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नाभिक: आकार, नाभिकीय बल, बंधन ऊर्जा, विखंडन और संलयन

नाभिक में Z प्रोटॉन और N न्यूट्रॉन होते हैं (A = Z + N न्यूक्लिऑन)। इसकी त्रिज्या R = R₀A^(1/3), R₀ ≈ 1.2 fm, इसलिए सब नाभिकों का घनत्व लगभग एक जैसा और बहुत ज़्यादा है। एक बहुत तेज़, कम दूरी वाला नाभिकीय बल न्यूक्लिऑनों को बाँधे रखता है। नाभिक अपने अलग-अलग कणों से थोड़ा हल्का होता है; यह द्रव्यमान क्षति Δm ही बंधन ऊर्जा है, E = Δm c² (1 u = 931.5 MeV)। प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा लोहे (A ≈ 56) के पास सबसे ज़्यादा है, इसलिए भारी नाभिक टूटकर (विखंडन) और हल्के नाभिक जुड़कर (संलयन) ऊर्जा देते हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. कोई नाभिक चुनिए। लाल गेंदें प्रोटॉन हैं, धूसर न्यूट्रॉन। ज़्यादा न्यूक्लिऑन से गेंद बड़ी होती है, पर त्रिज्या सिर्फ़ A के घनमूल जितनी बढ़ती है।
  2. दो न्यूक्लिऑनों को खिसकाइए। पास (1 से 2.5 fm) नाभिकीय बल ज़ोर से खींचता है। बहुत पास आएँ तो धकेलता है। थोड़ा दूर जाएँ तो लगभग खत्म।
  3. हीलियम के अलग कण एक पलड़े पर, हीलियम नाभिक दूसरे पर रखिए। अलग कण भारी हैं! जो द्रव्यमान गायब हुआ वह ऊर्जा बनकर निकला: E = Δm c²।
  4. स्तंभ बढ़ते देखिए: हर A के लिए प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा। तेज़ी से बढ़ती है, लोहे पर सबसे ऊपर (लगभग 8.8 MeV), फिर भारी नाभिकों के लिए धीरे-धीरे घटती है।
  5. एक न्यूट्रॉन यूरेनियम-235 से टकराया। वह दो मध्यम नाभिकों, 3 न्यूट्रॉन और लगभग 200 MeV में टूट गया। फिर दो हल्के नाभिक जुड़कर हीलियम बने और ऊर्जा निकली।
  6. अब आप खेलें: कोई भी नाभिक चुनकर आकार और बंधन ऊर्जा देखें, या विखंडन / संलयन दबाएँ।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

प्रोटॉन एक-दूसरे को धकेलते हैं, फिर नाभिक बिखरता क्यों नहीं?

इतनी कम दूरी पर पास वाले न्यूक्लिऑनों के बीच नाभिकीय बल विद्युत धक्के से बहुत तेज़ है। न्यूट्रॉन बिना धक्का बढ़ाए खिंचाव बढ़ाते हैं।

नाभिकीय बल इतना तेज़ है तो दो परमाणुओं के नाभिक आपस में क्यों नहीं खिंचते?

इसकी परास सिर्फ़ कुछ fm है। अलग परमाणुओं के नाभिक लगभग 1,00,000 fm दूर होते हैं, जहाँ यह बल शून्य है। 3D में न्यूक्लिऑन दूर खिसकाकर तीर गायब होते देखिए।

बड़ा नाभिक ज़्यादा घना क्यों नहीं होता?

न्यूक्लिऑन कंचों की तरह भरते हैं: हर नया न्यूक्लिऑन उतना ही आयतन जोड़ता है। आयतन A के साथ बढ़ता है, घनत्व वही रहता है।

गायब द्रव्यमान कहाँ गया?

नाभिक बनते समय वह ऊर्जा (गामा किरणें और गतिज ऊर्जा) बनकर निकल गया। 3D में दोनों पलड़े तौलिए: अंतर Δm × c² ठीक वही ऊर्जा है।

लोहे को तोड़कर ऊर्जा क्यों नहीं मिलती?

लोहा बंधन-ऊर्जा वक्र की चोटी पर है। उसके टुकड़े कम कसकर बँधे होंगे, इसलिए तोड़ने में ऊर्जा लगेगी, मिलेगी नहीं।

विखंडन के लिए न्यूट्रॉन क्यों, प्रोटॉन क्यों नहीं?

न्यूट्रॉन पर आवेश नहीं है, इसलिए धनावेशित नाभिक उसे धकेलता नहीं। धीमा न्यूट्रॉन भी अंदर जाकर ²³⁵U को अस्थिर कर देता है।

धरती पर संलयन इतना मुश्किल क्यों है?

नाभिक धनावेशित हैं और धकेलते हैं। करोड़ों डिग्री पर ही वे इतने तेज़ चलते हैं कि छू सकें, और इतनी गर्म गैस कोई साधारण बर्तन नहीं थाम सकता।

नाभिक की संरचना

नाभिक में दो तरह के कण होते हैं, जिन्हें मिलाकर न्यूक्लिऑन कहते हैं:

द्रव्यमान संख्या A = Z + N। नाभिक को ᴬ_Z X लिखते हैं, जैसे ²³⁵₉₂U में 92 प्रोटॉन और 143 न्यूट्रॉन हैं।

परमाणु द्रव्यमान मात्रक: 1 u = कार्बन-12 परमाणु के द्रव्यमान का 1/12 = 1.6605 × 10⁻²⁷ kg।

समस्थानिक, समभारिक और समन्यूट्रॉनिक

न्यूट्रॉन की खोज 1932 में जेम्स चैडविक ने की। न्यूट्रॉन बिना विद्युत धक्का बढ़ाए नाभिकीय खिंचाव बढ़ाते हैं, इसलिए भारी नाभिकों को जोड़े रखते हैं।

नाभिक का आकार और घनत्व

प्रकीर्णन प्रयोग बताते हैं कि नाभिक का आयतन A के समानुपाती है। इसलिए त्रिज्या:

R = R₀ A^(1/3), R₀ ≈ 1.2 fm (1 fm = 10⁻¹⁵ m, फर्मी)।

आयतन ∝ A और द्रव्यमान ∝ A, इसलिए सब नाभिकों का घनत्व लगभग समान है: लगभग 2.3 × 10¹⁷ kg/m³ — पानी से लगभग 10¹⁴ गुना। एक चम्मच नाभिकीय पदार्थ लगभग एक अरब टन का होगा। न्यूट्रॉन तारे इतने ही घने पदार्थ के बने हैं।

नाभिकीय बल

प्रोटॉन एक-दूसरे को तेज़ विद्युत बल से धकेलते हैं, फिर भी नाभिक टिका रहता है। तो कोई और तेज़ खिंचाव होना चाहिए — यही नाभिकीय बल (प्रबल बल) है। इसके गुण:

दो न्यूक्लिऑनों की स्थितिज ऊर्जा का वक्र लगभग 0.8 fm पर सबसे नीचे है: इसके दाईं ओर बल खींचता है, बाईं ओर धकेलता है।

द्रव्यमान–ऊर्जा संबंध

आइंस्टीन ने बताया कि द्रव्यमान भी ऊर्जा का एक रूप है: E = mc², c = 3 × 10⁸ m/s। c² बहुत बड़ा है, इसलिए छोटा द्रव्यमान भी बहुत बड़ी ऊर्जा है: 1 g = 9 × 10¹³ J।

नाभिकों के लिए आसान संबंध: 1 u द्रव्यमान = 931.5 MeV ऊर्जा। (1 MeV = 1.6 × 10⁻¹³ J)

हर नाभिकीय अभिक्रिया में (द्रव्यमान + ऊर्जा) का कुल योग वही रहता है।

द्रव्यमान क्षति और बंधन ऊर्जा

Z मुक्त प्रोटॉन और N मुक्त न्यूट्रॉन का द्रव्यमान जोड़िए। अब नाभिक तौलिए। नाभिक हमेशा हल्का निकलता है। यह अंतर द्रव्यमान क्षति है:

Δm = [Z mₚ + (A − Z) mₙ] − M_नाभिक

न्यूक्लिऑन जुड़ते समय यह द्रव्यमान ऊर्जा बनकर निकल जाता है। उन्हें फिर अलग करने के लिए उतनी ही ऊर्जा देनी पड़ती है। यही बंधन ऊर्जा है:

E_b = Δm c² = Δm (u में) × 931.5 MeV।

सुझाव: अगर परमाणु द्रव्यमान दिए हों, तो mₚ की जगह हाइड्रोजन परमाणु का द्रव्यमान (1.007825 u) लीजिए, इलेक्ट्रॉन कट जाते हैं।

प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा बनाम द्रव्यमान संख्या

प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा = E_b / A। यह बताती है कि हर न्यूक्लिऑन कितना कसकर बँधा है; जितनी ज़्यादा, उतना स्थायी।

इसे A के सामने बनाएँ तो वक्र की ये बातें दिखती हैं:

मतलब: भारी नाभिक दो मध्यम में टूटे, या हल्के नाभिक जुड़ें — दोनों शिखर की ओर जाते हैं। उत्पाद ज़्यादा कसकर बँधे होते हैं, और अतिरिक्त बंधन ऊर्जा बाहर निकलती है।

नाभिकीय विखंडन

विखंडन: भारी नाभिक दो मध्यम आकार के नाभिकों में टूटता है। उदाहरण: धीमा न्यूट्रॉन ²³⁵U से टकराता है:

¹n + ²³⁵U → ²³⁶U* → ¹⁴¹Ba + ⁹²Kr + 3 ¹n + लगभग 200 MeV

ऊर्जा क्यों? U की BE/A लगभग 7.6 MeV, उत्पादों की लगभग 8.5 MeV। लाभ ≈ 0.9 MeV × 235 ≈ 200 MeV।

शृंखला अभिक्रिया: निकले 2–3 न्यूट्रॉन और यूरेनियम तोड़ सकते हैं। नाभिकीय रिएक्टर में इसे स्थिर रखा जाता है: मंदक (भारी जल या ग्रेफाइट) न्यूट्रॉन धीमे करता है, नियंत्रक छड़ें (कैडमियम या बोरॉन) फालतू न्यूट्रॉन सोखती हैं, और शीतलक गर्मी ले जाकर भाप बनाता है जो टरबाइन घुमाती है। अनियंत्रित शृंखला अभिक्रिया परमाणु बम का सिद्धांत है।

नाभिकीय संलयन

संलयन: दो हल्के नाभिक जुड़कर भारी नाभिक बनाते हैं। उदाहरण: ²H + ²H → ⁴He + लगभग 23.8 MeV; या ²H + ³H → ⁴He + n + 17.6 MeV।

दोनों नाभिक धनावेशित हैं और एक-दूसरे को धकेलते हैं। नाभिकीय बल तक पास आने के लिए उन्हें बहुत तेज़ चलना होगा, यानी गैस का ताप लगभग 10⁷ K या ज़्यादा चाहिए। इसलिए इसे तापनाभिकीय संलयन कहते हैं।

सूरज में चार हाइड्रोजन नाभिक आखिर में एक हीलियम नाभिक बनाते हैं (प्रोटॉन–प्रोटॉन चक्र) और लगभग 26.7 MeV देते हैं। प्रति किलोग्राम ईंधन, संलयन विखंडन से ज़्यादा ऊर्जा देता है और इसका ईंधन भरपूर है, पर इतनी गर्म गैस को धरती पर थामना अभी भी चुनौती है (जैसे ITER परियोजना, जिसमें भारत भागीदार है)।

विखंडनसंलयन
क्या होता हैभारी नाभिक टूटता हैहल्के नाभिक जुड़ते हैं
ज़रूरतधीमा न्यूट्रॉनबहुत ऊँचा ताप
कचरारेडियोधर्मी उत्पादज़्यादातर हीलियम
कहाँबिजलीघर रिएक्टरसूरज और तारे

करके देखें: पहले अनुमान, फिर जाँच

1. फ्री प्ले में ²H, ⁴He, ⁵⁶Fe और ²³⁵U चुनिए। हर बार पहले अनुमान लगाइए कि प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा कितनी होगी। सबसे कसकर कौन बँधा है?

2. दोनों न्यूक्लिऑनों को 4 fm से 0.5 fm तक खिसकाइए। लिखिए कि तीर कहाँ शून्य से खिंचाव बनता है और कहाँ खिंचाव से धक्का।

3. घर पर: 12 कंचे मिट्टी से चिपकाकर गोला बनाइए। गिनिए कि अंदर वाला कंचा कितने पड़ोसियों को छूता है (लगभग 12) और बाहर वाला कितनों को (कम)। सतह वाले न्यूक्लिऑन कम कसकर बँधे होते हैं — इसलिए छोटे नाभिकों की प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा कम है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. लोहे के नाभिक ⁵⁶Fe की त्रिज्या निकालिए (R₀ = 1.2 fm)।

चरण 1: R = R₀ A^(1/3)। चरण 2: 56^(1/3) ≈ 3.83। चरण 3: R = 1.2 × 3.83 ≈ 4.6 fm।

2. ²⁷Al और ¹²⁵Te की त्रिज्याओं का अनुपात निकालिए।

चरण 1: R ∝ A^(1/3)। चरण 2: R_Al / R_Te = (27/125)^(1/3)। चरण 3: = 3/5। अनुपात 3 : 5।

3. 1 g द्रव्यमान में कितनी ऊर्जा छिपी है?

चरण 1: E = mc², m = 10⁻³ kg। चरण 2: E = 10⁻³ × (3 × 10⁸)² = 10⁻³ × 9 × 10¹⁶। चरण 3: E = 9 × 10¹³ J।

4. दिखाइए कि 1 u लगभग 931.5 MeV है।

चरण 1: 1 u = 1.6605 × 10⁻²⁷ kg। चरण 2: E = mc² = 1.6605 × 10⁻²⁷ × (2.998 × 10⁸)² ≈ 1.4924 × 10⁻¹⁰ J। चरण 3: 1.602 × 10⁻¹³ J प्रति MeV से भाग: E ≈ 931.5 MeV।

5. ⁴He की द्रव्यमान क्षति, बंधन ऊर्जा और प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा निकालिए। (mₚ = 1.00728 u, mₙ = 1.00866 u, He नाभिक = 4.00151 u)

चरण 1: अलग कण = 2(1.00728) + 2(1.00866) = 4.03188 u। चरण 2: Δm = 4.03188 − 4.00151 = 0.03037 u। चरण 3: E_b = 0.03037 × 931.5 ≈ 28.3 MeV। चरण 4: प्रति न्यूक्लिऑन = 28.3 / 4 ≈ 7.07 MeV।

6. ¹⁶O की प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा निकालिए। (¹H = 1.007825 u, n = 1.008665 u, ¹⁶O = 15.994915 u)

चरण 1: 8 ¹H + 8 n = 8.06260 + 8.06932 = 16.13192 u। चरण 2: Δm = 16.13192 − 15.994915 = 0.13700 u। चरण 3: E_b = 0.13700 × 931.5 ≈ 127.6 MeV। चरण 4: प्रति न्यूक्लिऑन = 127.6 / 16 ≈ 7.98 MeV।

7. ²³⁵U के हर विखंडन से 200 MeV मिलती है। 1 g ²³⁵U के विखंडन से कुल ऊर्जा बताइए।

चरण 1: नाभिकों की संख्या = (1/235) × 6.022 × 10²³ ≈ 2.56 × 10²¹। चरण 2: ऊर्जा = 2.56 × 10²¹ × 200 MeV = 5.12 × 10²³ MeV। चरण 3: जूल में = 5.12 × 10²³ × 1.6 × 10⁻¹³ ≈ 8.2 × 10¹⁰ J। (लगभग 2.5 टन कोयला जलाने जितनी।)

8. ²H की बंधन ऊर्जा 2.22 MeV और ⁴He की 28.3 MeV है। ²H + ²H → ⁴He में मुक्त ऊर्जा बताइए।

चरण 1: मुक्त ऊर्जा = उत्पाद की BE − अभिकारकों की BE। चरण 2: = 28.3 − 2 × 2.22 = 28.3 − 4.44। चरण 3: = 23.86 MeV ≈ 23.9 MeV।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. नाभिक की त्रिज्या समानुपाती है:
2. 1 u द्रव्यमान लगभग बराबर है:
3. प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा किसके पास सबसे ज़्यादा है?
4. नाभिकीय बल है:
5. सूरज की ऊर्जा मुख्य रूप से आती है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

द्रव्यमान क्षति आसान शब्दों में क्या है?

नाभिक अपने अलग-अलग प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों के कुल द्रव्यमान से थोड़ा हल्का होता है। यह छोटा सा गायब द्रव्यमान ही द्रव्यमान क्षति है; नाभिक बनते समय यह ऊर्जा बनकर निकल गया था।

लोहा सबसे स्थायी नाभिक क्यों है?

A = 56 के पास प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा सबसे ज़्यादा (लगभग 8.8 MeV) है, यानी हर न्यूक्लिऑन सबसे कसकर बँधा है। तोड़ने या जोड़ने, दोनों में ऊर्जा देनी पड़ेगी।

नाभिकीय विखंडन और संलयन में क्या अंतर है?

विखंडन में एक भारी नाभिक दो मध्यम में टूटता है; संलयन में दो हल्के नाभिक जुड़कर भारी बनते हैं। दोनों में ऊर्जा निकलती है क्योंकि उत्पादों की प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा ज़्यादा होती है।

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