप अपना प्रकाश कई रंगों में फैलाता है वह रंग अच्छे दिखाता है; जिसमें बस कुछ चमकीली रंग-रेखाएँ हों वह रंग बिगाड़ देता है।
प्रकाशीय तंतु (ऑप्टिकल फाइबर)
प्रकाशीय तंतु बाल से भी पतला काँच का धागा है। बीच के भाग को क्रोड (core) और ऊपरी परत को आवरण (cladding) कहते हैं। क्रोड का काँच प्रकाश को आवरण से ज़्यादा मोड़ता है (उसका अपवर्तनांक ज़्यादा है)।
प्रकाश एक सिरे से घुसता है और दीवार से टकराता है। अगर अभिलंब से बना कोण क्रांतिक कोण से बड़ा हो, तो पूरा प्रकाश वापस भीतर लौट जाता है। इसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं। प्रकाश टेढ़ा-मेढ़ा चलता हुआ मोड़ों के साथ लगभग बिना हानि आगे बढ़ता है।
उपयोग: इंटरनेट और फ़ोन के संकेत (प्रकाश की झपकियाँ डेटा ले जाती हैं), डॉक्टर का एंडोस्कोप जिससे शरीर के भीतर देखते हैं, सजावटी लैंप। तांबे के तार से बेहतर क्यों: कहीं ज़्यादा डेटा, बिजली का व्यवधान नहीं, लंबी दूरी पर भी बहुत कम हानि।
लेज़र
लेज़र बहुत ख़ास किरण बनाता है। वह एकवर्णी (एक तरंगदैर्ध्य), कलासंबद्ध (सभी तरंगें एक ताल में चलती हैं) और अत्यंत दिशात्मक (किरण लगभग फैलती नहीं) होती है। पूरी कार्यविधि लेज़र वाले पाठ में है।
उपयोग: बारकोड स्कैनर, लेज़र पॉइंटर, डिस्क पढ़ना-लिखना, तंतुओं से डेटा भेजना, धातु काटना, आँख आदि की शल्यक्रिया, दूरी नापना। सुरक्षा: लेज़र कभी आँख की ओर न करो; कमज़ोर किरण भी आँख को चोट पहुँचा सकती है क्योंकि सारा प्रकाश एक छोटे बिंदु पर गिरता है।
करके देखो
3D में: रंग वाले चरण में CRI स्लाइडर 90 से 30 तक खिसकाओ और फलों को देखो। लेज़र वाले चरण में दीवार के दोनों धब्बों की तुलना करो।
घर पर: अँधेरे कमरे में पानी की साफ़ धार या मुड़ी हुई पारदर्शी प्लास्टिक की छड़ के एक सिरे में फ़ोन की टॉर्च जलाओ। दूसरा सिरा चमकेगा। LED बल्ब के डिब्बे पर वाट, ल्यूमेन और CRI भी खोजो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- दक्षता = (निकला प्रकाश ऊर्जा ÷ कुल ऊर्जा) × 100%
- ऊर्जा (kWh) = शक्ति (kW) × समय (घंटे)
- क्रांतिक कोण: sin C = n(आवरण) ÷ n(क्रोड) (काँच से हवा के लिए sin C = 1/n)
- CRI पैमाना: 0 (बहुत ख़राब) से 100 (प्राकृतिक संदर्भ प्रकाश जैसा)
हल किए गए उदाहरण
1. 60 W का तंतु बल्ब 3 W प्रकाश देता है। उसकी दक्षता ज्ञात करो।
दक्षता = 3 / 60 × 100 = 5%. बाक़ी 95% ऊष्मा बनकर निकल जाता है।
2. 9 W का LED, 60 W के तंतु बल्ब जितना प्रकाश देता है। दोनों रोज़ 5 घंटे, 30 दिन चलते हैं। कितनी ऊर्जा बचती है?
समय = 5 × 30 = 150 घंटे। शक्ति का अंतर = 60 − 9 = 51 W = 0.051 kW। बची ऊर्जा = 0.051 × 150 = 7.65 kWh.
3. अपवर्तनांक 1.5 वाला काँच हवा में है। क्रांतिक कोण ज्ञात करो।
sin C = 1 / 1.5 = 0.667, इसलिए C ≈ 41.8°. काँच-हवा सतह पर इससे बड़े कोण पर पड़ने वाला प्रकाश पूरा परावर्तित हो जाता है।
4. तंतु में क्रोड का n = 1.50 और आवरण का n = 1.45 है। अभिलंब से 80° पर दीवार से टकराने वाली किरण भीतर रहेगी?
sin C = 1.45 / 1.50 = 0.967, इसलिए C ≈ 75°. 80°, 75° से बड़ा है, इसलिए किरण पूर्ण परावर्तित होकर भीतर रहेगी।
आम गलतियाँ
- चंद्रमा को प्रकाश का स्रोत कहना। वह सिर्फ़ सूर्य का प्रकाश लौटाता है।
- CRI को गरम या ठंडा रंग समझना। CRI बताता है कि रंग कितने सच्चे दिखते हैं, रोशनी कितनी पीली या नीली है यह नहीं।
- चमकीला बल्ब यानी दक्ष बल्ब मान लेना। गरम तंतु बल्ब चमकीला है पर लगभग 95% ऊर्जा ऊष्मा में गँवाता है।
- यह कहना कि प्रकाश तंतु की दीवार से "रिस" जाता है। तंतु के भीतर वह पूर्ण परावर्तित होता है, पर तभी जब कोण क्रांतिक कोण से बड़ा हो।