गरम चीज़ें क्यों चमकती हैं? (कृष्णिका विकिरण)
हर वस्तु के छोटे-छोटे कण हिलते रहते हैं, इसलिए वह प्रकाश छोड़ती है। वस्तु जितनी गरम, उतना ज़्यादा प्रकाश और उतना नीला सबसे तेज़ रंग। लोहे की छड़ गरम करो तो पहले फीकी लाल, फिर नारंगी, फिर सफ़ेद दिखती है।
कृष्णिका (black body) क्या है?
कृष्णिका एक आदर्श वस्तु है जो अपने ऊपर पड़ा सारा प्रकाश सोख लेती है और गरम होने पर सबसे आदर्श ढंग से प्रकाश छोड़ती है। उसके रंगों का वक्र सिर्फ़ तापमान पर निर्भर करता है, इस पर नहीं कि वह किस चीज़ की बनी है। छोटे छेद वाली भट्टी और तारे लगभग कृष्णिका जैसे हैं। यह मत सोचो कि वह काली ही दिखेगी: गरम होने पर वह खूब चमकती है।
वीन का नियम: सबसे तेज़ तरंगदैर्घ्य λmax = 2.898 × 10⁻³ m K ÷ T। वस्तु जितनी गरम, तरंगदैर्घ्य उतना छोटा।
पहेली: पुराने विचार में क्या गड़बड़ थी
1900 से पहले वैज्ञानिक मानते थे कि गरम वस्तु हर रंग में कोई भी मात्रा की ऊर्जा छोड़ सकती है। उनके हिसाब से नीला और पराबैंगनी प्रकाश बढ़ता ही जाना चाहिए था। तब हर भट्टी खतरनाक पराबैंगनी किरणें छोड़ती। असल भट्टियाँ ऐसा नहीं करतीं। इस असफलता को पराबैंगनी विपदा (ultraviolet catastrophe) कहते हैं। 3D में लाल पारदर्शी छड़ें पुराना अनुमान हैं और रंगीन छड़ें सच्चाई।
प्लांक की परिकल्पना: ऊर्जा पैकेट में
1900 में मैक्स प्लांक ने साहसी अनुमान लगाया। गरम वस्तु के हिलते कण ऊर्जा सिर्फ़ पूरे पैकेटों में दे या ले सकते हैं, छोटे टुकड़ों में कभी नहीं। f आवृत्ति के प्रकाश का एक पैकेट
E = h f, और छोड़ी गई कुल ऊर्जा हमेशा E = n h f होती है, जहाँ n = 1, 2, 3, …
यहाँ h = 6.63 × 10⁻³⁴ J s प्लांक नियतांक है। इसे ऊर्जा का क्वांटमीकरण कहते हैं: "क्वांटम" यानी निश्चित छोटी मात्रा।
पहेली कैसे सुलझी: बैंगनी पैकेट बड़ा है, इसलिए गरम वस्तु के पास उसे बनाने लायक ऊर्जा कम ही होती है। बहुत कम बैंगनी पैकेट निकलते हैं और ज़्यादा आवृत्ति पर चमक घटती है, जैसा असल वस्तुओं में दिखता है।
हमें सीढ़ियाँ दिखती क्यों नहीं?
h बहुत ही छोटा है। झूलते पेंडुलम या गरम कप के लिए सीढ़ियाँ इतनी छोटी हैं कि सीढ़ी चिकनी ढलान जैसी लगती है।
फ़ोटॉन: प्रकाश के पैकेट
1905 में आइंस्टाइन ने और आगे बढ़कर कहा: प्रकाश खुद पैकेटों में चलता है। एक पैकेट एक फ़ोटॉन है। उसकी ऊर्जा E = hf = hc/λ है। फ़ोटॉन का द्रव्यमान नहीं होता और वह निर्वात में हमेशा प्रकाश की चाल c = 3 × 10⁸ m/s से चलता है।
तेज़ प्रकाश का मतलब ज़्यादा फ़ोटॉन, बड़े फ़ोटॉन नहीं। बैंगनी फ़ोटॉन की ऊर्जा लाल फ़ोटॉन से ज़्यादा होती है। परमाणुओं की ऊर्जा अक्सर इलेक्ट्रॉन-वोल्ट में लिखते हैं: 1 eV = 1.6 × 10⁻¹⁹ J।
खुद करके देखो
3D में चरण 2 पर जाओ और ऊर्जा स्लाइडर को धीरे-धीरे खिसकाओ। ढलान वाली और सीढ़ी वाली गेंद देखो। सीढ़ी वाली गेंद कहाँ छलाँग लगाती है? अब चरण 3 में f बढ़ाओ। पहले अनुमान लगाओ: सीढ़ी वाली गेंद ज़्यादा छलाँग लगाएगी या कम? फिर जाँचो। घर पर: चूल्हे की कुंडली या टोस्टर को गरम होते देखो और रंगों के बदलाव लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- E = h f (एक फ़ोटॉन)
- E = n h f (n = 1, 2, 3 …)
- c = f λ, इसलिए E = h c / λ
- h = 6.63 × 10⁻³⁴ J s; c = 3 × 10⁸ m/s
- 1 eV = 1.6 × 10⁻¹⁹ J
- वीन: λmax × T = 2.898 × 10⁻³ m K
हल किए गए उदाहरण
1. लाल प्रकाश की आवृत्ति 4.5 × 10¹⁴ Hz है। एक फ़ोटॉन की ऊर्जा ज्ञात करो।
E = hf = 6.63 × 10⁻³⁴ × 4.5 × 10¹⁴ = 2.98 × 10⁻¹⁹ J। eV में: 2.98 × 10⁻¹⁹ ÷ 1.6 × 10⁻¹⁹ ≈ 1.9 eV।
2. हरे प्रकाश का तरंगदैर्घ्य 500 nm है। उसकी आवृत्ति और फ़ोटॉन ऊर्जा ज्ञात करो।
f = c/λ = 3 × 10⁸ / 5 × 10⁻⁷ = 6 × 10¹⁴ Hz। E = hf = 6.63 × 10⁻³⁴ × 6 × 10¹⁴ = 3.98 × 10⁻¹⁹ J ≈ 2.5 eV।
3. सूर्य की सतह का तापमान लगभग 5800 K है। वह किस तरंगदैर्घ्य पर सबसे तेज़ चमकता है?
λmax = 2.898 × 10⁻³ / 5800 = 5.0 × 10⁻⁷ m = 500 nm, यानी हरा-पीला प्रकाश।
4. एक तारा 290 nm पर सबसे तेज़ चमकता है। उसका तापमान लगभग कितना है?
T = 2.898 × 10⁻³ / 2.9 × 10⁻⁷ ≈ 10 000 K। यह सूर्य से बहुत गरम है, इसलिए नीला-सफ़ेद दिखता है।
5. एक लैंप 2 W हरा प्रकाश छोड़ता है, जिसके फ़ोटॉन की ऊर्जा 3.98 × 10⁻¹⁹ J है। हर सेकंड कितने फ़ोटॉन निकलते हैं?
प्रति सेकंड संख्या = शक्ति ÷ एक फ़ोटॉन की ऊर्जा = 2 / 3.98 × 10⁻¹⁹ ≈ 5.0 × 10¹⁸ फ़ोटॉन प्रति सेकंड।
6. कितने लाल फ़ोटॉन (4 × 10¹⁴ Hz) की ऊर्जा एक बैंगनी फ़ोटॉन (8 × 10¹⁴ Hz) के बराबर होगी?
ऊर्जा f के समानुपाती है। बैंगनी की आवृत्ति दुगुनी है, तो ऊर्जा भी दुगुनी। यानी 2 लाल फ़ोटॉन।
आम गलतियाँ
- सोचना कि कृष्णिका हमेशा काली दिखेगी। गरम होने पर वह खूब चमकती है।
- सोचना कि तेज़ प्रकाश यानी बड़े फ़ोटॉन। तेज़ का मतलब ज़्यादा फ़ोटॉन है; फ़ोटॉन का आकार सिर्फ़ आवृत्ति से तय होता है।
- f और λ को उलझाना। ज़्यादा आवृत्ति का मतलब छोटा तरंगदैर्घ्य और ज़्यादा फ़ोटॉन ऊर्जा।
- E = hf लगाने से पहले nm को m (1 nm = 10⁻⁹ m) और eV को J में बदलना भूल जाना।