समस्थापन क्या है?
कोशिकाओं के एंज़ाइम स्थिर हालात में ही ठीक काम करते हैं। कोशिकाओं के चारों ओर का द्रव (रक्त प्लाज़्मा और ऊतक द्रव) आंतरिक वातावरण है।
समस्थापन = इस आंतरिक वातावरण को एक छोटी सामान्य सीमा में रखना। हर कारक का एक निर्धारित बिंदु (set point) है:
- शरीर का ताप: लगभग 37 °C
- रक्त ग्लूकोज़: लगभग 4–6 mmol/L (लगभग 70–110 mg/dL)
- पानी और लवण का संतुलन (रक्त कितना गाढ़ा है)
- रक्त pH: लगभग 7.35–7.45
स्तर कभी बिल्कुल स्थिर नहीं रहते। वे निर्धारित बिंदु के आसपास थोड़ा हिलते रहते हैं।
ऋणात्मक और धनात्मक पुनर्भरण
नियंत्रण तंत्र के तीन भाग हैं:
- ग्राही (receptor): बदलाव (उद्दीपन) पहचानता है।
- नियंत्रण केंद्र: मस्तिष्क, मेरुरज्जु या ग्रंथि उसे निर्धारित बिंदु से मिलाती है।
- प्रभावक (effector): पेशी या ग्रंथि जो अनुक्रिया करती है।
ऋणात्मक पुनर्भरण: अनुक्रिया बदलाव को उलट देती है। ज़्यादा → घटाओ; कम → बढ़ाओ। ज़्यादातर समस्थापन ऐसे ही होता है।
धनात्मक पुनर्भरण: अनुक्रिया बदलाव को और बढ़ाती है, जब तक कोई घटना उसे खत्म न करे। उदाहरण: प्रसव के समय संकुचन, रक्त का थक्का बनना।
तंत्रिकाएँ तेज़, छोटे संदेश भेजती हैं। हार्मोन रक्त में चलते हैं; धीमे पर लंबे समय तक असर करते हैं।
शरीर के ताप का नियंत्रण
मस्तिष्क का हाइपोथैलेमस थर्मोस्टैट है। त्वचा और मस्तिष्क के ग्राही उसे ताप बताते हैं।
बहुत गरम
- स्वेद ग्रंथियाँ पसीना छोड़ती हैं; वाष्पन त्वचा से ऊष्मा ले जाता है।
- त्वचा के पास की रक्त नलिकाएँ चौड़ी होती हैं (वाहिका विस्फारण), ज़्यादा ऊष्मा निकलती है। त्वचा लाल दिखती है।
बहुत ठंडा
- पेशियाँ काँपती हैं: तेज़ संकुचन से ऊष्मा बनती है।
- त्वचा की नलिकाएँ सँकरी होती हैं (वाहिका संकुचन), गरम रक्त अंदर रहता है।
- रोएँ खड़े होते हैं और पसीना रुकता है।
बुखार, लू (हीटस्ट्रोक) और अतिशीतन तब होते हैं जब यह नियंत्रण बिगड़ जाए या उस पर बहुत बोझ पड़े।
रक्त ग्लूकोज़, पानी और pH
रक्त ग्लूकोज़
अग्न्याशय रक्त का ग्लूकोज़ जाँचता है।
- ज़्यादा ग्लूकोज़ (भोजन के बाद): इंसुलिन निकलता है। कोशिकाएँ ग्लूकोज़ लेती हैं; यकृत और पेशियाँ इसे ग्लाइकोजन बनाकर रखती हैं।
- कम ग्लूकोज़ (उपवास, व्यायाम): ग्लूकागॉन निकलता है। यकृत ग्लाइकोजन को फिर ग्लूकोज़ में तोड़ता है।
मधुमेह: टाइप 1 में अग्न्याशय लगभग इंसुलिन नहीं बनाता (इंसुलिन के इंजेक्शन)। टाइप 2 में कोशिकाएँ इंसुलिन पर ठीक से प्रतिक्रिया नहीं करतीं (आहार, व्यायाम और दवा से मदद)।
जल संतुलन (परासरण नियमन)
रक्त बहुत गाढ़ा हो तो मस्तिष्क पीयूष ग्रंथि से ADH छुड़वाता है। वृक्क पानी वापस रक्त में भेजते हैं, मूत्र कम और गहरा। ज़्यादा पानी: कम ADH, पतला मूत्र।
pH
फेफड़े कार्बन डाइऑक्साइड (अम्ल बनाने वाली गैस) निकालते हैं और वृक्क अतिरिक्त अम्ल निकालते हैं, जिससे रक्त pH 7.4 के पास रहता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: आंतरिक वातावरण, निर्धारित बिंदु, समस्थापन
- ऋणात्मक पुनर्भरण: बदलाव → ग्राही → नियंत्रण केंद्र → प्रभावक → बदलाव उलटा
- ताप: हाइपोथैलेमस; पसीना, वाहिका विस्फारण / कँपकँपी, वाहिका संकुचन
- ग्लूकोज़: इंसुलिन घटाता (ग्लूकोज़ → ग्लाइकोजन); ग्लूकागॉन बढ़ाता (ग्लाइकोजन → ग्लूकोज़)
- पानी: ज़्यादा ADH → कम, गहरा मूत्र; कम ADH → ज़्यादा, हल्का मूत्र
- सामान्य मान: 37 °C, ग्लूकोज़ 4–6 mmol/L, pH 7.35–7.45
हल किए गए उदाहरण
1. गर्म दिन में आप दौड़ते हैं। ताप नियंत्रण का पुनर्भरण चक्र बताइए।
बदलाव: ताप बढ़ा। ग्राही: त्वचा और हाइपोथैलेमस में। नियंत्रण केंद्र: हाइपोथैलेमस। प्रभावक: स्वेद ग्रंथियाँ पसीना छोड़ती हैं और त्वचा की धमनिकाएँ चौड़ी होती हैं। अनुक्रिया: ऊष्मा निकलती है और ताप लगभग 37 °C पर लौटता है।
2. दोपहर के भोजन के बाद रक्त ग्लूकोज़ पहले बढ़कर फिर क्यों घटता है?
पचा हुआ स्टार्च ग्लूकोज़ बनकर रक्त में आता है, तो बढ़ता है। अग्न्याशय इंसुलिन छोड़ता है; कोशिकाएँ ग्लूकोज़ लेती हैं और यकृत ग्लाइकोजन बनाकर रखता है, तो सामान्य पर लौटता है।
3. 2 लीटर पानी पीने के बाद मूत्र हल्का क्यों होता है?
रक्त पतला हो जाता है, तो ADH कम निकलता है। वृक्क कम पानी वापस लेते हैं और ज़्यादा मात्रा में पतला (हल्का) मूत्र बनाते हैं।
4. प्रसव के समय संकुचन ऋणात्मक है या धनात्मक पुनर्भरण?
धनात्मक। संकुचन से ऑक्सीटोसिन हार्मोन और निकलता है, जो और तेज़ संकुचन कराता है, जब तक बच्चा जन्म न ले ले।
आम गलतियाँ
- ग्लूकागॉन और ग्लाइकोजन को एक मानना। ग्लूकागॉन हार्मोन है; ग्लाइकोजन यकृत में रखा कार्बोहाइड्रेट।
- सोचना कि त्वचा की नलिकाएँ ऊपर-नीचे खिसकती हैं। वे चौड़ी या सँकरी होती हैं; खिसकती नहीं।
- कहना कि गरमी में कँपकँपी होती है। कँपकँपी ऊष्मा बनाती है, इसलिए ठंड में होती है।
- हर पुनर्भरण को ऋणात्मक कहना। प्रसव और थक्का बनना धनात्मक पुनर्भरण हैं, जो बदलाव को और बढ़ाते हैं।