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गोलीय लेंस: प्रतिबिंब, लेंस सूत्र और क्षमता

उत्तल लेंस बीच में मोटा होता है और समांतर प्रकाश को अपने फोकस पर मिलाता है; अवतल लेंस बीच में पतला होता है और प्रकाश को ऐसे फैलाता है मानो फोकस से आ रहा हो। दो आसान किरणों (एक अक्ष के समांतर, एक प्रकाशिक केंद्र से होकर) से किसी भी स्थिति का प्रतिबिंब मिल जाता है। वस्तु F₁ से परे हो तो उत्तल लेंस वास्तविक, उल्टा प्रतिबिंब देता है और F₁ के अंदर हो तो आभासी, सीधा, बड़ा; अवतल लेंस हमेशा आभासी, सीधा, छोटा प्रतिबिंब देता है। लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f, आवर्धन m = v/u और क्षमता P = 1/f (मीटर में, मात्रक डायोप्टर) से आंकिक प्रश्न हल होते हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह उत्तल लेंस है, बीच में मोटा। अक्ष के समांतर किरणें मुड़कर दूसरी ओर एक बिंदु पर मिलती हैं: फोकस F₂। हर तरफ़ एक फोकस है (F₁, F₂), और 2F दुगनी दूरी पर है।
  2. वस्तु 2F₁ से परे रखिए। दो किरणें लीजिए: नारंगी समांतर आकर F₂ से जाती है; हरी-नीली केंद्र O से सीधी निकल जाती है। जहाँ मिलती हैं वहाँ वास्तविक, उल्टा, छोटा प्रतिबिंब बनता है।
  3. अब वस्तु पास आती है: 2F₁ पर, 2F₁ और F₁ के बीच, F₁ पर, फिर F₁ के अंदर। प्रतिबिंब बड़ा होकर दूर जाता है; F₁ पर अनंत पर चला जाता है; F₁ के अंदर आभासी, सीधा और बड़ा हो जाता है, आवर्धक लेंस की तरह।
  4. अवतल लेंस बीच में पतला है। यह किरणों को ऐसे फैलाता है मानो वे F₁ से आ रही हों। वस्तु कहीं भी हो, प्रतिबिंब उसी तरफ़ बनता है: आभासी, सीधा और छोटा।
  5. अंकों में: f = +20 cm और u = −30 cm। लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f से v = +60 cm, और m = v/u = −2: वास्तविक, उल्टा, दुगना बड़ा। बेंच ठीक यही दिखाती है।
  6. क्षमता P = 1/f (मीटर में)। इस लेंस का f = 25 cm है, तो P = +4 D। f बदलकर क्षमता देखिए; वस्तु खींचिए और लेंस बदलकर खोजिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

उत्तल लेंस के बाद समांतर किरणें एक ही बिंदु पर क्यों मिलती हैं?

लेंस का हर हिस्सा छोटे प्रिज़्म जैसा है; किनारे की किरणें बीच की किरणों से ज़्यादा मुड़ती हैं, इसलिए सब F₂ पर अक्ष को काटती हैं। चरण 1 में समांतर किरण-पुंज मिलता दिखता है।

प्रकाशिक केंद्र से जाने वाली किरण क्यों नहीं मुड़ती?

केंद्र पर दोनों सतहें समांतर होती हैं, पतले काँच के स्लैब जैसी, इसलिए किरण उसी दिशा में निकलती है (पतले लेंस में थोड़ा खिसकाव नगण्य है)। चरण 2 की हरी-नीली किरण देखें।

वस्तु F₁ पर हो तो प्रतिबिंब कहाँ जाता है?

अपवर्तित किरणें समांतर निकलती हैं और कभी नहीं मिलतीं: प्रतिबिंब अनंत पर। चरण 3 में उस पल प्रतिबिंब गायब होता है और फिर वस्तु की तरफ़ आभासी बनकर लौटता है।

क्या अवतल लेंस वास्तविक प्रतिबिंब दे सकता है?

असली वस्तु का नहीं। इसकी किरणें हमेशा फैलती हैं, इसलिए प्रतिबिंब हमेशा आभासी, सीधा और छोटा। चरण 4 में वस्तु खींचकर हर स्थिति जाँचें।

लेंस में वास्तविक प्रतिबिंब का v धनात्मक और दर्पण में ऋणात्मक क्यों?

लेंस प्रकाश को आर-पार जाने देता है, इसलिए वास्तविक प्रतिबिंब दाईं ओर (प्रकाश की दिशा, धनात्मक) बनता है। दर्पण प्रकाश लौटाता है, इसलिए उसका वास्तविक प्रतिबिंब बाईं ओर (ऋणात्मक) होता है। चरण 5 में लेंस के लिए v = +60 cm है।

कम फोकस दूरी मतलब ज़्यादा क्षमता क्यों?

छोटा f मतलब लेंस किरणों को तेज़ी से मोड़कर पास ही मिला देता है। P = 1/f में छोटा f बड़ी संख्या देता है। चरण 6 में f बदलकर P देखें।

उत्तल और अवतल लेंस: मूल शब्द

लेंस पारदर्शी पदार्थ का वह टुकड़ा है जिसकी कम से कम एक सतह गोलीय हो। यह अपवर्तन से काम करता है, परावर्तन से नहीं।

शब्द

लेंस के किरण आरेख बनाने के नियम

  1. मुख्य अक्ष के समांतर किरण अपवर्तन के बाद F₂ से गुज़रती है (उत्तल) या F₁ से आती लगती है (अवतल)।
  2. F₁ से होकर आने वाली (उत्तल) या F₂ की ओर जाती (अवतल) किरण अक्ष के समांतर निकलती है।
  3. प्रकाशिक केंद्र O से गुज़रने वाली किरण बिना मुड़े सीधी निकल जाती है।

कोई भी दो किरणें काफ़ी हैं। 3D बेंच में नारंगी किरण नियम 1 और हरी-नीली किरण नियम 3 मानती है; बिंदीदार रेखाओं का मतलब है किरणें वहाँ सिर्फ़ मिलती लगती हैं (आभासी प्रतिबिंब)।

उत्तल लेंस द्वारा प्रतिबिंब (वस्तु की हर स्थिति)

वस्तु की स्थितिप्रतिबिंब की स्थितिआकारप्रकृति
अनंत परF₂ परबिंदु जैसा, बहुत छोटावास्तविक, उल्टा
2F₁ से परेF₂ और 2F₂ के बीचछोटावास्तविक, उल्टा
2F₁ पर2F₂ परबराबरवास्तविक, उल्टा
F₁ और 2F₁ के बीच2F₂ से परेबड़ावास्तविक, उल्टा
F₁ परअनंत परबहुत बड़ावास्तविक, उल्टा
F₁ और O के बीचवस्तु की ही तरफ़बड़ाआभासी, सीधा

इनके उपयोग: वस्तु दूर → कैमरा; वस्तु F₁ और 2F₁ के बीच → प्रोजेक्टर; वस्तु F₁ के अंदर → आवर्धक लेंस।

अवतल लेंस द्वारा प्रतिबिंब

वस्तु की स्थितिप्रतिबिंब की स्थितिआकारप्रकृति
अनंत परF₁ परबिंदु जैसाआभासी, सीधा
अनंत और O के बीचF₁ और O के बीच, उसी तरफ़छोटाआभासी, सीधा

अवतल लेंस किसी असली वस्तु का वास्तविक प्रतिबिंब कभी नहीं बनाता। इसीलिए दरवाज़े की झाँकने वाली जगह (पीपहोल) में और निकट-दृष्टि ठीक करने में इसका उपयोग होता है।

चिह्न परिपाटी और लेंस सूत्र

लेंस के लिए भी वही नई कार्तीय चिह्न परिपाटी है, बस मूल बिंदु प्रकाशिक केंद्र O है। प्रकाश बाएँ से दाएँ चलता है, इसलिए u ऋणात्मक। O के दाएँ की दूरियाँ धनात्मक।

लेंस सूत्र: 1/v − 1/u = 1/f

आवर्धन: m = h′/h = v/u

m धनात्मक → आभासी और सीधा; m ऋणात्मक → वास्तविक और उल्टा। ध्यान दीजिए: लेंस सूत्र में माइनस और m = +v/u, जबकि दर्पण सूत्र में प्लस और m = −v/u।

लेंस की क्षमता

कम फोकस दूरी वाला लेंस प्रकाश को ज़्यादा मोड़ता है। इसे क्षमता से नापते हैं:

P = 1/f (f मीटर में)

बोर्ड के संकेत: उत्तल लेंस के किरण आरेख (2–3 अंक), लेंस सूत्र और आवर्धन का आंकिक प्रश्न (3 अंक), और क्षमता/डायोप्टर के प्रश्न (1–2 अंक) लगभग हर साल आते हैं।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 50 cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस की क्षमता निकालिए।

f = +0.5 m। P = 1/f = 1/0.5 = +2 D।

2. चश्मे वाले ने −2.5 D का लेंस लिखा है। यह कौन सा लेंस है और फोकस दूरी कितनी है?

ऋणात्मक क्षमता → अवतल लेंस। f = 1/P = 1/(−2.5) = −0.4 m = −40 cm।

3. 10 cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस से 15 cm पर वस्तु है। प्रतिबिंब की स्थिति और आवर्धन निकालिए।

u = −15, f = +10। 1/v = 1/f + 1/u = 1/10 − 1/15 = (3 − 2)/30 = 1/30, तो v = +30 cm। m = v/u = 30/(−15) = −2। दूसरी तरफ़ 30 cm पर वास्तविक, उल्टा, दुगना बड़ा।

4. 15 cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस से 10 cm पर वस्तु है। प्रतिबिंब बताइए।

u = −10, f = +15। 1/v = 1/15 − 1/10 = (2 − 3)/30 = −1/30, तो v = −30 cm। m = (−30)/(−10) = +3। वस्तु की तरफ़ ही आभासी, सीधा, 3 गुना बड़ा: आवर्धक लेंस।

5. 15 cm फोकस दूरी वाले अवतल लेंस से 30 cm पर वस्तु है। प्रतिबिंब निकालिए।

u = −30, f = −15। 1/v = −1/15 − 1/30 = (−2 − 1)/30 = −3/30, तो v = −10 cm। m = (−10)/(−30) = +1/3। वस्तु की तरफ़ 10 cm पर आभासी, सीधा, एक-तिहाई आकार।

6. एक उत्तल लेंस 60 cm दूर परदे पर वस्तु से 3 गुना बड़ा वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है। वस्तु दूरी, फोकस दूरी और क्षमता निकालिए।

वास्तविक प्रतिबिंब: v = +60 cm, m = −3। m = v/u → u = 60/(−3) = −20 cm। 1/f = 1/v − 1/u = 1/60 + 1/20 = 4/60, तो f = +15 cm। P = 100/15 ≈ +6.67 D।

7. +2.5 D और −1.0 D क्षमता वाले दो पतले लेंस सटाकर रखे हैं। संयोजन की क्षमता और फोकस दूरी निकालिए।

P = P₁ + P₂ = 2.5 − 1.0 = +1.5 D। f = 1/1.5 ≈ 0.667 m ≈ 66.7 cm। संयोजन उत्तल लेंस की तरह काम करता है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. लेंस के प्रकाशिक केंद्र से गुज़रने वाली किरण:
2. लेंस सूत्र है:
3. 20 cm फोकस दूरी वाले अवतल लेंस की क्षमता है:
4. उत्तल लेंस से बराबर आकार का वास्तविक प्रतिबिंब पाने के लिए वस्तु कहाँ हो?
5. आवर्धक लेंस में वस्तु कहाँ रखी जाती है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कक्षा 10 का लेंस सूत्र क्या है?

1/v − 1/u = 1/f, जिसमें दूरियाँ प्रकाशिक केंद्र से नई कार्तीय चिह्न परिपाटी के अनुसार नापी जाती हैं।

1 डायोप्टर क्या है?

1 डायोप्टर उस लेंस की क्षमता है जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर है। P = 1/f, f मीटर में।

उत्तल और अवतल लेंस में क्या अंतर है?

उत्तल लेंस बीच में मोटा, प्रकाश को इकट्ठा करने वाला और धनात्मक फोकस दूरी व क्षमता वाला होता है। अवतल लेंस बीच में पतला, प्रकाश फैलाने वाला और ऋणात्मक फोकस दूरी व क्षमता वाला होता है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

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