South 고등학교 3학년 Physics II
अध्याय: 3
1. Mechanical interactions
Forces in a plane · Equilibrium and centre of mass · Uniform acceleration in 2D · Newton's laws in 2D · Circular motion · Kepler's laws · Accelerated frames · Gravitational lensing and black holes · Work-energy theorem · Projectiles and pendulums · Mechanical equivalent of heat
- समतल में गति के लिए अदिश और सदिश (कक्षा 11) – अदिश में सिर्फ परिमाण होता है; सदिश में परिमाण और दिशा दोनों। परिमाण और दिशा समान हों तो सदिश बराबर। किसी संख्या से गुणा करने पर लंबाई बदलती है (ऋणात्मक संख्या दिशा उल्टी कर देती है)। सदिश पूँछ-से-सिर जुड़ते हैं; A − B = A + (−B)। समतल का हर सदिश A = Ax î + Ay ĵ, जहाँ Ax = A cos θ, Ay = A sin θ। A·B = AB cos θ एक अदिश है; A×B का परिमाण AB sin θ और दिशा दोनों के लंबवत।
- द्रव्यमान केंद्र: दो कण, दृढ़ पिंड और एकसमान छड़ – द्रव्यमान केंद्र वह एक बिंदु है जो ऐसे चलता है मानो पूरे निकाय का सारा द्रव्यमान वहीं इकट्ठा हो। एक रेखा पर दो कणों के लिए x_cm = (m₁x₁ + m₂x₂)/(m₁ + m₂)। यह दोनों को मिलाने वाली रेखा पर, भारी कण के पास होता है। कई कणों के लिए x_cm = Σmx/Σm (y और z के लिए भी ऐसे ही)। L लंबाई की एकसमान छड़ का द्रव्यमान केंद्र L/2 पर, यानी ठीक बीच में होता है। आंतरिक बल द्रव्यमान केंद्र को नहीं हिला सकते, सिर्फ़ बाहरी बल: M·a_cm = F_ext।
- प्रक्षेप्य गति और एकसमान वृत्तीय गति (कक्षा 11) – समतल में r = r₀ + v₀t + ½at² और v = v₀ + at, x और y पर अलग-अलग लगते हैं। प्रक्षेप्य का क्षैतिज वेग u cos θ स्थिर रहता है और ऊर्ध्वाधर वेग हर सेकंड g से बदलता है, इसलिए पथ परवलय है: y = x tan θ − gx²/(2u²cos²θ)। T = 2u sin θ/g, H = u² sin²θ/2g, R = u² sin 2θ/g (45° पर अधिकतम)। एकसमान वृत्तीय गति में चाल स्थिर पर वेग की दिशा घूमती है, इसलिए केंद्र की ओर अभिकेंद्र त्वरण a = v²/r = ω²r होता है।
- केप्लर के ग्रहीय गति के नियम – केप्लर ने ग्रहों की चाल के तीन नियम दिए। 1) हर ग्रह दीर्घवृत्त (ellipse) में घूमता है और सूर्य उसके एक फोकस पर होता है। 2) सूर्य से ग्रह तक की रेखा बराबर समय में बराबर क्षेत्रफल घेरती है, इसलिए ग्रह सूर्य के पास तेज़ चलता है। 3) परिक्रमण काल का वर्ग (T²) अर्ध-दीर्घ अक्ष के घन (a³) के समानुपाती है। दूसरा नियम असल में कोणीय संवेग का संरक्षण है, और तीसरा नियम न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम से निकलता है।
- सापेक्षता का सामान्य सिद्धांत: वक्र दिक्-काल के रूप में गुरुत्व – सामान्य सापेक्षता कहती है कि द्रव्यमान और ऊर्जा दिक्-काल (स्पेस-टाइम) को मोड़ते हैं, और वस्तुएँ इसी मुड़े रास्ते पर चलती हैं। इसी को हम गुरुत्व कहते हैं। इससे पता चलता है कि द्रव्यमान के पास प्रकाश मुड़ता है (गुरुत्वीय लेंस), तेज़ गुरुत्व में घड़ी धीमी चलती है, और बहुत घना पिंड ब्लैक होल बन सकता है।
- कार्य, गतिज ऊर्जा, कार्य-ऊर्जा प्रमेय और शक्ति – जब बल किसी चीज़ को अपनी दिशा में खिसकाता है तो कार्य होता है: W = F·s = F s cos θ। बदलते बल का कार्य F–x ग्राफ़ के नीचे का क्षेत्रफल है। चलती वस्तु की गतिज ऊर्जा K = ½mv² है। कार्य-ऊर्जा प्रमेय: कुल कार्य = गतिज ऊर्जा में बदलाव। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W/t = F·v।
- ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम – आंतरिक ऊर्जा U निकाय के अंदर के अणुओं की कुल ऊर्जा है। यह दो ही तरीकों से बदलती है: ऊष्मा Q (ताप के अंतर से बहने वाली ऊर्जा) और कार्य W (बल से दी गई ऊर्जा, जैसे खिसकता पिस्टन)। प्रथम नियम: ΔQ = ΔU + ΔW. गैस को दी गई ऊष्मा का एक भाग आंतरिक ऊर्जा बढ़ाता है, बाकी से गैस कार्य करती है। स्थिर दाब पर कार्य PΔV है। आदर्श गैस के लिए Cp − Cv = R.
2. Electromagnetic fields
Electric fields of charges · Induction and polarisation · DC circuits · Transistor amplification · Capacitors · Magnetic fields of wires · Changing flux and induction · Mutual induction
- वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र – आवेश दो तरह का होता है, संरक्षित रहता है और e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C के पूरे पैकेटों में आता है। दो बिंदु आवेश F = kq₁q₂/r² बल से धकेलते या खींचते हैं (k = 9 × 10⁹ N m² C⁻²)। कई आवेशों के बल और क्षेत्र सदिश की तरह जुड़ते हैं (अध्यारोपण)। बिंदु आवेश का क्षेत्र E = kq/r² है। द्विध्रुव (±q, दूरी 2a) का आघूर्ण p = q·2a है; एकसमान क्षेत्र में उस पर कुल बल शून्य पर बल-आघूर्ण τ = pE sinθ होता है। फ्लक्स Φ = E·A, और गाउस नियम: किसी बंद सतह से कुल फ्लक्स = अंदर का आवेश/ε₀। इससे तार (λ/2πε₀r), समतल चादर (σ/2ε₀) और पतले गोलीय कोश (बाहर kq/r², अंदर 0) का क्षेत्र मिलता है।
- स्थिर विद्युतिकी: प्रेरण, ध्रुवण और आवेश का बँटवारा – स्थिर विद्युतिकी रुके हुए आवेशों का अध्ययन है। वस्तुएँ घर्षण (रगड़), चालन (छूकर) या प्रेरण (बिना छुए पास लाकर) से आवेशित होती हैं। चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉन चलते हैं: पास का आवेश उन्हें एक तरफ़ धकेलता है (प्रेरण), और भू-संपर्क करने पर चालक पर उल्टा आवेश रह जाता है। कुचालक (परावैद्युत) में इलेक्ट्रॉन घूम नहीं सकते, पर हर अणु खिंचकर छोटा द्विध्रुव बन जाता है (ध्रुवण); इसीलिए आवेशित कंघी कागज़ खींचती है। आवेशित चालकों को तार से जोड़ने पर आवेश तब तक बहता है जब तक विभव बराबर न हो। दूर रखे गोलों के लिए V = kq/r, इसलिए q₁/q₂ = r₁/r₂, और छोटे गोले का पृष्ठ आवेश घनत्व ज़्यादा होता है। कुल आवेश हमेशा संरक्षित रहता है।
- किरचॉफ के नियम और व्हीटस्टोन सेतु – संधि नियम: किसी भी संधि पर आने वाली धाराओं का योग = जाने वाली धाराओं का योग (ΣI = 0), क्योंकि आवेश संरक्षित है। लूप नियम: किसी भी बंद लूप में विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य (ΣΔV = 0), क्योंकि ऊर्जा संरक्षित है। चिह्न: धारा की दिशा में प्रतिरोधक पार करने पर −IR; सेल को − से + पार करने पर +ε. चार प्रतिरोधकों P, Q, R, S वाला व्हीटस्टोन सेतु तब संतुलित होता है (गैल्वेनोमीटर में धारा नहीं) जब P/Q = R/S; इससे अज्ञात प्रतिरोध ज्ञात होता है, जैसे मीटर सेतु में।
- अर्धचालक और p-n संधि डायोड – अर्धचालक में ऊर्जा अंतराल छोटा (लगभग 1 eV) होता है, इसलिए थोड़ी गर्मी से कुछ इलेक्ट्रॉन मुक्त हो जाते हैं। शुद्ध सिलिकॉन नैज है (इलेक्ट्रॉन = होल)। 5 संयोजकता वाला परमाणु मिलाने से n-प्रकार, 3 वाला मिलाने से p-प्रकार बनता है। p और n जोड़ने पर ह्रास परत और लगभग 0.7 V का विभव प्राचीर बनता है। डायोड अग्र बायस में धारा चलाता है, पश्च में लगभग नहीं, इसलिए यह AC को DC में बदल सकता है।
- स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता – किसी बिंदु पर विभव V = इकाई धन आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य। बिंदु आवेश के लिए V = kq/r; कई आवेशों के विभव सीधे (अदिश) जुड़ते हैं। विभवांतर V_B − V_A = W/q। समविभव सतहों पर V बराबर होता है; E उनके लंबवत और E = −dV/dr। दो आवेशों की स्थितिज ऊर्जा U = kq₁q₂/r, द्विध्रुव की U = −pE cosθ। चालक में मुक्त आवेश (अंदर E = 0), परावैद्युत में बंधे आवेश ध्रुवित होकर क्षेत्र को E₀/K कर देते हैं। संधारित्र Q = CV; समांतर प्लेट C = ε₀A/d, परावैद्युत के साथ KC। श्रेणी: 1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + …; पार्श्व: C = C₁ + C₂ + …। संचित ऊर्जा U = ½CV² = Q²/2C।
- धारा के कारण चुंबकीय क्षेत्र: बायो-सावर्ट नियम और ऐम्पियर नियम – धारा अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बनाती है (ऑर्स्टेड, 1820)। बायो-सावर्ट नियम तार के छोटे टुकड़े का क्षेत्र देता है: dB = (μ₀/4π)·I dl sinθ / r²। वृत्ताकार लूप के केंद्र पर B = μ₀NI / 2R और अक्ष पर B = μ₀NIR² / 2(R² + x²)^{3/2}। ऐम्पियर का परिपथीय नियम ∮B·dl = μ₀I लंबे सीधे तार के लिए B = μ₀I / 2πr देता है। लंबी परिनालिका के अंदर क्षेत्र प्रबल और एकसमान है: B = μ₀nI।
- विद्युत चुंबकीय प्रेरण – जब किसी कुंडली से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स बदलता है, तो उसमें emf पैदा होता है: ε = −N dΦ/dt (फैराडे)। ऋण चिह्न लेन्ज़ का नियम है: प्रेरित धारा हमेशा उस बदलाव का विरोध करती है जिससे वह बनी। चुंबकीय क्षेत्र में छड़ चलाने पर गतिक emf ε = Blv मिलता है। बदलती धारा अपनी ही कुंडली में (स्वप्रेरण, L) और पास की कुंडली में (अन्योन्य प्रेरण, M) emf बनाती है।
- धारावाही चालक पर बल, विद्युत मोटर और प्रेरण – चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही तार पर एक धक्का यानी बल लगता है। तार क्षेत्र से 90° पर हो तो बल सबसे ज़्यादा, और क्षेत्र के समांतर हो तो शून्य। बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से मिलती है। मोटर इसी बल से कुंडली घुमाती है; जनित्र उल्टा काम करके गति से धारा बनाता है।
3. Waves and properties of matter
Interference and diffraction · Doppler effect · EM waves from AC circuits · Convex lens images · Double-slit interference · Photoelectric effect · Matter waves · Electron orbits in hydrogen
- व्यतिकरण (यंग का द्वि-झिरी प्रयोग) और एकल झिरी विवर्तन – दो कला-संबद्ध स्रोत (समान आवृत्ति, स्थिर कलांतर) दीप्त और अदीप्त फ्रिंजों का स्थिर पैटर्न बनाते हैं। पर्दे के किसी बिंदु पर पथांतर Δ = yd/D: Δ = nλ पर दीप्त, Δ = (n + ½)λ पर अदीप्त। सभी फ्रिंज समान चौड़ाई β = λD/d के होते हैं। a चौड़ाई की एकल झिरी विवर्तन देती है: 2λD/a चौड़ा चमकीला केंद्रीय उच्चिष्ठ, पहला निम्निष्ठ a sin θ = λ पर, और हल्के पार्श्व उच्चिष्ठ।
- डॉप्लर प्रभाव – जब तरंग का स्रोत और प्रेक्षक (सुनने वाला) एक-दूसरे की ओर या एक-दूसरे से दूर चलते हैं, तो सुनी गई आवृत्ति बदल जाती है। इसे डॉप्लर प्रभाव कहते हैं। पास आने पर शिखर पास-पास दबते हैं: छोटी तरंगदैर्घ्य, ज़्यादा आवृत्ति, ऊँचा तारत्व। दूर जाने पर शिखर फैलते हैं: कम आवृत्ति। ध्वनि के लिए f′ = f × (v ± vo) ÷ (v ∓ vs), पास आने पर ऊपर वाले चिह्न। इसका उपयोग स्पीड गन, मौसम रडार, खून के बहाव का अल्ट्रासाउंड, चमगादड़ों में और खगोल विज्ञान (रेड शिफ्ट, ब्लू शिफ्ट) में होता है।
- प्रत्यावर्ती धारा – प्रत्यावर्ती धारा (AC) बार-बार अपना मान और दिशा बदलती है: I = I₀ sin ωt। इसका rms मान I₀/√2 है, यानी वह स्थिर DC जो उतनी ही गर्मी दे। प्रतिरोध में V और I साथ चलते हैं; प्रेरक में I 90° पीछे (Xʟ = ωL); संधारित्र में I 90° आगे (Xᴄ = 1/ωC)। श्रेणी LCR में Z = √(R² + (Xʟ − Xᴄ)²), Xʟ = Xᴄ पर अनुनाद होता है, और औसत शक्ति P = Vrms Irms cos φ।
- पतले लेंस: लेंस मेकर सूत्र, लेंस सूत्र और क्षमता – एक गोलीय सतह पर n₂/v − n₁/u = (n₂ − n₁)/R। ऐसी दो सतहें मिलकर पतला लेंस बनाती हैं: 1/f = (n − 1)(1/R₁ − 1/R₂) (लेंस मेकर सूत्र)। वस्तु और प्रतिबिंब दूरी 1/v − 1/u = 1/f मानती हैं, आवर्धन m = v/u, क्षमता P = 1/f (f मीटर में हो तो डायोप्टर में), और संपर्क में रखे पतले लेंसों की क्षमताएँ जुड़ती हैं: P = P₁ + P₂।
- प्रकाश विद्युत प्रभाव और आइंस्टीन का समीकरण – जब काफ़ी ऊँची आवृत्ति का प्रकाश किसी धातु पर पड़ता है, तो उसमें से इलेक्ट्रॉन तुरंत बाहर निकल आते हैं। प्रकाश छोटे-छोटे पैकेटों में आता है, जिन्हें फोटॉन कहते हैं; हर फोटॉन की ऊर्जा E = hν है। एक फोटॉन अपनी पूरी ऊर्जा एक इलेक्ट्रॉन को देता है: hν = φ + KEmax, जहाँ φ कार्य फलन है। देहली आवृत्ति ν₀ = φ/h से कम आवृत्ति पर, प्रकाश कितना भी तेज़ हो, कोई इलेक्ट्रॉन नहीं निकलता।
- द्रव्य तरंगें और दे ब्रॉग्ली संबंध – प्रकाश तरंग की तरह भी चलता है और कण की तरह भी। 1924 में लुई दे ब्रॉग्ली ने कहा कि द्रव्य भी ऐसा ही करता है: हर गतिमान कण के साथ एक तरंग होती है, जिसकी तरंगदैर्ध्य λ = h/p = h/mv। गतिज ऊर्जा K वाले कण के लिए λ = h/√(2mK); V वोल्ट से त्वरित इलेक्ट्रॉन के लिए λ = 1.227/√V nm। रोज़ की चीज़ों की λ बहुत ही छोटी होती है, पर इलेक्ट्रॉन की λ परमाणु के आकार जितनी होती है।
- परमाणु: अल्फा कण प्रकीर्णन से बोर मॉडल तक – रदरफोर्ड ने सोने की पतली पन्नी पर अल्फा कण फेंके और पाया कि परमाणु ज़्यादातर खाली है, बीच में एक बहुत छोटा, भारी, धनावेशित नाभिक है। फिर बोर ने कहा कि हाइड्रोजन का इलेक्ट्रॉन सिर्फ़ उन्हीं कक्षाओं में घूम सकता है जहाँ कोणीय संवेग nh/2π हो। n वीं कक्षा में त्रिज्या 0.529 n² Å, चाल (2.19 × 10⁶)/n m/s और ऊर्जा −13.6/n² eV होती है। इलेक्ट्रॉन नीचे कूदता है तो ऊर्जा का अंतर एक खास रंग के प्रकाश के रूप में निकलता है — यही हाइड्रोजन का रेखा स्पेक्ट्रम है।