Ukraine 8 клас Biology
अध्याय: 11
1. Introduction: human biology
Humans in the living world
- मानव शरीर के अंग तंत्र – हमारा शरीर स्तरों में बना है: कोशिकाएँ मिलकर ऊतक, ऊतक मिलकर अंग, अंग मिलकर अंग तंत्र और सारे तंत्र मिलकर पूरा जीव यानी हम। हर तंत्र का एक मुख्य काम है: कंकाल (ढाँचा), पेशी (गति), परिसंचरण (ढुलाई), श्वसन (गैसों का लेन-देन), पाचन (भोजन), उत्सर्जन (कचरा), तंत्रिका और अंतःस्रावी (नियंत्रण), प्रतिरक्षा (बचाव), त्वचा तंत्र और जनन तंत्र। कोई तंत्र अकेले काम नहीं करता: व्यायाम में पेशियाँ, दिल, फेफड़े और नसें साथ बदलकर शरीर के अंदर का हाल स्थिर रखते हैं (समस्थिति)।
2. The human body as a biological system
Levels of organisation of the body
- ऊतक: पादप और जंतु ऊतक – ऊतक एक जैसी कोशिकाओं का समूह है जो मिलकर एक काम करता है। कोशिकाएँ ऊतक बनाती हैं, ऊतक अंग, अंग अंग तंत्र और तंत्र मिलकर जीव। पौधों में बँटने वाला विभज्योतक और न बँटने वाला स्थायी ऊतक होता है, जिसमें जाइलम (पानी ऊपर) और फ्लोएम (भोजन दोनों ओर) शामिल हैं। जंतुओं में उपकला, संयोजी, पेशी और तंत्रिका ऊतक होते हैं। हड्डियों, पेशियों और जोड़ों को सही मुद्रा, व्यायाम और कैल्शियम वाला भोजन चाहिए।
3. Regulatory systems
Nervous system · Endocrine system
जल्द आ रहा है
4. Musculoskeletal system
Skeleton · Muscles
- पेशी शरीर क्रिया: पेशियाँ कैसे सिकुड़ती हैं – कंकाल पेशी लंबी कोशिकाओं से बनी है जिन्हें पेशी तंतु कहते हैं। हर तंतु में सार्कोमियर नाम की छोटी इकाइयों की कतारें होती हैं। सार्कोमियर में पतले एक्टिन और मोटे मायोसिन तंतु एक दूसरे पर चढ़े रहते हैं। तंत्रिका संकेत आने पर कैल्शियम छूटता है, मायोसिन के सिर एक्टिन को पकड़कर बीच की ओर खींचते हैं और पेशी छोटी हो जाती है। हर खिंचाव में ATP लगता है। ATP आता है क्रिएटिन फॉस्फेट (कुछ सेकंड), किण्वन (लगभग दो मिनट तक, लैक्टेट बनता है) और वायवीय श्वसन (लंबी कसरत) से। ATP कम होने पर पेशी थकती है।
5. Digestion and metabolism
Digestive system · Metabolism and nutrition
- मानव पाचन तंत्र और विषमपोषी पोषण – विषमपोषी जीव दूसरे जीवों से बना-बनाया भोजन लेते हैं। मनुष्य प्राणिसम (holozoic) पोषण करता है: पूरा भोजन खाकर एक लंबी नली, आहार नाल, में उसे तोड़ता है। दाँत, लार, आमाशय का अम्ल, एंज़ाइम, पित्त और अग्न्याशयी रस बड़े अणुओं को छोटा करते हैं, जिन्हें क्षुद्रांत्र के दीर्घरोम रक्त में सोख लेते हैं।
- पोषण (Nutrition) – पोषण वह तरीक़ा है जिससे हम भोजन के पदार्थ पाते और इस्तेमाल करते हैं। शरीर को छह तरह के पोषक तत्व चाहिए: कार्बोहाइड्रेट और वसा (मुख्य रूप से ऊर्जा), प्रोटीन (वृद्धि और मरम्मत), विटामिन और खनिज (थोड़ी मात्रा, शरीर को सही चलाने के लिए), और पानी; साथ में पाचन के लिए रेशा। कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन लगभग 17 kJ प्रति ग्राम, वसा लगभग 37 kJ प्रति ग्राम देते हैं। संतुलित आहार सब पोषक तत्व सही मात्रा में देता है, और अंदर आई ऊर्जा लगभग ख़र्च ऊर्जा के बराबर होनी चाहिए।
6. Internal environment of the body
Blood · Circulation · Lymph and immunity
- मनुष्य में परिवहन: हृदय, रुधिर वाहिकाएँ, रुधिर और लसीका – हृदय चार कक्षों वाला मांसपेशी पंप है। एक पूरे चक्कर में रुधिर हृदय से दो बार गुज़रता है: एक बार फेफड़ों से ऑक्सीजन लेने, और एक बार पूरे शरीर तक। यही दोहरा परिसंचरण है। धमनियाँ रुधिर को हृदय से दूर ले जाती हैं, शिराएँ वापस लाती हैं और केशिकाएँ आदान-प्रदान करती हैं। रुधिर (प्लाज़्मा, लाल व श्वेत कणिकाएँ, प्लेटलेट्स) और लसीका मिलकर भोजन, गैसें, हॉर्मोन और अपशिष्ट ढोते हैं।
- प्रतिरक्षा तंत्र: शरीर रोगाणुओं से कैसे लड़ता है – रोगाणु (रोगजनक) संक्रामक रोग करते हैं। शरीर में रक्षा की तीन पंक्तियाँ हैं: अवरोध (त्वचा, श्लेष्मा, अम्ल), तेज़ सामान्य (सहज) प्रतिरक्षा (सूजन, बुखार, भक्षक कोशिकाएँ) और धीमी पर विशिष्ट (उपार्जित) प्रतिरक्षा (B कोशिकाएँ एंटीबॉडी बनाती हैं, T कोशिकाएँ संक्रमित कोशिकाएँ मारती हैं)। स्मृति कोशिकाएँ दूसरे हमले को जल्दी रोकती हैं। टीका सुरक्षित रूप से स्मृति बनाता है। गड़बड़ी: एलर्जी, स्व-प्रतिरक्षी रोग, प्रतिरक्षा की कमी (जैसे HIV)।
7. Respiration and gas exchange
Breathing
- श्वसन: वायवीय, अवायवीय और मानव फेफड़े – श्वसन वह प्रक्रम है जिसमें कोशिका के अंदर भोजन (ज़्यादातर ग्लूकोज) टूटकर ऊर्जा देता है, जो ATP में जमा होती है। ऑक्सीजन के साथ (वायवीय) ग्लूकोज पूरा टूटकर CO₂ और जल बनता है और बहुत ऊर्जा मिलती है; ऑक्सीजन के बिना (अवायवीय) थोड़ी ऊर्जा मिलती है और एथेनॉल (यीस्ट) या लैक्टिक अम्ल (पेशी) बनता है। फेफड़ों की लाखों कूपिकाएँ रक्त तक ऑक्सीजन पहुँचाती हैं।
8. Excretion and thermoregulation
Urinary system · Skin and thermoregulation
- समस्थापन (Homeostasis) – समस्थापन वह तरीका है जिससे शरीर अपना आंतरिक वातावरण (रक्त और ऊतक द्रव) स्थिर रखता है, चाहे बाहर का मौसम बदले। यह शरीर का ताप (लगभग 37 °C), रक्त ग्लूकोज़ (लगभग 4–6 mmol/L), पानी-लवण और रक्त pH (लगभग 7.4) नियंत्रित करता है। ज़्यादातर यह ऋणात्मक पुनर्भरण से होता है: ग्राही बदलाव पहचानता है, नियंत्रण केंद्र तय करता है, और प्रभावक स्तर को निर्धारित बिंदु पर लौटाता है।
9. Sensory systems
Analysers
- ज्ञानेंद्रियाँ – ज्ञानेंद्रियाँ हमें आसपास के बदलाव (उद्दीपन) पहचानने देती हैं। आँख प्रकाश, कान ध्वनि और संतुलन, नाक गंध, जीभ स्वाद और त्वचा स्पर्श, दबाव, गरमी, ठंडक व दर्द पहचानती है। हर इंद्रिय में ग्राही कोशिकाएँ उद्दीपन को तंत्रिका संकेत में बदलती हैं। संकेत संवेदी तंत्रिका से मस्तिष्क या मेरुरज्जु तक जाता है, जो मांसपेशी को आदेश भेजता है: यही अनुक्रिया है।
10. Higher nervous activity
Behaviour and mind
जल्द आ रहा है
11. Reproduction and development
Human reproduction
- मानव में जनन और जनन स्वास्थ्य – यौवनारंभ पर मस्तिष्क के हॉर्मोन वृषण और अंडाशय को सक्रिय करते हैं। नर तंत्र शुक्राणु बनाता और ले जाता है; मादा तंत्र अंडाणु बनाता है और गर्भाशय में शिशु के बढ़ने की जगह देता है। निषेचन अंडवाहिनी में होता है और भ्रूण को प्लेसेंटा से पोषण मिलता है। जनन स्वास्थ्य में सुरक्षित निर्णय, गर्भनिरोध, भ्रूण हत्या पर रोक और HIV/AIDS जैसे रोगों से बचाव शामिल हैं।