घर और शहर में ऊर्जा का उपयोग
शक्ति बताती है कि ऊर्जा कितनी तेज़ी से खर्च हो रही है। मात्रक: वाट (W)। ऊर्जा = शक्ति × समय। बिजली कंपनी किलोवाट-घंटा (kWh) में गिनती है। एक kWh को एक यूनिट कहते हैं: 1 000 W का उपकरण 1 घंटा चले।
यूनिट = वाट × घंटे ÷ 1000। लागत = यूनिट × प्रति यूनिट दाम।
ऊर्जा बचाने के लिए: बेकार चल रहे उपकरण बंद करो, LED लगाओ (उतनी ही रोशनी, बहुत कम वाट) और स्टार रेटिंग वाले उपकरण लो। शहर कोयले की जगह सौर, पवन और जल बिजली भी बढ़ा रहे हैं।
फाइबर में प्रकाश
ऑप्टिकल फाइबर बाल से भी पतला काँच का तार है। प्रकाश एक सिरे से घुसता है और दीवार से कम कोण पर टकराकर पूरी तरह लौट जाता है (पूर्ण आंतरिक परावर्तन)। वह लगभग बिना नुकसान के टेढ़ा-मेढ़ा चलकर दूसरे सिरे पहुँचता है।
फाइबर एक साथ बहुत सारी कॉल और वीडियो ले जा सकता है क्योंकि प्रकाश को बहुत तेज़ी से जलाया-बुझाया जा सकता है। यह पतला, हल्का होता है और बिजली के शोर से अप्रभावित रहता है। डॉक्टर एंडोस्कोप में भी फाइबर से शरीर के अंदर देखते हैं।
लेज़र
बल्ब का प्रकाश कई रंगों का होता है और हर दिशा में जाता है। लेज़र का प्रकाश एक रंग का होता है, एक साथ कदम मिलाकर चलता है (कला-संबद्ध) और बहुत कम फैलता है, इसलिए किरण दूर तक पतली रहती है।
उपयोग: फाइबर में डेटा भेजना, बारकोड स्कैनर, लेज़र प्रिंटर, आँख की सर्जरी, धातु काटना, दूरी नापना और निशाना साधना। लेज़र किरण में कभी सीधे मत देखो: छोटी किरण भी आँख को नुकसान पहुँचा सकती है।
लेज़र यह प्रकाश कैसे बनाता है, इसकी पूरी कहानी लेज़र पाठ में है।
अंतरिक्ष यात्रा: रॉकेट और कक्षा
रॉकेट न्यूटन के तीसरे नियम से चलता है। वह गरम गैस को पीछे (नीचे) फेंकता है। गैस रॉकेट को आगे (ऊपर) धक्का देती है। रॉकेट खाली अंतरिक्ष में भी चलता है क्योंकि उसके पास अपना ईंधन है और धक्का देने के लिए हवा नहीं चाहिए। प्रणोद = प्रति सेकंड गैस का द्रव्यमान × गैस की चाल।
उपग्रह कक्षा में होता है: वह हर समय पृथ्वी की ओर गिर रहा है, पर उसकी आड़ी चाल इतनी तेज़ (पृथ्वी के पास लगभग 7.8 km/s) है कि नीचे की सतह मुड़कर दूर हो जाती है। अंदर चीज़ें इसलिए तैरती हैं कि सब एक साथ गिर रहे हैं, इसलिए नहीं कि गुरुत्व नहीं है।
उपग्रह मौसम की तस्वीरें, टीवी, फ़ोन और नेविगेशन देते हैं। देखें कक्षीय चाल।
करके देखें
घर पर: तीन उपकरणों पर लिखे वाट देखो। हर एक रोज़ कितने घंटे चलता है, लिखो। हर एक की रोज़ की यूनिट निकालो और सबसे बड़ी पहचानो।
गुब्बारा रॉकेट: गुब्बारा फुलाकर छोड़ दो। हवा एक ओर जाती है, गुब्बारा दूसरी ओर।
3D में: कक्षा चुनो और चाल को सबसे कम करो। इस मॉडल में उपग्रह फिर भी घूमता है, पर असली जीवन में बहुत कम चाल हो तो वह ज़मीन पर गिर जाएगा।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ऊर्जा (kWh) = शक्ति (kW) × समय (h)
- यूनिट = वाट × घंटे ÷ 1000
- लागत = यूनिट × प्रति यूनिट दाम
- प्रणोद = (प्रति सेकंड गैस का द्रव्यमान) × (गैस की चाल)
- कक्षा का समय = कक्षा की लंबाई ÷ चाल
हल किए गए उदाहरण
1. 60 W का पंखा 10 घंटे चलता है। कितनी यूनिट खर्च होती हैं?
यूनिट = 60 × 10 ÷ 1000 = 0.6 यूनिट।
2. 2 000 W का गीज़र रोज़ 30 मिनट, 30 दिन चलता है। दाम ₹7 प्रति यूनिट है। लागत निकालो।
30 मिनट = 0.5 घंटा। रोज़ की यूनिट = 2 000 × 0.5 ÷ 1000 = 1। 30 दिन में 30 यूनिट। लागत = 30 × 7 = ₹210।
3. एक रॉकेट हर सेकंड 100 kg गैस 3 000 m/s की चाल से फेंकता है। प्रणोद निकालो।
प्रणोद = 100 × 3 000 = 300 000 N।
आम गलतियाँ
- वाट को ही यूनिट समझ लेना। यूनिट किलोवाट-घंटा है, इसलिए वाट-घंटे को 1000 से भाग दो।
- यह सोचना कि रॉकेट को हवा पर धक्का देना पड़ता है। वह अपनी ही निकली गैस पर धक्का देता है।
- कहना कि उपग्रह इसलिए तैरते हैं कि वहाँ गुरुत्व नहीं है। गुरुत्व मज़बूत है; उपग्रह मुक्त पतन में है।
- फाइबर में प्रकाश सीधा जाता है, यह कहना। वह दीवार से कई बार परावर्तित होता है।