Russia 9 класс Physics (advanced)
अध्याय: 6
1. Mechanical phenomena
Describing motion · Vectors in mechanics · Straight-line motion · Projectile and circular motion · Newton's laws · Bernoulli's law · Gravitation · Statics · Momentum · Work and energy
- गति: दूरी, चाल, वेग, त्वरण और ग्राफ़ – जब किसी चीज़ की जगह समय के साथ बदलती है, तो वह गति में है। दूरी पूरे रास्ते की लंबाई है (अदिश); विस्थापन शुरू से आख़िर तक की सीधी दूरी है, दिशा के साथ (सदिश)। चाल = दूरी ÷ समय; वेग = विस्थापन ÷ समय। त्वरण = वेग में बदलाव ÷ समय। s–t ग्राफ़ का ढाल वेग देता है, v–t ग्राफ़ का ढाल त्वरण, और v–t ग्राफ़ के नीचे का क्षेत्रफल दूरी। एकसमान त्वरण के लिए: v = u + at, s = ut + ½at², v² = u² + 2as।
- समतल में गति के लिए अदिश और सदिश (कक्षा 11) – अदिश में सिर्फ परिमाण होता है; सदिश में परिमाण और दिशा दोनों। परिमाण और दिशा समान हों तो सदिश बराबर। किसी संख्या से गुणा करने पर लंबाई बदलती है (ऋणात्मक संख्या दिशा उल्टी कर देती है)। सदिश पूँछ-से-सिर जुड़ते हैं; A − B = A + (−B)। समतल का हर सदिश A = Ax î + Ay ĵ, जहाँ Ax = A cos θ, Ay = A sin θ। A·B = AB cos θ एक अदिश है; A×B का परिमाण AB sin θ और दिशा दोनों के लंबवत।
- प्रक्षेप्य गति और एकसमान वृत्तीय गति (कक्षा 11) – समतल में r = r₀ + v₀t + ½at² और v = v₀ + at, x और y पर अलग-अलग लगते हैं। प्रक्षेप्य का क्षैतिज वेग u cos θ स्थिर रहता है और ऊर्ध्वाधर वेग हर सेकंड g से बदलता है, इसलिए पथ परवलय है: y = x tan θ − gx²/(2u²cos²θ)। T = 2u sin θ/g, H = u² sin²θ/2g, R = u² sin 2θ/g (45° पर अधिकतम)। एकसमान वृत्तीय गति में चाल स्थिर पर वेग की दिशा घूमती है, इसलिए केंद्र की ओर अभिकेंद्र त्वरण a = v²/r = ω²r होता है।
- बल तथा गति के नियम – बल एक धक्का या खिंचाव है। संतुलित बल (नेट बल शून्य) गति नहीं बदलते; असंतुलित बल चाल या दिशा बदलता है। घर्षण फिसलने का विरोध करता है। पहला नियम: कोई चीज़ अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था में रहती है जब तक असंतुलित बल न लगे (जड़त्व; भारी चीज़ का जड़त्व ज़्यादा)। संवेग p = mv। दूसरा नियम: F = ma (संवेग बदलने की दर), 1 N = 1 kg m/s²। तीसरा नियम: बल जोड़ों में आते हैं, बराबर और उलटे, दो अलग चीज़ों पर। बाहरी बल न हो तो तंत्र के आंतरिक बल कट जाते हैं और कुल संवेग संरक्षित रहता है।
- श्यानता, स्टोक्स का नियम और बर्नूली प्रमेय – बहता तरल एक-दूसरे पर फिसलती परतों जैसा है। परतों के बीच का घर्षण श्यानता (viscosity) है: F = ηA(dv/dx)। तरल में गिरती छोटी गेंद पर श्यान बल F = 6πηrv लगता है (स्टोक्स नियम); जब श्यान बल + उत्प्लावन बल भार के बराबर हो जाए, तो गेंद स्थिर सीमांत वेग से गिरती है। धीमा बहाव धारारेखी होता है; क्रांतिक वेग (रेनॉल्ड्स संख्या लगभग 2000) के ऊपर विक्षुब्ध। स्थिर धारारेखी प्रवाह में Av नियत (सांतत्य) और P + ½ρv² + ρgh नियत (बर्नूली)। यानी तेज़ बहाव पर दाब कम। इसी से टॉरिसेली का बहिःस्राव वेग √(2gh), वेंचुरीमीटर और पंखों व घूमती गेंद पर उत्थापक बल समझ आते हैं।
- न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम – ब्रह्मांड की हर वस्तु हर दूसरी वस्तु को अपनी ओर खींचती है। r दूरी पर रखे दो द्रव्यमानों m₁ और m₂ के बीच खिंचाव F = G m₁ m₂ / r² होता है। यह बल दोनों को मिलाने वाली रेखा पर लगता है। दोनों एक-दूसरे को बराबर और उलटी दिशा में खींचते हैं। G = 6.67 × 10⁻¹¹ N m² kg⁻² हर जगह एक जैसा है, इसलिए इसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहते हैं। कई द्रव्यमान एक वस्तु को खींचें तो बल सदिश की तरह जुड़ते हैं (अध्यारोपण)।
- बल-आघूर्ण, कोणीय संवेग और दृढ़ पिंडों का संतुलन – बल-आघूर्ण (torque) बल का घुमाने वाला असर है: τ = r × F, परिमाण rF sinθ, मात्रक N m। कोणीय संवेग संवेग का घूमने वाला रूप है: L = r × p; स्थिर अक्ष पर घूमते पिंड के लिए L = Iω। बल-आघूर्ण कोणीय संवेग बदलता है: τ = dL/dt। बाहरी बल-आघूर्ण शून्य हो तो L नहीं बदलता, इसलिए द्रव्यमान अंदर खींचने पर पिंड तेज़ घूमता है। दृढ़ पिंड संतुलन में तब है जब कुल बल शून्य (खिसकना नहीं) और किसी भी बिंदु के परितः कुल बल-आघूर्ण शून्य (घूमना नहीं) हो।
- तीसरा नियम, संवेग संरक्षण और बलों का संतुलन – बल हमेशा जोड़े में होते हैं: A ने B पर बल लगाया तो उसी पल B भी A पर बराबर और उलटा बल लगाता है (तीसरा नियम)। यह जोड़ा अलग-अलग वस्तुओं पर लगता है। जिस निकाय पर कोई नेट बाहरी बल न हो, उसका कुल रैखिक संवेग स्थिर रहता है; इससे प्रतिक्षेप, रॉकेट और टक्करें समझ आती हैं। कोई कण संतुलन में है जब उस पर सारे बलों का योग शून्य हो; संतुलन वाले तीन संगामी बल एक बंद त्रिभुज बनाते हैं।
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति – जब बल किसी वस्तु को खिसकाता है, तब कार्य होता है: W = F × s, मात्रक जूल (J)। ऊर्जा यानी कार्य करने की क्षमता। चलती वस्तु में गतिज ऊर्जा ½mv² होती है, ऊँचाई पर रखी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा mgh। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W ÷ t, मात्रक वाट। उत्तोलक और घिरनी जैसी सरल मशीनें कम बल से भारी वस्तु उठाने में मदद करती हैं।
2. Mechanical oscillations and waves
Oscillations · Mechanical waves · Sound
- स्प्रिंग के दोलन और सरल लोलक – स्प्रिंग से बँधा गुटका F = −kx का खिंचाव महसूस करता है, जहाँ k बल नियतांक (कठोरता) है। यह SHM करता है, T = 2π√(m/k)। सरल लोलक छोटे झूलों में mg sinθ ≈ mgθ का खिंचाव महसूस करता है और SHM करता है, T = 2π√(L/g)। लोलक का आवर्तकाल गोलक के द्रव्यमान पर और (छोटे झूलों में) आयाम पर निर्भर नहीं करता।
- ध्वनि – ध्वनि कंपन करती वस्तुओं से बनती है। यह किसी माध्यम (हवा, पानी, ठोस) में अनुदैर्ध्य तरंग के रूप में चलती है: कण आगे-पीछे हिलते हैं, कहीं घने हो जाते हैं (संपीडन) और कहीं फैल जाते हैं (विरलन)। आवृत्ति (Hz) से तारत्व (पिच), आयाम से प्रबलता तय होती है, और चाल v = f × λ। निर्वात में ध्वनि नहीं चलती। हम 20 Hz से 20,000 Hz सुनते हैं; इससे कम अवश्रव्य, ज़्यादा पराश्रव्य। परावर्तित ध्वनि से प्रतिध्वनि बनती है।
3. Electromagnetic field and waves
Electromagnetic waves · Wave properties of light
- विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम – विद्युतचुंबकीय (EM) तरंगें बदलते विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों की अनुप्रस्थ तरंगें हैं। इन्हें माध्यम नहीं चाहिए और निर्वात में सब 3 × 10⁸ m/s से चलती हैं। घटती तरंगदैर्ध्य (बढ़ती आवृत्ति और ऊर्जा) के क्रम में: रेडियो, माइक्रोवेव, अवरक्त, दृश्य प्रकाश, पराबैंगनी, एक्स-किरण और गामा किरण। चाल = आवृत्ति × तरंगदैर्ध्य (c = fλ)। हर प्रकार के उपयोग हैं; ज़्यादा ऊर्जा वाली (पराबैंगनी, एक्स, गामा) आयनकारी हैं और जीवित कोशिकाओं को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
- व्यतिकरण (यंग का द्वि-झिरी प्रयोग) और एकल झिरी विवर्तन – दो कला-संबद्ध स्रोत (समान आवृत्ति, स्थिर कलांतर) दीप्त और अदीप्त फ्रिंजों का स्थिर पैटर्न बनाते हैं। पर्दे के किसी बिंदु पर पथांतर Δ = yd/D: Δ = nλ पर दीप्त, Δ = (n + ½)λ पर अदीप्त। सभी फ्रिंज समान चौड़ाई β = λD/d के होते हैं। a चौड़ाई की एकल झिरी विवर्तन देती है: 2λD/a चौड़ा चमकीला केंद्रीय उच्चिष्ठ, पहला निम्निष्ठ a sin θ = λ पर, और हल्के पार्श्व उच्चिष्ठ।
4. Light phenomena
Reflection and mirrors · Refraction · Thin lens formula · Dispersion
- प्रकाश का परावर्तन: समतल और गोलीय दर्पण – चमकदार सतह से टकराकर प्रकाश इस तरह लौटता है कि आपतन कोण और परावर्तन कोण बराबर रहते हैं। समतल दर्पण का प्रतिबिंब आभासी, सीधा, बराबर आकार का और दर्पण के उतना ही पीछे बनता है जितनी वस्तु आगे है। अवतल दर्पण वस्तु की जगह के हिसाब से वास्तविक या आभासी प्रतिबिंब बनाता है, जबकि उत्तल दर्पण हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब देता है। दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f और आवर्धन m = −v/u (नई कार्तीय चिह्न परिपाटी के साथ) से बिना चित्र बनाए प्रतिबिंब निकाल सकते हैं।
- प्रकाश का अपवर्तन: नियम, अपवर्तनांक और काँच का स्लैब – प्रकाश जब एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे में जाता है तो उसकी चाल बदलती है, इसलिए वह सीमा पर मुड़ जाता है (अगर अभिलंब के साथ न गिरे)। प्रकाशिक सघन माध्यम में जाते समय वह धीमा होकर अभिलंब की ओर मुड़ता है, और बाहर आते समय तेज़ होकर अभिलंब से दूर। दो माध्यमों के लिए sin i / sin r स्थिर रहता है (स्नेल का नियम); यही स्थिरांक अपवर्तनांक है, जो प्रकाश की चालों का अनुपात भी है: n = c/v। आयताकार काँच के स्लैब से निकली किरण आपतित किरण के समांतर होती है, पर थोड़ी खिसकी हुई (पार्श्विक विस्थापन)।
- गोलीय लेंस: प्रतिबिंब, लेंस सूत्र और क्षमता – उत्तल लेंस बीच में मोटा होता है और समांतर प्रकाश को अपने फोकस पर मिलाता है; अवतल लेंस बीच में पतला होता है और प्रकाश को ऐसे फैलाता है मानो फोकस से आ रहा हो। दो आसान किरणों (एक अक्ष के समांतर, एक प्रकाशिक केंद्र से होकर) से किसी भी स्थिति का प्रतिबिंब मिल जाता है। वस्तु F₁ से परे हो तो उत्तल लेंस वास्तविक, उल्टा प्रतिबिंब देता है और F₁ के अंदर हो तो आभासी, सीधा, बड़ा; अवतल लेंस हमेशा आभासी, सीधा, छोटा प्रतिबिंब देता है। लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f, आवर्धन m = v/u और क्षमता P = 1/f (मीटर में, मात्रक डायोप्टर) से आंकिक प्रश्न हल होते हैं।
- काँच के प्रिज़्म से अपवर्तन, प्रकाश का वर्ण विक्षेपण और इंद्रधनुष – काँच का प्रिज़्म प्रकाश को दो बार मोड़ता है, दोनों बार आधार की ओर; कुल मुड़ाव विचलन कोण है। श्वेत प्रकाश का हर रंग थोड़ा अलग मुड़ता है (बैंगनी सबसे अधिक, लाल सबसे कम), इसलिए प्रिज़्म उसे रंगों की पट्टी – स्पेक्ट्रम – में फैला देता है। उल्टा रखा दूसरा प्रिज़्म रंगों को फिर श्वेत बना देता है। वर्षा की बूँदें छोटे प्रिज़्म और दर्पण जैसा काम करके इंद्रधनुष बनाती हैं।
5. Quantum phenomena
Atom models and spectra · Radioactivity and protection · Nuclear reactions and energy
- परमाणु की संरचना – परमाणु के बीच में एक बहुत छोटा, भारी और धनावेशित नाभिक होता है, जिसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन रहते हैं। इलेक्ट्रॉन इसके चारों ओर तय कोशों K, L, M, N में घूमते हैं। प्रोटॉन की संख्या (Z) से तत्व तय होता है; प्रोटॉन + न्यूट्रॉन = द्रव्यमान संख्या (A)। बाहरी इलेक्ट्रॉन संयोजकता तय करते हैं।
- रेडियोधर्मिता: अल्फ़ा, बीटा, गामा और अर्ध-आयु – कुछ परमाणुओं के नाभिक अस्थायी होते हैं। वे स्थायी बनने के लिए अपने आप, यादृच्छिक ढंग से विकिरण छोड़ते हैं। इसे रेडियोधर्मी क्षय कहते हैं। अल्फ़ा (2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन), बीटा (तेज़ इलेक्ट्रॉन) और गामा (ऊर्जा की तरंग) मुख्य तीन प्रकार हैं। अर्ध-आयु वह समय है जिसमें आधे अस्थायी नाभिक क्षय हो जाते हैं।
- नाभिकीय भौतिकी: नाभिक और रेडियोधर्मिता – नाभिक में प्रोटॉन (Z) और न्यूट्रॉन (N) होते हैं; द्रव्यमान संख्या A = Z + N। समस्थानिकों में Z वही पर N अलग होता है। अस्थिर नाभिक अपने-आप क्षय होते हैं: अल्फ़ा क्षय में 2 प्रोटॉन और 2 न्यूट्रॉन निकलते हैं (A − 4, Z − 2), बीटा क्षय में एक न्यूट्रॉन प्रोटॉन बनता है और इलेक्ट्रॉन निकलता है (Z + 1), गामा सिर्फ़ ऊर्जा है। अर्ध-आयु वह समय है जिसमें आधे नाभिक क्षय हो जाते हैं।
6. Review practicum
Problem solving, labs and projects
जल्द आ रहा है