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भौतिकी और समाज: भाप, बिजली, चिप और परमाणु ऊर्जा

भौतिकी के नए विचारों ने लोगों का जीवन बदला। भाप इंजन ने ऊष्मा को गति में बदला। जनरेटर ने गति को बिजली में बदला। माइक्रोचिप में स्विच इतने छोटे हुए कि फ़ोन में अरबों समा गए। नाभिकीय विखंडन में थोड़े द्रव्यमान से बहुत ऊष्मा मिलती है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. आग पानी को भाप बना देती है। भाप पिस्टन को आगे-पीछे धक्का देती है। ऊष्मा गति बन गई। यहीं से पहला औद्योगिक युग शुरू हुआ।
  2. चुंबक तार की कुंडली के पास घूमता है। इससे बिजली बनती है और बल्ब जलता है। तेज़ घुमाओ तो रोशनी तेज़ होती है।
  3. चिप में छोटे-छोटे स्विच होते हैं, जिन्हें ट्रांजिस्टर कहते हैं। स्लाइडर से इन्हें छोटा करो, उतनी ही चिप पर बहुत ज़्यादा आ जाते हैं।
  4. एक भारी नाभिक को न्यूट्रॉन लगता है और वह दो टुकड़ों में टूट जाता है। बहुत ऊष्मा निकलती है। बिजलीघर इसी से भाप बनाता है।
  5. अब खुद खेलो: कोई भी मशीन चुनो और स्लाइडर चलाओ। घर के लिए आपको कौन-सी सबसे ज़्यादा चाहिए?

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

भाप पानी से ज़्यादा ज़ोर क्यों लगाती है?

भाप उसी पानी से बहुत ज़्यादा जगह घेरती है। सिलिंडर में बंद होने पर वह पिस्टन को ज़ोर से धकेलती है।

जनरेटर में बिजली कहाँ से आती है?

गति से। चुंबक को घुमाने में मेहनत लगती है। वही मेहनत बिजली में बदलती है, कुछ नहीं से नहीं बनती।

फ़ोन में इतने ट्रांजिस्टर कैसे समाते हैं?

हर ट्रांजिस्टर कुछ नैनोमीटर का ही होता है। स्लाइडर से आकार घटाओ और गिनती बढ़ती देखो।

विखंडन में ऊष्मा कहाँ से आती है?

दोनों टुकड़ों और न्यूट्रॉनों का कुल द्रव्यमान शुरुआत से थोड़ा कम होता है। कम हुआ द्रव्यमान ऊर्जा बनता है, E = mc²।

कौन-सी मशीन किस विचार पर चलती है?

भाप इंजन: ऊष्मा। जनरेटर: विद्युत चुंबकत्व। चिप: अर्धचालक। रिएक्टर: नाभिक। खुद खेलकर हर एक देखो।

भाप और पहला औद्योगिक युग

कोयला जलाकर बॉयलर में पानी गरम किया जाता है। पानी भाप बन जाता है, जो बहुत ज़्यादा जगह घेरती है, इसलिए पिस्टन को ज़ोर से धक्का देती है। पिस्टन छड़ और पहिये को घुमाता है। अब ऊष्मा से काम लिया जा सकता था, चाहे नदी पास हो या न हो।

इसके बाद कारखानों, रेलों और जहाज़ों में मशीनें आईं। लोग गाँवों से शहरों की ओर गए। ईंधन कम बर्बाद हो, इसी इच्छा से ऊष्मागतिकी का विज्ञान बढ़ा।

भाप इंजन पूरा नहीं होता। बहुत-सी ऊष्मा हवा में चली जाती है। दक्षता = उपयोगी कार्य ÷ दी गई ऊष्मा।

विद्युत चुंबकत्व और बिजली का युग

1831 में माइकल फैराडे ने दिखाया कि बदलता चुंबकीय क्षेत्र तार में धारा चला देता है। कुंडली के पास घूमता चुंबक एक जनरेटर है। टरबाइन (भाप, पानी या हवा से घूमती) चुंबक को घुमाती है।

मोटर इसका उलटा करती है: चुंबकीय क्षेत्र में कुंडली में धारा बहे तो वह घूमती है। बिजली तारों से दूर तक जा सकती है, इसलिए एक बिजलीघर से कारखाने, घर और सड़कें चल सकीं। यह दूसरा औद्योगिक युग था।

माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना का युग

ट्रांजिस्टर एक बहुत छोटा स्विच है जिसमें कोई चलने वाला पुर्ज़ा नहीं होता। सिलिकॉन के एक टुकड़े पर बहुत से ट्रांजिस्टर मिलकर समाकलित परिपथ (चिप) बनाते हैं। इंजीनियरों ने स्विच छोटे किए, तो चिप पर इनकी संख्या लगभग हर दो साल में दुगुनी होती गई। इसे मूर का नियम कहते हैं।

छोटे स्विच कम बिजली लेते हैं और तेज़ चलते हैं। इसीलिए आज का फ़ोन पुराने कमरे-भर कंप्यूटर से ज़्यादा ताक़तवर है। चिप, फ़ाइबर और रेडियो से सूचना युग बना: कंप्यूटर, फ़ोन, इंटरनेट।

नाभिकीय प्रौद्योगिकी

विखंडन में यूरेनियम-235 जैसा भारी नाभिक न्यूट्रॉन पकड़कर टूट जाता है। टुकड़ों का कुल द्रव्यमान शुरुआत से थोड़ा कम होता है। यह कम हुआ द्रव्यमान ऊर्जा बन जाता है: E = mc²। एक किलो यूरेनियम से उतनी ऊष्मा मिल सकती है जितनी हज़ारों टन कोयले से।

रिएक्टर में ऊष्मा पानी को भाप बनाती है, भाप टरबाइन घुमाती है और जनरेटर बिजली बनाता है। नियंत्रक छड़ें न्यूट्रॉन सोखकर अभिक्रिया को स्थिर रखती हैं। नाभिकीय बिजली में धुआँ या कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलती, पर रेडियोधर्मी कचरा बनता है जिसे सुरक्षित रखना पड़ता है और सख़्त सुरक्षा नियम चाहिए।

अन्य उपयोग: मेडिकल स्कैन और कैंसर का इलाज, भोजन की सुरक्षा और कार्बन डेटिंग।

करके देखें

घर पर: किसी बड़े की मदद से केतली की टोंटी के ऊपर कागज़ की छोटी पवनचक्की रखो। भाप उसे घुमाएगी: ऊष्मा गति बन गई। फिर खिलौने की छोटी मोटर को हाथ से घुमाओ और उसके दोनों तार LED से जोड़ो। LED टिमटिमा सकती है: गति बिजली बनी।

3D में: माइक्रोचिप चुनो, पहले अनुमान लगाओ कि स्लाइडर दाएँ ले जाने पर कितने स्विच दिखेंगे, फिर जाँचो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक भाप इंजन 500 J ऊष्मा लेता है और 100 J कार्य करता है। उसकी दक्षता निकालो।

दक्षता = 100 ÷ 500 = 0.2, यानी 20%। बाकी 400 J ऊष्मा के रूप में बर्बाद हुई।

2. एक चिप में 1 000 ट्रांजिस्टर हैं। संख्या हर 2 साल में दुगुनी होती है, तो 10 साल बाद कितने होंगे?

10 साल में 5 बार दुगुना। 1 000 × 2⁵ = 1 000 × 32 = 32 000।

3. एक विखंडन में 0.001 kg द्रव्यमान ऊर्जा बन गया। कितनी ऊर्जा निकली? (c = 3 × 10⁸ m/s)

E = mc² = 0.001 × (3 × 10⁸)² = 0.001 × 9 × 10¹⁶ = 9 × 10¹³ J।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. भाप इंजन किसे गति में बदलता है?
2. जनरेटर में बिजली किससे बनती है?
3. ट्रांजिस्टर एक छोटा क्या है?
4. मूर का नियम कहता है कि चिप पर ट्रांजिस्टर लगभग कितने समय में दुगुने होते हैं?
5. नाभिकीय विखंडन में ऊर्जा कहाँ से आती है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भौतिकी ने औद्योगिक क्रांति कैसे कराई?

ऊष्मा को समझने से भाप इंजन बने, और चुंबकत्व तथा धारा को समझने से जनरेटर और मोटर बने। इनसे कारखाने और यातायात मांसपेशियों की जगह इंजन से चलने लगे।

चिप छोटी क्यों होती जा रही हैं?

छोटे ट्रांजिस्टर तेज़ होते हैं, कम बिजली लेते हैं और एक चिप पर ज़्यादा आ जाते हैं, इसलिए कम दाम में ज़्यादा काम होता है।

क्या परमाणु बिजली सुरक्षित है?

बिजलीघर सख़्त सुरक्षा नियमों में चलते हैं और चलते समय धुआँ या कार्बन डाइऑक्साइड नहीं देते। चुनौती है अभिक्रिया को काबू में रखना और कचरे को बहुत लंबे समय तक सँभालना।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

चीन高三Elective 1: Physics and society

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