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परमाणु: अल्फा कण प्रकीर्णन से बोर मॉडल तक

रदरफोर्ड ने सोने की पतली पन्नी पर अल्फा कण फेंके और पाया कि परमाणु ज़्यादातर खाली है, बीच में एक बहुत छोटा, भारी, धनावेशित नाभिक है। फिर बोर ने कहा कि हाइड्रोजन का इलेक्ट्रॉन सिर्फ़ उन्हीं कक्षाओं में घूम सकता है जहाँ कोणीय संवेग nh/2π हो। n वीं कक्षा में त्रिज्या 0.529 n² Å, चाल (2.19 × 10⁶)/n m/s और ऊर्जा −13.6/n² eV होती है। इलेक्ट्रॉन नीचे कूदता है तो ऊर्जा का अंतर एक खास रंग के प्रकाश के रूप में निकलता है — यही हाइड्रोजन का रेखा स्पेक्ट्रम है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. अल्फा कण सोने की पतली पन्नी की ओर जा रहे हैं। गिनिए: ज़्यादातर सीधे निकल गए, कुछ मुड़े, और लगभग 8000 में से 1 वापस लौटा।
  2. मतलब परमाणु ज़्यादातर खाली है। सारा धन आवेश और लगभग सारा द्रव्यमान एक छोटे से नाभिक में है। इलेक्ट्रॉन बाहर घूमते हैं। यह रदरफोर्ड मॉडल है।
  3. बोर का विचार: इलेक्ट्रॉन सिर्फ़ कुछ तय छल्लों पर घूम सकता है — कक्षा n = 1, 2, 3 … इन छल्लों पर वह प्रकाश नहीं छोड़ता।
  4. देखिए, इलेक्ट्रॉन बड़ी n पर जा रहा है। छल्ला n² गुना बड़ा होता है, चाल 1/n गुना घटती है। ऊर्जा −13.6/n² eV शून्य के पास पहुँचती है।
  5. अब इलेक्ट्रॉन n = 3 से n = 2 पर कूदा। खोई ऊर्जा 1.89 eV एक लाल फोटॉन बनकर निकली। हर छलाँग एक पक्का रंग देती है।
  6. अब आप खेलें: ऊपर और नीचे की कक्षा चुनें, कूदो दबाएँ, और फोटॉन की ऊर्जा, तरंगदैर्ध्य और श्रेणी का नाम पढ़ें।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

अगर परमाणु ज़्यादातर खाली है तो हाथ मेज़ के आर-पार क्यों नहीं जाता?

हाथ और मेज़ के इलेक्ट्रॉन नाभिकों के मिलने से बहुत पहले ही विद्युत बल से एक-दूसरे को धकेल देते हैं। खाली का मतलब बल-रहित नहीं है।

सिर्फ़ कुछ अल्फा कण ही वापस क्यों लौटे?

नाभिक इतना छोटा है कि बहुत कम कण उसके पास पहुँचते हैं। सिर्फ़ लगभग सीधी टक्कर (छोटा संघट्ट प्राचल) कण को लौटाती है। 3D का काउंटर देखिए।

बोर मॉडल में इलेक्ट्रॉन नाभिक में क्यों नहीं गिरता?

बोर ने नियम दिया कि मान्य कक्षा पर इलेक्ट्रॉन ऊर्जा नहीं छोड़ता। बाद में तरंग विचार से पता चला कि मान्य कक्षा में इलेक्ट्रॉन तरंगों की पूरी संख्या समाती है — एक स्थिर पैटर्न जो ऊर्जा नहीं खोता।

बड़ी कक्षा में इलेक्ट्रॉन धीमा है, फिर भी ऊर्जा ज़्यादा क्यों?

गतिज ऊर्जा कम होती है, पर स्थितिज ऊर्जा बहुत कम ऋणात्मक हो जाती है। कुल ऊर्जा −13.6/n² बढ़ते n के साथ शून्य की ओर उठती है।

3 → 2 का प्रकाश लाल है, पर 2 → 1 का दिखता क्यों नहीं?

3 → 2 में 1.89 eV (656 nm, लाल) निकलती है। 2 → 1 में 10.2 eV (122 nm) — यह पराबैंगनी है, आँख नहीं देख पाती।

क्या इलेक्ट्रॉन दो कक्षाओं के बीच रुक सकता है?

नहीं। बोर मॉडल में सिर्फ़ mvr = nh/2π वाले छल्ले मान्य हैं। खुद खेलकर देखिए: इलेक्ट्रॉन हमेशा किसी छल्ले पर ही पहुँचता है।

अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग

अल्फा कण हीलियम का नाभिक है: 2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन, आवेश +2e। यह इलेक्ट्रॉन से बहुत भारी और तेज़ है।

इस प्रयोग में (गाइगर और मार्सडन ने, रदरफोर्ड के मार्गदर्शन में) अल्फा कणों की पतली धारा सोने की बहुत पतली पन्नी पर डाली गई। चारों ओर लगे पर्दे पर गिना गया कि कौन सा कण कहाँ गिरा।

कोई कण तभी लौटेगा जब वह किसी बहुत छोटी, बहुत भारी और तेज़ धनावेशित चीज़ से टकराए। इसलिए धन आवेश एक छोटे केंद्र में भरा होना चाहिए।

संघट्ट प्राचल और निकटतम पहुँच की दूरी

संघट्ट प्राचल (b): आते हुए कण की रेखा और नाभिक के केंद्र के बीच की तिरछी दूरी। b छोटा तो मोड़ बड़ा; b = 0 यानी सीधी टक्कर, कण सीधा लौटता है।

सीधी टक्कर में कण धीमा होता है, पल भर रुकता है और लौट जाता है। उस पल उसकी पूरी गतिज ऊर्जा विद्युत स्थितिज ऊर्जा बन जाती है। यह सबसे कम दूरी निकटतम पहुँच की दूरी है:

K = (1/4πε₀) × (2e)(Ze) / r₀, इसलिए r₀ = (1/4πε₀) × 2Ze² / K।

सोने के लिए यह लगभग 10⁻¹⁴ m आती है, यानी नाभिक इससे भी छोटा है।

रदरफोर्ड का नाभिकीय मॉडल और उसकी कमियाँ

रदरफोर्ड मॉडल: परमाणु में एक छोटा नाभिक (आकार लगभग 10⁻¹⁵ m से 10⁻¹⁴ m) है जिसमें सारा धन आवेश और लगभग सारा द्रव्यमान है। इलेक्ट्रॉन दूर-दूर घूमते हैं (परमाणु का आकार लगभग 10⁻¹⁰ m)। परमाणु लगभग पूरा खाली है।

कमी 1 – स्थायित्व: गोल घूमता इलेक्ट्रॉन त्वरित है। त्वरित आवेश ऊर्जा छोड़ता है। तो उसे ऊर्जा खोकर घूमते-घूमते लगभग 10⁻⁸ s में नाभिक में गिर जाना चाहिए। पर परमाणु तो स्थायी हैं।

कमी 2 – स्पेक्ट्रम: ऐसा इलेक्ट्रॉन हर रंग देता (सतत स्पेक्ट्रम)। पर हाइड्रोजन सिर्फ़ कुछ पतली रेखाएँ देता है।

हाइड्रोजन परमाणु का बोर मॉडल

नील्स बोर (1913) ने नाभिक को रखा और तीन नियम (अभिगृहीत) जोड़े:

  1. स्थायी कक्षाएँ: इलेक्ट्रॉन कुछ खास कक्षाओं में ही घूमता है और वहाँ ऊर्जा नहीं छोड़ता।
  2. क्वांटम शर्त: कक्षा तभी मान्य है जब कोणीय संवेग h/2π का पूर्ण गुणज हो: mvr = nh/2π, n = 1, 2, 3 … (n = मुख्य क्वांटम संख्या)।
  3. आवृत्ति नियम: ऊँचे स्तर Eᵢ से नीचे E_f पर कूदने पर एक फोटॉन निकलता है: hν = Eᵢ − E_f।

n = 1 निम्नतम अवस्था (ground state) है। n = 2, 3 … उत्तेजित अवस्थाएँ हैं।

n वीं कक्षा में त्रिज्या, चाल और ऊर्जा

दो बातें जोड़ते हैं: (1) नाभिक का विद्युत खिंचाव ही अभिकेंद्र बल देता है: mv²/r = ke²/r², जहाँ k = 1/4πε₀; (2) mvr = nh/2π। दोनों को साथ हल करने पर:

ऋणात्मक क्यों? दूर पड़े मुक्त इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा को हम शून्य मानते हैं। बंधे इलेक्ट्रॉन के पास उससे कम है, इसलिए शून्य से नीचे। हाइड्रोजन की आयनन ऊर्जा (n = 1 से इलेक्ट्रॉन को मुक्त करने की ऊर्जा) 13.6 eV है।

ऊर्जा स्तर आरेख

E₁ = −13.6 eV, E₂ = −3.4 eV, E₃ = −1.51 eV, E₄ = −0.85 eV, … E∞ = 0। शून्य के पास स्तर घने हो जाते हैं। n = 1 से n = 2 तक उठाने की ऊर्जा (10.2 eV) पहली उत्तेजन ऊर्जा कहलाती है।

हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम (गुणात्मक)

गर्म हाइड्रोजन गैस सिर्फ़ कुछ तरंगदैर्ध्य का प्रकाश देती है: रेखा स्पेक्ट्रम। हर रेखा एक तरह की छलाँग है। एक ही निचले स्तर पर खत्म होने वाली छलाँगें एक श्रेणी बनाती हैं:

तरंगदैर्ध्य: 1/λ = R(1/n_f² − 1/nᵢ²), R ≈ 1.097 × 10⁷ m⁻¹ (रिडबर्ग नियतांक)। आसान तरीका: λ (nm) ≈ 1240 / ΔE (eV)।

अगर गैस प्रकाश सोखे तो यही छलाँगें ऊपर की ओर होती हैं और उन्हीं जगहों पर काली रेखाएँ दिखती हैं: अवशोषण स्पेक्ट्रम।

बोर मॉडल की सीमाएँ

यह सिर्फ़ हाइड्रोजन और एक-इलेक्ट्रॉन आयनों (He⁺, Li²⁺) पर चलता है। कुछ रेखाएँ ज़्यादा चमकीली क्यों हैं, या कई इलेक्ट्रॉन वाले परमाणु — यह नहीं समझा पाता। बाद में दे ब्रॉग्ली ने कारण दिया: कक्षा में इलेक्ट्रॉन तरंगों की पूरी संख्या समाती है, 2πr = nλ।

करके देखें: पहले अनुमान, फिर जाँच

1. कूदो दबाने से पहले सोचिए: 4 → 2 की छलाँग 3 → 2 से ज़्यादा ऊर्जा देगी या कम? रंग का अनुमान लगाइए। अब 3D में जाँचिए।

2. 2 → 1, 3 → 1, 4 → 1 आज़माइए। ये रेखाएँ आँख से क्यों नहीं दिखतीं? (तरंगदैर्ध्य देखिए।)

3. घर पर: एक पुरानी CD को सफ़ेद LED के नीचे और फिर पीले सोडियम स्ट्रीट लैंप के नीचे देखिए। सफ़ेद रोशनी पूरा इंद्रधनुष देती है; सोडियम लैंप ज़्यादातर एक पीली पट्टी। यही रेखा स्पेक्ट्रम है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. हाइड्रोजन की तीसरी कक्षा की त्रिज्या निकालिए।

चरण 1: rₙ = 0.529 n² Å। चरण 2: n = 3, तो n² = 9। चरण 3: r₃ = 0.529 × 9 = 4.76 Å ≈ 4.76 × 10⁻¹⁰ m।

2. हाइड्रोजन में n = 2 और n = 4 पर इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा निकालिए।

चरण 1: Eₙ = −13.6 / n² eV। चरण 2: E₂ = −13.6 / 4 = −3.4 eV। चरण 3: E₄ = −13.6 / 16 = −0.85 eV।

3. किसी कक्षा में इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा −3.4 eV है। गतिज और स्थितिज ऊर्जा बताइए।

चरण 1: K = −E = +3.4 eV। चरण 2: U = 2E = −6.8 eV। जाँच: K + U = 3.4 − 6.8 = −3.4 eV ✓।

4. इलेक्ट्रॉन n = 3 से n = 2 पर कूदे तो फोटॉन की ऊर्जा और तरंगदैर्ध्य बताइए।

चरण 1: E₃ = −1.51 eV, E₂ = −3.40 eV। चरण 2: ΔE = −1.51 − (−3.40) = 1.89 eV। चरण 3: λ ≈ 1240 / 1.89 ≈ 656 nm। यह लाल बामर रेखा (H-अल्फा) है।

5. 7.7 MeV गतिज ऊर्जा वाला अल्फा कण सोने के नाभिक (Z = 79) की ओर सीधा जाता है। निकटतम पहुँच की दूरी निकालिए। (1/4πε₀ = 9 × 10⁹, e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C)

चरण 1: K = 7.7 × 10⁶ × 1.6 × 10⁻¹⁹ J = 1.232 × 10⁻¹² J। चरण 2: r₀ = 9 × 10⁹ × 2 × 79 × (1.6 × 10⁻¹⁹)² / K। चरण 3: अंश = 9 × 10⁹ × 158 × 2.56 × 10⁻³⁸ = 3.64 × 10⁻²⁶। चरण 4: r₀ = 3.64 × 10⁻²⁶ / 1.232 × 10⁻¹² ≈ 2.95 × 10⁻¹⁴ m ≈ 30 fm।

6. हाइड्रोजन की लाइमन श्रेणी की सबसे छोटी तरंगदैर्ध्य निकालिए।

चरण 1: सबसे छोटी तरंगदैर्ध्य = सबसे बड़ी छलाँग = n = ∞ से n = 1। चरण 2: ΔE = 0 − (−13.6) = 13.6 eV। चरण 3: λ ≈ 1240 / 13.6 ≈ 91.2 nm (पराबैंगनी)।

7. n = 4 से निम्नतम अवस्था तक आते हाइड्रोजन परमाणु कितनी अलग रेखाएँ दे सकते हैं?

चरण 1: 1, 2, 3, 4 में से हर जोड़ी एक रेखा देती है। चरण 2: जोड़ियाँ = n(n − 1)/2 = 4 × 3 / 2 = 6। चरण 3: रेखाएँ: 4→3, 4→2, 4→1, 3→2, 3→1, 2→1।

8. n = 1 में इलेक्ट्रॉन की चाल की तुलना प्रकाश की चाल से कीजिए।

चरण 1: v₁ = 2.19 × 10⁶ m/s। चरण 2: v₁ / c = 2.19 × 10⁶ / 3 × 10⁸ ≈ 1/137। यानी प्रकाश की चाल का लगभग 0.7%, इसलिए बोर का सीधा-सादा हिसाब चल जाता है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. सोने की पन्नी प्रयोग में ज़्यादातर अल्फा कण:
2. n वीं बोर कक्षा की त्रिज्या समानुपाती है:
3. हाइड्रोजन की निम्नतम अवस्था में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा:
4. हाइड्रोजन की दृश्य रेखाएँ किस श्रेणी में हैं?
5. बोर की क्वांटम शर्त है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बोर मॉडल आसान शब्दों में क्या है?

इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर सिर्फ़ कुछ तय छल्लों पर घूमता है। छल्ले पर उसकी ऊर्जा नहीं घटती। नीचे वाले छल्ले पर कूदने पर वह प्रकाश का एक पैकेट छोड़ता है जिसकी ऊर्जा दोनों छल्लों के अंतर के बराबर होती है।

परमाणु में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा ऋणात्मक क्यों होती है?

दूर पड़े मुक्त इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा शून्य मानी जाती है। बंधे इलेक्ट्रॉन को मुक्त करने के लिए ऊर्जा देनी पड़ती है, इसलिए उसकी ऊर्जा शून्य से कम है।

रदरफोर्ड के अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग से क्या पता चला?

कि परमाणु ज़्यादातर खाली है और बीच में बहुत छोटा, घना, धनावेशित नाभिक है।

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