वैद्युत आवेश और उसका संरक्षण
आवेश पदार्थ का वह गुण है जिससे वह दूसरे आवेशित पिंडों को धकेलता या खींचता है। आवेश दो प्रकार के हैं: धन (+) और ऋण (−)। समान आवेश प्रतिकर्षित करते हैं, असमान आकर्षित।
तीन मूल बातें
- योगात्मकता: कुल आवेश = चिह्न सहित सीधा जोड़। +3 µC और −5 µC मिलकर −2 µC।
- संरक्षण: अलग-थलग निकाय का कुल आवेश कभी नहीं बदलता। रगड़ना, छूना — ये आवेश को केवल खिसकाते हैं।
- क्वांटीकरण: हर आवेश इलेक्ट्रॉन के आवेश का पूर्ण गुणज है: q = ne, e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C, n पूर्णांक।
आवेशित करने के तरीके
घर्षण (रगड़ से इलेक्ट्रॉन जाते हैं), चालन (छूकर आवेश बँटता है) और प्रेरण (आवेशित छड़ पास लाओ, दूर वाले सिरे को भू-संपर्कित करो, फिर संपर्क और छड़ हटाओ — पिंड पर उल्टा आवेश रह जाता है)। चालक में आवेश आसानी से चलता है, कुचालक में नहीं।
करके देखो: प्लास्टिक का स्केल सूखे बालों पर रगड़ो और नल की पतली धार के पास लाओ। धार स्केल की ओर मुड़ जाती है।
कूलॉम का नियम
निर्वात में r दूरी पर रखे दो बिंदु आवेशों q₁ और q₂ के बीच बल:
F = k q₁q₂ / r², जहाँ k = 1/(4πε₀) = 9 × 10⁹ N m² C⁻² और ε₀ = 8.85 × 10⁻¹² C² N⁻¹ m⁻²।
- बल दोनों आवेशों को जोड़ने वाली रेखा पर लगता है।
- यह व्युत्क्रम-वर्ग नियम है, गुरुत्व जैसा, पर यह धकेल भी सकता है और बहुत अधिक प्रबल है।
- परावैद्युतांक K वाले माध्यम में बल F/K हो जाता है।
सदिश रूप: F₁₂ = −F₂₁ (न्यूटन का तीसरा नियम)।
1 कूलॉम वह आवेश है जो निर्वात में 1 m दूर रखे बराबर आवेश को 9 × 10⁹ N से धकेले — बहुत बड़ा, इसलिए प्रयोग में µC या nC लेते हैं।
कई आवेशों के बीच बल: अध्यारोपण का सिद्धांत
कई आवेश हों तो हर जोड़ी ऐसे काम करती है जैसे बाकी मौजूद ही न हों। किसी आवेश पर कुल बल = बाकी सब बलों का सदिश योग:
F₁ = F₁₂ + F₁₃ + F₁₄ + …
हल करने का तरीका
- हर बल का तीर बनाओ (प्रतिकर्षण = दूर, आकर्षण = पास)।
- कूलॉम नियम से हर बल का मान निकालो।
- x और y घटक अलग जोड़ो, फिर F = √(Fx² + Fy²)।
सममिति से समय बचता है: वर्ग या समबाहु त्रिभुज के कोनों पर बराबर आवेश हों तो केंद्र पर कुल बल शून्य।
संतत आवेश वितरण
आवेशित छड़, चादर या गेंद पर आवेश फैला होता है, इसलिए घनत्व लेते हैं:
- रैखिक λ = प्रति मीटर आवेश (C/m) — तार।
- पृष्ठीय σ = प्रति वर्ग मीटर आवेश (C/m²) — चादर या कोश।
- आयतन ρ = प्रति घन मीटर आवेश (C/m³) — ठोस गोला।
पिंड को छोटे टुकड़ों dq में बाँटते हैं, हर टुकड़े को बिंदु आवेश मानकर सबका क्षेत्र जोड़ते (समाकलन करते) हैं। सममित आकृतियों में गाउस नियम यह समाकलन बचा देता है।
बिंदु आवेश का विद्युत क्षेत्र
किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र = वहाँ रखे छोटे धन परीक्षण आवेश q₀ पर प्रति इकाई आवेश बल: E = F / q₀। मात्रक N/C (या V/m)। यह सदिश है।
बिंदु आवेश q के लिए: E = kq / r², + से बाहर की ओर, − की ओर अंदर। E पता हो तो किसी भी आवेश पर बल F = qE।
परीक्षण आवेश बहुत छोटा होना चाहिए ताकि वह स्रोत आवेशों को न खिसकाए।
विद्युत क्षेत्र रेखाएँ
क्षेत्र रेखा वह वक्र है जिसकी हर बिंदु पर स्पर्श रेखा E की दिशा बताती है।
- + आवेश से शुरू, − पर खत्म (या अनंत तक)।
- कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं — वरना एक बिंदु पर E की दो दिशाएँ होतीं।
- पास-पास रेखाएँ = तेज़ क्षेत्र।
- स्थिरवैद्युत में बंद लूप नहीं बनातीं।
- चालक की सतह से 90° पर मिलती हैं।
आकृतियाँ: अकेला + (सीधे बाहर), अकेला − (सीधे अंदर), + और − (रेखाएँ + से − की ओर मुड़ती हैं), दो बराबर + (रेखाएँ दूर हटती हैं, बीच में उदासीन बिंदु), एकसमान क्षेत्र (समांतर, बराबर दूरी)।
वैद्युत द्विध्रुव और उसका क्षेत्र
वैद्युत द्विध्रुव = +q और −q, छोटी दूरी 2a पर। द्विध्रुव आघूर्ण p = q × 2a, सदिश, दिशा − से + की ओर। मात्रक C m। पानी का अणु प्राकृतिक द्विध्रुव है।
अक्ष पर क्षेत्र
केंद्र से r दूरी पर: E = 2kpr/(r² − a²)², r ≫ a के लिए E_अक्षीय = 2kp/r³, p की दिशा में।
निरक्ष (विषुवत) रेखा पर क्षेत्र
E = kp/(r² + a²)^{3/2}, r ≫ a के लिए E_निरक्ष = kp/r³, p के उल्टी दिशा में।
दूर जाकर द्विध्रुव का क्षेत्र 1/r³ से घटता है — अकेले आवेश (1/r²) से तेज़, क्योंकि + और − लगभग एक-दूसरे को काट देते हैं। एक ही दूरी पर E_अक्षीय = 2 × E_निरक्ष।
व्युत्पत्ति का विचार (अक्षीय)
+ आवेश r − a दूरी पर, − आवेश r + a पर। E = kq/(r − a)² − kq/(r + a)² = kq·4ar/(r² − a²)² = 2kpr/(r² − a²)²।
एकसमान क्षेत्र में द्विध्रुव पर बल-आघूर्ण
एकसमान क्षेत्र E में + सिरे पर qE, E की दिशा में, और − सिरे पर qE उल्टी दिशा में। कुल बल = 0, इसलिए द्विध्रुव खिसकता नहीं। पर दोनों बल अलग-अलग रेखाओं पर हैं, इसलिए बल-युग्म बनता है:
τ = (qE)(2a sinθ) = pE sinθ, सदिश रूप में τ = p × E।
- θ = 0°: τ = 0, स्थायी संतुलन।
- θ = 90°: τ = pE, अधिकतम।
- θ = 180°: τ = 0 पर अस्थायी संतुलन।
असमान क्षेत्र में दोनों बल बराबर नहीं रहते, इसलिए कुल बल भी लगता है — इसी से आवेशित कंघी उदासीन कागज़ को खींच लेती है।
विद्युत फ्लक्स
किसी सतह से विद्युत फ्लक्स बताता है कि कितनी क्षेत्र रेखाएँ उसमें से गुज़रती हैं:
Φ = E · A = EA cosθ, θ = E और सतह के बाहरी अभिलंब के बीच कोण। मात्रक N m² C⁻¹। अदिश राशि।
- E सतह के लंबवत (θ = 0): Φ = EA, अधिकतम।
- E सतह के समांतर (θ = 90°): Φ = 0।
- बाहर निकलती रेखाएँ +, अंदर आती −।
गाउस प्रमेय और उसके अनुप्रयोग: तार, समतल चादर, पतला गोलीय कोश
गाउस नियम: किसी बंद सतह से कुल फ्लक्स = अंदर का आवेश ÷ ε₀: ∮E·dA = q_अंदर / ε₀। बाहर के आवेश का कुल फ्लक्स शून्य (जो रेखा घुसती है, वह निकल भी जाती है)।
तरीका: ऐसी काल्पनिक बंद सतह (गाउसीय सतह) चुनो जिस पर E का मान बराबर हो और वह सतह के लंबवत या समांतर हो।
1. अनंत लंबा सीधा तार (λ प्रति मीटर)
त्रिज्या r, लंबाई l का बेलन। फ्लक्स केवल वक्र सतह से: E(2πrl) = λl/ε₀ → E = λ/(2πε₀r)। E ∝ 1/r।
2. अनंत समतल चादर (σ प्रति m²)
चादर को पार करता छोटा बेलन, सिरे का क्षेत्रफल A। दोनों सिरों से फ्लक्स: 2EA = σA/ε₀ → E = σ/(2ε₀)। दूरी पर निर्भर नहीं।
3. पतला गोलीय कोश (आवेश q, त्रिज्या R)
बाहर (r > R): E(4πr²) = q/ε₀ → E = kq/r², मानो सारा आवेश केंद्र पर हो। अंदर (r < R): अंदर आवेश नहीं → E = 0। सतह पर E = σ/ε₀।
बोर्ड परीक्षा में क्या पूछा जाता है
इकाई I और II मिलकर लगभग 16 अंक। अक्सर: द्विध्रुव का अक्षीय/निरक्षीय क्षेत्र, बल-आघूर्ण, गाउस नियम से तार/चादर/कोश का क्षेत्र — व्युत्पत्ति; क्षेत्र रेखाओं के चित्र; अध्यारोपण वाला 2–3 अंक का आंकिक प्रश्न और फ्लक्स का प्रश्न। व्युत्पत्ति में गाउसीय सतह का चित्र ज़रूर बनाओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- q = ne, e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C
- F = k q₁q₂ / r², k = 1/(4πε₀) = 9 × 10⁹ N m² C⁻²
- F_कुल = F₁ + F₂ + … (सदिश योग)
- E = F / q₀; बिंदु आवेश E = kq / r²
- p = q × 2a; E_अक्षीय = 2kp/r³; E_निरक्ष = kp/r³
- τ = p × E, τ = pE sinθ
- Φ = EA cosθ; ∮E·dA = q_अंदर/ε₀
- तार E = λ/(2πε₀r); चादर E = σ/(2ε₀); कोश E = kq/r² (बाहर), 0 (अंदर)
हल किए गए उदाहरण
1. उदासीन पिंड से कितने इलेक्ट्रॉन निकालें कि उस पर +3.2 µC आवेश हो?
n = q/e = 3.2 × 10⁻⁶ / 1.6 × 10⁻¹⁹ = 2 × 10¹³ इलेक्ट्रॉन।
2. +2 µC और −3 µC हवा में 30 cm दूर हैं। बल ज्ञात करो।
F = 9 × 10⁹ × 2 × 10⁻⁶ × 3 × 10⁻⁶ / (0.3)² = 0.054/0.09 = 0.6 N, आकर्षण।
3. दो आवेशों के बीच बल 16 N है। दूरी दोगुनी और हर आवेश आधा कर दिया। नया बल?
नया = 16 × (½ × ½) / 2² = 16 × ¼ / 4 = 1 N।
4. A पर +1 µC और B पर +4 µC, दूरी 3 m। बीच में किस बिंदु पर तीसरे आवेश पर कुल बल शून्य होगा?
A से x दूरी: 1/x² = 4/(3 − x)² → 3 − x = 2x → x = 1 m (छोटे आवेश के पास)।
5. 10 cm भुजा वाले समबाहु त्रिभुज के कोनों पर +2 µC के तीन आवेश हैं। किसी एक पर बल?
हर बल = 9 × 10⁹ × (2 × 10⁻⁶)² / 0.01 = 3.6 N, बीच का कोण 60°। F = 3.6√3 ≈ 6.24 N, बाहर की ओर समद्विभाजक पर।
6. ±5 nC वाले द्विध्रुव में दूरी 2 mm है। p और अक्ष पर 10 cm दूर क्षेत्र?
p = 5 × 10⁻⁹ × 2 × 10⁻³ = 10⁻¹¹ C m। E = 2kp/r³ = 2 × 9 × 10⁹ × 10⁻¹¹ / 10⁻³ = 180 N/C।
7. 4 × 10⁻⁹ C m का द्विध्रुव 5 × 10⁴ N/C के एकसमान क्षेत्र से 30° पर है। बल-आघूर्ण?
τ = pE sinθ = 4 × 10⁻⁹ × 5 × 10⁴ × 0.5 = 1 × 10⁻⁴ N m।
8. 10 cm भुजा का वर्ग 200 N/C के एकसमान क्षेत्र में है, क्षेत्र अभिलंब से 60° पर। फ्लक्स?
Φ = EA cosθ = 200 × 0.01 × 0.5 = 1 N m² C⁻¹।
9. लंबे तार पर λ = 2 µC/m। 20 cm पर E?
E = 2kλ/r = 2 × 9 × 10⁹ × 2 × 10⁻⁶ / 0.2 = 1.8 × 10⁵ N/C।
10. 10 cm त्रिज्या के कोश पर +8 nC। केंद्र से 5 cm और 20 cm पर E?
5 cm (अंदर): E = 0। 20 cm: E = 9 × 10⁹ × 8 × 10⁻⁹ / 0.04 = 1800 N/C।
आम गलतियाँ
- कूलॉम नियम में µC को C (× 10⁻⁶) और cm को m में बदलना भूल जाना।
- कई आवेशों के बलों को सदिश की जगह सीधे अंकों में जोड़ देना।
- यह मानना कि बंद सतह का फ्लक्स बाहर के आवेश पर निर्भर है — बाहर के आवेश का कुल फ्लक्स शून्य है।
- द्विध्रुव सूत्र उलझाना: अक्षीय 2kp/r³, निरक्ष kp/r³, और p की दिशा − से + की ओर।