नाभिक की संरचना
नाभिक में दो तरह के कण होते हैं, जिन्हें मिलाकर न्यूक्लिऑन कहते हैं:
- प्रोटॉन: आवेश +e, द्रव्यमान 1.00728 u। इनकी संख्या परमाणु क्रमांक Z है।
- न्यूट्रॉन: आवेश शून्य, द्रव्यमान 1.00866 u। इनकी संख्या N है।
द्रव्यमान संख्या A = Z + N। नाभिक को ᴬ_Z X लिखते हैं, जैसे ²³⁵₉₂U में 92 प्रोटॉन और 143 न्यूट्रॉन हैं।
परमाणु द्रव्यमान मात्रक: 1 u = कार्बन-12 परमाणु के द्रव्यमान का 1/12 = 1.6605 × 10⁻²⁷ kg।
समस्थानिक, समभारिक और समन्यूट्रॉनिक
- समस्थानिक (isotopes): Z समान, N अलग (¹H, ²H, ³H)।
- समभारिक (isobars): A समान, Z अलग (³H और ³He)।
- समन्यूट्रॉनिक (isotones): N समान (¹⁹⁸Hg और ¹⁹⁷Au दोनों में N = 118)।
न्यूट्रॉन की खोज 1932 में जेम्स चैडविक ने की। न्यूट्रॉन बिना विद्युत धक्का बढ़ाए नाभिकीय खिंचाव बढ़ाते हैं, इसलिए भारी नाभिकों को जोड़े रखते हैं।
नाभिक का आकार और घनत्व
प्रकीर्णन प्रयोग बताते हैं कि नाभिक का आयतन A के समानुपाती है। इसलिए त्रिज्या:
R = R₀ A^(1/3), R₀ ≈ 1.2 fm (1 fm = 10⁻¹⁵ m, फर्मी)।
आयतन ∝ A और द्रव्यमान ∝ A, इसलिए सब नाभिकों का घनत्व लगभग समान है: लगभग 2.3 × 10¹⁷ kg/m³ — पानी से लगभग 10¹⁴ गुना। एक चम्मच नाभिकीय पदार्थ लगभग एक अरब टन का होगा। न्यूट्रॉन तारे इतने ही घने पदार्थ के बने हैं।
नाभिकीय बल
प्रोटॉन एक-दूसरे को तेज़ विद्युत बल से धकेलते हैं, फिर भी नाभिक टिका रहता है। तो कोई और तेज़ खिंचाव होना चाहिए — यही नाभिकीय बल (प्रबल बल) है। इसके गुण:
- सबसे प्रबल बल: नाभिकीय दूरी पर विद्युत बल से बहुत तेज़।
- कम परास: लगभग 0.8 fm से 2.5 fm तक तेज़ आकर्षण; कुछ fm के बाद लगभग शून्य।
- 0.8 fm से पास आने पर प्रतिकर्षी, ताकि नाभिक सिकुड़कर खत्म न हो।
- आवेश पर निर्भर नहीं: p–p, n–n, p–n के लिए लगभग एक जैसा।
- संतृप्त: एक न्यूक्लिऑन सिर्फ़ अपने पास वाले पड़ोसियों को खींचता है।
दो न्यूक्लिऑनों की स्थितिज ऊर्जा का वक्र लगभग 0.8 fm पर सबसे नीचे है: इसके दाईं ओर बल खींचता है, बाईं ओर धकेलता है।
द्रव्यमान–ऊर्जा संबंध
आइंस्टीन ने बताया कि द्रव्यमान भी ऊर्जा का एक रूप है: E = mc², c = 3 × 10⁸ m/s। c² बहुत बड़ा है, इसलिए छोटा द्रव्यमान भी बहुत बड़ी ऊर्जा है: 1 g = 9 × 10¹³ J।
नाभिकों के लिए आसान संबंध: 1 u द्रव्यमान = 931.5 MeV ऊर्जा। (1 MeV = 1.6 × 10⁻¹³ J)
हर नाभिकीय अभिक्रिया में (द्रव्यमान + ऊर्जा) का कुल योग वही रहता है।
द्रव्यमान क्षति और बंधन ऊर्जा
Z मुक्त प्रोटॉन और N मुक्त न्यूट्रॉन का द्रव्यमान जोड़िए। अब नाभिक तौलिए। नाभिक हमेशा हल्का निकलता है। यह अंतर द्रव्यमान क्षति है:
Δm = [Z mₚ + (A − Z) mₙ] − M_नाभिक
न्यूक्लिऑन जुड़ते समय यह द्रव्यमान ऊर्जा बनकर निकल जाता है। उन्हें फिर अलग करने के लिए उतनी ही ऊर्जा देनी पड़ती है। यही बंधन ऊर्जा है:
E_b = Δm c² = Δm (u में) × 931.5 MeV।
सुझाव: अगर परमाणु द्रव्यमान दिए हों, तो mₚ की जगह हाइड्रोजन परमाणु का द्रव्यमान (1.007825 u) लीजिए, इलेक्ट्रॉन कट जाते हैं।
प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा बनाम द्रव्यमान संख्या
प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा = E_b / A। यह बताती है कि हर न्यूक्लिऑन कितना कसकर बँधा है; जितनी ज़्यादा, उतना स्थायी।
इसे A के सामने बनाएँ तो वक्र की ये बातें दिखती हैं:
- सबसे हल्के नाभिकों के लिए बहुत कम (²H: 1.1 MeV), ⁴He, ¹²C, ¹⁶O पर उभार।
- तेज़ी से बढ़कर A ≈ 30 से 170 तक लगभग सपाट, करीब 8 MeV। सपाट हिस्सा बताता है कि नाभिकीय बल संतृप्त है।
- A = 56 (लोहा) के पास शिखर: लगभग 8.8 MeV। लोहा सबसे स्थायी नाभिकों में है।
- भारी नाभिकों के लिए धीरे-धीरे घटती है (²³⁸U: लगभग 7.6 MeV), क्योंकि प्रोटॉनों का विद्युत धक्का बढ़ता है।
मतलब: भारी नाभिक दो मध्यम में टूटे, या हल्के नाभिक जुड़ें — दोनों शिखर की ओर जाते हैं। उत्पाद ज़्यादा कसकर बँधे होते हैं, और अतिरिक्त बंधन ऊर्जा बाहर निकलती है।
नाभिकीय विखंडन
विखंडन: भारी नाभिक दो मध्यम आकार के नाभिकों में टूटता है। उदाहरण: धीमा न्यूट्रॉन ²³⁵U से टकराता है:
¹n + ²³⁵U → ²³⁶U* → ¹⁴¹Ba + ⁹²Kr + 3 ¹n + लगभग 200 MeV
ऊर्जा क्यों? U की BE/A लगभग 7.6 MeV, उत्पादों की लगभग 8.5 MeV। लाभ ≈ 0.9 MeV × 235 ≈ 200 MeV।
शृंखला अभिक्रिया: निकले 2–3 न्यूट्रॉन और यूरेनियम तोड़ सकते हैं। नाभिकीय रिएक्टर में इसे स्थिर रखा जाता है: मंदक (भारी जल या ग्रेफाइट) न्यूट्रॉन धीमे करता है, नियंत्रक छड़ें (कैडमियम या बोरॉन) फालतू न्यूट्रॉन सोखती हैं, और शीतलक गर्मी ले जाकर भाप बनाता है जो टरबाइन घुमाती है। अनियंत्रित शृंखला अभिक्रिया परमाणु बम का सिद्धांत है।
नाभिकीय संलयन
संलयन: दो हल्के नाभिक जुड़कर भारी नाभिक बनाते हैं। उदाहरण: ²H + ²H → ⁴He + लगभग 23.8 MeV; या ²H + ³H → ⁴He + n + 17.6 MeV।
दोनों नाभिक धनावेशित हैं और एक-दूसरे को धकेलते हैं। नाभिकीय बल तक पास आने के लिए उन्हें बहुत तेज़ चलना होगा, यानी गैस का ताप लगभग 10⁷ K या ज़्यादा चाहिए। इसलिए इसे तापनाभिकीय संलयन कहते हैं।
सूरज में चार हाइड्रोजन नाभिक आखिर में एक हीलियम नाभिक बनाते हैं (प्रोटॉन–प्रोटॉन चक्र) और लगभग 26.7 MeV देते हैं। प्रति किलोग्राम ईंधन, संलयन विखंडन से ज़्यादा ऊर्जा देता है और इसका ईंधन भरपूर है, पर इतनी गर्म गैस को धरती पर थामना अभी भी चुनौती है (जैसे ITER परियोजना, जिसमें भारत भागीदार है)।
| विखंडन | संलयन | |
|---|---|---|
| क्या होता है | भारी नाभिक टूटता है | हल्के नाभिक जुड़ते हैं |
| ज़रूरत | धीमा न्यूट्रॉन | बहुत ऊँचा ताप |
| कचरा | रेडियोधर्मी उत्पाद | ज़्यादातर हीलियम |
| कहाँ | बिजलीघर रिएक्टर | सूरज और तारे |
करके देखें: पहले अनुमान, फिर जाँच
1. फ्री प्ले में ²H, ⁴He, ⁵⁶Fe और ²³⁵U चुनिए। हर बार पहले अनुमान लगाइए कि प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा कितनी होगी। सबसे कसकर कौन बँधा है?
2. दोनों न्यूक्लिऑनों को 4 fm से 0.5 fm तक खिसकाइए। लिखिए कि तीर कहाँ शून्य से खिंचाव बनता है और कहाँ खिंचाव से धक्का।
3. घर पर: 12 कंचे मिट्टी से चिपकाकर गोला बनाइए। गिनिए कि अंदर वाला कंचा कितने पड़ोसियों को छूता है (लगभग 12) और बाहर वाला कितनों को (कम)। सतह वाले न्यूक्लिऑन कम कसकर बँधे होते हैं — इसलिए छोटे नाभिकों की प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा कम है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- A = Z + N
- R = R₀ A^(1/3), R₀ ≈ 1.2 fm; घनत्व ≈ 2.3 × 10¹⁷ kg/m³
- E = mc²; 1 u = 1.6605 × 10⁻²⁷ kg = 931.5 MeV
- Δm = Z mₚ + (A − Z) mₙ − M
- E_b = Δm × 931.5 MeV; प्रति न्यूक्लिऑन BE = E_b / A
- Q (मुक्त ऊर्जा) = (पहले का द्रव्यमान − बाद का द्रव्यमान) × 931.5 MeV
हल किए गए उदाहरण
1. लोहे के नाभिक ⁵⁶Fe की त्रिज्या निकालिए (R₀ = 1.2 fm)।
चरण 1: R = R₀ A^(1/3)। चरण 2: 56^(1/3) ≈ 3.83। चरण 3: R = 1.2 × 3.83 ≈ 4.6 fm।
2. ²⁷Al और ¹²⁵Te की त्रिज्याओं का अनुपात निकालिए।
चरण 1: R ∝ A^(1/3)। चरण 2: R_Al / R_Te = (27/125)^(1/3)। चरण 3: = 3/5। अनुपात 3 : 5।
3. 1 g द्रव्यमान में कितनी ऊर्जा छिपी है?
चरण 1: E = mc², m = 10⁻³ kg। चरण 2: E = 10⁻³ × (3 × 10⁸)² = 10⁻³ × 9 × 10¹⁶। चरण 3: E = 9 × 10¹³ J।
4. दिखाइए कि 1 u लगभग 931.5 MeV है।
चरण 1: 1 u = 1.6605 × 10⁻²⁷ kg। चरण 2: E = mc² = 1.6605 × 10⁻²⁷ × (2.998 × 10⁸)² ≈ 1.4924 × 10⁻¹⁰ J। चरण 3: 1.602 × 10⁻¹³ J प्रति MeV से भाग: E ≈ 931.5 MeV।
5. ⁴He की द्रव्यमान क्षति, बंधन ऊर्जा और प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा निकालिए। (mₚ = 1.00728 u, mₙ = 1.00866 u, He नाभिक = 4.00151 u)
चरण 1: अलग कण = 2(1.00728) + 2(1.00866) = 4.03188 u। चरण 2: Δm = 4.03188 − 4.00151 = 0.03037 u। चरण 3: E_b = 0.03037 × 931.5 ≈ 28.3 MeV। चरण 4: प्रति न्यूक्लिऑन = 28.3 / 4 ≈ 7.07 MeV।
6. ¹⁶O की प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा निकालिए। (¹H = 1.007825 u, n = 1.008665 u, ¹⁶O = 15.994915 u)
चरण 1: 8 ¹H + 8 n = 8.06260 + 8.06932 = 16.13192 u। चरण 2: Δm = 16.13192 − 15.994915 = 0.13700 u। चरण 3: E_b = 0.13700 × 931.5 ≈ 127.6 MeV। चरण 4: प्रति न्यूक्लिऑन = 127.6 / 16 ≈ 7.98 MeV।
7. ²³⁵U के हर विखंडन से 200 MeV मिलती है। 1 g ²³⁵U के विखंडन से कुल ऊर्जा बताइए।
चरण 1: नाभिकों की संख्या = (1/235) × 6.022 × 10²³ ≈ 2.56 × 10²¹। चरण 2: ऊर्जा = 2.56 × 10²¹ × 200 MeV = 5.12 × 10²³ MeV। चरण 3: जूल में = 5.12 × 10²³ × 1.6 × 10⁻¹³ ≈ 8.2 × 10¹⁰ J। (लगभग 2.5 टन कोयला जलाने जितनी।)
8. ²H की बंधन ऊर्जा 2.22 MeV और ⁴He की 28.3 MeV है। ²H + ²H → ⁴He में मुक्त ऊर्जा बताइए।
चरण 1: मुक्त ऊर्जा = उत्पाद की BE − अभिकारकों की BE। चरण 2: = 28.3 − 2 × 2.22 = 28.3 − 4.44। चरण 3: = 23.86 MeV ≈ 23.9 MeV।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि नाभिक अपने कणों से भारी है। वह हमेशा हल्का है; गायब द्रव्यमान ही बंधन ऊर्जा है।
- R ∝ A लिखना, R ∝ A^(1/3) की जगह। आठ गुना न्यूक्लिऑन से त्रिज्या सिर्फ़ दोगुनी होती है।
- कुल बंधन ऊर्जा ज़्यादा होने को ज़्यादा स्थायी मान लेना। तुलना प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा से करें।
- विखंडन और संलयन को उलझाना: विखंडन = भारी का टूटना (न्यूट्रॉन चाहिए), संलयन = हल्कों का जुड़ना (बहुत ऊँचा ताप चाहिए)।