नाभिक के अंदर
परमाणु ज़्यादातर खाली है। लगभग सारा द्रव्यमान बीच के छोटे हिस्से नाभिक में है, जो लगभग 10⁻¹⁵ m का है (परमाणु से 1,00,000 गुना छोटा)।
नाभिक में प्रोटॉन (आवेश +1, द्रव्यमान लगभग 1 u) और न्यूट्रॉन (कोई आवेश नहीं, द्रव्यमान लगभग 1 u) होते हैं। दोनों को मिलाकर न्यूक्लिऑन कहते हैं।
- परमाणु संख्या Z = प्रोटॉन की संख्या। यही तत्व तय करती है।
- द्रव्यमान संख्या A = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन। न्यूट्रॉन N = A − Z।
- संकेत: ᴬ_Z X, जैसे ¹⁴₆C में 6 प्रोटॉन और 8 न्यूट्रॉन।
प्रोटॉन एक-दूसरे को धकेलते हैं। उन्हें प्रबल नाभिकीय बल बाँधे रखता है, जो बहुत शक्तिशाली है पर सिर्फ़ लगभग 3 × 10⁻¹⁵ m तक काम करता है।
समस्थानिक
समस्थानिक एक ही तत्व (वही Z) के वे परमाणु हैं जिनमें न्यूट्रॉन अलग (A अलग) होते हैं। इनका रासायनिक व्यवहार एक जैसा पर द्रव्यमान अलग होता है, और कुछ अस्थिर होते हैं। उदाहरण: हाइड्रोजन-1, ड्यूटेरियम (²H), ट्रिटियम (³H); कार्बन-12 (स्थिर) और कार्बन-14 (रेडियोधर्मी); यूरेनियम-235 और यूरेनियम-238।
रेडियोधर्मी क्षय: अल्फ़ा, बीटा, गामा
अस्थिर नाभिक विकिरण छोड़कर ज़्यादा स्थिर बनता है। इसे रेडियोधर्मी क्षय कहते हैं। यह यादृच्छिक है (कौन-सा नाभिक कब टूटेगा, नहीं कह सकते) और स्वतः है (गर्मी या दबाव से नहीं बदलता)।
| प्रकार | क्या है | बदलाव | किससे रुकता है | आयनन |
|---|---|---|---|---|
| अल्फ़ा α | ⁴₂He नाभिक | A − 4, Z − 2 | कागज़, कुछ cm हवा | तेज़ |
| बीटा β⁻ | तेज़ इलेक्ट्रॉन | A वही, Z + 1 | कुछ mm एल्युमिनियम | मध्यम |
| गामा γ | उच्च ऊर्जा EM तरंग | A, Z में बदलाव नहीं | मोटा सीसा/कंक्रीट (घटती है) | कमज़ोर |
क्षय समीकरण
दोनों ओर A और Z बराबर होने चाहिए।
α: ²³⁸₉₂U → ²³⁴₉₀Th + ⁴₂He
β⁻: ¹⁴₆C → ¹⁴₇N + ⁰₋₁e (+ एंटीन्यूट्रिनो)
β⁺ (पॉज़िट्रॉन) क्षय भी होता है: प्रोटॉन न्यूट्रॉन बनता है और Z 1 घटता है।
पृष्ठभूमि विकिरण चट्टानों (रेडॉन गैस), कॉस्मिक किरणों, भोजन और मेडिकल स्कैन से आता है।
अर्ध-आयु
अर्ध-आयु वह समय है जिसमें नमूने के आधे अस्थिर नाभिक (या उसकी सक्रियता) क्षय हो जाते हैं। n अर्ध-आयु के बाद बचा भाग (½)ⁿ है।
सक्रियता बेक्वेरेल में नापी जाती है (1 Bq = 1 क्षय प्रति सेकंड)। अर्ध-आयु सेकंड के हिस्से से अरबों साल तक होती है (यूरेनियम-238: 4.5 अरब साल; कार्बन-14: लगभग 5,730 साल; आयोडीन-131: 8 दिन)।
मूल कण और नाभिकीय ऊर्जा
प्रोटॉन और न्यूट्रॉन और छोटे कणों क्वार्क से बने हैं (प्रोटॉन = अप, अप, डाउन; न्यूट्रॉन = अप, डाउन, डाउन)। इलेक्ट्रॉन और न्यूट्रिनो लेप्टॉन हैं। हर कण का एक प्रतिकण होता है, जिसका द्रव्यमान वही पर आवेश उल्टा होता है (पॉज़िट्रॉन इलेक्ट्रॉन का प्रतिकण है)।
बीटा क्षय में एक डाउन क्वार्क अप बन जाता है, तो न्यूट्रॉन प्रोटॉन बन जाता है।
बड़े नाभिक टूट सकते हैं (विखंडन) और छोटे जुड़ सकते हैं (संलयन); दोनों में थोड़ा द्रव्यमान ऊर्जा बनता है (E = mc²), इसलिए बहुत ऊर्जा निकलती है। विस्तार अगले पाठ में।
सुरक्षा और उपयोग
विकिरण कोशिकाओं और DNA को नुकसान कर सकता है। दूरी रखो, समय कम करो, आवरण (शील्ड) लगाओ। उपयोग: चिकित्सा जाँच और इलाज, कीटाणुरहित करना, उम्र निकालना, धुआँ-संसूचक, मोटाई नापना और बिजली।
करके देखो
32 सिक्के उछालो; सारे "चित" हटा दो। फिर उछालो और गिनो। हर बार संख्या लगभग आधी होती है, ठीक वैसे ही जैसे हर अर्ध-आयु में नाभिक।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- A = Z + N
- अल्फ़ा: ᴬ_Z X → ᴬ⁻⁴_{Z−2}Y + ⁴₂He
- बीटा: ᴬ_Z X → ᴬ_{Z+1}Y + ⁰₋₁e
- गामा: A और Z में कोई बदलाव नहीं
- n अर्ध-आयु बाद बचा भाग = (½)ⁿ
- सक्रियता: 1 Bq = 1 क्षय प्रति सेकंड
- प्रोटॉन = uud, न्यूट्रॉन = udd
हल किए गए उदाहरण
1. ²³⁵₉₂U में कितने प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और न्यूक्लिऑन हैं?
प्रोटॉन Z = 92। न्यूक्लिऑन A = 235। न्यूट्रॉन N = 235 − 92 = 143।
2. रेडियम-226 (Z = 88) अल्फ़ा कण छोड़ता है। क्या बनेगा?
A = 226 − 4 = 222, Z = 88 − 2 = 86। Z = 86 रेडॉन है: ²²⁶₈₈Ra → ²²²₈₆Rn + ⁴₂He।
3. स्ट्रॉन्शियम-90 (Z = 38) बीटा उत्सर्जक है। उत्पाद लिखो।
A 90 ही, Z = 38 + 1 = 39 (इट्रियम): ⁹⁰₃₈Sr → ⁹⁰₃₉Y + ⁰₋₁e।
4. एक नमूने की सक्रियता 800 Bq और अर्ध-आयु 3 घंटे है। 12 घंटे बाद सक्रियता?
12 ÷ 3 = 4 अर्ध-आयु। 800 → 400 → 200 → 100 → 50 Bq।
5. एक लकड़ी के औज़ार में जीवित लकड़ी का ¼ कार्बन-14 है। अर्ध-आयु 5,730 साल। उम्र?
¼ = (½)², यानी 2 अर्ध-आयु = 2 × 5,730 = 11,460 साल।
6. U-238 (Z 92) α और β⁻ क्षय से Pb-206 (Z 82) बनता है। कितने अल्फ़ा और बीटा?
A घटा 238 − 206 = 32; A सिर्फ़ अल्फ़ा से बदलता है: 32 ÷ 4 = 8 अल्फ़ा। 8 अल्फ़ा से Z 16 घटकर 76, पर अंत में 82 चाहिए, तो 82 − 76 = 6 बीटा।
आम गलतियाँ
- बीटा क्षय में द्रव्यमान संख्या बदलना मानना। β⁻ में A वही रहता है; सिर्फ़ Z 1 बढ़ता है।
- दो अर्ध-आयु बाद कुछ नहीं बचता, ऐसा सोचना। ¼ बचता है, 0 नहीं।
- समस्थानिकों को अलग तत्व मानना। Z वही तो तत्व वही।
- गामा को द्रव्यमान वाला कण मानना जो नाभिक बदल दे। यह ऊर्जा ले जाने वाली EM तरंग है।