France Première STL (laboratory sciences) — 1re specialties
अध्याय: 9
1. Physics-chemistry: Constitution of matter
Structure and properties of chemical species · Solvents and solutes
- रासायनिक आबंधन: आयनिक, सहसंयोजक और धात्विक बंध – परमाणु आपस में जुड़कर (बंध बनाकर) ज़्यादा स्थिर होते हैं। इसमें सिर्फ़ बाहरी इलेक्ट्रॉन काम आते हैं। ज़्यादातर परमाणु बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होने पर सबसे स्थिर होते हैं: यही अष्टक नियम है। इसके तीन मुख्य रास्ते हैं। आयनिक बंध में धातु अधातु को इलेक्ट्रॉन दे देती है; विपरीत आवेश वाले आयन बनते हैं और एक-दूसरे को खींचते हैं। सहसंयोजक बंध में दो अधातुएँ इलेक्ट्रॉन जोड़े बाँटती हैं और अणु बनते हैं। धात्विक बंध में धातु परमाणु अपने बाहरी इलेक्ट्रॉन एक साझा 'सागर' में छोड़ देते हैं जो धनायनों को जोड़े रखता है। विद्युत-ऋणात्मकता का अंतर बताता है कि कौन-सा बंध बनेगा। बंध का प्रकार ही गलनांक, बिजली चलाने और पानी में घुलने जैसे गुण तय करता है।
- कॉसेल-लुईस उपागम और आयनिक आबंध – परमाणु आपस में इसलिए जुड़ते हैं ताकि हर एक के बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन (अष्टक) हो जाएँ, बिल्कुल उत्कृष्ट गैस जैसे। कॉसेल ने बताया कि परमाणु इलेक्ट्रॉन देकर या लेकर आयन बनाते हैं (आयनिक आबंध)। लुईस ने बताया कि परमाणु इलेक्ट्रॉन-युग्म बाँट भी सकते हैं (सहसंयोजी आबंध)। लुईस संरचना इन इलेक्ट्रॉनों को बिंदु और रेखा से दिखाती है। फ़ॉर्मल आवेश (V − L − B/2) सबसे अच्छी संरचना चुनने में मदद करता है। आयन जुड़कर क्रिस्टल बनाते हैं; इसमें निकली ऊर्जा का संबंध जालक एन्थैल्पी से है।
- विलयन: प्रकार, सांद्रता और हेनरी का नियम – विलयन दो या ज़्यादा पदार्थों का एकसमान मिश्रण है। जो ज़्यादा मात्रा में हो वह विलायक, जो कम हो वह विलेय। विलयन कितना 'गाढ़ा' है, यह सांद्रता के पदों से बताते हैं: द्रव्यमान %, आयतन %, ppm, मोल अंश, मोलरता (1 लीटर विलयन में) और मोललता (1 kg विलायक में)। ठोस अक्सर गर्म करने पर ज़्यादा घुलते हैं। गैस दाब बढ़ाने पर ज़्यादा घुलती है (हेनरी का नियम, p = KH·x) और गर्म करने पर कम।
2. Physics-chemistry: Chemical transformation
Acid–base reactions in water · Reaction kinetics
- अम्ल और क्षारक: गुण, सूचक और अभिक्रियाएँ – अम्ल पानी में H⁺ आयन देता है और क्षारक OH⁻ आयन। सूचक रंग या गंध बदलकर बताता है कि कौन मौजूद है। H⁺ और OH⁻ मिलकर पानी बनाते हैं और पीछे लवण बच जाता है।
- रासायनिक अभिक्रिया का वेग – अभिक्रिया वेग बताता है कि प्रति इकाई समय में अभिकारक कितना ख़र्च होता है या उत्पाद कितना बनता है। वेग = −Δ[R]/Δt = +Δ[P]/Δt (इकाई mol L⁻¹ s⁻¹)। वेग नियम, वेग = k[A]^x[B]^y, प्रयोग से मिलता है; x + y कोटि है। आण्विकता = एक प्राथमिक चरण में टकराने वाले कणों की संख्या।
3. Physics-chemistry: Motion and interactions
Motion · Interactions · Energy aspects
- गति: दूरी, चाल, वेग, त्वरण और ग्राफ़ – जब किसी चीज़ की जगह समय के साथ बदलती है, तो वह गति में है। दूरी पूरे रास्ते की लंबाई है (अदिश); विस्थापन शुरू से आख़िर तक की सीधी दूरी है, दिशा के साथ (सदिश)। चाल = दूरी ÷ समय; वेग = विस्थापन ÷ समय। त्वरण = वेग में बदलाव ÷ समय। s–t ग्राफ़ का ढाल वेग देता है, v–t ग्राफ़ का ढाल त्वरण, और v–t ग्राफ़ के नीचे का क्षेत्रफल दूरी। एकसमान त्वरण के लिए: v = u + at, s = ut + ½at², v² = u² + 2as।
- बल तथा गति के नियम – बल एक धक्का या खिंचाव है। संतुलित बल (नेट बल शून्य) गति नहीं बदलते; असंतुलित बल चाल या दिशा बदलता है। घर्षण फिसलने का विरोध करता है। पहला नियम: कोई चीज़ अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था में रहती है जब तक असंतुलित बल न लगे (जड़त्व; भारी चीज़ का जड़त्व ज़्यादा)। संवेग p = mv। दूसरा नियम: F = ma (संवेग बदलने की दर), 1 N = 1 kg m/s²। तीसरा नियम: बल जोड़ों में आते हैं, बराबर और उलटे, दो अलग चीज़ों पर। बाहरी बल न हो तो तंत्र के आंतरिक बल कट जाते हैं और कुल संवेग संरक्षित रहता है।
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति – जब बल किसी वस्तु को खिसकाता है, तब कार्य होता है: W = F × s, मात्रक जूल (J)। ऊर्जा यानी कार्य करने की क्षमता। चलती वस्तु में गतिज ऊर्जा ½mv² होती है, ऊँचाई पर रखी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा mgh। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W ÷ t, मात्रक वाट। उत्तोलक और घिरनी जैसी सरल मशीनें कम बल से भारी वस्तु उठाने में मदद करती हैं।
4. Physics-chemistry: Waves and signals
Mechanical waves · Electromagnetic waves
- ध्वनि – ध्वनि कंपन करती वस्तुओं से बनती है। यह किसी माध्यम (हवा, पानी, ठोस) में अनुदैर्ध्य तरंग के रूप में चलती है: कण आगे-पीछे हिलते हैं, कहीं घने हो जाते हैं (संपीडन) और कहीं फैल जाते हैं (विरलन)। आवृत्ति (Hz) से तारत्व (पिच), आयाम से प्रबलता तय होती है, और चाल v = f × λ। निर्वात में ध्वनि नहीं चलती। हम 20 Hz से 20,000 Hz सुनते हैं; इससे कम अवश्रव्य, ज़्यादा पराश्रव्य। परावर्तित ध्वनि से प्रतिध्वनि बनती है।
- विद्युत चुंबकीय तरंगें – बदलता हुआ विद्युत क्षेत्र धारा जैसा काम करता है। इसे विस्थापन धारा कहते हैं और यह चुंबकीय क्षेत्र बनाती है। बदलता चुंबकीय क्षेत्र विद्युत क्षेत्र बनाता है। दोनों मिलकर विद्युत चुंबकीय तरंग बनकर c = 3 × 10⁸ m/s से चलते हैं, खाली जगह में भी। E और B एक-दूसरे से और चलने की दिशा से 90° पर होते हैं, इसलिए ये तरंगें अनुप्रस्थ हैं। तरंगदैर्घ्य के क्रम में: रेडियो, सूक्ष्म तरंग, अवरक्त, दृश्य, पराबैंगनी, एक्स-किरणें, गामा किरणें।
5. Mathematics
Trigonometry · Dot product · Derivatives · Antiderivatives
- त्रिकोणमितीय फलन: रेडियन, इकाई वृत्त, ग्राफ़ और सर्वसमिकाएँ – एक रेडियन वह कोण है जिसका चाप त्रिज्या के बराबर हो, इसलिए π रेडियन = 180°। इकाई वृत्त पर कोण x वाला बिंदु P = (cos x, sin x) है, जिससे sin²x + cos²x = 1 मिलता है और sin, cos हर वास्तविक संख्या के लिए बन जाते हैं। चारों चतुर्थांशों में चिह्न 'All, Sin, Tan, Cos' से याद रखो; sin x और cos x हर 2π पर दोहराते हैं और −1 से 1 के बीच रहते हैं। cos(A + B) = cos A cos B − sin A sin B जैसे सूत्रों से tan(A + B), cot(A + B), योग-गुणनफल, द्विगुण और त्रिगुण कोण सूत्र निकलते हैं।
- सदिश बीजगणित – सदिश (vector) में माप (परिमाण) और दिशा दोनों होते हैं। 3D में a = xî + yĵ + zk̂ लिखते हैं। लंबाई |a| = √(x² + y² + z²)। दिक्-कोसाइन l = x/|a|, m = y/|a|, n = z/|a| और l² + m² + n² = 1। सदिश सिर-से-पूँछ (त्रिभुज नियम) या घटक-दर-घटक जुड़ते हैं। ka लंबाई को k गुना करता है, k ऋण हो तो दिशा उल्टी। AB को m : n में बाँटने वाले बिंदु का स्थिति सदिश अंतः (mb + na)/(m + n) और बाह्य (mb − na)/(m − n)। अदिश गुणनफल a·b = |a||b|cosθ एक संख्या है। सदिश गुणनफल a×b दोनों पर लंब नया सदिश है; इसकी लंबाई समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल है।
- सांतत्य तथा अवकलनीयता – किसी बिंदु पर फलन सतत तब है जब वहाँ ग्राफ़ टूटता नहीं: बायीं सीमा, दायीं सीमा और फलन का मान तीनों बराबर हों। अवकलज स्पर्श रेखा की ढाल है। शृंखला नियम, अस्पष्ट अवकलन, eˣ, ln x और प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के सूत्र, लघुगणकीय अवकलन और प्राचलिक रूप से कक्षा 12 का लगभग हर फलन अवकलित हो जाता है। द्वितीय अवकलज बताता है कि ढाल खुद कैसे बदल रही है, यानी वक्र कैसे मुड़ रहा है।
- समाकलन – समाकलन अवकलन को उलट देता है: अगर F′(x) = f(x), तो ∫f(x) dx = F(x) + C। हम मानक सूत्रों, प्रतिस्थापन (अंदर वाले हिस्से को u मानना), आंशिक भिन्न (भिन्न को तोड़ना) और खंडशः समाकलन (∫u dv = uv − ∫v du) से समाकलन करते हैं। निश्चित समाकल ∫ₐᵇ f(x) dx, a से b तक वक्र के नीचे का चिह्नित क्षेत्रफल है, और मूल प्रमेय के अनुसार यह F(b) − F(a) के बराबर है।
6. Biochemistry-biology: thematic modules
Digestion · Excretion · Reproductive physiology · Molecular genetics
- मानव पाचन तंत्र और विषमपोषी पोषण – विषमपोषी जीव दूसरे जीवों से बना-बनाया भोजन लेते हैं। मनुष्य प्राणिसम (holozoic) पोषण करता है: पूरा भोजन खाकर एक लंबी नली, आहार नाल, में उसे तोड़ता है। दाँत, लार, आमाशय का अम्ल, एंज़ाइम, पित्त और अग्न्याशयी रस बड़े अणुओं को छोटा करते हैं, जिन्हें क्षुद्रांत्र के दीर्घरोम रक्त में सोख लेते हैं।
- उत्सर्जी उत्पाद एवं उनका निष्कासन – जीवों को नाइट्रोजन अपशिष्ट निकालना होता है। अमोनिया सबसे विषैली है और बहुत पानी माँगती है; यूरिया कम विषैला; यूरिक अम्ल को सबसे कम पानी चाहिए। मनुष्य यूरियोत्सर्जी हैं। हर वृक्क में लगभग 10 लाख वृक्काणु हैं। मूत्र तीन चरणों में बनता है: गुच्छीय निस्यंदन (लगभग 125 mL/मिनट, 180 L/दिन), पुनरवशोषण (लगभग 99% वापस) और स्रावण। हेनले लूप और वासा रेक्टा प्रतिधारा से मध्यांश को नमकीन बनाते हैं, जिससे गाढ़ा मूत्र बनता है। ADH, रेनिन-एंजियोटेंसिन-एल्डोस्टेरोन तंत्र और ANF जल व लवण नियंत्रित करते हैं। फेफड़े, यकृत, त्वचा भी मदद करते हैं। वृक्क फेल हों तो डायलिसिस या प्रत्यारोपण।
- मानव में जनन और जनन स्वास्थ्य – यौवनारंभ पर मस्तिष्क के हॉर्मोन वृषण और अंडाशय को सक्रिय करते हैं। नर तंत्र शुक्राणु बनाता और ले जाता है; मादा तंत्र अंडाणु बनाता है और गर्भाशय में शिशु के बढ़ने की जगह देता है। निषेचन अंडवाहिनी में होता है और भ्रूण को प्लेसेंटा से पोषण मिलता है। जनन स्वास्थ्य में सुरक्षित निर्णय, गर्भनिरोध, भ्रूण हत्या पर रोक और HIV/AIDS जैसे रोगों से बचाव शामिल हैं।
- आनुवंशिकता और मेंडल के नियम – माता-पिता से बच्चों में लक्षणों का जाना आनुवंशिकता है। हर लक्षण के लिए माँ और पिता दोनों एक-एक जीन देते हैं। प्रभावी जीन अप्रभावी को छुपा देता है, इसलिए एकसंकर में 3:1 और द्विसंकर में 9:3:3:1 अनुपात आता है। जीन DNA का टुकड़ा है जो प्रोटीन बनवाता है, और प्रोटीन से लक्षण बनता है।
7. Biochemistry-biology: cross-cutting modules
Structure and properties of biomolecules · Structure and physiological function · Internal environment and homeostasis · Information and communication
- जैव अणु – कोशिका में ज़्यादातर पानी है, और कार्बन यौगिकों के चार बड़े परिवार: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल। ऊतक को अम्ल में पीसने से छोटे अणु (अम्ल-विलेय भाग) बड़े अणुओं – प्रोटीन, पॉलीसैकेराइड, न्यूक्लिक अम्ल (अम्ल-अविलेय भाग) – से अलग हो जाते हैं। प्रोटीन अमीनो अम्लों की शृंखलाएँ हैं जो चार स्तरों में मुड़ती हैं। पॉलीसैकेराइड शर्करा की शृंखलाएँ हैं; लिपिड ग्लिसरॉल पर वसा अम्ल; न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लियोटाइड की शृंखलाएँ। एंज़ाइम प्रोटीन उत्प्रेरक हैं जो सक्रिय स्थल पर क्रियाधार पकड़ते हैं, सक्रियण ऊर्जा घटाते हैं, और तापमान, pH, क्रियाधार मात्रा व संदमकों से प्रभावित होते हैं।
- कोशिका: जीवन की मूल इकाई – हर सजीव कोशिकाओं से बना है। 1665 में रॉबर्ट हुक ने कॉर्क में सबसे पहले कोशिकाएँ देखीं। कोशिकाएँ प्रोकैरियोटी (असली केंद्रक नहीं, जैसे जीवाणु) या यूकैरियोटी (असली केंद्रक) होती हैं। पादप कोशिका में कोशिका भित्ति, हरितलवक और बड़ी रिक्तिका होती है, जंतु कोशिका में नहीं। हर कोशिकांग का एक काम है। पानी परासरण से कोशिका में आता-जाता है। नई कोशिकाएँ समसूत्री (वृद्धि) और अर्धसूत्री (जनन कोशिकाएँ) विभाजन से बनती हैं।
- समस्थापन (Homeostasis) – समस्थापन वह तरीका है जिससे शरीर अपना आंतरिक वातावरण (रक्त और ऊतक द्रव) स्थिर रखता है, चाहे बाहर का मौसम बदले। यह शरीर का ताप (लगभग 37 °C), रक्त ग्लूकोज़ (लगभग 4–6 mmol/L), पानी-लवण और रक्त pH (लगभग 7.4) नियंत्रित करता है। ज़्यादातर यह ऋणात्मक पुनर्भरण से होता है: ग्राही बदलाव पहचानता है, नियंत्रण केंद्र तय करता है, और प्रभावक स्तर को निर्धारित बिंदु पर लौटाता है।
- प्रोटीन संश्लेषण: जीन से प्रोटीन तक – जीन DNA का एक हिस्सा है जिसमें एक प्रोटीन बनाने की विधि लिखी होती है। अनुलेखन (transcription) में केंद्रक के अंदर जीन की नकल mRNA में बनती है; T की जगह U आता है। mRNA कोशिकाद्रव्य में राइबोसोम तक जाता है। स्थानांतरण (translation) में राइबोसोम mRNA को 3-3 क्षार (कोडॉन) करके पढ़ता है। हर कोडॉन एक अमीनो अम्ल से मेल खाता है जिसे tRNA लाता है। अमीनो अम्ल जुड़कर श्रृंखला बनाते हैं, जो मुड़कर प्रोटीन बनती है। DNA में बदलाव (उत्परिवर्तन) से प्रोटीन बदल सकता है।
8. Biotechnology (option)
Experimental research and project work · Lab risk prevention · Reliable measurements · Digital tools in biotechnology · Observing microscopic life · Culturing microorganisms · Identifying microorganisms · Counting microorganisms · Preparing lab solutions · Detecting biomolecules · Separating mixtures · Measuring biomolecule concentration
- प्रयोगशाला कौशल: अच्छा प्रयोग कैसे करें – अच्छा प्रयोग साफ़ सवाल से शुरू होता है जिसे जाँचा जा सके। फिर निष्पक्ष जाँच की योजना बनती है: एक चीज़ बदलिए (स्वतंत्र चर), एक चीज़ नापिए (आश्रित चर) और बाक़ी सब एक-सा रखिए (नियंत्रित चर)। सही उपकरण से नापिए, माप दोहराइए और औसत निकालिए। पाठ्यांकों का फैलाव, यानी परास का आधा, अनिश्चितता बताता है। सब कुछ लैब नोटबुक में लिखिए (तारीख़, उद्देश्य, विधि, तालिका, अवलोकन) और फिर रिपोर्ट में (उद्देश्य, विधि, परिणाम, ग्राफ़, निष्कर्ष, मूल्यांकन)। यही कौशल लैब प्रोजेक्ट और रोज़मर्रा के विज्ञान में भी काम आते हैं, जैसे कौन-सा डिटर्जेंट बेहतर है यह परखना।
- प्रयोगशाला सुरक्षा और सुरक्षित प्रयोग – सुरक्षा पहनावा (गॉगल्स, कोट, बंद जूते, बँधे बाल)। लेबल और ख़तरा चिह्न पढ़ें। परखनली का मुँह दूर रखकर धीरे गरम करें। अम्ल को पानी में डालें, गंध हवा करके लें, कभी न चखें। हर दुर्घटना तुरंत बताएँ। प्रयोग की योजना बनाएँ, पहले जोखिम आँकें और कचरा सही जगह डालें।
- द्रव्य और उसका मापन – द्रव्य वह सब कुछ है जिसमें द्रव्यमान हो और जो जगह घेरे। यह ठोस, द्रव या गैस हो सकता है, और तत्व, यौगिक या मिश्रण हो सकता है। रसायनज्ञ SI मात्रकों में मापते हैं। हर माप में थोड़ा संदेह होता है, इसलिए हम उसे सही सार्थक अंकों के साथ लिखते हैं, बहुत बड़ी-छोटी संख्या वैज्ञानिक संकेतन में लिखते हैं और इकाई को इकाई-गुणक से बदलते हैं।
- जैव सूचना विज्ञान: जीव विज्ञान में कंप्यूटर – जैव सूचना विज्ञान (bioinformatics) कंप्यूटर से जैविक डेटा को सहेजता, खोजता और मिलाता है। लैब के नतीजे स्प्रेडशीट में; DNA और प्रोटीन अनुक्रम ऑनलाइन डेटाबेस में; संरेखण टूल अनुक्रमों में मिलान, अंतर (जैसे SNP) और रिश्तेदारी खोजते हैं; सॉफ़्टवेयर सूक्ष्मदर्शी कैमरे के चित्र मापता है। लोगों का डेटा गोपनीय और न्यायपूर्ण तरीके से इस्तेमाल होना चाहिए।
- सूक्ष्मजीव: हमारे चारों ओर के नन्हे जीव – सूक्ष्मजीव (माइक्रोब) वे जीव हैं जो इतने छोटे हैं कि बिना सूक्ष्मदर्शी के नहीं दिखते। मुख्य समूह हैं जीवाणु, कवक, प्रोटोज़ोआ और शैवाल; वायरस भी इनके साथ पढ़े जाते हैं पर वे कोशिका नहीं हैं। जीवाणु में केंद्रक नहीं होता (प्रोकैरियोट), बाकी में होता है (यूकैरियोट)। जीवाणु दो में बँटकर बढ़ते हैं, इसलिए उनकी संख्या बार-बार दोगुनी होती है। ज़्यादातर सूक्ष्मजीव हानिरहित या उपयोगी हैं: आँत के जीवाणु पाचन में मदद करते हैं, सूक्ष्मजीव दही और ब्रेड बनाते हैं, मरी चीज़ें सड़ाते हैं और नाइट्रोजन स्थिर करते हैं। कुछ रोगाणु रोग फैलाते हैं। एंटीबायोटिक जीवाणुओं को मारते हैं, वायरस को नहीं, और इनका गलत इस्तेमाल प्रतिरोधी जीवाणु पैदा करता है।
- सूक्ष्मजीव-विज्ञान: उगाना, पहचानना और गिनना – सूक्ष्मजीव-विज्ञान की प्रयोगशाला में हम अगर पर सूक्ष्मजीव उगाते हैं, चयनात्मक माध्यम से मनचाहा जीव छाँटते हैं, उस पर दवाओं का असर जाँचते हैं (एंटीबायोग्राम), आकार, ग्राम अभिरंजन और उपापचयी परीक्षणों से पहचानते हैं, और सूक्ष्मदर्शी या प्लेट-गिनती से गिनते हैं (CFU/mL = बस्तियाँ × तनुता-गुणक ÷ फैलाया आयतन)।
- विलयन: प्रकार, सांद्रता और हेनरी का नियम – विलयन दो या ज़्यादा पदार्थों का एकसमान मिश्रण है। जो ज़्यादा मात्रा में हो वह विलायक, जो कम हो वह विलेय। विलयन कितना 'गाढ़ा' है, यह सांद्रता के पदों से बताते हैं: द्रव्यमान %, आयतन %, ppm, मोल अंश, मोलरता (1 लीटर विलयन में) और मोललता (1 kg विलायक में)। ठोस अक्सर गर्म करने पर ज़्यादा घुलते हैं। गैस दाब बढ़ाने पर ज़्यादा घुलती है (हेनरी का नियम, p = KH·x) और गर्म करने पर कम।
- जैव अणु – कोशिका में ज़्यादातर पानी है, और कार्बन यौगिकों के चार बड़े परिवार: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल। ऊतक को अम्ल में पीसने से छोटे अणु (अम्ल-विलेय भाग) बड़े अणुओं – प्रोटीन, पॉलीसैकेराइड, न्यूक्लिक अम्ल (अम्ल-अविलेय भाग) – से अलग हो जाते हैं। प्रोटीन अमीनो अम्लों की शृंखलाएँ हैं जो चार स्तरों में मुड़ती हैं। पॉलीसैकेराइड शर्करा की शृंखलाएँ हैं; लिपिड ग्लिसरॉल पर वसा अम्ल; न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लियोटाइड की शृंखलाएँ। एंज़ाइम प्रोटीन उत्प्रेरक हैं जो सक्रिय स्थल पर क्रियाधार पकड़ते हैं, सक्रियण ऊर्जा घटाते हैं, और तापमान, pH, क्रियाधार मात्रा व संदमकों से प्रभावित होते हैं।
- कार्बनिक यौगिकों का शोधन और विश्लेषण – प्रयोगशाला में बना या पौधे से निकाला यौगिक शुरू में शुद्ध नहीं होता। हम किसी गुण के अंतर से उसे शुद्ध करते हैं: विलेयता (क्रिस्टलन), क्वथनांक (आसवन और उसके प्रकार), ऊर्ध्वपातन, दो द्रवों में विलेयता (विभेदी निष्कर्षण) या किसी सतह पर चिपकने की ताकत (वर्णलेखन)। शुद्ध ठोस का गलनांक तीक्ष्ण होता है। फिर हम पता करते हैं कौन-से तत्व हैं (गुणात्मक विश्लेषण): कॉपर(II) ऑक्साइड से C और H, और लैसें सोडियम संगलन परीक्षण से N, S, हैलोजन और P। अंत में हम हर तत्व की मात्रा निकालते हैं (मात्रात्मक विश्लेषण): C और H के लिए लीबिग विधि, N के लिए ड्यूमा और कैल्डाल विधि, हैलोजन और S के लिए कैरिअस विधि, और ऑक्सीजन अंतर से। प्रतिशतों से मूलानुपाती सूत्र मिलता है।
- स्पेक्ट्रोस्कोपी और बियर-लैम्बर्ट नियम – स्पेक्ट्रोस्कोपी यह अध्ययन है कि पदार्थ प्रकाश को कैसे सोखता या छोड़ता है। प्रकाश फ़ोटॉनों से बना है, जिनकी ऊर्जा E = hf = hc/λ है। परमाणु रेखा स्पेक्ट्रम देते हैं क्योंकि इलेक्ट्रॉन तय ऊर्जा स्तरों के बीच कूदते हैं। रंगीन घोल अपना पूरक रंग सोखता है। स्पेक्ट्रोफ़ोटोमीटर पारगम्यता T = I/I₀ और अवशोषकता A = log₁₀(I₀/I) मापता है। बियर-लैम्बर्ट नियम A = εlc है, इसलिए A बनाम c की अंशांकन रेखा से अज्ञात सांद्रता मिलती है।
9. Lab physical and chemical sciences (option)
Measurement and uncertainty · Chemistry: safety and environment · Chemistry: organic synthesis · Chemistry: physico-chemical analysis · Image: colour and vision · Image: photography and digital camera · Image: storing and sending digital images · Instrumentation · Project linked to research or industry
- द्रव्य और उसका मापन – द्रव्य वह सब कुछ है जिसमें द्रव्यमान हो और जो जगह घेरे। यह ठोस, द्रव या गैस हो सकता है, और तत्व, यौगिक या मिश्रण हो सकता है। रसायनज्ञ SI मात्रकों में मापते हैं। हर माप में थोड़ा संदेह होता है, इसलिए हम उसे सही सार्थक अंकों के साथ लिखते हैं, बहुत बड़ी-छोटी संख्या वैज्ञानिक संकेतन में लिखते हैं और इकाई को इकाई-गुणक से बदलते हैं।
- प्रयोगशाला सुरक्षा और सुरक्षित प्रयोग – सुरक्षा पहनावा (गॉगल्स, कोट, बंद जूते, बँधे बाल)। लेबल और ख़तरा चिह्न पढ़ें। परखनली का मुँह दूर रखकर धीरे गरम करें। अम्ल को पानी में डालें, गंध हवा करके लें, कभी न चखें। हर दुर्घटना तुरंत बताएँ। प्रयोग की योजना बनाएँ, पहले जोखिम आँकें और कचरा सही जगह डालें।
- कार्बन और उसके यौगिक: आबंधन, हाइड्रोकार्बन और नामकरण – कार्बन के बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए वह इलेक्ट्रॉन लेने-देने के बजाय साझा करता है (सहसंयोजक आबंध)। वह अपने जैसे कार्बन से जुड़ता है (श्रृंखलन) और हमेशा 4 आबंध बनाता है (चतुःसंयोजकता), इसलिए लाखों यौगिक बनते हैं: सीधी श्रृंखला, शाखा और वलय, संतृप्त या असंतृप्त। एक ही क्रियात्मक समूह वाले यौगिक समजातीय श्रेणी बनाते हैं, जिनमें हर सदस्य –CH₂– से अलग होता है।
- स्पेक्ट्रोस्कोपी और बियर-लैम्बर्ट नियम – स्पेक्ट्रोस्कोपी यह अध्ययन है कि पदार्थ प्रकाश को कैसे सोखता या छोड़ता है। प्रकाश फ़ोटॉनों से बना है, जिनकी ऊर्जा E = hf = hc/λ है। परमाणु रेखा स्पेक्ट्रम देते हैं क्योंकि इलेक्ट्रॉन तय ऊर्जा स्तरों के बीच कूदते हैं। रंगीन घोल अपना पूरक रंग सोखता है। स्पेक्ट्रोफ़ोटोमीटर पारगम्यता T = I/I₀ और अवशोषकता A = log₁₀(I₀/I) मापता है। बियर-लैम्बर्ट नियम A = εlc है, इसलिए A बनाम c की अंशांकन रेखा से अज्ञात सांद्रता मिलती है।
- प्रकाश और रंग: रंग मिलाना, देखना और प्रकाश की ऊर्जा – सफ़ेद प्रकाश कई रंगों का मेल है (लाल से बैंगनी)। प्रकाश जुड़ता है: लाल + हरा + नीला = सफ़ेद (योगात्मक मिश्रण, स्क्रीन में)। रंग घटाते हैं: सियान + मैजेंटा + पीला = लगभग काला (व्यवकलनात्मक मिश्रण)। वस्तु का रंग वही है जो वह लौटाती है; बाक़ी सोख लेती है। आँख में तीन तरह की शंकु कोशिकाएँ हैं। प्रकाश का रंग उसकी ऊर्जा बताता है: E = hf, नीला फ़ोटॉन लाल से ज़्यादा ऊर्जा ले जाता है।
- गोलीय लेंस: प्रतिबिंब, लेंस सूत्र और क्षमता – उत्तल लेंस बीच में मोटा होता है और समांतर प्रकाश को अपने फोकस पर मिलाता है; अवतल लेंस बीच में पतला होता है और प्रकाश को ऐसे फैलाता है मानो फोकस से आ रहा हो। दो आसान किरणों (एक अक्ष के समांतर, एक प्रकाशिक केंद्र से होकर) से किसी भी स्थिति का प्रतिबिंब मिल जाता है। वस्तु F₁ से परे हो तो उत्तल लेंस वास्तविक, उल्टा प्रतिबिंब देता है और F₁ के अंदर हो तो आभासी, सीधा, बड़ा; अवतल लेंस हमेशा आभासी, सीधा, छोटा प्रतिबिंब देता है। लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f, आवर्धन m = v/u और क्षमता P = 1/f (मीटर में, मात्रक डायोप्टर) से आंकिक प्रश्न हल होते हैं।
- डिजिटल मीडिया: चित्र, आवाज़ और वीडियो संख्याएँ कैसे बनते हैं – डिजिटल मीडिया यानी कंप्यूटर पर संख्याओं के रूप में सहेजा गया हर चित्र, आवाज़, वीडियो या एनिमेशन। रास्टर चित्र पिक्सेल का जाल है; हर पिक्सेल लाल, हरे और नीले के 0 से 255 तक के मानों में सहेजा जाता है। वेक्टर ग्राफ़िक्स आकृतियों को गणित से सहेजते हैं, इसलिए हर आकार में साफ़ रहते हैं। वीडियो और एनिमेशन बहुत सारे फ़्रेम तेज़ी से दिखाना है। रेज़ोल्यूशन बढ़ने से फ़ाइल बड़ी होती है, इसलिए संपीडन करते हैं। मीडिया बनाते-बाँटते समय कॉपीराइट, लाइसेंस और लोगों के चित्र-अधिकार का सम्मान करना ज़रूरी है।
- सेंसर: मशीनें दुनिया को कैसे महसूस करती हैं – सेंसर किसी भौतिक राशि (प्रकाश, तापमान, दूरी, नमी, ध्वनि, दाब) को विद्युत संकेत में बदलता है। एनालॉग सेंसर लगातार बदलता वोल्टेज देता है; ADC उसे संख्या में बदलता है जिसे कंप्यूटर समझता है। नियंत्रक संख्या को थ्रेशोल्ड (सीमा) से मिलाकर एक्चुएटर को, अक्सर रिले के ज़रिए, चालू-बंद करता है। तय समय पर बार-बार पढ़ना डेटा लॉगिंग है। अच्छे सेंसर की सही रेंज, संवेदनशीलता, शुद्धता और प्रतिक्रिया-समय होता है।
- परियोजना प्रबंधन – परियोजना (project) एक बार का काम है जिसका साफ़ लक्ष्य, शुरुआत और अंत होता है। परियोजना प्रबंधन यानी उसकी योजना बनाकर और नियंत्रण करके उसे तय दायरे में, समय पर और बजट में पूरा करना। जीवन चक्र: आरंभ, योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और समापन। योजनाकार काम को छोटे कामों (WBS) में बाँटते हैं, गैंट चार्ट पर रखते हैं, क्रांतिक पथ ढूँढते हैं, जोखिम सँभालते हैं और अंत में सीख की समीक्षा करते हैं।