ऊतक क्या है? संगठन के स्तर
ऊतक ऐसी कोशिकाओं का समूह है जो दिखने में एक जैसी हों और मिलकर एक काम करें। एककोशिकीय अमीबा में एक ही कोशिका सब काम करती है। बड़े जीवों में काम बँटा होता है: इसे श्रम विभाजन कहते हैं।
छोटे से बड़े स्तर:
- कोशिका – जैसे एक पेशी कोशिका
- ऊतक – बहुत सी पेशी कोशिकाएँ = पेशी ऊतक
- अंग – अलग-अलग ऊतक मिलकर, जैसे हृदय, पत्ती
- अंग तंत्र – मिलकर काम करने वाले अंग, जैसे पाचन तंत्र
- जीव – पूरा सजीव
पौधों और जंतुओं के ऊतक अलग हैं: पौधे एक जगह रहते हैं, इसलिए उनके बहुत से ऊतक मृत होते हैं और मज़बूती देते हैं; जंतु चलते-फिरते हैं, इसलिए उनके ज़्यादातर ऊतक जीवित और ज़्यादा ऊर्जा खर्च करने वाले होते हैं। पौधे कुछ खास जगहों से ही बढ़ते हैं; जंतु लगभग हर जगह से।
पादप ऊतक: विभज्योतक और स्थायी, जाइलम और फ्लोएम
विभज्योतक ऊतक (बँटने वाला ऊतक)
पतली भित्ति, घना कोशिकाद्रव्य, बड़ा केंद्रक और लगभग कोई रिक्तिका नहीं। ये लगातार बँटती रहती हैं।
- शीर्षस्थ विभज्योतक: जड़ और तने के सिरों पर – लंबाई बढ़ाता है।
- पार्श्व विभज्योतक (कैंबियम): किनारों पर – तने और जड़ की मोटाई बढ़ाता है।
- अंतर्वेशी विभज्योतक: पत्तियों के आधार या पर्व-संधि के पास (जैसे घास में) – दोबारा बढ़ने में मदद।
स्थायी ऊतक
ऐसी कोशिकाएँ जिन्होंने बँटना बंद करके एक पक्का काम ले लिया (इस बदलाव को विभेदन कहते हैं)।
सरल स्थायी ऊतक (एक तरह की कोशिका):
- मृदूतक (पैरेनकाइमा): जीवित, ढीली कोशिकाएँ, बीच में जगह; भोजन जमा करता है। क्लोरोफ़िल के साथ हरित ऊतक; जलीय पौधों में बड़ी हवा वाली जगहों के साथ वायु ऊतक (तैरने में मदद)।
- स्थूलकोण ऊतक (कॉलेनकाइमा): जीवित, कोनों पर मोटी भित्ति; लचीलापन देता है, जैसे पत्ती का डंठल।
- दृढ़ ऊतक (स्क्लेरेनकाइमा): लिग्निन की मोटी भित्ति वाली मृत कोशिकाएँ; भागों को कठोर बनाता है, जैसे नारियल का रेशेदार छिलका।
- रक्षी ऊतक: बाह्यत्वचा (सबसे बाहरी परत, मोमी क्यूटिन हो सकता है; गैसों के आदान-प्रदान और पानी निकलने के लिए रंध्र) और कॉर्क (मृत, सुबेरिन वाली, पुराने पेड़ों पर)।
जटिल स्थायी ऊतक (एक से ज़्यादा तरह की कोशिकाएँ) – पौधे की पाइपलाइन:
| जाइलम | फ्लोएम |
|---|---|
| पानी और खनिज ले जाता है | भोजन (शर्करा) ले जाता है |
| एक दिशा: जड़ → पत्तियाँ | दोनों दिशाओं में |
| वाहिनिकाएँ, वाहिकाएँ, जाइलम मृदूतक, जाइलम रेशे | चालनी नलिकाएँ, सहचर कोशिकाएँ, फ्लोएम मृदूतक, फ्लोएम रेशे |
| ज़्यादातर मृत (सिर्फ़ मृदूतक जीवित) | ज़्यादातर जीवित (सिर्फ़ रेशे मृत) |
घर पर करके देखें
सफ़ेद फूल या सेलरी का डंठल खाने वाले रंग मिले पानी में रखिए। कुछ घंटे बाद तना आड़ा काटिए और रंगीन बिंदु खोजिए – यही जाइलम है।
जंतु ऊतक: उपकला, संयोजी, पेशी, तंत्रिका
1. उपकला ऊतक (ढकने वाला)
कोशिकाएँ बिना खाली जगह के सटी हुई, एक पतली आधार झिल्ली पर। शरीर को ढकता है और अंगों के अंदर परत बनाता है।
- शल्की: चपटी, पतली – रक्त वाहिकाओं, फेफड़ों की कूपिकाओं में; त्वचा में परतों में (स्तरित शल्की)।
- घनाकार: घन जैसी – वृक्क नलिकाएँ, ग्रंथियाँ।
- स्तंभाकार: लंबी – आँत की परत, अवशोषण में मदद।
- पक्ष्माभी: छोटे बालों वाली – श्वासनली में, बलगम बाहर धकेलती है।
2. संयोजी ऊतक (जोड़ने और सहारा देने वाला)
कोशिकाएँ एक आधात्री (मैट्रिक्स) में फैली रहती हैं (जैली, तरल या कठोर भराव)।
- रक्त: तरल आधात्री (प्लाज़्मा) में RBC, WBC और प्लेटलेट्स; गैसें, भोजन, हार्मोन ले जाता है।
- अस्थि (हड्डी): कैल्शियम और फ़ॉस्फ़ोरस वाली कठोर आधात्री; शरीर का ढाँचा।
- उपास्थि: चिकनी और लचीली; कान, नाक का सिरा, जोड़ों पर हड्डियों के सिरे।
- स्नायु (लिगामेंट): हड्डी को हड्डी से जोड़ता है; मज़बूत और थोड़ा लचीला।
- कंडरा (टेंडन): पेशी को हड्डी से जोड़ता है; बहुत मज़बूत, लचीला नहीं।
- एरियोलर ऊतक: त्वचा और पेशियों के बीच, अंगों के चारों ओर भराव।
- वसा ऊतक: वसा जमा करता है, शरीर को गर्म रखता है।
3. पेशी ऊतक (गति)
लंबी कोशिकाएँ (पेशी रेशे) जो सिकुड़ती और फैलती हैं।
- रेखित (कंकाल, ऐच्छिक): धारियाँ, कई केंद्रक; हाथ-पैर; हमारे वश में।
- अरेखित (चिकनी, अनैच्छिक): तर्कु आकार; आहारनाल, रक्त वाहिकाएँ, आँख की पुतली।
- हृदय पेशी: शाखित, सिर्फ़ हृदय में; जीवन भर बिना थके काम करती है।
4. तंत्रिका ऊतक (संदेश)
न्यूरॉन से बना। हर न्यूरॉन में केंद्रक वाली कोशिका काय, छोटी शाखाएँ द्रुमिकाएँ और एक लंबा तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन) होता है। न्यूरॉन विद्युत संदेश तेज़ी से ले जाते हैं। मस्तिष्क, मेरुरज्जु और तंत्रिकाओं में पाए जाते हैं।
पेशी-कंकाल तंत्र और उसकी देखभाल
हड्डियाँ, उपास्थि, जोड़, स्नायु, कंडरा और कंकाल पेशियाँ मिलकर पेशी-कंकाल तंत्र बनाते हैं। यह आकार देता है, नरम अंगों की रक्षा करता है (खोपड़ी मस्तिष्क की, पसलियाँ हृदय और फेफड़ों की), कैल्शियम जमा करता है, अस्थि मज्जा में रक्त कोशिकाएँ बनाता है और हमें चलने-फिरने देता है।
हम कैसे हिलते हैं: पेशी सिर्फ़ खींच सकती है। बाइसेप्स सिकुड़ती है तो कंडरा के ज़रिए बाँह की हड्डी खींचती है और कोहनी के जोड़ पर बाँह मुड़ती है। पेशियाँ जोड़ी में काम करती हैं (बाइसेप्स मोड़ती, ट्राइसेप्स सीधा करती)।
देखभाल के तरीके
- मुद्रा: पीठ सीधी रखकर बैठिए, स्क्रीन आँखों की ऊँचाई पर, स्कूल बैग दोनों कंधों पर।
- वज़न उठाना: घुटने मोड़िए, कमर नहीं।
- व्यायाम: रोज़ कम से कम 60 मिनट खेल या योग; स्ट्रेचिंग से जोड़ लचीले रहते हैं।
- भोजन: कैल्शियम (दूध, दही, रागी, हरी पत्तियाँ), प्रोटीन (दाल, अंडा, पनीर) और विटामिन D (सुबह की धूप) हड्डियों को मज़बूत रखते हैं।
- सुरक्षा: खेल से पहले वार्म-अप, हेलमेट और नी-पैड, चोटिल जोड़ को आराम।
कमज़ोर हड्डियों से बच्चों में सूखा रोग (रिकेट्स, विटामिन D की कमी) और बुढ़ापे में ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ऊतक = एक काम करने वाली एक जैसी कोशिकाओं का समूह
- कोशिका → ऊतक → अंग → अंग तंत्र → जीव
- विभज्योतक: शीर्षस्थ (लंबाई), पार्श्व (मोटाई), अंतर्वेशी (दोबारा बढ़त)
- सरल स्थायी: मृदूतक, स्थूलकोण, दृढ़ ऊतक; रक्षी: बाह्यत्वचा, कॉर्क
- जाइलम: पानी + खनिज, सिर्फ़ ऊपर; फ्लोएम: भोजन, दोनों ओर
- जंतु ऊतक: उपकला, संयोजी, पेशी, तंत्रिका
- स्नायु: हड्डी–हड्डी; कंडरा: पेशी–हड्डी
- पेशियाँ: रेखित (ऐच्छिक), अरेखित (अनैच्छिक), हृदय पेशी
हल किए गए उदाहरण
1. लॉन मोअर से काटने के बाद घास जल्दी फिर बढ़ जाती है। कौन-सा ऊतक मदद करता है?
पत्तियों के आधार या पर्व-संधि पर अंतर्वेशी विभज्योतक बँटता रहता है, इसलिए घास फिर बढ़ती है।
2. नारियल का छिलका किस ऊतक से कठोर होता है, और क्या उसकी कोशिकाएँ जीवित हैं?
दृढ़ ऊतक (स्क्लेरेनकाइमा)। इसकी कोशिकाएँ मृत होती हैं, लिग्निन की मोटी भित्ति के साथ।
3. कमल और जलकुंभी पानी पर क्यों तैरते हैं?
इनमें वायु ऊतक (एरेनकाइमा) होता है – बड़ी हवा वाली जगहों वाला मृदूतक – जो इन्हें हल्का बनाता है।
4. एक खिलाड़ी के घुटने पर जाँघ की हड्डी को पिंडली की हड्डी से जोड़ने वाला ऊतक फट गया। यह कौन-सा ऊतक है?
स्नायु (लिगामेंट), क्योंकि यह हड्डी को हड्डी से जोड़ता है।
5. ऊतक का नाम बताइए: यह श्वासनली की परत बनाता है और इसके छोटे बाल धूल व बलगम बाहर धकेलते हैं।
पक्ष्माभी स्तंभाकार उपकला।
6. रक्त तरल होकर भी संयोजी ऊतक क्यों कहलाता है?
इसमें कोशिकाएँ (RBC, WBC, प्लेटलेट्स) एक आधात्री (प्लाज़्मा) में फैली हैं, और यह ऑक्सीजन, भोजन, हार्मोन व अपशिष्ट ले जाकर शरीर के सब भागों को जोड़ता है।
आम गलतियाँ
- लिखना कि कंडरा हड्डी को हड्डी से जोड़ता है। कंडरा पेशी को हड्डी से; स्नायु हड्डी को हड्डी से जोड़ता है।
- कहना कि जाइलम भोजन ले जाता है। जाइलम पानी और खनिज, फ्लोएम भोजन ले जाता है।
- सोचना कि सारे स्थायी ऊतक मृत हैं। मृदूतक और स्थूलकोण ऊतक जीवित हैं; दृढ़ ऊतक मृत है।
- रक्त को 'ऊतक नहीं' कहना। रक्त तरल संयोजी ऊतक है।